‘द वायर’ के संपादकों ने मांगी माफी, जारी किया ये बयान

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद...

Last Modified:
Monday, 22 October, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद उन्होंने अपने चर्चित शो 'जन गण मन की बात' से फिलहाल खुद को अलग कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ, ‘द वायर’ के संपादकों ने ‘जन गण मन की बात’ के 318वें एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी भी मांगी है। 

दरअसल, दुआ ने अपने संस्थान 'द वायर' से  एक हफ्ते की मोहलत लेते हुए अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने को कहा है। हालांकि इसके बाद ‘द वायर’ ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति भी गठित कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम की अध्यक्षता वाली इस जांच समिति के सदस्यों में पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह और प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय शामिल हैं।

बता दें कि दुआ के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप निष्ठा जैन नाम की एक महिला फिल्म निर्माता ने लगाया है। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए निष्ठा जैन के आरोपों के बाद दुआ ने 'द वायर' पर प्रसारित अपने कार्यक्रम में सफाई पेश की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निष्ठा जैन के आरोपों के बाद 'द वायर' ने दुआ के 318वें शो को अपलोड होने से ठीक पहले रोक दिया। ‘जन गण मन की बात’  में इस शो का विषय था- ‘राफेल डील और तेलों की बढ़ती कीमतें’। हालांकि यह एपिसोड बुधवार को बेवसाइट पर प्रसारित हुआ, लेकिन कुछ काट-छांट के साथ। शो में से दुआ की वो बातें हटा दी गईं जिनमें उन्होंने #MeToo अभियान को चुनावी साल में लोगों का ध्यान भटकाने का हथकंडा बताया था, लेकिन उनकी कही बातें सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर देखी जा सकती हैं-

 

शो के पहले वाले विडियो में दुआ अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी बात करते हैं। वे कहते हैं, 'इसमें थोड़ा कीचड़ मुझ पर भी उछाला गया है… उसका भी मैं जिक्र करूंगा।' दुआ कहते हैं कि एक ऐसा कीचड़, सेक्सुअल हरासमेंट का तो नहीं है, परेशान करने का है।' दुआ ने कहा, '30 साल पहले किसी महिला को लगा कि मैंने कुछ ऐसा किया जिससे उन्हें परेशानी हुई। अब ये ऐसा कीचड़ है जो किसी पादरी के चोगे पर भी लग सकता है, जज के चोगे पर भी लग सकता है, वकील के चोगे पर भी लग सकता है, पुजारी पर भी लग सकता है, किसी शरीफ आदमी पर भी लग सकता है, डॉक्टर पर भी लग सकता है।'

दुआ ने कहा, 'कीचड़ एक दफे लग गया, तो जिस पर फेंका गया, वो क्या कर सकता है सिवाय इसके कि वो इनकार करे कि ऐसा नहीं हुआ है।' दुआ ने कहा- मैं, जो मुझ पर आरोप लगाए गए हैं, उनको सिरे से नकार रहा हूं, खारिज कर रहा हूं, कि वो बिल्कुल बे-बुनियाद है, कल्पना है किसी की, ऐसा कुछ नहीं हुआ। लेकिन, क्योंकि मैं आपके प्रति जवाबदेह हूं, 'द वायर' के प्रति जवाबदेह हूं, इसलिए आज से... इस कार्यक्रम को सस्पेंड कर रहा हूं एक हफ्ते के लिए। आज 16 तारीख है, 23 तारीख को मैं फिर हाजिर होऊंगा आपके सामने, या तो अपना आखिरी अलविदा कहने के लिए, या इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए ताकि ये जो हफ्ता है 'द वायर' ने अगर कोई जांच करनी हो, तफ्तीश करनी हो, मालूमात करनी हो, तो मेरे बिना वहां रहे कर सकते हैं। 23 तारीख को आपसे फिर मुलाकात होगी।’

वहीं ‘द वायर’ का कहना है कि जब तक कमेटी की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक, विनोद दुआ का कार्यक्रम ‘जन गण मन की बात’ प्रसारित नहीं किया जाएगा।

देखें विडियो-

हालांकि इसके बाद, कार्यक्रम में विनोद दुआ द्वारा सफाई पेश करने को लेकर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए, जैसे कि ‘द वायर’ ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने के लिए मंच क्यों दिया?, निष्ठा जैन के आरोप के लगाने के बाद ‘द वायर’ ने खुद विनोद दुआ का इस्तीफा क्यों नहीं लिया, या फिर उनके शो (जन गण मन की बात) को स्थगित क्यों नहीं किया गया? हालांकि इन सभी सवालों का जवाब ‘द वायर’ के संपादकों ने अपने पोर्टल पर दिया है और ‘जन गण मन की बात’ के पिछले एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए संपादकों ने माफी भी मांगी है।

पढ़िए द वायर द्वारा जारी किया गया बयान-

द वायर  ने #मीटू आंदोलन की रिपोर्टिंग पूरी शिद्दत के साथ की है और संपादकीय स्तर पर इसका पूरा समर्थन किया है, क्योंकि यौन उत्पीड़न हमारे समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।

इस आंदोलन के दरमियान हमारे एक कंसल्टिंग एडिटर विनोद दुआ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। वे सप्ताह में चार दिन मंगलवार से शुक्रवार तक प्रसारित होने वाले लोकप्रिय वीडियो शो ‘जन गण मन की बात’ की एंकरिंग करते हैं।

द वायर  को 2015 में स्थापित किया गया था। निष्ठा जैन के आरोप का संबंध जिस घटना से है, वह 1989 में हुई थी। जिस दिन, रविवार को उनका फेसबुक पोस्ट सार्वजनिक हुआ, उसी दिन द वायर  की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) जिस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने का दायित्व है, की अध्यक्ष ने आईसीसी के अन्य सदस्यों को आरोपों की गंभीर प्रकृति के बारे में बताया और कहा कि समिति को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

