शब-ए-बारात में गुंडागर्दी पर मुस्लिमों का संग मिला, कांवड़ वाले तो भाई बोलने लायक भी नहीं...

देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में शिव भक्‍त सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा पर निकले हुए हैं

Last Modified:
Friday, 10 August, 2018
sakshi

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में शिव भक्‍त सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा पर निकले हुए हैं, लेकिन इस दौरान कई जगह झड़पें देखने मिली। कांवड़ियों द्वारा तोड़फोड़ के साथ कुछ अन्‍य विवादास्‍पद वारदातें भी हुईं। फिर चाहे वह दिल्ली की घटना हो, जहां  एक महिला की कार एक कांवड़ी से छू जाने पर गुस्साए कांवड़ियों ने पूरी गाड़ी को ही तोड़ डाला हो। या फिर बुलंदशहर की घटना, जहां कांवड़ियों के आपसी झगड़े को सुलझाने पहुंची पुलिस को ही पीट-पीटकर उनकी गाड़ी को तोड़ डाला हो। ये ऐसी वारदातें हैं, जो सवाल खड़ा करती हैं कि क्या कांवड़ियां बनने पर गुंडागर्दी का लाइसेंस मिल जाता है? लेकिन अगर आपने यह सवाल किया तो फिर आप भी ऐसे लोगों के हमले का शिकार होने से नहीं बच सकते हैं, क्योंकि ऐसा ही कुछ देखने को मिला जानी-मानी न्यूज एंकर साक्षी जोशी के साथ।

दरअसल, कांवडियों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात को लेकर न्यूज एंकर साक्षी जोशी ने जैसे ट्विटर पर इसकी आलोचना की, बस फिर क्या था, अगले ही पल उन्हें कुछ लोगों का शिकार होना पड़ा और ट्रोल किया जाने लगा और भद्दी-भद्दी गालियां दी जानें लगीं। पहले यहां जान लीजिए कि अखिर साक्षी ने कहा क्या।

साक्षी ने सवाल किया था कि इन कांवड़ियों को काबू में कोई करेगा? वैसे मैं भी किससे उम्मीद कर रही हूं! पुलिस तो खुद इनपर फूल बरसा रही है। अब सावन का इंतज़ार खुद शिव जी को नहीं होता होगा।



बस इतना कहते ही कुछ लोगों को यह बात इतनी कड़वी लगी कि वे साक्षी को ट्विटर पर घेरने के लिए अमादा हो गए और उन्हें भद्दी गालियां देने लगे। इसके बाद साक्षी जोशी ने एक अन्य ट्वीट कर कहा कि कांवड़ियों की उद्दंडता पर बोलने पर देखिए जरा कैसी भाषा का सामना कर रही हूं मैं। एक के बाद एक सभी ट्वीट दिखाऊंगी आपको। यही हैं वो जो वहां कांवड़ियों की शक्ल लेकर उद्दंडता मचाते हैं।




उन्होंने इसके बाद एक अन्य ट्वीट में कहा कि जब शब ए बारात में होने वाली गुंडागर्दी पर मैंने ट्वीट किया था तो मुसलमान भाइयों ने मेरा साथ दिया और कहा आप सही कह रही हैं ये गुंडागर्दी बंद होनी चाहिए।पर देखिए कांवड़ियों की गुंडागर्दी पर बोलते ही ये लोग(इन्हें तो मैं भाई भी बोलना नहीं चाहूंगी)कैसे अपशब्द कह रहे हैं। ये फर्क है।




हालांकि इस तरह के ट्वीट्स के बाद उन्हें ट्रोल किया जाने लगा और उन पर इस तरह का हमला लगातार जारी है।

 

 

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बिहार में इस पॉलिटिकल पार्टी के प्रवक्ता बने पत्रकार असित नाथ

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Asit Nath

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें बिहार कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इस बात की जानकारी असित नाथ ने खुद अपने फेसबुक पेज पर दी है।

बिहार के बेतिया के रहने वाले असित नाथ तिवारी ने पश्चिम चंपारण में पढ़ाई की है और पत्रकारिता की शुरुआत भी वहीं से की। उन्होंने दैनिक जागरण की मुजफ्फरपुर यूनिट से सम्बद्ध होकर रिपोर्टिंग की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टीवी पत्रकारिता में असिता नाथ ने महुआ टीवी से बतौर एंकर शुरुआत की और यह सफर मौर्या टीवी, जी न्यूज हिंदी, के न्यूज इंडिया और समाचार प्लस आदि  तक जारी रहा। असित इन चैनल्स में आउटपुट हेड समेत कई वरिष्ठ पदों पर रहे। पत्रकारिता के साथ साथ कविता और सार्थक लेखन में भी असित की विशेष रुचि है। उन्होंने ‘नदी लौटती भी है’ नाम से कहानी संग्रह भी लिखा है।

