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आशुतोष के हिंदू आतंकवाद की बात पर रोहित सरदाना ने दिया यूं करारा जवाब
धार्मिक आधार पर जो लड़ाई अब तक आम जनता और कट्टरपंथियों के बीच लड़ी जाती थी, वो अब पत्रकारों के बीच...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
धार्मिक आधार पर जो लड़ाई अब तक आम जनता और कट्टरपंथियों के बीच लड़ी जाती थी, वो अब पत्रकारों के बीच भी शुरू हो गई है। हालांकि गनीमत बस इतनी है कि ये लड़ाई अस्त्र-शस्त्र से नहीं, बल्कि शब्दों से लड़ी जा रही है। इसलिए इसे कुछ हद तक वैचारिक द्वंद्व का नाम दिया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष और ‘आज तक’ के एंकर रोहित सरदाना हिंदू-मुस्लिम को लेकर भिड़े हुए हैं। इस भिड़ंत की वजह है आशुतोष की वेबसाइट का वो लिंक जिसे उन्होंने एक टिप्पणी के साथ अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया था। इस ट्वीट में आशुतोष ने लिखा ‘आतंक का कोई धर्म नहीं होता। मोदी सरकार आने के बाद से आरएसएस से जुड़े आतंक के अभियुक्त बरी हो रहे हैं। क्यों? क्या बचाया जा रहा है या वाक़ई पहले फंसाया गया था? सत्य हिंदी की पड़ताल जारी है।
दरअसल, समझौता ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी रहे स्वामी असीमानन्द को बरी कर दिया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस फैसले को चुनौती न देने का इरादा जता चुके हैं। यानी एक तरह से यह मामला बिना सुलझे ही ख़त्म होने के कगार पर है। आशुतोष की वेबसाइट ‘सत्यहिंदी’ ने इसी पर केंद्रित एक रिपोर्ट प्रकशित की है, जिसे वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर ने तैयार किया है।
आशुतोष ने इस रिपोर्ट का हवाला देकर यह सवाल उठाया कि आखिरी हिंदू आतंकवाद से जुड़े नाम एक-एक करके बरी कैसे होते जा रहे हैं? जायज है ये सवाल देश की आबादी के एक बड़े हिस्से को नागवार लगता और ऐसा हुआ भी। सोशल मीडिया पर अधिकांश यूजर्स ने इसके लिए आशुतोष को आड़े हाथ लिया। ‘आज तक’ के वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना ने भी आशुतोष को करारा जवाब दिया, लेकिन उनके जवाब से कहीं न कहीं हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई को बल मिला।
सरदाना ने अपने ट्वीट में कहा, ‘फ़रवरी 2019, नासिक कोर्ट ने 11 मुस्लिम आरोपी बरी किए। 25 साल से उन पर TADA केस था। सितंबर 2018, अदालत ने IM के आतंकी होने के 2 आरोपी बरी किए। जनवरी 2018, TADA कोर्ट ने अब्दुल क़य्यूम को बरी किया,सबूत नहीं थे। 2014 से ही और भी हैं, पर आपका ‘सत्य’ तो एक ही धर्म के देखता है ना’? सरदाना के इस जवाबी ट्वीट को अब तक 12 हजार के आसपास रीट्वीट किया जा चुका है, इसके अलावा करीब दो हजार लोगों ने उस पर कमेंट्स भी किये हैं, जिनमें से अधिकांश रोहित के पक्ष में हैं।
फ़रवरी 2019, नासिक कोर्ट ने 11 मुस्लिम आरोपी बरी किए. 25 साल से उनपे TADA केस था.
— रोहित सरदाना (@sardanarohit) March 25, 2019
सितम्बर 2018, अदालत ने IM के आतंकी होने के 2 आरोपी बरी किए.
जनवरी 2018, TADA कोर्ट ने अब्दुल क़य्यूम को बरी किया,सबूत नहीं थे.
2014 से ही और भी हैं, पर आपका ‘सत्य’ तो एक ही धर्म के देखता है ना? https://t.co/qIgETIb3xT
इसके बाद आशुतोष ने पाकिस्तान में हिंदुओं के हाल और मोदी सरकार को जोड़ने वाली रिपोर्ट का लिंक शेयर किया, जिस पर भी रोहित सरदाना ने तीखा हमला बोला। आशुतोष ने लिखा ‘आखिर पाकिस्तान में हिंदू क्यों मुसलमान बनने के लिये मजबूर किये जाते हैं? और क्या मोदी सरकार हिंदुओं की ये पीड़ा रोक सकती है? सत्य हिंदी की विशेष रिपोर्ट’।
इस पर रोहित ने ट्वीट किया ‘सरकार ने पाकिस्तान जैसे मुल्कों से आने वाले हिंदुओं को नागरिकता देने का विचार बनाया था ना? बुद्धिजीवियों ने हल्ला मचा दिया। राजस्थान से जो परिवार जबरन वापस पाकिस्तान भेज दिए गए उनमें से आधों को वहां जान बचाने के लिए इस्लाम क़ुबूल करना पड़ा’। फ़िलहाल इस मसले पर दोनों ही शांत हैं, लेकिन इस क्षणिक भिड़ंत से इतना ज़रूर साफ़ हो गया है कि अब पत्रकार भी हिंदू-मुस्लिम को लेकर आम जनता की तरह मैदान में उतरने लगे हैं, जो शुभ संकेत नहीं हैं।
सरकार ने पाकिस्तान जैसे मुल्कों से आने वाले हिंदुओं को नागरिकता देने का विचार बनाया था ना? बुद्धिजीवियों ने हल्ला मचा दिया. राजस्थान से जो परिवार जबरन वापस पाकिस्तान भेज दिए गए उनमें से आधों को वहाँ जान बचाने के लिए इस्लाम क़ुबूल करना पड़ा. https://t.co/SHioJ1JR0H
— रोहित सरदाना (@sardanarohit) March 26, 2019
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