अगले ही दिन, यानी सोमवार, 15 अक्टूबर को आईसीसी की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि निष्ठा जैन से आईसीसी के समक्ष एक शिकायत करने की दरख्वास्त की जाए, ताकि इसकी प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू हो सके। निष्ठा ने कहा कि वह जल्दी ही ऐसा करेंगी।

17 अक्टूबर, 2018 को यानी निष्ठा जैन द्वारा आरोप लगाए जाने के तीन दिन के बाद, द वायर  ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति के गठन का फैसला किया।

हम आईसीसी के दायरे के बाहर नजर आने वाली एक घटना को, इसके अधिकार क्षेत्र के मामलों से दूर रखने के लिए इस पहल पर काम कर रहे थे। हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते थे कि यह कार्यवाही प्रश्नों से परे ईमानदार और पक्षपातरहित लोगों द्वारा की जाए।

इस दिशा में तेजी से काम करते हुए हमने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम, पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक और पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह से निष्ठा जैन के आरोपों की एक समयबद्ध जांच कराने के लिए बाहरी समिति का सदस्य बनने के लिए रजामंदी भी ले ली।

ये नाम निष्ठा जैन के साथ साझा किए गए, जिस पर उन्होंने एक और स्त्री सदस्य के तौर पर पांचवें सदस्य को इसमें शामिल करने का अनुरोध किया, जिसे हमने तत्काल स्वीकार कर लिया। प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय इस समिति की पांचवीं सदस्य हैं।

चूंकि इस समिति के सदस्य निष्ठा जैन के आरोपों की जांच करने में द वायर  की मदद करने के लिए अपनी अन्य प्रतिबद्धताओं को स्थगित कर रहे थे, और चूंकि निष्ठा ने भी अपने फेसबुक पोस्ट में इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई थी, इसलिए हमने उन्हें 17 अक्टूबर को इस समिति को लेकर अपनी लिखित रजामंदी देने और अपनी शिकायत 18 अक्टूबर तक लिखित रूप में देने के लिए कहा।

उन्होंने जवाब देते शिकायत दायर करने के लिए 26 अक्टूबर तक का समय देने के लिए कहा, जिसे हमने मान लिया, लेकिन हमने उनसे कम से कम औपचारिक तौर पर अपनी अनुमति देने के लिए अवश्य कहा ताकि हम समिति के सदस्यों के साथ इसकी पुष्टि कर सकें और इस तरह से प्रक्रिया शुरू हो सके। उन्होंने 18 अक्टूबर की शाम को ऐसा किया।

सभी अनुमतियां मिल जाने के बाद, द वायर  ने 20 अक्टूबर को समिति के गठन और इसके सदस्यों के बारे में घोषणा कर दी। निष्ठा जैन से शिकायत मिल जाने के बाद बाहरी समिति अपने कामकाज की समय-सारणी घोषित करेगी।

निष्ठा के आरोपों को द वायर  द्वारा जिस तरह से बरता गया, उसको लेकर हमारे पाठकों, शुभचिंतकों, द वायर  के पब्लिक एडिटरों और हमारे अपने सहकर्मियों द्वारा कई सवाल उठाए गए हैं।

हमारा यह यकीन है कि सबसे अहम सवाल कि आखिर द वायर अपने कंसल्टिंग एडिटर पर निष्ठा जैन द्वारा लगाए गए आरोपों पर किस तरह से कार्रवाई करना चाहती है, इसका जवाब ऊपर दे दिया गया है। लेकिन इसके अलावा पिछले कुछ दिनों में कुछ और सवाल व चिंताएं प्रकट किए गए हैं जिनका जवाब हमने नीचे देने की कोशिश की है।

प्रश्न 1- द वायर  ने विनोद दुआ को बरखास्त क्यों नहीं किया या निष्ठा जैन के आरोपों सामने आने के साथ ही उनके शो को स्थगित क्यों नहीं किया?

मीटू आंदोलन में लगाए गए आरोपों का संबंध विभिन्न तरह की स्थितियों से है, जो अलग-अलग जवाबों की मांग करते हैं। कार्यस्थल पर हाल-फिलहाल के यौन उत्पीड़न की शिकायतें तत्काल कार्य बंटवारे में बदलाव की मांग करती हैं, अगर शिकायतकर्ता और आरोपित उत्पीड़क एक साथ काम करते और अगर उत्पीड़क निरीक्षक (सुपरवाइजरी) पद पर है।

पहले की शिकायत की घटनाएं, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल पर घटित हुईं, वे अलग तरह के कदमों की मांग करती हैं। पुरानी घटनाओं की शिकायतें, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से पूरी तरह से असंबद्ध हैं, और भी भिन्न तरह की प्रतिक्रिया की मांग करती हैं।

वैसी शिकायतें, जो उत्पीड़न, यहां तक कि हिंसा से जुड़ी हैं, खासकर साथी द्वारा की गई हिंसा, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से जुड़ी हुई नहीं हैं, लेकिन कर्मचारी के चरित्र को कठघरे में खड़ा करती है, वह भिन्न तरह की कार्रवाई की मांग करती हैं।

दूसरे मीडिया घरानों की तरह हमें भी इस मामले में, यानी निष्ठा जैन द्वारा विनोद दुआ के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर, जो कि 1989 की हैं, अपने पास मौजूद विकल्पों के बारे में सोचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हमारे पास इस मामले में अनुसरण करने के लिए कोई नक्शा नहीं था।

अंतरिम उपायों (जैसे किसी व्यक्ति के निलंबन) के बारे फैसला लेते वक्त निर्देशक सिद्धांत कुछ चीजों पर गौर करने के लिए कहते हैं :

क्या चल रहे या संभावित नुकसान को रोकने के लिए व्यक्ति का निलंबन जरूरी है?

