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आखिर क्यों वॉशिंगटन पोस्ट ने खाली छोड़ दिया अपना कॉलम?
वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने गुमशुदा पत्रकार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करने और सरकार...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने गुमशुदा पत्रकार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करने और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा ज़ाहिर करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। शुक्रवार के संस्करण में अख़बार का एक पूरा कॉलम ब्लैंक रहा। केवल एक शीर्षक ‘ए मिसिंग वॉइस’ और लेखक के नाम के अलावा कॉलम में कुछ भी नहीं था। दरअसल, वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खाशोगी पिछले कुछ दिनों से लापता हैं। जमाल अगले हफ्ते शादी करने वाले थे और इसी सिलसिले में कागज़ी कार्रवाई के लिए तुर्की स्थित सऊदी दूतावास गए थे। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है, उनकी मंगेतर ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि जमाल मंगलवार को दूतावास गए थे, तब से वे लापता हैं।
मूल रूप से सऊदी अरब निवासी जमाल काफी लंबे समय से अमेरिकी अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट’ से जुड़े हुए हैं और नियमित कॉलम लिखते हैं। अख़बार ने अपने शुक्रवार के संस्करण में एक अलग संपादकीय में लिखा, ‘हम जमाल को लेकर बहुत दुखी और परेशान हैं, उन्हें आखिरी बार तुर्की के इंस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में देखा गया था। यह संपादकीय लिखे जाने तक हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है। हमने जमाल के परिजनों से बात की और सऊदी एवं तुर्की के अधिकारियों को भी इससे अवगत करा दिया है।’
वहीं, सऊदी अरब ने जमाल की गिरफ़्तारी जैसी ख़बरों से इनकार किया है। उसकी तरफ से कहा गया है कि पत्रकार जमाल अपनी वैवाहिक स्थिति से संबंधित कागज़ी कार्रवाई का अनुरोध करने के बाद तुरंत दूतावास से निकल गए थे। एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में सऊदी अधिकारियों ने कहा कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जमाल को तलाशने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। हालांकि, तुर्की के अधिकारियों का मानना है कि पत्रकार को सऊदी दूतावास में ही हिरासत में लिया गया था।
प्रेस फ्रीडम ग्रुप जैसे कि ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर’ और ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ ने सऊदी पत्रकार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। जमाल खाशोगी पिछले कुछ वर्षों से संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे थे। उन्होंने 1987 और 1999 के बीच अफगान युद्ध सहित मध्य पूर्व में हुए संघर्षों को व्यापक रूप से कवर किया था। साथ ही उन्होंने कई मौकों पर ओसामा बिन लादेन का साक्षात्कार भी किया था। सऊदी सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ लिखने के चलते ही जमाल को 2003 में सऊदी के अल-वतन अख़बार के एडिटर-इन-चीफ पद से हाथ धोना पड़ा था। 2010 में भी उन्हें बिना कोई ठोस वजह बताए नौकरी से निकाल दिया गया और 2015 में उस न्यूज़ चैनल को ऑन एयर होने के महज 11 घंटों में ही बंद करा दिया गया, जिसके इंचार्ज जमाल थे। देश में अपने खिलाफ पैदा होते विपरीत माहौल को देखते हुए जमाल अमेरिकी आ गए और यहीं से अपना लेखन जारी रखा।
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