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अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने PM मोदी को लिखा लेटर, उठाया ये बड़ा मुद्दा

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
PM MODI

दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के उत्पीड़न का मामला उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को लिखे गए इस पत्र में इन दोनों प्रेस संस्थाओं ने पीएम से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने का आग्रह किया है, जिससे पत्रकारों का उत्पीड़न न हो और वे प्रतिशोध के डर के बिना काम कर सकें।

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ऑस्ट्रिया-मुख्यालय स्थित ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और बेल्जियम स्थित ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं। इन दोनों संस्थाओं ने मोदी से राज्य सरकारों को पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह समेत सभी आरोपों को वापस लेने का निर्देश देने के लिए कहा है, जो कर्तव्य पालन के दौरान उन पर लगाए गए हैं।

इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पत्र के अनुसार, ‘स्वास्थ्य संकट का उपयोग उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार की कमी को उजागर किया है। एक सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के लिए एक स्वतंत्र मीडिया आवश्यक है।’

उन्होंने लिखा है, ‘स्वतंत्र, महत्वपूर्ण पत्रकारों को परेशान करने के लिए राजद्रोह के कानूनों का उपयोग न केवल देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन है। यह सरकार द्वारा किसी आलोचना को चुप कराने का भी प्रयास है।’

रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों एसोसिशंस का कहना है, ’भारत में 25 मार्च को जब पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था, तब से 31 मई के बीच महामारी को कवर करने के लिए 55 पत्रकारों को निशाना बनाया गया। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई।’

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पत्रकार की पिटाई के खिलाफ आगे आया एडिटर्स गिल्ड, उठाई ये मांग

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने दिल्ली में ‘कारवां’ मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है। इस बारे में गिल्ड की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है। गिल्ड ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की मांग की है।  

गिल्ड का कहना है कि पेनकर पर पुलिस ने उस समय हमला किया, जब वह बतौर पत्रकार अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। दिल्ली में पिछले दो महीनों के दौरान कारवां मैगजीन का यह चौथा पत्रकार है, जिस पर हमला किया गया है।

यह भी पढ़ें: पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, कमिश्नर को दी शिकायत

गिल्ड की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, ‘पिछले दिनों उत्तरी दिल्ली में नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना के मामले में कुछ छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मॉडल टाउन इलाक़े के पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पेनकर इसी मामले की कवरेज कर रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान पेनकर ने अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन पुलिस नहीं मानी। पुलिस ने उनका फोन जब्त कर लिया और खींचे गए फोटोग्राफ डिलीट कर दिए।’

इस स्टेटमेंट भी यह भी कहा गया है, ‘कारवां के रिपोर्टर पर हुआ यह हमला संवैधानिक सिद्धांतों और मीडिया के स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के अधिकार का उल्लंघन है। गिल्ड हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही पत्रकार के खिलाफ किसी भी मामले को रोकने का निर्देश देना चाहिए।’

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ZEE में हुए बड़े बदलाव, राहुल जौहरी को मिली ये जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Zee

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की।

इस पुनर्गठन के तहत पुनीत मिश्रा कंटेंट व इंटरनेशनल मार्केट्स के प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं अमित गोयनका डिजिटल बिजनेस एंड प्लेटफॉर्म्स के प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। तरुण कात्याल जो ZEE5 इंडिया के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अमित गोयनका को रिपोर्ट करते रहेंगे।

शरीक पटेल इंटीग्रेटेड मूवीज बिजनेस का काम देखेंगे और अनुराग बेदी म्यूजिक बिजनेस संभालते रहेंगे।

इसके अलावा राहुल जौहरी को प्रेजिडेंट (बिजनेस- साउथ एशिया) के तौर पर नियुक्त किया गया है और वे इंटीग्रेटेड रेवेन्यू और मोनेटाइजिंग टीम का नेतृत्व करेंगे। जौहरी इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पहले सीईओ थे और करीब चार साल तक उन्होंने इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। बीसीसीआई से पहले वे करीब 15 साल तक डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

पुनीत मिश्रा, अमित गोयनका, शरीक पटेल, अनुराग बेदी और राहुल जौहरी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे। कंपनी में किए गए ये बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

 

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अब इस तरह का कंटेंट प्रोडक्शन हाउसेज से सीधे तैयार करा सकेगा प्रसार भारती

15 अक्टूबर को हुई प्रसार भारती बोर्ड की 163वीं बैठक में इस संबंध में लिया गया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’  (Prasar Bharati) प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप अब रणनीतिक, राष्ट्रीय व अन्य प्रतिष्ठित महत्व की परियोजनाओं के लिए जाने-माने प्रॉडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को सीधे कंटेंट का प्रोडक्शन प्रदान कर सकता है।