क्या उस व्यक्ति का बना रहना, उन लोगों को प्रभावित कर सकता है, जिनके साथ व्यक्ति निरीक्षक (सुपरवाइजर) की भूमिका में है?

क्या व्यक्ति का अपने पद पर बने रहना किसी वर्तमान जांच के नतीजों को किसी तरह प्रभावित कर सकता है?

क्या व्यक्ति का पद पर बने रहना किसी मौजूदा जांच को लेकर सार्वजनिक धारणा को पूर्वाग्रहग्रस्त कर सकता, क्योंकि प्रतिष्ठा का मसला भी यहां दांव पर होता है?

क्या उस निलंबन को स्थायी करने या उसे वापस लेने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप/नक्शा है- जिसकी गैरहाजिरी में यह अनिश्चितकालीन बना रहेगा, जिसे न वापस लिया जा सकेगा और न जिसे निलंबन में तब्दील किया जाएगा?

पहले और दूसरे सवाल के जवाब स्पष्ट तौर पर न में थे। दुआ निरीक्षक/सुपरवाइजर नहीं है। न ही द वायर  में रहते हुए उनके आचरण को लेकर कोई शिकायत आई है। चूंकि कोई जांच शुरू नहीं हुई थी, इसलिए सवाल नंबर 3 और 4 का कोई वजूद ही नहीं था।

अब चूंकि, हमने एक समिति का गठन कर दिया है और निष्ठा जैन ने एक समयबद्ध कार्यवाही को लेकर अपनी अनुमति दे दी है, पांचवें सवाल का जवाब है- हां। अब एक ठोस नक्शा हमारे सामने है। इसलिए विनोद दुआ के कार्यक्रम, जिसे उन्होंने स्वैच्छिक रूप से एक सप्ताह के लिए स्थगित किया था, का प्रसारण नहीं किया जाएगा और यह समिति द्वारा काम पूरा किए जाने तक स्थगित रहेगा।

प्रश्न 2- द वायर  ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने मंच क्यों दिया?

जिस समय विनोद दुआ ने ‘जन गण मन की बात’ के अपने एपिसोड की रिकॉर्डिंग की, उस समय तक उनके खिलाफ किसी जांच की शुरुआत नहीं हुई थी।

आईसीसी ने 15 अक्टूबर को निष्ठा जैन से संपर्क किया था और उनसे एक औपचारिक शिकायत देने का अनुरोध किया था, ताकि वह अपनी कार्यवाही शुरू कर सके। कोई शिकायत नहीं मिली थी। बाहरी समिति का गठन 17 अक्टूबर को हुआ और हमें निष्ठा से इस बारे में अनुमति मिली।

विनोद दुआ ने द वायर  को निष्ठा जैन के आरोपों- जिसकी रिपोर्टिंग खुद द वायर द्वारा की गई- पर विचार करने के लिए मौका/समय देने के लिए अपने कार्यक्रम के स्थगन की घोषणा की और इसके बाद यह भी कहा कि वे उनके आरोपों से इनकार करते हैं, जो कि एक आरोपित व्यक्ति के तौर पर उनका अधिकार था।

हमारी राय यह थी कि उनके द्वारा द वायर  पर उनके शो के मंच से या किसी दूसरी मीडिया मंच से आरोपों को नकारने का कोई असर उनके खिलाफ की जा रही जांच पर नहीं पड़ेगा।

संभवतः विनोद दुआ इस मामले में अलग से एक बयान जारी कर सकते थे, जो उनके शो से जुड़ा हुआ नहीं होता। लेकिन यह महसूस किया गया कि उन्हें अपने दर्शकों- जो द वायर  के बड़े पाठक समूह का हिस्सा हैं- को यह समझाना होगा कि आखिर वे अपने शो को स्थगित क्यों कर रहे हैं। 

प्रश्न 3- क्या द वायर  विनोद दुआ द्वारा मीटू आंदोलन को नकारने से इत्तेफाक रखता है?

नहीं ऐसा नहीं है। द वायर  का मीटू आंदोलन को समर्थन इसके द्वारा इसकी निरंतर रिपोर्टिंग और संपादकीय लेखों से साफ है। एशियन एज में एमजे अकबर के मातहत काम करने वाली एक पत्रकार के अनुभव का पहला विस्तृत विवरण द वायर द्वारा प्रकाशित किया गया।

प्रश्न 4- अगर द वायर  मीटू का समर्थन करता है, तो इसने विनोद दुआ को उन पर लगे आरोपों को नकारने की इजाज़त कैसे दी?

द वायर  एक मीडिया प्लेटफॉर्म है और मीटू आंदोलन का इसके द्वारा किया गया सारा कवरेज दो सिद्धांतों का अनुकरण करता है :

1- अनाम शिकायतों की कोई रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी और 2- आरोपित व्यक्तियों से संपर्क करके उन्हें अपने बचाव में चाहे जो कहना है, कहने देने, आरोपों को नकाराने, खारिज करने आदि का मौका देना।

अन्य आरोपितों की तरह ही विनोद दुआ को उनके खिलाफ लगे आरोपों को नकारने का अधिकार था। दूसरे आरोपितों के पास भी यह अधिकार है।

प्रश्न 6- विनोद दुआ ने अपने शो को स्थगित क्यों किया और यह क्यों कहा कि वे एक सप्ताह के लिए ऐसा कर रहे हैं?

