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मीडिया इंडस्ट्री में विरले होते हैं राधाकृष्णन जैसे मैनेजिंग एडिटरः राजदीप सरदेसाई
राधा बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। मैं आज जब राधा को याद करता हूं तो याद आता है...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
राजदीप सरदेसाई
कंसल्टिंग एडिटर, टीवी टुडे ग्रुप ।।
राधा बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। मैं आज जब राधा को याद करता हूं तो याद आता है उनका वो उत्साह, उनकी वो ऊर्जा और उनकी वो नम्रता, जो उनसे मिलने वाला हर शख्स चाहे वो कोई वो टॉप अधिकारी हो या जूनियर, महसूस करता था। राधा की विशेषता थी कि वह न्यूज रूम में मौजूद यंगस्टर्स के साथ बहुत आसानी से घुल-मिल जाते थे। वो ऐसे मैनेजिंग एडिटर थे, जिनमें नाममात्र का भी ईगो नहीं था। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राधा जैसे एडिटर मीडिया इंडस्ट्री में विरले ही होते हैं, जिनकी न कभी किसी से दुश्मनी रही और न ही कभी वो किसी भी तरह से न्यूज रूम की पॉलिटिक्स का हिस्सा बने।
मुझे अच्छी तरह से याद है कि राधा यदि किसी क्षण किसी पर चिल्लाते थे, तो अगले ही पल मैं उन्हें उसके साथ कॉफी पीते हुए पाता था। खबर पर राधा की पकड़ अद्भुत थी। ‘यूएनआई’ जैसी प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राधा समझते थे कि खबर क्या है और खबर कैसी होनी चाहिए। मुझे याद है कि न्यूज रूम में खबरों को लेकर उनका पैशन जनहित की खबरों पर रहता था। वह ह्यूमन इंटरेस्ट की स्टोरी समझने में माहिर थे। वह हमेशा कहते थे कि अच्छी स्टोरी का आमजन से जुड़ाव होना बहुत जरूरी है।
राधा को याद करते हुए मैं एक बात का उल्लेख जरूर करूंगा कि उनके नेतृत्व में कई नए इनोवेशन मीडिया इंडस्ट्री को देखने को मिले हैं। चूंकि राधा सीएनबीसी से सीएनएन-आईबीएन में आए थे, ऐसे में बजट को लेकर उन्होंने यहां पर जो खाका बनाया, वो अब तक का बेस्ट बजट प्रजेंटेशन रहा। यह उनका ही आयडिया था कि हमने पीपल्स (लोगों का) बजट बनाया, जिसके तहत वो दस मांगें फाइनेंस मिनिस्टर को सौंपी गईं, जो इस देश का आमजन चाहता था। वाकई ये एक अद्भुत प्रयोग था, जिसने बजट को इस देश के आमजन से जोड़ दिया।
मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि दिल्ली के कई संपादक दक्षिण भारत को नहीं समझते हैं, लेकिन राधा चूंकि खुद त्रिवेंद्रम से थे, ऐसे में दक्षिण भारत के बारे में उनका ज्ञान बेहद सटीक था। वे कई बार दक्षिण भारत की खबरों में ऐसे एंगल निकालते थे, जो दिल्ली के पत्रकार कभी सोच भी नहीं पाते थे।
मुझे आज भी राधा की जिंदादिली याद है। पॉजिटिव स्प्रिट वाले इस शख्स को मैंने कभी भी किसी की टांग खिंचाई करते हुए नहीं देखा। दो बेटियों के पिता राधा के लिए न्यूज रूम भी एक विस्तारित परिवार की तरह था। एक टीम लीडर के तौर पर वह इतने कुशल थे कि जब भी उनके किसी साथी को एचआर के साथ किसी भी तरह की कोई समस्या होती थी तो वे सीधे राधा तक पहुंचते थे और राधा उस परेशानी को आसानी से हल कर देते थे। वह चैनल के पीछे की असली ताकत थे। उनके संचालन में चैनल ने कई नए आयाम रचे हैं। वह एक अच्छे श्रोता भी थे। लोगों की बातें बड़ी तन्मयता से सुनते थे।
Dear Radha, We miss u a lot, you are the finest human being, Salute to my friend
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