कैसा पत्रकार और कैसी पत्रकारिता दिवस

जमीन बदल गई तो मायने बदल गए। मायने बदले तो चेहरा बदल गया, रहन-सहन और जीवन की शर्तें बदल गईं। वैश्विक अर्थशास्त्र की इस बाढ़ के चलते खासा बदलाव आ गया है समाज में। तो फिर कैसा पत्रकार और कैसा पत्रकारिता दिवस। मौजूदा हालातों में तो यह सवाल ही बेमानी हो जाते हैं। अब तो एड्स डे है, वेलंटाइन डे है, वगैरह-वगैरह। इंतजार कीजिए, अभी तो और ना जाने कितने नए

Last Modified:
Wednesday, 30 May, 2012
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जमीन बदल गई तो मायने बदल गए। मायने बदले तो चेहरा बदल गया, रहन-सहन और जीवन की शर्तें बदल गईं। वैश्विक अर्थशास्त्र की इस बाढ़ के चलते खासा बदलाव आ गया ह...
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