दुआ को इस बात का इल्म था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप द वायर  को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें स्वैच्छिक तरीके से अपने शो को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया ताकि हमें अपनी इच्छा के मुताबिक उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का मौका/वक्त मिल सके।

उन्होंने कहा कि पहले की तरह अपने शो को रिकॉर्ड करेंगे, लेकिन साथ ही अपने दर्शकों को यह बताएंगे कि उनके खिलाफ एक आरोप लगा है और वे पूरी तरह से उन आरोपों को नकारते हैं, लेकिन वे एक सप्ताह के लिए अपने कार्यक्रम को स्थगित कर रहे हैं ताकि द वायर  को अपने मनमुताबिक इस मामले में कार्यवाही करने के लिए वक्त मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि वे एक सप्ताह के बाद इस बारे में घोषणा करेंगे कि वे अपने कार्यक्रम को जारी रख रहे हैं या नहीं। द वायर  ने उसके बाद एक एक जांच समिति का गठन कर दिया है और जैसा कि हमने बताया, विनोद दुआ का शो इस समिति के काम करने के दरमियान प्रसारित नहीं होगा।

प्रश्न 7- क्या द वायर  विनोद दुआ के इस बयान का समर्थन करता है कि इन आरोपों के रूप में उन पर कीचड़ उछाला गया है?

यौन उत्पीड़न के आरोपित व्यक्ति के तौर पर विनोद दुआ के पास उनके खिलाफ लगे आरोपों को झूठा बताने का अधिकार है और यह उन पर है कि यह कैसे करते हैं। दूसरे आरोपितों ने भी उन पर लगे आरोपों को खारिज किया है, कुछ लोगों ने इसे ज्यादा परिष्कृत तरीके और सूझबूझ के साथ किया है।

यह जरूर है कि मीटू आंदोलन की भी अपनी सीमाएं हैं और इन पर संजीदगी के साथ बहस की जा सकती है, की जानी चाहिए। इसके केंद्र में यौन हिंसा और उत्पीड़न के निजी अनुभवों को बयान करने का स्त्री का संघर्ष छिपा है। ऐसा दूसरे पीड़ितों को प्रोत्साहित करके और थोड़ी जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करके किया जाना है।

यह कहना अनुचित और गलत होगा कि सामान्य तौर पर यह आंदोलन कीचड़ उछालने वाला है। ऐसा नजरिया द वायर  के संपादकीय पक्ष के पूरी तरह से उलट है।

उनका कार्यक्रम बगैर किसी संपादकीय परीक्षा से गुजरे प्रसारित किया गया और यह हमारी तरफ से दूरदृष्टि की एक बड़ी चूक थी। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने मीटू आंदोलन को, भटकाव करार देने वाली, जो कुछ टिप्पणियां कीं उन्हें हमारे नोटिस में लाए जाने के तत्काल बाद संपादित करके हटा दिया गया।

प्रश्न 8- क्या आप विनोद दुआ के इस कथन से सहमत हैं कि उन पर लगाए गए आरोप यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं बल्कि सिर्फ परेशान करनेकी श्रेणी में आते हैं?

इस बहस में गए बिना कि उन पर लगे आरोप सही हैं या गलत- और द वायर  इस बात को दोहराता है कि वह न तो निष्ठा जैन के आरोपों और न विनोद दुआ के इनकार का समर्थन करता है- इस बात में कोई संदेह नहीं है ये आरोप आचरण को संबंधित हैं जो ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी के भीतर आते हैं।

यही कारण है कि निष्ठा के आरोपों पर द वायर की रिपोर्ट का शीर्षक था, ‘विनोद दुआ पर फिल्मकार ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप’।यह बात सबको स्पष्ट होनी चाहिए।

द वायर  के संपादक बिना किसी शर्त के ‘जन गण मन की बात’ के आखिरी एपिसोड में आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी मांगते हैं।

सिद्धार्थ वरदराजन

सिद्धार्थ भाटिया

एमके वेणु

20 अक्टूबर, 2018

 

 

 

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डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनने का सपना देख रहे युवा प्रफेशनल्स को FB इंडिया के MD की सीख

फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन ने ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
Ajit Mohan

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था में से एक है, जो चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में 480 मिलियन से ज्यादा एक्टिव इंटरनेट यूजर्स हैं, जो इसे दुनियाभर में एक महत्वपूर्ण विकासशील मार्केट बनाते हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी किस तरह से कंज्यूमर्स के व्यवहार को प्रभावित करती है? और वैश्विक स्तर पर भारत एक महत्वपूर्ण डिजिटल बाजार क्यों है? यह समझने के लिए ‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया गया। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक आयोजित इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से इन मुद्दों पर चर्चा की।

वर्तमान दौर के बारे में अजीत मोहन का कहना था कि भारत इन दिनों मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है और कोरोनावायरस (कोविड-19) से लड़ाई में भारत के सहयोग के लिए फेसबुक आर्थिक के साथ-साथ स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी अपना योगदान देने का प्रयास कर रही है। अजीत मोहन ने कहा, ‘हेल्थ केयर के मोर्चे पर फेसबुक ने सरकार के साथ हाथ मिलाया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां के लोगों के पास स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी उपलब्ध हो। इसके अलावा हमने छोटे व्यवसायों के लिए 100 मिलियन डॉलर का ग्लोबल फंड भी तैयार किया है।’

फेसबुक एमडी के अनुसार, उनकी कंपनी ने ‘कोविड-हब’ (Covid-hub) तैयार किया है, यह एक इंफॉर्मेशन पोर्टल है, जहां पर लोग एक क्लिक कर महामारी से संबंधित सभी सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘करीब दो बिलियन लोगों ने इस हब को देखा है और 350 मिलियन से ज्यादा लोगों ने इस पर क्लिक किया है और सक्रिय रूप से वहां से जानकारी ले रहे हैं।’ अजीत मोहन ने बताया कि भारत के आर्थिक पुनरुद्धार (economic revival) खासकर छोटे व्यवसायों के पुनरुद्धार पर फेसबुक का फोकस है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि छोटे व्यवसायों की मदद करने, बाजारों को सक्रिय करने, कस्टमर्स तक पहुंचने के मामले में यह हमेशा हमारी विशेष ताकत रही है।’   

