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संजय अभिज्ञान ने बताया, मीडिया की दुनिया में कैसे कारगर है CAS
हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा जो स्वस्थ जीवन नहीं गुजारना चाहता होगा...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा जो स्वस्थ जीवन नहीं गुजारना चाहता होगा। इसके लिए उसे तमाम जानकारी की जरूरत पड़ती है कि कौन सी चीज उसके लिए फायदेमंद होगी और कौन सी नुकसान देगी। इसके लिए वह तमाम तरह की रिसर्च का सहारा लेता है। इसी तरह की रिसर्च का नाम है 'क्रिटिकल एप्रेजल स्किल्स' (CAS)। इसमें तमाम ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती है ताकि विश्वसनीय आंकड़े मिल सकें और आखिर में एक बेहतर प्रॉडक्ट मिल सके।
हिन्दी दैनिक 'अमर उजाला' की पिछले दिनों हुई वर्कशॉप में वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान का कहना था कि खबरों की दुनिया में भी CAS इसी प्रकार काम करता है।दिल्ली के एक होटल में आयोजित अखबार के हेल्थ रिपोर्टरों की इस वर्कशॉप में उनका कहना है कि किसी खबर को तैयार करने के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाए तो पाठक को भी ऐसी न्यूज मिलेगी जो विश्वसनीय होने के साथ-साथ आंकड़ों की कसौटी पर भी खरी उतरेगी। ऐसे में खबर के साथ-साथ पत्रकार की क्रेडिबिलिटी भी बनी रहेगी।
अभिज्ञान के अनुसार, इस प्रक्रिया के द्वारा पत्रकार को अपने स्किल्स को डेवलप करने में काफी मदद मिलती है। इसके द्वारा वह किसी भी खबर को पहले कसौटी पर मापते हैं और खरा उतरने पर ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।
अभिज्ञान के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत खबरें तैयार करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना पड़ता है। सबसे पहले तो हमें मार्केट में स्टडी करनी पड़ती है। जैसे- यदि हम कोई प्रॉडक्ट तैयार कर रहे हैं तो उसके बारे में स्टडी कर तथ्य जुटाते हैं। ठीक उसी प्रकार अच्छी खबर लिखने से पूर्व विषय वस्तु की भी पूरी तरह से स्टडी करनी चाहिए और उसी के आधार पर खबर लिखनी चाहिए ताकि उसमें किसी भी तरह की कमी की गुंजाइश न रहे और पाठकों तक जो खबर पहुंचे वह सच्ची और तथ्यों पर आधारित हो। इसके अलावा जिस प्रकार इस सिस्टम के तहत किसी दवा को तैयार करने के लिए सबसे पहले विश्वसनीय आंकड़ों की जरूरत होती है, उसी प्रकार इस सिस्टम में खबर को तैयार करते समय हमें अपने विश्वसनीय सोर्स से डाटा जुटा लेने चाहिए। अपने सोर्स को भी कई लेयर्स में बांटा जा सकता है। शुरुआत में पत्रकार को कहीं से प्राथमिक तौर पर जो सूचना मिलती है, वह उसका प्राइमरी सोर्स होता है। इसके बाद उस सूचना को पुष्ट करने की जरूरत होती है, इसके लिए संबंधित विभागों, निकायों अथवा अधिकारियों से उसकी पुष्टि की जाती है। इसमें इस बात का ध्यान रखना जरूरी होता है कि जहां से सूचनाओं की पुष्टि की जा रही है, क्या उसे संबंधित विषय पर अपनी बात रखने का अधिकार है। यानी सूत्र बहुत ही भरोसेमंद और आधिकारिक रूप से सक्षम होना चाहिए। कई मामलों में देखा गया है कि यदि सूत्र निष्पक्ष नहीं है, किसी एक पक्ष से प्रभावित है अथवा उसे विषय की संपूर्ण जानकारी नहीं है तो स्टोरी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
संजय अभिज्ञान के अनुसार, दवाएं तैयार करते समय ' CAS' में जिस तरह चेक एंड बैलेंस (Check and Balance) की जरूरत होती है, उसी प्रकार न्यूज अथवा आर्टिकल तैयार करने के दौरान भी चेक एंड बैलेंस की बहुत जरूरत होती है ताकि खबर गलत न जाए और दोनों पक्षों की बात उसमें आ सके। विश्वसनीयता के लिए यह बहुत ही जरूरी होता है। एक बार न्यूज की पुष्टि होने के बाद उसमें विशेषज्ञों की राय की जरूरत पड़ती है ताकि खबर को और प्रामाणिक बनाया जा सके।
उनका कहना था कि यदि पत्रकार खबर लिखते समय CAS का ध्यान रखेगा तो उसकी स्टेारी न सिर्फ तथ्यों के आधार पर प्रामाणिक भी होगी और इससे पत्रकार की विश्वसनीयता में भी इजाफा होगा।
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