गूगल की YouTube TV और Disney के बीच दो हफ्ते से चल रहा विवाद आखिर खत्म हो गया है और अब दोनों कंपनियों ने समझौता कर लिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल की YouTube TV और Disney के बीच दो हफ्ते से चल रहा विवाद आखिर खत्म हो गया है। दोनों कंपनियों ने समझौता कर लिया है, जिसके बाद ABC, ESPN और अन्य Disney चैनल दोबारा YouTube TV पर लौट आए हैं। यह विवाद 31 अक्टूबर से जारी था, जिसके कारण कई लाइव स्पोर्ट्स इवेंट्स, जैसे कॉलेज फुटबॉल और दो Monday Night Football मैच प्लेटफॉर्म पर नहीं दिख पाए।
YouTube ने एक बयान में कहा, 'हमें खुशी है कि हम Disney के साथ एक नया समझौता करने में सफल रहे हैं। इससे हमारी सर्विस का वैल्यू सब्सक्राइबर्स के लिए बना रहेगा। यूजर्स को आज के दौरान ABC, ESPN और FX जैसे चैनल वापस दिखाई देने लगेंगे, साथ ही उनकी पुरानी रिकॉर्डिंग भी फिर से उपलब्ध होगी। हुई असुविधा के लिए हम माफी चाहते हैं।'
Disney Entertainment के को-चेयर्स एलन बर्गमैन और डैना वाल्डेन और ESPN के चेयरमैन जिमी पिटारो ने भी कहा कि यह समझौता दर्शकों की देखने की बदलती आदतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि चैनल्स समय पर वापस आ गए हैं, जिससे दर्शक इस वीकेंड का शानदार कंटेंट, खासकर कॉलेज फुटबॉल, देख सकेंगे।
विवाद के दौरान YouTube TV ने अपनी सर्विस से 20 से ज्यादा Disney चैनलों को हटा दिया था। इसमें ABC और ESPN के साथ FX, NatGeo, Disney Channel और Freeform जैसे चैनल भी शामिल थे। स्टैंडऑफ की वजह Disney की तरफ से चैनलों के लिए वसूला जाने वाला ऊँचा शुल्क बताया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ESPN टीवी इंडस्ट्री का सबसे महंगा चैनल है, जो प्रति सब्सक्राइबर $10 से ज्यादा चार्ज करता है।
इस साल YouTube TV का यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले अक्टूबर में NBCUniversal के साथ और अगस्त में Fox के साथ भी ऐसे ही टकराव हो चुके हैं। दोनों मामलों में आखिरी समय पर समझौता हुआ और चैनल बंद होने से बच गए।
YouTube ने कहा कि वे भविष्य में Disney और अन्य पार्टनर्स के साथ नए प्रोग्राम पैकेज लाने की भी प्लानिंग कर रहे हैं। वहीं Disney ने बताया कि ESPN Unlimited का कुछ लाइव और ऑन-डिमांड कंटेंट 2026 के आखिर तक YouTube TV के बेस प्लान पर बिना अतिरिक्त लागत के उपलब्ध कराया जाएगा।
Disney ने अपने एम्प्लॉयीज को एक मेमो भी भेजा, जिसमें कहा गया कि यह मुश्किल समय था, लेकिन अंत में नतीजा कंपनी और दर्शकों दोनों के लिए फायदेमंद रहा। मेमो में कहा गया कि यह समझौता Disney की प्रोग्रामिंग की वैल्यू और दर्शकों के लिए बेहतर अनुभव देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मेमो में Disney के टॉप लीडर्स ने टीम को इस प्रक्रिया में धैर्य और मेहनत के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है, इसलिए ऐसे समझौते जटिल होते हैं, लेकिन कंपनी हमेशा दर्शकों के बेहतर अनुभव को प्राथमिकता देगी।
अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स', 'न्यूयॉर्क डेली न्यूज' समेत कई समाचार संस्थानों ने OpenAI के खिलाफ संघीय अदालत में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (The New York Times), 'न्यूयॉर्क डेली न्यूज' (New York Daily News) समेत कई समाचार संस्थानों ने OpenAI के खिलाफ संघीय अदालत में सख्त कार्रवाई की मांग की है। अखबारों का आरोप है कि OpenAI ने अदालत को यह कहकर गुमराह किया कि वह अपने AI सिस्टम में मौजूद कॉपीराइट वाले समाचारों को खोज नहीं सकता, जबकि कंपनी पहले ही ऐसा कर चुकी थी।
मैनहैटन की संघीय अदालत में गुरुवार को दाखिल याचिका में समाचार संस्थानों ने कहा कि OpenAI ने गलत दावा किया था कि वह अपने बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) और ट्रेनिंग डेटासेट में उनके लेखों की प्रतियां खोजने में सक्षम नहीं है। जबकि पहला मुकदमा दायर होने से पहले ही कंपनी कई बार ऐसी खोज कर चुकी थी।
अखबारों ने यह भी आरोप लगाया कि OpenAI ने ChatGPT की अरबों बातचीत (Chat Logs) को या तो हटा दिया या फिर उन्हें इस तरह बदल दिया कि उनकी खोज संभव न रहे। उनका कहना है कि इससे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अदालत से OpenAI पर जुर्माना लगाने, कानूनी खर्च दिलाने और यह मानने की मांग की है कि ChatGPT के रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण हैं कि कंपनी ने उनके कॉपीराइट वाले समाचारों का इस्तेमाल किया।