प्रसार भारती बोर्ड ने इसके लिए दिशा-निर्देशों को अपनी मंजूरी दे दी है। प्रसार भारती बोर्ड की 15 अक्टूबर को हुई 163वीं बोर्ड बैठक में ‘Policy Guidelines for Commissioning of Programmes under DAP (Direct Assignment Process)’ को मंजूरी दे दी गई है। ये गाइडलाइंस सभी पूर्व और वर्तमान नीतियों में ‘DAP’  के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं में लागू होंगी।

इन गाइडलाइंस के अनुसार प्रसार भारती प्रबंधन सीधे असाइमेंट के लिए समय-समय पर रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के टॉपिक्स/सब्जेक्ट/थीम्स को शॉर्टलिस्ट करेगा। जिन प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को डाइरेक्ट असाइमेंट दिया जाना है, उनकी पहचान प्रसार भारती प्रबंधन करेगा। ‘DAP’ प्रक्रिया शुरू करने से पहले शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के बारे में संबंधित बोर्ड समिति को सूचित किया जाएगा।

प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स की ओर से रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के कंटेंट को तैयार करने के लिए मिलने वाले स्वत:प्रस्तावों को भी पहले संबंधित बोर्ड कमेटी के सामने शॉर्टलिस्टिंग के लिए रखना होगा। इसके बाद मूल्यांकन के लिए उन्हें ‘DAP’ की कमेटी के सामने रखा जाएगा।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनीं TRAI-ब्रॉडकास्टर्स की दलीलें, दिया ये आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायलय में चल रही है सुनवाई। कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
TRAI

बॉम्बे हाई कोर्ट का कहना है कि वर्ष 2020 के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (नियामक ढांचे) को लागू न किए जाने को लेकर ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ जबरन कोई कठोर कदम नहीं उठा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बताया जाता है कि कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही कहा गया है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता, ट्राई इस मामले में ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता है।

इससे पहले एक सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.ए. सैयद और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की डिवीजन बेंच ने ट्राई से कई सवाल पूछे थे। बता दें कि तमाम ब्रॉडकास्टर्स और आईबीएफ ने ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर (NTO-2) को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए इस राज्य में जल्द लागू होगा कानून

लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है।

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Journalist Protection Act

झारखंड में जल्द ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) लागू होगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उसके बाद इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। ।

मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान एसोसिएशन ने दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मुआवजा देने, गंभीर रूप से बीमार पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने और पत्रकार पेंशन योजना में सुधार करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद सभी पत्रकारों को पत्रकार पेंशन योजना का लाभ देने, इसकी खामियों में सुधार करने की बात कही। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार 10 पत्रकारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने का निर्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज हसन, झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, रांची जिला अध्यक्ष आलोक सिन्हा और पत्रकार नईमुल्ला खान आदि शामिल थे।

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यूपी सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने संभाला टीआरपी घोटाले की जांच का जिम्मा

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
CBI

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है और यूपी में की गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।

इस मामले की जांच में सीबीआई की एंट्री तब हुई, जब मामले की जांच मुंबई पुलिस कर रही है, जिसने रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर लखनऊ पुलिस से जांच को अपने हाथ मे लिया और वह भी तब जब यूपी में इससे संबंधित एक मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ पुलिस ने रविवार को विज्ञापन कंपनी ‘गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस’ कंपनी के सीईओ कमल शर्मा की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत दर्ज होने के बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआई मामले की सिफारिश की। 24 घंटे के भीतर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच के लिए यूपी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वहीं, रिपब्लिक टीवी ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। चैनल का कहना था कि सुशांत सिंह राजपूत केस में आवाज उठाने के लिए मुंबई पुलिस उनके पीछे पड़ी है, क्योंकि उन्होंने इस मामले में कवरेज के दौरान मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

खबरों के मुताबिक, सीबीआई की एक टीम मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए लखनऊ पहुंची है। एजेंसी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के बाद से अब यह दूसरी बार है कि किसी जांच ने मुंबई पुलिस से भाजपा शासित राज्य और फिर सीबीआई तक का रास्ता बनाया है।

इस महीने की शुरुआत में मुंबई पुलिस ने कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच के दौरान न्यूज में हेरफेर और गलत टिप्पणियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण के दौरान टीआरपी रेटिंग घोटाले का खुलासा हुआ था।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने कहा कि चुनिंदा घरों में रेटिंग मीटर लगाने वाली एजेंसी हंसा के पूर्व कर्मचारियों ने गोपनीय डेटा को तीन चैनलों के साथ साझा किया था। हंसा के डेटा का उपयोग BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) द्वारा किया जाता है, जो देश भर के चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग के आंकड़े जारी करता है।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के मुताबिक, सिटी पुलिस टीआरपी के हेरफेर से जुड़े घोटाले की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक विशेष चैनल को चलाने के लिए घरों में रिश्वत दे रहे थे। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो मराठी चैनल फक्त मराठी और बॉक्स सिनेमा के मालिक हैं, जबकि तीसरे आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।

