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क्यों 3 मीडिया संगठनों से नाराज हुआ सुप्रीम कोर्ट ...
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चार मीडिया संगठनों के किसी भी प्रतिनिधि...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तीन मीडिया संगठनों के किसी भी प्रतिनिधि के कोर्ट में उपस्थित न होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। ये तीन मीडिया संगठन- भारतीय प्रेस परिषद, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फेडरेशन हैं। दरअसल, कोर्ट ने 20 सितंबर को मीडिया संगठनों को नोटिस जारी कर बलात्कार और यौन हिंसा से संबंधित खबरों के प्रसारण को लेकर कानूनी प्रावधानों का कथित रूप से पालन नहीं करने के मामले में समाधान हेतु सहयोग की अपील की थी।
पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि वे इस मामले में हमें सहयोग करने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन कम से कम उन्होंने अपनी उपस्थिति तो दर्ज कराई होती। जस्टिस मदन बी. लोकुर, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने इन संगठनों की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसने इस मामले में इनसे सहयोग मांगा था और उन्हें जारी किए गए नोटिस की उन पर तामील हो चुकी है।
शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करते हुए मात्र एक ही मीडिया संगठन न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के प्रतिनिधि ही कोर्ट के समक्ष मौजूद रहे। कोर्ट ने इस संगठन से जानना चाहा कि बलात्कार और यौन हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टिंग में संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले मीडियाकर्मियों के खिलाफ उन्होंने क्या कार्रवाई की।
सुनवाई के दौरान न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के वकील ने कहा कि ऐसे मुद्दों के बारे में पर्याप्त दिशा निर्देश हैं। वहीं इस पर पीठ ने कहा,‘हो सकता है कि इसके लिए हजारों दिशा निर्देश हों। सवाल इन पर अमल का है। ऐसे कितने लोग हैं जिनके खिलाफ आपने कार्रवाई की है।
इस संगठन के वकील ने जब यह कहा कि उन्होंने अनेक मामलों में कार्रवाई की है तो पीठ ने कहा,‘हमें दिखाए।’वकील ने जब यह दलील दी कि अनेक मामलों में जुर्माना लगाया गया है और वह ऐसे मामलों में दिए गए आदेशों को पेश करेगा।
पीठ ने कहा कि हमें बताएं कि क्या इन आदेशों पर अमल किया गया है। इस बारे में एक हलफनामा दाखिल करें।
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के वकील ने कहा कि वह तीन दिन के भीतर सारे विवरण के साथ हलफनामा दाखिल करेंगे। पीठ ने इसके बाद सुनवाई 22 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी।
बलात्कार और यौन शोषण पीड़ितों की पहचान उजागर करने का मुद्दा मुजफ्फरपुर आश्रय गृह की जांच के बारे में रिपोर्टिंग पर पटना उच्च न्यायालय के प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत में उठा था।
शीर्ष अदालत ने मीडिया की रिपोर्टिंग पर उच्च न्यायालय के 23 अगस्त के तहत लगाई गई रोक हटा दी थी।
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