सोशल मीडिया कभी न्यूजमेकर नहीं हो सकता है: सईद अंसारी, आजतक

‘मीडिया एंड मीडिया एजुकेशन समिट’ (Media & Media Education Summit) में...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 November, 2018
Last Modified:
Tuesday, 27 November, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘मीडिया एंड मीडिया एजुकेशन समिट’ (Media & Media Education Summit) में ‘Conflict between Mainstream Media & Social Media and it’s Impact on Media Education’ शीर्षक से हुए पैनल डिस्कशन में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर सईद अंसारी ने बताया कि आखिर क्यों वे सोशल मीडिया से इतनी दूरी बनाकर रखते हैं।

'समाचार4मीडिया' के डिप्‍टी एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने जब ये सवाल उठाया कि जहां चैनलों के एंकर्स की लोकप्रियता के लिए सोशल मीडिया काफी मायने रखता है। लगभग हर एंकर बताता है कि मेरे इतने लाइक्स हैं और मेरे इतने रिट्वीट्स हैं। ऐसे दौर में वह सोशल मीडिया से दूर रहकर भी कैसे इतने लोकप्रिय हैं?   

इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने भी सवाल उठाया, ‘मेरी नजर में ऐसा करना जरूरी नहीं हैं। यहां पर एंकर्स पत्रकारिता के लिए हैं, लोगों की खबरें दिखाने के लिए हैं अथवा अपनी लोकप्रियता और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए हैं?’

उन्होंने कहा, ‘आजकल की नई पीढ़ी और हमारे कई साथियों की परेशानी यही हो गई है कि वो किसी भी खबर या चर्चा के मुद्दे को सोशल मीडिया से चुनते हैं। वे शाम को टीवी पर चर्चा के लिए फेसबुक से मुद्दे चुनते हैं। वे सोशल मीडिया से काफी प्रभावित होते हैं और मुझे लगता है यही सबसे बड़ी गड़बड़ है। न्यूज के मामले में क्रेडिबिलिटी बहुत बड़ी बात है। आप वॉट्सऐप अपने पारिवारिक मित्रों के लिए तो इस्तेमाल कर सकते हैं। फेसबुक आप अपने दोस्तों के लिए तो इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन फेसबुक का इस्तेमाल आप पत्रकारिता के लिए कैसे कर सकते हैं, आप उससे कैसे प्रभावित हो सकते हैं? ‘

इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी के पर्सनल ट्विटर हैंडल से कैसे तय कर सकते हैं कि हमारे देश की 130 करोड़ जनता इससे प्रभावित होगी और उसका प्रतिनिधित्व भी करेगी। सोशल मीडिया कभी न्यूजमेकर नहीं हो सकता है और हमारी गलती यही है कि हम इस्तेमाल हो रहे हैं। 

क्रेडिबिलिटी के बारे में उन्होंने कहा कि मान लीजिए कुछ ट्रेंड कर रहा है, तो क्या आप मानकर चल रहे हैं कि वह सही है। क्या फेसबुक पर किसी के लाखों लाइक्स आ रहे हैं या यूट्यूब पर किसी विडियो को लाखों-करोड़ों व्यूज मिल रहे हैं तो क्या वे सही लोग  द्वारा किया जा रहा हैं। उनका यह भी कहना था, ‘क्या आप यह नहीं मानते कि आजकल इस तरह के बड़े-बड़े मीडिया हाउस हैं, जो बड़े-बड़े उद्योगपतियों या बड़े राजनेताओं के हैं अथवा वे उसकी फंडिंग करते हैं। वहां जितने भी ऑफिसर्स हैं, उनका काम ही इन्हें लाइक करना, फॉलो करना और प्रमोट करना है और उनके विडियो को वायरल करना है, क्या ऐसा नहीं है? यदि ऐसा नहीं है तो ये बहुत ही अच्छी बात है और अगर ऐसा है तो बंद होना चाहिए।’

आखिर में पत्रकारिता के छात्रों के आगे बढ़ने के बारे में सलाह देते सईद अंसारी ने कहा कि पढ़ना बहुत जरूरी है। आप ये नहीं कह सकते कि मुझे राजनीति में रुचि है, तो मैं इसी की पत्रकारिता करूंगा। स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, साइंस और डिफेंस आदि सब के बारे में पता होना चाहिए और यह सिर्फ और सिर्फ पढ़ने से आ सकता है।’ प्रोफेसर्स, टीचर्स और एजुकेटर्स के लिए उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल रही है। रोजाना कुछ न कुछ नया आ रहा है, तो यदि आप इसके अनुसार नहीं बदलेंगे और खुद को अपग्रेड नहीं करेंगे तो आप अपने छात्रों को डिग्री जरूर दे देंगे, लेकिन उन्हें इस लायक नहीं बना पाएंगे कि वो इंडस्ट्री में जाकर जॉब हासिल कर पाएं।

इस पूरे इवेंट में CSR Partner के तौर पर Pleasin Strides Foundation का सहयोग रहा।

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