याचिका में कहा गया है कि यह पूरा विवाद कॉपीराइट सामग्री की नकल (Copying) से जुड़ा है। समाचार संस्थानों का दावा है कि उनके लेखों के इस्तेमाल के सबूत OpenAI के ट्रेनिंग डेटासेट और ChatGPT के आउटपुट लॉग में मौजूद हैं।
अखबारों का यह भी आरोप है कि OpenAI के रवैये की वजह से मामले की सुनवाई में देरी हुई और उन्हें यह समझने का पूरा मौका नहीं मिला कि कंपनी किस हद तक उनके समाचारों को स्क्रैप करती है, AI मॉडल को ट्रेन करती है और फिर उसी सामग्री का आउटपुट देती है।
याचिका के मुताबिक, OpenAI ने 2024 में अदालत से कहा था कि उसके पास अपने ट्रेनिंग डेटासेट को प्रभावी ढंग से खोजने का कोई टूल नहीं है। इसके बाद 2025 में कंपनी ने यह भी कहा कि ChatGPT के बड़े पैमाने पर मौजूद आउटपुट लॉग में खोज करने की कोई व्यवस्था उसके सिस्टम में नहीं है और ऐसा सिस्टम बनाना काफी मुश्किल होगा।
हालांकि, अखबारों का कहना है कि बाद में OpenAI के एक कर्मचारी ने गवाही में स्वीकार किया कि कंपनी ने समाचार संस्थानों की सामग्री को लेकर कई बार खोज की थी। उनका कहना है कि यह बयान OpenAI के पहले दिए गए दावों के बिल्कुल विपरीत है।
वहीं OpenAI ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ड्रू पुसाटेरी (Drew Pusateri) ने रॉयटर्स से कहा कि जैसे-जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स का मामला कमजोर पड़ रहा है और उसे अपने कुछ दावे वापस लेने पड़े हैं, वैसे-वैसे वह ऐसे झूठे आरोप लगाकर उन लोगों की निजता में दखल देने की कोशिश कर रहा है जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले महीने द न्यूयॉर्क टाइम्स ने संशोधित शिकायत में OpenAI के खिलाफ लगाया गया एक अतिरिक्त कॉपीराइट उल्लंघन का दावा वापस ले लिया था।
यह मुकदमा सबसे पहले वर्ष 2023 में दायर किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि OpenAI और उसके सबसे बड़े वित्तीय साझेदार Microsoft ने ChatGPT के AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए बिना अनुमति लाखों समाचार लेखों का इस्तेमाल किया।
यह मामला उन कई कॉपीराइट मुकदमों में से एक है, जो लेखकों, प्रकाशकों, कलाकारों और संगीत कंपनियों ने OpenAI, Anthropic और Meta जैसी AI कंपनियों के खिलाफ दायर किए हैं। इन सभी मामलों में आरोप है कि AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट सामग्री का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुख्य वकील इयान क्रॉस्बी (Ian Crosby) ने आरोप लगाया कि OpenAI ने पूरे मामले के दौरान अपनी क्षमताओं के बारे में गलत जानकारी दी। वहीं न्यूयॉर्क डेली न्यूज के वकील स्टीवन लीबरमैन (Steven Lieberman) ने कहा कि अदालत से की गई यह मांग OpenAI को उन सबूतों को छिपाने और नष्ट करने के लिए दंडित करने के उद्देश्य से की गई है, जिनसे यह पता चल सकता है कि ChatGPT को कथित तौर पर चोरी की गई पत्रकारिता सामग्री से प्रशिक्षित किया गया।
OpenAI पहले भी यह दलील दे चुका है कि ChatGPT की बातचीत के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से उसके उपयोगकर्ताओं की निजता प्रभावित हो सकती है।
दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान The New York Times ने अपनी प्रसिद्ध लाइफस्टाइल, फैशन और संस्कृति पर आधारित T Magazine के लिए नई एडिटर-इन-चीफ की घोषणा कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान The New York Times ने अपनी प्रसिद्ध लाइफस्टाइल, फैशन और संस्कृति पर आधारित T Magazine के लिए नई एडिटर-इन-चीफ की घोषणा कर दी है। अब इस जिम्मेदारी को अनुभवी मैगजीन एडिटर और क्रिएटिव लीडर जोडी क्वॉन (Jody Quon) संभालेंगी।
कंपनी ने कहा कि 20 साल से अधिक समय से T Magazine फैशन, कला, साहित्य और संस्कृति की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। ऐसे में मैगजीन के अगले प्रमुख के रूप में ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो इसकी विरासत को आगे बढ़ा सके। कंपनी का मानना है कि जोडी क्वॉन इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
न्यूयॉर्क मैगजीन में निभाई अहम भूमिका