इस चर्चा के दौरान यह पूछे जाने पर कि कंपनी की वैश्विक योजनाओं में भारत की स्थिति क्या है? अजीत मोहन का कहना था कि फेसबुक के लिए भारत काफी महत्वपूर्ण बाजार है। उन्होंने कहा, ‘हमने ‘जियो’ (Jio) में 5.7 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। इससे साफ पता चलता है कि भारत की ओर हमारा झुकाव कितना है। फेसबुक और वॉट्सऐप पर सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। यहां पर इंस्टाग्राम भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में इन तीनों ऐप्स की भूमिका बहुत ज्यादा है और बड़ी संख्या में यहां के लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हम इस वास्तविकता से इनकार नहीं कर सकते हैं कि अधिकांश लोगों की दिनचर्या वॉट्सऐप से ही शुरू होती है और इससे ही खत्म होती है। फेसबुक भी दोस्तों और परिवार से जुड़ने में काफी महत्वूर्ण भूमिका निभाती है।’

भारत के महत्व पर जोर देते हुए अजीत मोहन ने यह भी कहा, ‘यदि आप पिछले पांच वर्षों को देखें तो पता चलेगा कि भारत को बदलने में डिजिटल की विशेष भूमिका रही है। चीन समेत कोई भी ऐसा देश नहीं है, जहां पर चार सालों में हमने 400-500 मिलियन लोगों को ऑनलाइन आते हुए और मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हुए देखा है। जियो ने इसमें काफी प्रमुख भूमिका निभाई है। भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ी है और इंटरनेट की दरें काफी सस्ती हुई हैं, यह तो सिर्फ शुरुआत है। इससे सभी प्रकार के उद्योगों को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिला है। अभी हम कंज्यूमर्स को ऑनलाइन लेकर आए हैं और हमारा अगला काम 60 मिलियन छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन लेकर आना है।’

अजीत मोहन ने इसके साथ यह भी जोड़ा कि एक अमेरिक टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में फेसबुक का मानना है कि भारत एक खुला लोकतांत्रिक देश है। यहां फेसबुक सभी के लिए एक ओपन प्लेटफॉर्म है। इस दौरान अजीत मोहन ने इंस्टाग्राम में हाल के दिनों में हुई ग्रोथ और पिछले दिनों लॉन्च किए गए इसके शॉर्ट फॉर्म विडियो प्रॉडक्ट ‘रील्स’ (Reels) के बारे में भी बातचीत की। अजीत मोहन का कहना था, ‘देश में इंस्टाग्राम में हुई ग्रोथ अभूतपूर्व है। इसने वैश्विक संस्कृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें शॉर्ट फॉर्मेट के वीडियो तैयार करने में अवसर दिखे हैं और हमने अब इसके लिए रील्स को लॉन्च किया है।‘

इस मौके पर फेसबुक के एमडी ने यह भी बताया कि दुनिया में सबसे पहले रील को कहीं और की जगह भारत में ही क्यों लॉन्च किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब भी हम किसी प्रॉडक्ट को कहीं लॉन्च करने के बारे में सोचते हैं, भारत उस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इस नए प्रॉडक्ट को लॉन्च करने का आइडिया काफी पहले से था, अब इसे लागू करने का सही समय था। यदि हम इंस्टाग्राम की ग्रोथ देखें तो यह काफी तेजी से हुई है।’ अजीत मोहन ने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें बड़े शहरों की तुलना में  छोटे कस्बों और शहरों से कंटेंट निर्माण में बढ़ोतरी देखने को मिली है औऱ इससे उन्हें समझ आया कि इंस्टाग्राम ने सोसायटी में कितनी गहराई तक अपनी जगह बना ली है। मौजूदा समय में इंस्टाग्राम बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी के साथ-साथ उनके फॉलोअर्स के लिए एक जगह बन गया है और यह ऐसा ही रहेगा, पर रील्स ने नए क्रिएटर्स के लिए भी रास्ते खोले हैं।

ऐसे युवा प्रफेशनल्स जो डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनना चाहते हैं और नई चीजें सीखना चाहते हैं, उन्हें सलाह देते हुए सेशन के आखिर में अजीत मोहन ने कहा, ‘चीजों को जानने-समझने और उसके अनुसार निर्णय लेने के साथ सीखने की दक्षता (learning agility) ये दो लीडरशिप स्किल हैं और इनका अभ्यास करना चाहिए।’

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पत्रकार खुदकुशी केस में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने की ये बड़ी कार्रवाई

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
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दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स ट्रॉमा सेंटर (जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि 6 जुलाई को कोरोना पाड़ित पत्रकार ने AIIMS के ट्रामा सेंटर की चौथी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पत्रकार की पहचान करीब 34 वर्षीय तरुण सिसोदिया के रूप में हुई थी, जो दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। सिसोदिया कोरोना पॉजिटिव थे और इलाज के लिए एम्स में भर्ती थे।

हालांकि पत्रकार की आत्महत्या की जांच के लिए केंद्रीय मंत्री ने एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे और 48 घंटे के अंदर जांच की रिपोर्ट मांगी थी। इस जांच समिति में चीफ ऑफ न्यूरोसाइंस सेंटर से प्रोफेसर पद्मा, मनोचिकित्सा विभाग के हेड आरके चड्ढा, डिप्टी डायरेक्टर (एडमिन) डॉ. पांडा और डॉ. यू सिंह शामिल रहे।

4 सदस्यों की इस कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 संक्रमित पत्रकार द्वारा कथित तौर पर की गई आत्महत्या के मामले में एम्स द्वारा की गई जांच में पत्रकार की मौत के पीछे किसी गलत नीयत के होने का प्रमाण नहीं मिला है और न उसके इलाज की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पाई गई है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स और जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रशासन में आवश्यक बदलाव के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि समिति 27 जुलाई तक अपने सुझाव सौंपेगी।

बता दें कि दिल्ली के भजनपुरा के रहने वाले पत्रकार तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण कथित तौर पर एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह से घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि कुछ दिन पहले एलएनजीपी अस्पताल में उनके ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई थी।  

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

वहीं तरुण की पत्नी मोनिका का कहना है कि मेरे पति को कोरोना वॉरियर का सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी उनके पति अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे। उन्होंने आखिरी वक्त तक कोरोना से जुड़ी जानकारियां समाज तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं की। हमेशा अपने काम को तवज्जो देते रहे। उनकी मौत के बाद दूसरा कोई सहारा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि उनके पति को कोविड वॉरियर का सम्मान मिले जो, उनका अधिकार है।

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BCCI के CEO पद से अलग हुए राहुल जौहरी, इस्तीफा मंजूर

बीसीसीआई का सीईओ बनने से पहले राहुल डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Rahul5454

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सीईओ राहुल जौहरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल जौहरी ने पिछले साल दिसंबर में ही अपना पद छोड़ने का फैसला कर लिया था, जब बीसीसीआई द्वारा गांगुली के नेतृत्व में एक नया प्रशासक चुना गया था, लेकिन तब उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। बताया जाता है कि बोर्ड ने अब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। 

अप्रैल 2016 में बीसीसीआई के सीईओ का पद संभालने वाले राहुल उससे पहले डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

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BW Dialogue: 10 जुलाई को नजर आएंगे फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन, होगी दिलचस्प चर्चा

​​​​​​​‘बिजनेस वर्ल्ड’ ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
anuragsir8745

‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक चलने वाले इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से चर्चा करेंगे।

बता दें कि ‘बीडब्‍ल्‍यू डायलॉग’ ऐसा मंच है, जिसके जरिये ऐसे प्रख्यात व्यक्तियों, सेलेब्रिटीज और अचीवर्स से बात कर उनसे उनकी जिंदगी, उनके बिजनेस और उनके नेतृत्व क्षमता के बारे में जानने की कोशिश की जाती है, ताकि उनकी सफलता की कहानी को दुनिया के सामने लाया जा सके। ये सेलिब्रिटीज विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े होते हैं फिर चाहे वे किसी स्पोर्ट्स से हों, आर्टिस्ट हों, एक्टर हों या फिर कोई लेखक। ये वे लोग हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, प्रदर्शन और कार्यक्षमता से अपने क्षेत्र में लोहा मनवाया है।

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प्रिंट और डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने कही ये बात

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित फिल्म्स और टीवी के लिए सरकार जल्द करेगी प्रोत्साहन की घोषणा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
Amit Khare

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सेक्रेट्री अमित खरे ने कहा कि सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक स्वतंत्रता लाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के मामले में सरकार प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एक समान व्यवस्था (level playing field) के बारे में भी सोच रही है। खरे का कहना है, ’प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी 26 प्रतिशत एफडीआई लागू होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया पर लागू एफडीआई के नियम न्यूज एग्रीगेटर्स (news aggregators) पर भी लागू होने चाहिए। बता दें कि एग्रीगेटर्स इनशॉर्ट्स और डेलीहंट जैसे ऐप्स या वेबसाइट्स हैं जो अन्य पब्लिशर्स से उनके कंटेंट को क्यूरेट करती हैं और पाठकों के लिए कंटेंट को पर्सनलाइज करने के लिए एल्गोरिदम (algorithms) का इस्तेमाल करती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कहीं और से कंटेंट लेकर उसे अपने यहां इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इसकी घोषणा नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह मेरी भूमिका नहीं है, लेकिन इस बात को लेकर काफी गंभीरता से विचार चल रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रिंट मीडिया के बीच एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। इस बारे में सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही किसी तरह की घोषणा की जाएगी।’

बता दें कि पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी प्रदान की थी। इससे पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए ही यह मंजूरी थी। न्यूज चैनल्स के लिए 49 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी मिली हुई है। फिक्की फ्रेम्स 2020 के 21वें एडिशन (ऑनलाइन) में ‘Shaping the Future of M&E in Today’s Digitalised and Information Driven Economy’ सेशन के दौरान खरे ने कहा कि लेवल प्लेयिंग फील्ड का मतलब मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारी रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के अधीन लाना नहीं है। खरे ने कहा, ‘सरकार द्वारा पिछले छह सालों के दौरान बिजनेस को आसान करने और कम लेकिन प्रभावी रेगुलेशन पर फोकस किया गया है। अब कुछ और नए रेगुलेशंस लाने का विचार है, इन्हें लागू करना आसान होगा और इससे अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।’   

बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय इन दिनों अपने तमाम नियमों और अधिनियमों में संशोधन कर रहा है। जैसे- सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) अधिनियम आदि। खरे का कहना था कि विभिन्न मीडिया के लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं हैं, जैसे-प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और फिल्मों के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड हैं। उन्होंने कहा कि  नेटफ्लिक्स और डिज्नी+हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान व्यवस्था (लेवल प्लेयिंग फील्ड) तैयार किया जाना है, जो अभी तक किसी भी नियामक दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि कम रेगुलेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी स्ट्रक्चर को सिंक (sync) किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दायरे में आते हैं, अब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस तरह के कंटेंट को भी अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