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सुधीर चौधरी के इन सवालों पर अमित शाह ने कुछ यूं रखी ‘मन की बात’

जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी से बातचीत में गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार चुनाव में बीजेपी की स्थिति, सुशांत केस से लेकर टीआरपी घोटाले समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Sudhir Chaudhary Amit Shah

सुशांत सिंह राजपूत केस की रिपोर्टिंग के दौरान ही टीआरपी घोटाला सामने आने के बाद मीडिया की भूमिका को लेकर उठे सवाल के बारे में गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। राजनीति नहीं होनी चाहिए। ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के साथ एक बातचीत के दौरान गृहमंत्री ने बिहार चुनाव, कोरोना काल में चीन से तनातनी और टीआरपी घोटाले की आंच में मीडिया की विश्‍वसनीयता समेत तमाम पहलुओं पर अपनी बात रखी।

क्या मीडिया विवाद पर कानून का पालन होना चाहिए था? इस बारे में अमित शाह का कहना था, 'मीडिया संस्थाओं और अदालत को इसे ठीक करना चाहिए'। इन मुद्दों पर मीडिया की आलोचना के बारे में अमित शाह का कहना था कि मीडिया बैलेंस रिपोर्टिंग करे, खबर मार्केटिंग की चीज नहीं है।

बातचीत के दौरान राष्‍ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर अमित शाह का कहना था कि भारत की एक इंच की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं कर पाएगा। ये भारत सरकार का अटल निर्णय है। कोविड-19 से मुकाबले को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा, 'देखिए, बहुत समय से पढ़ाई-लिखाई का समय नहीं मिला था। डेढ़ महीने में मुझे पढ़ाई-लिखाई का समय मिल गया। दूसरी बात, कई सारी चीज़ों को पीछे मुड़कर देखने का, सोचने का समय भी मिला। कई गलतियां मुझसे स्वयं से कहां हुईं, क्या हुईं, इसके बारे में भी सोचा और आगे वो गलती न हों, इसके लिए अपने आपको तैयार भी किया। विशेषकर पढ़ाई-लिखाई पर मेरा ज्यादा ध्यान रहा।

बिहार में सुशांत सिंह राजपूत के चुनावी मुद्दा बन जाने के बारे में अमित शाह का कहना था, 'हो सकता है कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भी वोट डालें। मगर दो चीजें एक साथ हुईं। इतना विवाद हुआ कि मुझे आश्चर्य इस बात का था कि महाराष्ट्र सरकार ने क्यों सीबीआई को केस पहले नहीं दे दिया। सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। पहले से ही सीबीआई को केस दे देते, परिवार की मांग है, तो बात खत्म हो जाती। खैर अब मीडिया ने  भी उसको ज्‍यादा तूल भी दिया'।

इस पूरी बातचीत को आप यहां देख सकते हैं—

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मातृभूमि ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन का कद बढ़ा, मिली नई जिम्मेदारी

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Naveen

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है। उन्हें मीडिया सॉल्यूशंस टीआडी (टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल) का हेड बनाया गया है। अब मातृभूमि न्यूज टेलीविजन चैनल (Mathrubhumi News Television Channel), कप्पा टीवी (Kappa TV), क्लब एफएम (Club FM) और मातृभूमि डिजिटल (Mathrubhumi Digital) के सेल्स व मार्केटिंग कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।

अपनी नई भूमिका पर नवीन श्रीनिवासन ने कहा कि सही कहूं तो मैं इस जिम्मेदारी को लेने के लिए काफी उत्साहित हूं। परिस्थितियां वैसे तो चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमारे पास एक बेहतरीन टीम है जो कि इसका मुकाबला करने के लिए सक्षम है। इसके अलावा, एक मीडिया समूह के तौर पर हम हमेशा केरल के सामाजिक माहौल के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं और मलयाली लोगों ने हम पर पूरा भरोसा जताया है, जिसका हमें काफी फायदा मिला है।

अलग-अलग इंडस्ट्रीज और डोमेन्स में काम करने का अनुभव रखने वाले नवीन आईआईएम लखनऊ के छात्र रह चुके हैं। इससे पहले वे दैनिक ‘मातृभूमि’ के लिए क्लस्टर हेड सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें कंपनी के लिए नए इनोवेटिव आइडियाज और सेल्स संचालित गतिविधियां बनाने का श्रेय दिया जाता है। फिलहाल वे मातृभूमि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एम.वी. श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगे।

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