जोडी क्वॉन ने करीब दो दशक तक New York Magazine में काम किया। इस दौरान उन्होंने कई चर्चित और पुरस्कार विजेता कवर स्टोरी और विजुअल प्रोजेक्ट तैयार किए। उनकी पहचान ऐसे क्रिएटिव कामों के लिए रही है, जिन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए।
पहले भी रह चुकी हैं The New York Times का हिस्सा
यह जोडी क्वॉन की The New York Times में वापसी भी है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने यहीं फैशन सेक्शन में फोटो रिसर्चर के रूप में की थी। बाद में वह The New York Times Magazine में डिप्टी फोटो एडिटर बनीं और एक दशक से ज्यादा समय तक संस्थान के साथ जुड़ी रहीं।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी हैं
अपने लंबे करियर में जोडी क्वॉन के नेतृत्व में तैयार किए गए विजुअल प्रोजेक्ट्स को कई बड़े सम्मान मिले हैं। इनमें Robert F. Kennedy Journalism Award, George Polk Award और कई National Magazine Awards शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें फोटोग्राफी और मैगजीन डिजाइन के लिए भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
हाल ही में उनके नेतृत्व में प्रकाशित फोटोग्राफी प्रोजेक्ट को 2026 National Magazine Award for Photography भी मिला।
पहली बार विजुअल आर्ट्स बैकग्राउंड वाला एडिटर
The New York Times ने कहा कि T Magazine के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब विजुअल आर्ट्स की मजबूत पृष्ठभूमि वाला कोई व्यक्ति एडिटर-इन-चीफ बनेगा। कंपनी को उम्मीद है कि जोडी क्वॉन की रचनात्मक सोच और विजुअल स्टोरीटेलिंग का अनुभव मैगजीन को नई दिशा देगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि जोडी फैशन, कला, साहित्य और संगीत जैसी दुनिया को आकर्षक और प्रेरणादायक अंदाज में पाठकों के सामने पेश करने की खास क्षमता रखती हैं। उनके नेतृत्व में T Magazine अपने पाठकों को पहले से अधिक समृद्ध और अलग अनुभव देने का प्रयास करेगी।
The New York Times ने जोडी क्वॉन का स्वागत करते हुए विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में T Magazine अपनी मजबूत पहचान को और आगे बढ़ाएगी।
इस बदलाव के साथ चैनल के कंटेंट में भी बड़ा विस्तार किया जाएगा। अब बच्चों और परिवार के कार्यक्रमों के साथ-साथ वयस्क दर्शकों के लिए भी अधिक शो और सीरीज दिखाई जाएंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'द वॉल्ट डिज्नी' कंपनी ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड (DACH) में अपने फ्री-टू-एयर Disney Channel का नाम बदलकर Disney TV करने का फैसला किया है। इस बदलाव के साथ चैनल के कंटेंट में भी बड़ा विस्तार किया जाएगा। अब बच्चों और परिवार के कार्यक्रमों के साथ-साथ वयस्क दर्शकों के लिए भी अधिक शो और सीरीज दिखाई जाएंगी।
कंपनी के मुताबिक, नए Disney TV पर एनिमेशन, लाइव-एक्शन सीरीज, फैमिली एंटरटेनमेंट, ड्रामा, डॉक्यूमेंट्री के अलावा FX, Marvel Studios और Star Wars से जुड़े लोकप्रिय कंटेंट भी शामिल किए जाएंगे। हालांकि बच्चों के लिए खास प्रोग्रामिंग ब्लॉक और फैमिली फिल्में पहले की तरह चैनल का अहम हिस्सा बनी रहेंगी।
फिलहाल कंपनी ने यह नहीं बताया है कि यह रीब्रैंडिंग कब से लागू होगी। इससे पहले इस साल Disney Channel को Disney+ प्लेटफॉर्म के साथ भी जोड़ दिया गया था, जिससे दर्शक अब इस फ्री-टू-एयर चैनल को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी देख सकते हैं। इसके अलावा यह चैनल सैटेलाइट, केबल, IPTV और OTT प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध रहेगा।
द वॉल्ट डिज्नी कंपनी में जर्मनी, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया की कंट्री मैनेजर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर एंड नेटवर्क्स) यून-क्युंग पार्क ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य अपने सभी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को बेहतरीन और विविधतापूर्ण मनोरंजन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि Disney TV के जरिए वयस्क दर्शकों के लिए कंटेंट बढ़ाया जाएगा, जबकि बच्चों और परिवार के पसंदीदा कार्यक्रम भी पहले की तरह जारी रहेंगे।
कंपनी का कहना है कि इस नई रणनीति से 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के दर्शकों तक पहुंच बढ़ेगी। इससे विज्ञापनदाताओं को अधिक विज्ञापन स्लॉट मिलेंगे और क्रॉस-मीडिया मार्केटिंग के साथ कमाई के नए अवसर भी बनेंगे।