खरे के पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का प्रभार भी है। इस मंत्रालय ने महामारी के मद्देनजर छात्रों की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल को बढ़ावा दिया है। खरे ने कहा कि महामारी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बढ़ गई है। मानव संसाधन विकास को मीडिया और मनोरंजन के साथ जोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग पर कई वीडियो आ गए हैं। उनका कहना था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ज्यादा स्वंतत्रता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है और यह एक नियामक (रेगुलेटर) से अधिक एक सूत्रधार और एजुकेटर के रूप में काम करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो मैसेज के जरिये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित फिल्म और टीवी प्रॉडक्शन के लिए सरकार जल्द ही प्रोत्साहन का ऐलान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिल्म और टीवी शूट्स के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) लेकर आएगी।

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CM, अखबार के संपादक समेत 4 लोगों को 50 करोड़ की मानहानि का मिला नोटिस

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
court5497

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। रघुवर दास ने रांची से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के संपादक को भी नोटिस दिया है। झूठी व भ्रामक खबर फैलाकर उन्हें बदनाम करने को लेकर यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता विनोद कुमार साहू के माध्यम से भेजा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि पूर्व सीएम रघुवर दास पर लगाए गए आरोप में अखबार के संपादक व वर्तमान सरकार की मिलीभगत है। इससे उनकी छवि धूमिल कर बदनाम करने के मकसद से किया गया है। इस कारण लीगल नोटिस सीएम हेमंत सोरेन, अखबार के संपादक समेत चार लोगों पर 50 करोड़ की मानहानि का दावा किया है।

दरअसल मामला यह है कि 27 जून 2020 को एक अखबार ने यह खबर छापी की रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी को 'वंडर कार' बनाने का ऑर्डर दिया था। मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास ने बेंटले कार का ऑर्डर 2018 में इंग्लैंड की एक कंपनी को दिया था, जिसके एवज में उन्हें 40 लाख रुपए एडवांस भुगतान किया था। लेकिन जब इंग्लैंड की कंपनी ने कार बनाने से इनकार किया, तो यह ऑर्डर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की किसी कंपनी को दे दिया।  साथ ही यह खबर प्रकाशित हुई कि नई सरकार के गठन के पश्चात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गाड़ी का मूल्य देखते हुए ऑर्डर को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसे फिजूलखर्ची मानते हैं। वहीं यह बात भी लिखी गई थी कि बेंटले कंपनी ने ऑर्डर के बारे में झारखंड सरकार को ईमेल भेजा है। इसके बाद जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हुई।

 वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को गलत बताया है, जिसके चलते उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हेमंत सोरेन और अखबार के संपादक को लीगल नोटिस भेजा है।

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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के थिंक-टैंक में न्यूज एंकर तरुण नांगिया कुछ यूं देंगे योगदान

IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
TarunNangia

जाने-माने सीनियर न्यूज एंकर तरुण नांगिया को भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले थिंक-टैंक ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स’ (IICA) के लिए गठित मॉनिटरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है। IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे।  

नंगिया के कंधों पर IEPFA को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता व सुरक्षा, विवादों से बचने के लिए सलाह, मीडिया प्रसार से संबंधित सलाह और निवेशक जागरूकता और सुरक्षा के लिए अन्य गतिविधि की पेशकश करना शामिल है। इस कार्य में भारतीय निवेशकों के बीच वित्तीय साक्षरता में सुधार करना भी शामिल है, जिससे आर्थिक रूप से लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई जा सके।

‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत टीवी सीरीज के प्रॉडक्शन और टेलिकास्ट से संबंधित प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित IICA मॉनिटरिंग कमेटी में नांगिया को एक सदस्य (मीडिया एक्सपर्ट) के रूप में नामित किया गया है।

वर्तमान में तरुण नांगिया बतौर एसोसिएट एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) आईटीवी ग्रुप (ITV Group) से जुड़े हुए हैं और लोकप्रिय साप्ताहिक टेलिविजन शो ‘लीगली स्पीकिंग’ (Legally Speaking), 'पॉलिसी एंड पॉलिटिक्‍स' (Policy & Politics) और ‘ब्रैंड स्टोरी’ (Brand Story) को प्रड्यूस और होस्ट करते हैं। नंगिया ‘द डेली गार्जियन’ अखबार में Legally Speaking, Policy & Politics आर्टिकल भी क्यूरेट और एडिट करते हैं।

बता दें कि IEPFA एक फंड है, जो सेबी और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के गाइडेंस के तहत स्थापित किया जाता है।  

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'मीडिया इंडस्ट्री को आगे ले जाना है, तो यह बदलाव करना होगा जरूरी'

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
uday Shankar

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है। ये कहना है ‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney Company) कंपनी के एशिया प्रशांत के प्रेजिडेंट व फिक्की के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट उदय शंकर का। उन्होंने कहा कि विज्ञापन पर निर्भरता उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने महामारी के दौरान इसका सामना किया है।

हालांकि, उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस प्रकट किया कि भारतीय मीडिया उद्योग, विशेषकर प्रिंट, टीवी और डिजिटल क्षेत्र व्यापक स्तर पर विज्ञान राजस्व पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से साबित हुआ है कि यह व्यवस्था उद्योग के लिए काफी नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, ‘यदि उद्योग को आगे बढ़ना है तो उसे विज्ञापन पर निर्भरता कम करनी होगी।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महामारी के कारण हम सभी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि यह अस्थायी हैं, पर हम इसे आसानी से दूर कर सकते हैं। फिलहाल हम एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ चीजों में बदलाव करने की जरूरत है और मुझे लगता है कि अगले कुछ वर्षों में हमें इस पर ध्यान जरूर देना चाहिए कि इन सभी को कैसे बदलना है।’

उन्होंने कहा कि विशेषरूप से प्रिंट, टीवी और अब डिजिटल के लिए सबसे बड़ा अभिशाप यह है कि ये विज्ञापन पर कुछ जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं और वह भी इतना कि यह मीडिया को कस्टमर्स के साथ सीधा संबंध बनाने से रोकता है। उदय शंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मीडिया उद्योग उपभोक्ताओं के साथ अपने संबंधों के बल पर आगे बढ़ा है।

फिक्की फ्रेम्स के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह उद्योग बढ़कर 20 अरब डॉलर का हो गया है। इसमें से 10 अरब डॉलर के राजस्व का योगदान अकेले विज्ञापन का है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘हम सभी इसके लिए दोषी हैं। हमने दूरदर्शिता नहीं दिखाई, हमने अपने उत्पाद पर सब्सिडी लेने का प्रयास किया और छोटी चुनौतियों के लिए अड़चनें खड़ी कीं।’ शंकर ने कहा कि मीडिया उद्योग में दूरदर्शिता की कमी की वजह यह है कि बरसों से यह काफी हद तक विज्ञापनों पर कुछ अधिक निर्भर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘यदि हमें उद्योग को अगले स्तर पर ले जाना है, तो एक चीज निश्चित रूप से करने की जरूरत है। वह है, उपभोक्ता जो इस्तेमाल करें, उसके लिए भुगतान करें। इसके लिए हमें अपनी क्षमता का इस्तेमाल करना होगा और इच्छाशक्ति दिखानी होगी, क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे उद्योग बढ़ सकता है।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश में प्रिंट और फिल्में बहुत अच्छा कर रही हों, लेकिन अभी और भी बहुत कुछ किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वह उद्योग की लॉबी से जुड़े हुए हैं और देखा है कि पिछले कुछ साल में चीजें काफी बदल गई हैं।

उदय शंकर ने कहा, ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र रचनात्मक अर्थव्यवस्था का एक अहम भाग है। यह रोजगार और कारोबार पैदा कर सकता है, साथ ही भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।’  

उदय शंकर ने कहा कि इस साल कोविड-19 की वजह से उद्योग को बड़ा झटका लगेगा। विज्ञापन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से इसका प्रभाव और अधिक ‘कष्ट’ देने वाला होगा।

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मीडिया-मनोरंजन सेक्टर में नौकरियों को लेकर वित्त राज्य मंत्री ने कही ये बात

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Anuragthakur

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे। ये कहना है केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का। उन्होंने कहा कि घर से काम करने की व्यवस्था (वर्क फ्रॉम होम) आगे भी जारी रहेगी।

ठाकुर ने उद्योग मंडल फिक्की के एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन की स्थिति ने हमें दिखा दिया है कि घर से काम करने की व्यवस्था जारी रहेगी। हमें इस संकट में अवसरों को खोजना चाहिए। यह भारत के लिए आगे बढ़ने का सही समय है। ऐसे में मीडिया और मनोरंजन नौकरी देने वाले बड़े सेक्टर के रूप में उभर सकता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फिक्की फ्रेम में अपने विचार साझा करते हुए आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से हमें तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में ठाकुर ने कहा कि रचनात्मक कार्यों का क्षेत्र एक उच्च वृद्धि वाला क्षेत्र है। यदि इसको ठीक से पोषित किया जाए तो यह प्रतिस्पर्धा, उत्पादकता, सतत वृद्धि और रोजगार को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है और देश की निर्यात क्षमता को बढ़ा सकता है। भारत के सामने बड़ी चुनौती बौद्धिक संपदा अधिकारों और कॉपीराइट के डिजिटलीकरण, कुशल कार्यबल और वितरण नेटवर्क तक पहुंच की है। मीडिया और मनोरंजन उद्योग पूरी तरह से विज्ञापन पर निर्भर है जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी आय का मुख्य जरिया वितरण नेटवर्क और उपयोक्ताओं से आने वाला पैसा है। इन सभी पहलुओं को साथ लाने की जरूरत है ताकि आय और वृद्धि के नए रास्ते बनाए जा सकें।

ठाकुर ने कहा कि उनका मंत्रालय 20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू कर रहा है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के बेहतर प्रभाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोविड-19 संकट से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में उद्योग और नागरिकों के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य उसे इस तरह के अभूतपूर्व संकट से बाहर निकालेगा। 

 

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Vinod Dua

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि मंगलवार को 15 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 16 जुलाई को होगी।

दुआ के खिलाफ उनके यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। साथ ही विनोद दुआ को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

स्थानीय नेता का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडार और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की और हिमाचल प्रदेश पुलिस को इस मामले में अभी तक की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह बताए कि जांच के रिकॉर्ड का क्या है। अभी तक इसमें क्या हुआ है? रजिस्ट्री में सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट जमा कराएं।  

वहीं न्यायमूर्ति उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ विनोद दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश की पुलिस को रोक दिया है।

सुनवाई के दौरान दुआ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पत्रकार से वही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं और यह एक तरह से उन्हें परेशान करने जैसा ही है। इस पर पीठ ने कहा कि दुआ को इस मामले में पूरक सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। दुआ इस मामले की डिजिटल माध्यम से जांच में शामिल हुए थे।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 14 जून को रविवार के दिन इस मामले की सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। हालांकि, तब पीठ ने दुआ के खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि दुआ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जांच में शामिल होंगे।

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ‘मुझे बोलने और अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त है और मुझे सरकार की आलोचना का भी अधिकार है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायत के बारे में विवरण देने से इनकार कर दिया है जबकि शीर्ष अदालत ने इस बारे में स्थिति रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि दुआ पहले ही पुलिस द्वारा भेजे गये सवालों के जवाब दे चुके हैं और अब सवालों का नया सेट भेजा गया है। दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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