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TAM की रिपोर्ट ने बताया, प्रिंट इंडस्ट्री को कैसे हुआ नुकसान
लगता है कि ‘नोटबंदी’ (demonetisation) और ‘गुड्स एवं सर्विस टैक्स’ (GST) के असर से प्रिंट इंडस्ट्री अभी तक...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
सोनम सैनी।।
लगता है कि ‘नोटबंदी’ (demonetisation) और ‘गुड्स एवं सर्विस टैक्स’ (GST) के असर से प्रिंट इंडस्ट्री अभी तक उबर नहीं पाई है और लगातार इससे जूझ रही है। टैम मीडिया रिसर्च (TAM Media Research) के डाटा के अनुसार, जनवरी से जून 2017 के मुकाबले इसी अवधि के दौरान वर्ष 2018 में प्रिंट इंडस्ट्री को मिलने वाले विज्ञापन में दो प्रतिशत की कमी आई है।
इन आंकड़ों में 10 प्रमुख ऐडवर्टाइजिंग कैटेगरी को शामिल किया गया है, जिनमें टू-व्हीलर, कार-जीप, कोचिंग/कंपटेटिव एग्जाम सेंटर, मल्टीपल कोर्सेज, रियल एस्टेट, हॉस्पिटल/क्लिनिक, रिटेल आउटलेट-इलेक्ट्रॉनिक्स, स्कूल, रिटेल आउटलेट-क्लॉथिंग और रिटेल आउटलेट ज्वेलर्स शामिल हैं।
हालांकि ‘नोटबंदी’ और ‘जीएसटी’ समेत इंडस्ट्री प्लेयर्स इस मंदी के कई कारण मानते हैं। ‘द हिन्दू’ (The Hindu) के बिजनेस हेड (नेशनल अकाउंट्स) पीएम बालकृष्णन ने कहा, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि विज्ञापन पर काफी असर पड़ा है। नोटबंदी व जीएसटी के बाद हुए प्रभाव के साथ ही कई कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं। दरअसल, ब्रैंड्स ने इस दौरान मार्केट प्लांस में कई बदलाव किए थे और खर्च को लेकर भी कई अहम निर्णय लिए थे, जिसकी वजह से प्रिंट का बजट कम हो गया था।’
बालकृष्णन का कहना था कि अब कंपनियां नई लॉन्चिंग और ब्रैंड कैंपेन की तैयारी कर रही हैं, ऐसे में इन कैंपेन के द्वारा ग्राहकों में जागरूकता बढ़ाने और बिक्री को तेजी लाने के काम में प्रिंट काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा, ‘त्योहारी सीजन में लोगों को विभिन्न ऑफर्स और स्कीम के बारे में बताने के लिए प्रिंट हमेशा से पसंदीदा माध्यम रहा है। इस बार त्योहारी सीजन का समय बढ़ जाने के कारण इंडस्ट्री को बेहतर परिणाम की उम्मीद है।’
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि नोटबंदी व जीएसटी के बाद कंपनियों ने अपने बजट सीमित कर दिए थे। ऐडवर्टाइजर्स ने भी अपने खर्चों को सीमित करना शुरू कर दिया था। इसके तहत उन्होंने प्रिंट के मुकाबले टीवी और डिजिटल पर ज्यादा खर्च करना शुरू कर दिया था। हालांकि लोगों तक प्रिंट की पहुंच भी ज्यादा है लेकिन यह अन्य माध्यमों से ज्यादा महंगा प़ड़ता है।
हाल ही में आई ‘केपीएमजी’ (KPMG) रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी, जीएसटी और रेरा लागू होने के बाद विज्ञापन की मांग कम होने से प्रिंट सेक्टर पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा था। इसी का परिणाम था कि वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में इसकी ग्रोथ दर 3.4 प्रतिशत रह गई थी जो पूरे दशक में सबसे कम थी।
वहीं, विज्ञापन के बारे में ‘एचटी मीडिया’ के एक वरिष्ठ एग्जिक्यूटिव का कहना है, ‘प्रिंट इंडस्ट्री काफी खराब दौर से गुजर रही है। इसके अलावा अखबारी कागज (Newsprint) की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने भी इस पर काफी बुरा असर डाला है।’ यदि ऊपर दी गई 10 प्रमुख कैटेगरी की बात करें तो कार-जीप सेगमेंट में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि कोचिंग सेगमेंट में छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
‘TAM Axis’ और ‘TAM Sports’ की हेड (मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट और एनालिटिक्स) विनीता शाह का कहना है, ‘यदि आप जनवरी-जून 2017 और जनवरी-जून 2018 के दौरान 10 टॉप कैटेगरी की तुलना करें तो इसमें ज्यादा अंतर नहीं है। इसके अलावा त्योहारी सीजन में कहानी कुछ अलग हो जाती है। इस बार भी त्योहारी सीजन में रिटेल विज्ञापन मिलेंगे।’
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