अभिव्यक्ति पर खतरा तो लोकतंत्र कहां

उमेश चतुर्वेदी, टीवी पत्रकार, स्तंभकार और ब्लॉगर सत्ता चाहे लोकतांत्रिक हो या फिर कोई और...उसकी अहम जिम्मेदारी नियमन और व्यवस्था को बनाए रखना होता है...व्यवस्था बहाली में बाधा बनती प्रक्रियाओं और कोशिशों का निषेध भी सत्ताओं का काम होता है। लेकिन अक्सर होता यह है कि निषेध के इस अधिकार का इस्तेमाल सत्ताएं अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लि

Last Modified:
Saturday, 26 May, 2012
s4m


उमेश चतुर्वेदी, टीवी पत्रकार, स्तंभकार और ब्लॉगर सत्ता चाहे लोकतांत्रिक हो या फिर कोई और...उसकी अहम जिम्मेदारी नियमन और व्यवस्था को बनाए रखना होता...
Read More
TAGS media
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए