राजनाथ सिंह बोले, सरकार को इस तरह का ‘आईना’ न दिखाए मीडिया

13वें रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड' चार जनवरी को दिल्ली में...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 January, 2019
Last Modified:
Saturday, 05 January, 2019
RAJNATH SINGH

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

13वें रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड' चार जनवरी को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किए गए। पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 29 पत्रकारों को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पत्रकारों को ये अवॉर्ड्स दिए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सच्ची पत्रकारिता बहुत जरूरी है, क्योंकि यह देश को ताकत देने का काम करती है। उन्होंने इमरजेंसी के दौर में रामनाथ गोयनका के साहसिक निर्णयों की चर्चा करते हुए कहा कि पहरेदार जितना जागरूक व निडर होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि आज खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जो इस पेशे का अपमान है। उन्होंने कहा, ‘मीडिया को चाहिए कि वह सरकार को आईना दिखाए, लेकिन वह आईना रंगीन न हो।’

सोशल मीडिया की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि परंपरागत मीडिया की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी, लेकिन इसके लिए सही तथ्यों को पेश करना होगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की जाती है। इमरजेंसी के समय में जिन लोगों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की गई थी, उनके सवालों का भी जवाब हमें तलाशने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात में विश्वास नहीं करता कि मीडिया और सरकार के बीच दोस्ती नहीं हो सकती। भले ही वे दोस्त न हों,  लेकिन उन्हें एक-दूसरे को लेकर कटुता की भावना नहीं रखनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि निडरता और राष्ट्रवाद के स्तंभों पर पत्रकारिता टिकी है।

सिंह ने कहा, ‘जो पत्रकारिता देश के खिलाफ है और भ्रष्टाचार के दृष्टांतों को छिपाती है, वह पत्रकारिता नहीं है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया दिया कि पत्रकारिता सिर्फ लोकतंत्र का पहरुआ नहीं है, बल्कि यह बैरोमीटर भी है, जिसपर इसे मापा जाता है। उन्होंने कहा, ‘सच्ची पत्रकारिता राष्ट्र मजबूत करती है। पत्रकारिता जितनी मजबूत होती है, लोकतंत्र की चमक उतनी तेज होती है।’ उन्होंने इंगित किया कि वर्षों से यह भरोसा बना है जो लोगों और मीडिया के संबंधों को परिभाषित करता है। यह भरोसा न डिगे, इसके लिए मीडिया को चौकन्ना रहने की जरूरत है।

गृहमंत्री ने इस पर भी चर्चा की कि ‘सोशल मीडिया और फेक न्यूज के रूप में पारंपरिक मीडिया को किस प्रकार से चुनौतियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘पारंपरिक मीडिया का महत्त्व तब तक बना रहेगा, जब तक यह अपनी विश्वसनीयता बनाए रखेगी।’ उन्होंने कहा कि अखबार या मीडिया समूहों की अपनी विचारधारा हो सकती है, लेकिन यह खबरों में नहीं दिखनी चाहिए।  सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर सिंह ने कहा कि परंपरागत मीडिया का महत्व नहीं घटेगा, चाहे नई मीडिया कितना भी आगे बढ़ जाए।

पुरस्कार समारोह के बाद ‘#MeToo इन द न्यूजरूम : व्हाट एडिटर्स कैन एंड शुड डू’ विषय पर एक पैनल डिस्कशन हुआ। पैनल में न्यूज रूम की नायक रहीं चार महिला संपादक द न्यूज मिनट की सह-संस्थापक एवं प्रधान संपादक धन्या राजेंद्रन, मुंबई मिरर की संपादक मीनल बघेल, द क्विंट की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋतु कपूर और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भारतीय भाषाओं की प्रमुख रूपा झा शामिल थीं। चर्चा का संचालन द इंडियन एक्सप्रेस की डिप्टी एडिटर सीमा चिश्ती ने किया।

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OTT के खिलाफ अदालती मामलों को लेकर MIB उठा सकता है ये कदम

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
MIB

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए एक याचिका दायर करने की योजना बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया ताकि उन्हें इसके अगले कदम के बारे में सूचित किया जा सके। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ 23 से अधिक अदालती मामले दायर किए गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एमआईबी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों में जाना पड़ता है, लिहाजा मंत्रालय का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के तहत सभी मामलों को लाना बेहतर होगा।

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 Netflix में इस बड़े पद से स्वाति मोहन का इस्तीफा

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग के डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
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Thursday, 26 November, 2020
Swati Mohan

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग की डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर की पुष्टि खुद स्वाति मोहन ने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media.com) से की।

नेटफ्लिक्स में अपने 2.5 साल के कार्यकाल के दौरान  मोहन ने इस प्लेटफॉर्म के लिए भारत में मार्केटिंग की जिम्मेदारियां संभाली और एक मजबूत टीम का निर्माण किया। उन्होंने नए-नए मार्केटिंग कैंपेन्स के जरिए इस स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नेटफ्लिक्स में शामिल होने से पहले, मोहन अप्रैल 2015 से नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) और फॉक्स नेटवर्क्स ग्रुप, इंडिया (Fox Networks Group, India) की कंट्री हेड थीं। जनवरी 2012 से मार्च 2015 के बीच वे इंडिया में फॉक्स इंटरनेशनल चैनल में कंटेंट और प्रोग्रामिंग की वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर इसके कई चैनल्स के लिए प्रोग्रामिंग और कंटेंट पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

उन्हें इस इंडस्ट्री में 16 वर्षों का अनुभव है। इस बीच इन्होंने Group M, O&M, FBC Media and और Endemol जैसी कंपनियों में काम किया।

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इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
SC

अमरावती भूमि घोटाले मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है। यह रोक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने लगाई थी। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को जस्टिस अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

बेंच ने इस मामले में एफआइआर की जांच पर रोक सहित हाई कोर्ट के अन्य निर्देशों पर रोक लगाने इनकार कर दिया। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई अगले साल जनवरी में करेगी।

बेंच ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया है कि इस बीच वे हलफनामा दायर करें, साथ ही हाई कोर्ट से भी गुजारिश की है कि इस बीच वे मामले में कोई फैसला न लें।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर मुख्यमंत्री वाइएस जगन मोहन रेड्डी को नोटिस जारी नहीं किया और आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता सहित अन्य से प्रतिक्रिया मांगी, जिनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया था।   

मामले की सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हाई कोर्ट के आदेश को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरिम आदेश को पारित नहीं किया जाना चाहिए था। धवन ने घोटाले के बारे में कुछ तथ्यों का भी हवाला दिया, जो कथित तौर पर पूर्व महाधिवक्ता और अन्य लोगों से जुड़े विभिन्न लेनदेन को लेकर था।

इससे पहले 15 सितंबर को, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने जांच पर रोक लगा दी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद हाई कोर्ट ने यह फैसला लिया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा 2014 में राज्य के विभाजन के बाद अमरावती को राजधानी में स्थानांतरित करने के संबंध में भ्रष्टाचार और अवैध भूमि के लेन-देन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर के संबंध में कोई भी सूचना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया में सार्वजनिक नहीं किए जाने का आदेश जारी किया था।

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‘कादम्बिनी’ पत्रिका के प्रभारी संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा का निधन

कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
rajivkatara

देश में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। वहीं इस बीच कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। कोविड संक्रमण के बाद दिल्ली के बत्रा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा 2006 से हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर के साथ एक लंबी पारी खेल रहे थे। 2 महीने पहले तक वे ‘कादंबिनी’ पत्रिका  के प्रभारी संपादक थे। सौम्य स्वभाव के राजीव कटारा की हर विषय की अच्छी पकड़ थी।

कटारा ‘चौथी दुनिया’, ‘अमर उजाला’ समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे। 1983 में ‘नवभारत टाइम्स’ से ट्रेनिंग लेने के बाद ‘चौथी दुनिया’, ‘संडे ’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘माया’, ‘आजतक’, ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक भास्कर’ में काम करने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े। समाचार4मीडिया से एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि 1986 में ‘चौथी दुनिया’ ने उन्हें पत्रकारिता का बड़ा ब्रेक दिया। वे कहते थे कि कमर वहीद नकवी, रामकृपाल सिंह और संतोष भारतीय की टीम ने बहुत कुछ सिखाया। वो उनकी पत्रकारिता का यादगार दौर था। वहां काम करते वक्त गजब का आत्मविश्वास पैदा होता था।

उन्होंने बताया था कि अजय चौधरी, वीरेंद्र सैंगर, अर्चना झा, आदियोग के साथ उन्होंने वहां खूब काम किया। उसके बाद उदयन शर्मा के साथ ‘संडे ऑब्जर्वर’ के जरिए उन्होंने अपनी पारी आगे बढ़ाई। करीब साढ़े तीन साल वहां काम करने के बाद वे ‘राष्ट्रीय सहारा’ गए। उस दौरान सुमिता, शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकार उनके साथी रहे। वहां नौ महीने काम करने के बाद ‘माया’ जॉइन की, पर वहां भी वे नौ महीने ही काम कर पाए। उसके बाद वे ‘आजतक’ चले गए।

इसके बाद 1996 में उनकी जागरण में बतौर फीचर एडिटर दिल्ली में जॉइनिंग हुई। जागरण के साथ उन्होंने फीचर के कई प्रयोग किए। सहस्त्राब्दि अंकों का संयोजन किया। 2001 में ‘अमर उजाला’ के साथ सातों दिनों के फीचर पेज की शुरुआती की। 2003 में सीएसई की फैलोशिप के अंतर्गत बैतूल में उन्होंने काम किया। फिर 2006 में ‘हिन्दुस्तान’ आए और यहां रिसर्च और स्पेशल प्रोजेक्ट के इंजार्च, खेल संपादक के पद पर काम करते हुए ‘कादम्बिनी’ का प्रभार इस वर्ष सितंबर तक संभाला।

पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के देने लिए उन्हें 2013 के ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था। 

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प्रेस की स्वतंत्रता को कुछ यूं सुनिश्चित करेगी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने एक कानूनी सलाहकार पैनल नियुक्त किया है। यह पैनल प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर गिल्ड को सलाह मशविरा देगा और मिलकर काम करेगा।

इस बारे में गिल्ड की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, ‘यह कानूनी पैनल सिविल और आपराधिक कानूनों के मामलों में गिल्ड की मदद करेगा।’ पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

बताया जाता है कि आने वाले समय में पैनल का विस्तार किया जाएगा और इसमें विभिन्न राज्यों से ऐसे कानूनी सलाहकारों को शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया से संबंधित मुद्दों पर काम किया है।

 

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The Walt Disney Company को बाय बोल नए सफर पर निकले पवन शर्मा

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Pawan Sharma

‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) इंडिया के नेशनल हेड-रेवेन्यू (branded content and Bindass) पवन शर्मा ने कंपनी को अलविदा कह दिया है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार उन्होंने अब प्रतिष्ठित मीडिया समूह में शामिल नेटवर्क18 (Network 18) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। उन्होंने वर्ष 2009 में इस कंपनी को जॉइन किया था। वर्ष 2013 में उन्हें रीजनल सेल्स हेड (UTV Action और World Movies) के पद पर प्रमोट किया गया था।

बता दें कि शर्मा पूर्व में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) और ‘रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट’ (Reliance Big Entertainment) के साथ भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कॉरपोरेट के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें Rex Karmaveer Gold Category Award भी मिल चुका है।  

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HT से अलग होकर इस वेबसाइट की एडिटर-इन-चीफ बनीं मेधा श्री

मेधा श्री ने करीब 50 किताबों लेखक ओम स्वामी की ऑफिशियल वेबसाइट os.me में बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है

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Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
MedhaSri

मेधा श्री ने करीब 50 किताबों लेखक ओम स्वामी की ऑफिशियल वेबसाइट os.me में बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है। मेधा श्री हिन्दुस्तान टाइम्स से पहले बीसीसीएल (टाइम्स ऑफ इंडिया), क्रिएटिव नेस्ट मीडिया जैसे मीडिया हाउसों के साथ काम कर चुकी हैं। वे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और मीडिया हाउस के लिए भी लिखती रही हैं।

6.5 साल के कार्यकाल के बाद जनवरी में उन्होंने एचटी से विदाई ली थी। उन पर एचटी सिटी में मनोरंजन व लाइफस्टाइल सप्लीमेंट की जिम्मेदारी थी।

Os.me प्लेटफॉर्म पर वे लेखकों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगी और इंटरनेट पर बेहतर कंटेंट बनाने का काम करेंगी।

इस मौके पर मेधा ने कहा, ‘os.me अच्छे लोगों का एक विशेष समुदाय है जो इस मंच पर अपनी बुद्धिमत्ता और चुनौतियों को साझा करते हैं।’

 

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Netflix के 2 अधिकारियों के खिलाफ FIR, जानें मामला

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
Netflix5

वेबसीरिज ‘ए सूटेबल बॉय’ (A Suitable Boy) में आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स  (Netflix) के 2 अधिकारियों पर मध्य प्रदेश में एफआईआर दर्ज कराई गई है। वेबसीरीज के एक सीन को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में नेटफ्लिक्स की वाइस प्रेजिडेंट (कंटेंट) मोनिका शेरगिल और निदेशक (पब्लिक पॉलिसी) अंबिका खुराना का नाम है। 

बता दें कि यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। तिवारी ने नेटफ्लिक्स और इस वेब सीरीज के निर्माताओं से माफी की मांग की है और इससे आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने की मांग है। उनका कहना है कि इस प्रकार के दृश्य लव जिहाद को बढ़ावा देते हैं।

पूरे विवाद पर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘ओटीटी मीडिया प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ रहे एक कार्यक्रम ‘ए सूटेबल बॉय’ में बेहद आपत्तिजनक दृश्य फिल्माए गए हैं जो एक धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते हैं। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इस बात का परीक्षण किया जाए कि क्या इसमें किसिंग सीन मंदिर में फिल्माया गया है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। प्रथमदृश्या जांच में ये पाया गया है कि ये दृश्य एक धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘गौरव तिवारी द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर, नेटफ्लिक्स के अधिकारियों मोनिका शेरगिल और अंबिका खुराना के खिलाफ रीवा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (ए) (धार्मिक भावनाओं और विश्वासों को अपमानित करने और अपमानित करने के लिए दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत एक एफआईआर दर्ज की जा रही है।’ दरअसल, इस सीन में मंदिर परिसर में किसिंग सीन को दिखाया गया था।

गौतलब है कि वेबसीरिज को लेकर अभी तक कोई सेंसरशिप नहीं है और ना ही इन्हें उसके लिए फिल्म की तरह इजाजत लेनी होती है। हालांकि, हाल में केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस बाबत नोटिफिकेशन जारी कर इसे अपने अंतर्गत लिया है, जिसके बाद आने वाले दिनों में इसके दृश्यों पर सेंशर लग सकते हैं।

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‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर के मामले में एडिटर्स गिल्ड ने कही ये बात

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
EditorsGuild54

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि यह मामला देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े खतरे को प्रदर्शित करता है।

बता दें कि मुखिम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध कानून के विभिन्न प्रावधानों को किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है, मुखिम का मामला इसका उदाहरण पेश करता है।

कुछ दिन पहले ही मुखिम ने एडिटर्स गिल्ड की ‘चुप्पी’ हवाला देते हुए विरोध स्वरूप इस संगठन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने से मना कर दिया था। अदालत ने मुखिम को उनके द्वारा जुलाई में लिखी फेसबुक से सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का दोषी पाया था।

रविवार को जारी किये गए बयान में गिल्ड ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त शिलॉन्ग टाइम्स की एडिटर मुखिम पर उनके द्वारा लिखी गई एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आपराधिक मामला चलाना चिंताजनक है। लॉसेतुन में एक बॉस्केटबाल कोर्ट में आदिवासी और गैर आदिवासी युवकों के बीच झड़प पर जुलाई 2020 में लिखी गई फेसबुक पोस्ट के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। गिल्ड ने कहा, ‘मुखिम का मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े स्तर पर खतरे को प्रदर्शित करता है, जो कानून के अस्पष्ट ढांचे के तहत संचालित होता है और जिसका अकसर असहमति को दबाने के लिए सरकार और एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग किया जाता है।’