रीब्रैंडिंग के साथ ही Disney+ ने अपनी नई जर्मन भाषा की Hulu Original सीरीज 'Under the Ice' का भी ऐलान किया है। छह एपिसोड वाली यह थ्रिलर सीरीज स्विट्जरलैंड के मैटरहॉर्न क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसकी कहानी पर्वतीय रेस्क्यू अधिकारी ईव लेनर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक अमीर कारोबारी पॉल वेल्श के लापता होने की जांच करती है। इस सीरीज की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है।
वहीं, कंपनी ने बताया कि 2026 डिज्नी के लिए विज्ञापन कारोबार के लिहाज से भी अहम साल होगा। इस साल के आखिर तक यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (EMEA) क्षेत्र में कंपनी अपनी नई एड-टेक तकनीक लागू करेगी। इसके तहत Disney+ में Disney Audience Graph को जोड़ा जाएगा, जिससे डेटा आधारित और ज्यादा सटीक विज्ञापन दिखाए जा सकेंगे।
इसके अलावा Dynamic Ad Insertion जैसी नई तकनीक के जरिए लाइव डिजिटल कंटेंट के दौरान भी अधिक प्रभावी तरीके से विज्ञापन दिखाए जा सकेंगे। कंपनी का मानना है कि इससे ब्रैंड्स को Disney+ पर बड़े खेल आयोजनों, जैसे 2026-27 UEFA Women's Champions League, के दौरान विज्ञापन देने के और बेहतर अवसर मिलेंगे।
अमेरिका की मीडिया व टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका की दिग्गज मीडिया और टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' (Comcast) ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
इस खबर के बाद सोमवार को प्री-मार्केट ट्रेडिंग में Comcast के शेयरों में 20% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।
कंपनी के मुताबिक, यह बंटवारा करीब एक साल में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद एक कंपनी के पास Comcast का केबल ब्रॉडबैंड, वायरलेस और बिजनेस सर्विसेज का कारोबार रहेगा, जबकि दूसरी कंपनी के तहत Universal Theme Parks, फिल्म और टीवी स्टूडियो, NBC, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Peacock और यूरोपीय मीडिया बिजनेस Sky आएंगे।
Comcast के चेयरमैन और सह-CEO ब्रायन रॉबर्ट्स ने कहा कि इस फैसले से दोनों कंपनियों को अलग-अलग रणनीति के साथ काम करने और नए कारोबारी अवसरों का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।
कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा Co-CEO माइक कैवनॉ नई NBCUniversal कंपनी का नेतृत्व करेंगे। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) माइकल एंजेलाकिस दोबारा Comcast में लौटेंगे और अलग होने के बाद मुख्य कंपनी के CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस विभाजन के बाद मौजूदा Comcast के शेयरधारकों को दोनों नई कंपनियों के शेयर मिलेंगे। साथ ही Comcast शुरुआत में नई NBCUniversal कंपनी में 19.9% तक हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जिसे वह समय के साथ बेचने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पारंपरिक टीवी कारोबार लगातार दबाव में है और Netflix जैसी स्ट्रीमिंग कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। वहीं, अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में बड़े विलय और पुनर्गठन का दौर भी जारी है, जिससे कंपनियां अपने कारोबार को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही हैं।
युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि Daily Monitor और NTV Uganda उनकी अनुमति के बिना दोबारा नहीं खुलेंगे।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें "फ्री प्रेस" पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब से युगांडा से जुड़ी कोई भी नकारात्मक खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उनके कार्यालय की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से देश के सभी मीडिया संस्थानों को इन नियमों का पालन करना होगा।
Daily Monitor और NTV Uganda दोनों Nation Media Group के स्वामित्व में हैं। Daily Monitor ने बताया कि राजधानी कंपाला के नमुवोंगो स्थित कंपनी के मुख्यालय और सेरेना होटल कार्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दफ्तर के अंदर जाने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, Nation Media Group के स्वामित्व वाले NTV Uganda, Spark TV और उसके अन्य टीवी एवं रेडियो चैनलों का प्रसारण भी रविवार को बंद हो गया।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने दावा किया कि उन्हें मीडिया संस्थानों को बंद करने का अधिकार 2017 में उनके पिता और युगांडा के राष्ट्रपति Yoweri Museveni ने दिया था। मुहूजी को राष्ट्रपति का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता है और वे अपने विवादित सोशल मीडिया बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।
युगांडा में मीडिया पर कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2013 में सरकार ने Daily Monitor को 10 दिनों के लिए बंद कर दिया था। वहीं 2007 में सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के बाद NTV Uganda का प्रसारण शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद रोक दिया गया था।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक Uganda People's Defence Forces>, Uganda Police Force और Uganda Communications Commission की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वहीं, National Association of Broadcasters ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और इस कदम का देश के मीडिया माहौल तथा संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है।
अमेरिकी सांसदों ने एक द्विदलीय समझौते के तहत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा टूल उपलब्ध कराना अनिवार्य करने पर सहमति बनाई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अमेरिकी हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं ने एक द्विदलीय (Bipartisan) समझौता किया है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों और अभिभावकों के लिए सुरक्षा सुविधाएं और नियंत्रण संबंधी टूल उपलब्ध कराने होंगे।
कमेटी के चेयरमैन ब्रेट गुथ्री और वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य फ्रैंक पैलोन ने सोमवार को इस समझौते की घोषणा की। हालांकि उन्होंने प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधानों का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि यह कदम “बिग टेक कंपनियों को जवाबदेह बनाने” की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि कई महीनों तक दोनों दलों ने मिलकर काम किया और अब बच्चों के लिए डिजिटल माहौल को बेहतर बनाने वाली नीतियों पर सहमति बन गई है।
अमेरिका में टेक कंपनियां लंबे समय से युवाओं और किशोरों पर उनके प्रभाव को लेकर जांच के दायरे में हैं। कई अभिभावक और राज्य सरकारें स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने जैसी पहल कर रही हैं ताकि बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित की जा सके।
इस समझौते में सोशल मीडिया नियमन से जुड़े कई विवादास्पद मुद्दों को भी संबोधित किया गया है। हालांकि इसमें “ड्यूटी ऑफ केयर” (Duty of Care) का प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। यह प्रावधान सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन करने के लिए बाध्य करता।
डेमोक्रेट सांसदों और कुछ प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं, विशेष रूप से टेनेसी की सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न, लंबे समय से इस प्रावधान को कानून का हिस्सा बनाने की मांग करते रहे हैं। इसी वजह से अब तक इस तरह के विधेयकों को आगे बढ़ाने में कठिनाई आती रही है।
समझौते के तहत राज्यों को ऐसे कानून बनाने की अनुमति होगी जो इस प्रस्तावित कानून से भी अधिक सुरक्षा प्रदान करें। इसे डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि वे राज्यों के मौजूदा कानूनों को बनाए रखना चाहते थे।
हालांकि यह समझौता अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी सीनेट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी हासिल करनी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन इस समझौते का समर्थन करते हैं।
राज्यों ने पहले ही बनाए हैं अपने कानून
अमेरिका में लंबे समय से सोशल मीडिया को लेकर व्यापक राष्ट्रीय कानून नहीं बन पाया है। इसके चलते कई राज्यों ने अपने स्तर पर कानून लागू किए हैं। गैर-पक्षपाती संस्था नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स के अनुसार, पिछले वर्ष कम से कम 20 राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने से जुड़े कानून पारित किए थे।