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TRP को ध्यान में रखकर की जा रही पत्रकारिता का तरीका सही नहीं: सूचना-प्रसारण मंत्री

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी लोगों तक पहुंचाएं।’

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
PrakashJavedkar

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी समाचार मानकर लोगों तक पहुंचाएं।’ पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए उक्त बात भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के शैक्षणिक सत्र 2020-21 का सोमवार को ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन करते हुए केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कही।

जावड़ेकर ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलाव का हम सभी को स्वागत करना चाहिए और उसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नम्बूदिरिपाड सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, दुरुपयोग का साधन नहीं। आपकी स्टोरी में यदि दम है, तो उसके लिए किसी नाटक अथवा सनसनी की जरूरत नहीं है। समाज में अच्छी खबरें इतनी हैं, परन्तु दुर्भाग्य से उन्हें कोई दिखाता नहीं है। रचनात्मक पत्रकारिता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब से सरकार ने खाद की नीम कोटिंग शुरू की, तब से खाद की कालाबाजारी रुकी है। रेलवे का कोई गेट अब ‘अनमैन’ नहीं रहा, इसलिए दुर्घटनाएं बंद हो गई हैं। स्वच्छता की दृष्टि से भी रेलवे में बहुत सुधार हुआ है। पांच हजार रेलवे स्टेशन आज वाई-फाई से जुड़े हैं। करीब 100 नए एयरपोर्ट देश में शुरू हुए हैं, जिनका लाभ लाखों लोग ले रहे हैं। क्या ये सभी खबरें नहीं हैं?

उन्होंने कहा कि करीब दो लाख गांवों तक फाइबर कनेक्टिविटी पहुंची है, जिससे वहां के जीवन में बदलाव आया है। फ्री डिश के माध्यम से अब 104 चैनल और 50 एजुकेशनल चैनल निशुल्क देखे जा सकते हैं। देश में 300 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चल रहे हैं। कभी जाकर देखिए इनसे कितने स्थानीय कलाकारों को अवसर मिल रहा है और उनसे समाज जीवन में कैसा बदलाव आया है। ढाई करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मकान मिले हैं, बारह करोड़ लोगों को टॉयलेट्स मिले हैं, उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन मिले हैं, चालीस करोड़ लोगों के बैंक खाते खुले हैं, पचास करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। क्या ये सब खबरें नहीं हैं?

'हर घर नल से जल' का सपना अब आजादी के 70 साल बाद पूरा होने जा रहा है। प्रत्येक गांव में बिजली पहुंच चुकी है। आज चार-पांच सौ योजनाओं की सब्सिडी और मदद लोगों को डीबीटी के माध्यम से सीधे मिल रही है। इससे एक लाख 75 हजार रुपए की चोरी रुकी है। क्या ये न्यूज नहीं है? दूसरी घटनाएं भी न्यूज हैं, परन्तु ये भी न्यूज है, यह हमें समझना चाहिए। समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में योगदान ही पत्रकारिता का धर्म है।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता का पहला मंत्र यह है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली सारी घटनाएं खबर हैं, जो ठीक से लोगों तक पहुंचानी हैं। मीडिया की आजादी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आयाम है। इसे संभालकर रखना है। परंतु यह आजादी जिम्मेदारी के साथ आती है। इसलिए हम सभी को जिम्मेदार भी होना है। पत्रकार के रूप में आप सभी पक्ष-विपक्ष को सुनें, परंतु समाज को अच्छी दिशा में ले जाने के लिए ही हमारी पत्रकारिता काम करे। टीआरपी को ध्यान में रखकर जो पत्रकारिता हो रही है, वह सही रास्ता नहीं है। 50 हजार घरों में लगा मीटर 22 करोड़ दर्शकों की राय नहीं हो सकता। हम इसका दायरा बढाएंगे, ताकि इस बात का पता चल सके कि सही मायने में लोग क्या देखते हैं और क्या देखना चाहते हैं।

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