युवाओं में सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म
प्यू रिसर्च सेंटर की दिसंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 13 से 17 वर्ष के अमेरिकी किशोरों के बीच Snapchat, Instagram, YouTube और TikTok सबसे लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं।
इसी बीच Meta, TikTok, YouTube और Snapchat जैसी कंपनियां हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए हैं, जो युवाओं के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेष रूप से Meta पर यह आरोप भी लग चुका है कि उसने सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान से जुड़े मामलों में कानूनी सुरक्षा हासिल करने के लिए अमेरिकी सांसदों के बीच लॉबिंग की थी। हालांकि Meta का कहना है कि प्रस्तावित कानूनी भाषा मौजूदा मुकदमों को खत्म नहीं करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो अमेरिका में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी।
दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय उस विवाद के बाद लिया गया है, जिसमें इस साल के एक विजेता लेखक पर अपनी कहानी लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
Granta ने कहा है कि अब वह ऐसे बाहरी प्रकाशन साझेदारियों का हिस्सा नहीं बनेगी, जहां उसके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता। हालांकि, पत्रिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमनवेल्थ प्राइज के लिए शॉर्टलिस्ट हुई कहानियां सार्वजनिक हित में उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगी।
विवाद की शुरुआत कैरेबियाई क्षेत्र की विजेता कहानी ‘The Serpent in the Grove’ से हुई, जिसे लेखक जमीर नजीर ने लिखा है। मई के मध्य में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया कि कहानी में ऐसे कई संकेत दिखाई देते हैं जो AI द्वारा लिखी गई सामग्री में आमतौर पर देखने को मिलते हैं।
आलोचकों ने कहानी की कुछ खास लेखन शैलियों और वाक्यों को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि इनमें AI की छाप नजर आती है। हालांकि, लेखक जमीर नजीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
मई के आखिर में एक बयान में नजीर ने कहा कि उनकी लेखन प्रक्रिया सामान्य लेखकों से अलग है। उन्होंने बताया कि वह पूरी कहानी अपने एंड्रॉयड फोन पर लिखते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनके लिए लंबे समय तक बैठकर टाइप करना मुश्किल है, इसलिए वे स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और बाद में बहुत कम संपादन करते हैं।
Granta की प्रकाशक सिग्रिड रॉसिंग ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संभव है कि कहीं AI से जुड़ी साहित्यिक चोरी का मामला हो, लेकिन फिलहाल इसके पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं है।
वहीं, कॉमनवेल्थ फाउंडेशन के महानिदेशक रजमी फारूक ने स्पष्ट किया कि शॉर्टलिस्ट किए गए सभी लेखकों ने व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में AI का इस्तेमाल नहीं किया है। फाउंडेशन ने अतिरिक्त जांच और बातचीत के बाद भी यही निष्कर्ष निकाला।
कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज के तहत कुल विजेता को 5,000 पाउंड और क्षेत्रीय विजेताओं को 2,500 पाउंड की पुरस्कार राशि दी जाती है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह विवाद साहित्य जगत में नई बहस छेड़ रहा है कि रचनात्मक लेखन में तकनीक की भूमिका क्या होनी चाहिए और इसकी निगरानी कैसे की जाए।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है। इस सौदे के तहत Roku के शेयरों का मूल्य 160 डॉलर प्रति शेयर तय किया गया है। इस डील के बाद बनने वाली नई इकाई अमेरिका में टीवी व्युअरशिप के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।
इस समझौते के बाद Fox के पास मौजूद स्पोर्ट्स, न्यूज और एंटरटेनमेंट कंटेंट के साथ-साथ उसकी ऐड-समर्थित स्ट्रीमिंग सर्विस Tubi और Roku के हार्डवेयर, स्मार्ट टीवी प्लेटफॉर्म और बढ़ते विज्ञापन बिजनेस का एक बड़ा इकोसिस्टम एक साथ आ जाएगा। हालांकि Roku अपना ओपन प्लेटफॉर्म बनाए रखेगा, यानी उस पर Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे ऐप्स पहले की तरह चलते रहेंगे।
इस डील के पीछे अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में दो बड़े दबाव बताए जा रहे हैं। पहला, कंटेंट बनाने वाली कंपनियां अब यह नहीं चाहतीं कि वे किसी और के डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहें और वहां पहुंच व डेटा के लिए “किराया” देती रहें। अब कंपनियां सीधे दर्शकों से रिश्ता बनाना चाहती हैं ताकि विज्ञापन और डेटा दोनों पर उनका नियंत्रण रहे।
दूसरा बड़ा कारण पारंपरिक टीवी यानी लाइनर टीवी का तेजी से गिरना है। इसके चलते ब्रॉडकास्ट कंपनियां अब स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी (CTV) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही हैं, जहां लाइव स्पोर्ट्स, न्यूज और विज्ञापन का भविष्य देखा जा रहा है। Fox के लिए यह कदम उसकी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्पोर्ट्स, न्यूज और लाइव इवेंट्स पर फोकस करते हुए घरों के टीवी स्क्रीन तक सीधे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के जरिए पहुंच बनाना चाहती है।
भारत में इसका एक सीधा उदाहरण Reliance Industries Limited और Disney Star के विलय से बना JioStar मॉडल माना जा सकता है, जहां कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन दोनों एक ही छत के नीचे आ गए हैं। इसी तरह Viacom18 और JioCinema जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए Reliance ने कंटेंट, डेटा और एडवरटाइजिंग को एकीकृत करने की कोशिश की है।
इसके अलावा भारत में भी स्मार्ट टीवी और प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम को कंट्रोल करने की दिशा में तेजी देखी गई है, जहां Tata Play और Jio के इंटीग्रेटेड स्मार्ट टीवी अनुभव जैसे मॉडल दर्शकों के पहले स्क्रीन यानी टीवी होम पेज पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह डील एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है, जहां मीडिया कंपनियां अब अलग-अलग स्ट्रीमिंग ऐप्स की बजाय एकीकृत इकोसिस्टम बना रही हैं, जिसमें कंटेंट, प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और विज्ञापन सब एक ही नियंत्रण में आ रहे हैं। इसी दिशा में Omnicom Group और Interpublic Group जैसे एडवरटाइजिंग दिग्गजों के विलय और Paramount Global तथा Warner Bros Discovery जैसी कंपनियों में चल रहे बदलाव भी इसी बड़ी मीडिया कंसोलिडेशन की ओर इशारा करते हैं।
आज के समय में मीडिया इंडस्ट्री में ताकत उन कंपनियों के हाथ में जा रही है जो कंटेंट के साथ-साथ प्लेटफॉर्म और डेटा दोनों को नियंत्रित कर रही हैं, जिससे विज्ञापन, पहुंच और दर्शक व्यवहार पर उनका असर और भी ज्यादा मजबूत हो रहा है।
दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अखबार को लंबे समय तक टिके रहने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत और पाठकों के लिए प्रासंगिक बने रहना जरूरी है, चाहे उनके पास कितनी भी निजी संपत्ति क्यों न हो।
CNBC को दिए इंटरव्यू में बेजोस से पूछा गया कि आखिर उन्होंने अपनी दौलत का इस्तेमाल अखबार को बचाने के लिए क्यों नहीं किया, जबकि हाल ही में ‘Washington Post’ में करीब 30 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी की गई है। इस पर बेजोस ने साफ कहा कि अखबार को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए और खुद कमाई करने वाला संस्थान बनना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “The Post को एक ऐसा बिजनेस बनना होगा जो अपने दम पर चल सके और मुनाफा कमा सके।”
बेजोस ने बताया कि उन्होंने मैनेजमेंट से कहा था कि छंटनी का फैसला डेटा और प्रदर्शन के आधार पर लिया जाए। हालांकि उन्होंने एक अहम अपवाद भी रखा। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता यानी Investigative Reporting के मामले में सिर्फ डेटा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
बेजोस के मुताबिक, खोजी पत्रकारिता ही ‘Washington Post’ की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि छंटनी के बाद भी अखबार का न्यूजरूम उतना छोटा नहीं हुआ है जितना लोग मान रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज छंटनी के बाद भी हमारा न्यूजरूम उतना बड़ा है, जितना Watergate और Pentagon Papers के दौर से भी बड़ा था।”
बेजोस का मानना है कि आर्थिक अनुशासन अखबार को और मजबूत बनाएगा और भविष्य में उसकी प्रासंगिकता बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने हाल ही में ‘Washington Post’ को ट्रंप प्रशासन से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए मिले Pulitzer Prize का भी जिक्र किया और कहा कि अखबार अब भी असरदार पत्रकारिता कर रहा है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब भी अखबार का मालिक बने रहना चाहते हैं, जबकि उनके दूसरे बिजनेस हितों के कारण हितों के टकराव की आशंका रहती है, तो बेजोस ने साफ कहा कि वह अखबार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने 2013 में ‘Washington Post’ खरीदा था, तब यह घाटे में चल रहा था और न्यूजरूम भी काफी छोटा था। बाद में अखबार को दो साल में मुनाफे में लाया गया और फिर उस कमाई को संपादकीय टीम को मजबूत करने में लगाया गया।
बेजोस ने कहा, “अब हमने न्यूजरूम को थोड़ा छोटा जरूर किया है, लेकिन यह उतना छोटा नहीं हुआ है जितना उस समय था जब मैंने इसे खरीदा था।”
ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस मामले पर Channel 4 की चीफ एग्जिक्यूटिव प्रिया डोगरा ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिलाओं की पीड़ा पर दुख जताते हुए कहा कि वह “गहराई से माफी” मांगती हैं।
हालांकि प्रिया डोगरा ने यह भी कहा कि चैनल ने उस समय शिकायतों को सही तरीके से संभाला था, लेकिन अब पूरे मामले की दोबारा जांच के लिए बाहरी रिव्यू शुरू कराया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शो प्रतिभागियों के लिए सुरक्षित है।
दरअसल, ‘Married at First Sight UK’ में एक्सपर्ट्स सिंगल लोगों की जोड़ी बनाते हैं और उन्हें शादी करवाते हैं। शो में कपल्स पहली बार अपनी शादी के दिन मिलते हैं। यह शो ब्रिटेन में काफी लोकप्रिय है।
मामला तब गरमा गया जब BBC के चर्चित कार्यक्रम ‘Panorama’ में दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि शो में उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनके साथ रेप किया। दोनों महिलाओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं एक अन्य महिला प्रतिभागी शोना मेंडरसन ने आरोप लगाया कि उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनकी सहमति के बिना सेक्सुअल एक्ट किया। हालांकि जिन पुरुषों पर आरोप लगे हैं, उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।
BBC की रिपोर्ट के बाद कई पूर्व प्रतिभागियों ने भी शो को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। वहीं लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने भी लोगों से आगे आकर शिकायत करने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर शिकायत सुनने और जांच करने के लिए तैयार हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस पहले से ही Channel 4 और शो बनाने वाली प्रोडक्शन कंपनी CPL Productions के संपर्क में है।
Channel 4 की वार्षिक रिपोर्ट के दौरान प्रिया डोगरा ने कहा कि उन्होंने महिलाओं की बातें सुनी हैं और उनकी तकलीफ बेहद परेशान करने वाली है। उन्होंने कहा कि चैनल के लिए सभी कार्यक्रमों में प्रतिभागियों की सुरक्षा सबसे अहम है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि चैनल खुद इन आरोपों की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि यह काम पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों का है।
Channel 4 के चीफ कंटेंट ऑफिसर इयान कैट्ज ने भी कहा कि चैनल ने उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही फैसले लिए थे और महिलाओं को जरूरी सहायता दी गई थी। लेकिन आरोप बेहद गंभीर हैं, इसलिए अब दोबारा समीक्षा करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे शो और सुरक्षित बनाए जा सकें।
इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में रियलिटी शोज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ब्रिटिश संसद की संस्कृति समिति के सांसदों ने भी Channel 4 और मीडिया रेगुलेटर Ofcom से जवाब मांगा है।
समिति की चेयरपर्सन कैरोलिन डिनेनाज ने कहा कि ‘Married at First Sight’ से जुड़े ये आरोप बेहद डराने वाले हैं और यह चिंता बढ़ाते हैं कि क्या रियलिटी शोज में प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं।