होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / छंटने लगे प्रिंट इंडस्ट्री पर छाये काले बादल, इस खबर ने लौटाई चेहरे पर मुस्कान

छंटने लगे प्रिंट इंडस्ट्री पर छाये काले बादल, इस खबर ने लौटाई चेहरे पर मुस्कान

लंबे समय से परेशानियों से जूझ रही प्रिंट इंडस्ट्री के लिए यह खबर राहत

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

लंबे समय से परेशानियों से जूझ रही प्रिंट इंडस्ट्री के लिए यह खबर राहत देने वाली है। दरअसल, पिछले करीब डेढ़ साल से न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) की कीमतों में बढ़ोतरी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री की उत्पादन लागत में इजाफा हो रहा थ। कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ने से इस इंडस्ट्री के सामने काफी संकट था, लेकिन अक्टूबर से राहत मिलनी शुरू हुई और न्यूजप्रिंट की कीमतें थोड़ी कम होने के साथ ही अब स्थिर बनी हुई हैं। कीमतों की बात करें तो 820 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के मुकाबले न्यूजप्रिंट के दाम अब 700 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर स्थिर बने हुए हैं। हालांकि कीमतों में आई इस कमी का असर पब्लिशर्स को होने वाले लाभ पर फिलहाल नहीं पड़ रहा है, लेकिन फिर भी कीमतों में इस ठहराव ने इंडस्ट्री को मुस्कुराने का मौका दे दिया है।

इस बारे में ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (ऑपरेशंस) शरद सक्सेना ने कहा, ‘इंडस्ट्री के लिए वाकई में वह दौर बहुत मुश्किल था, जब अचानक न्यूजप्रिंट की कीमतों में इजाफा हो गया था। इसके अलावा रुपए की कीमतें भी गिर गई थीं, लेकिन फिलहाल दोनों ही स्थिति नहीं हैं और हम राहत की सांस ले सकते हैं।’

शरद सक्सेना ने कीमतों में और कमी की उम्मीद जताते हुए कहा, ‘पिछली तिमाही से न्यूजप्रिंट की कीमतें लगातार कम हो रही हैं और उम्मीद है कि आने वाली तिमाही में यह और कम होंगी। हालांकि न्यूजप्रिंट की कीमतों में इस कमी का प्रभाव तुरंत नहीं पड़ेगा, लेकिन आखिरकार अखबार की लागत में कमी आएगी। हालांकि इस वर्ष के दौरान 8 से 10 प्रतिशत कमी आने की उम्मीद है।’

‘एमके ग्लोबल’(Emkay Global) में मीडिया और एंटरटेनमेंट एनॉलिस्ट नवल सेठ का कहना है, ‘न्यूजप्रिंट की कीमतों में वृद्धि से अखबारों ने अखबारी कागज के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की काफी कोशिश की। पेजिनेशन में बदलाव करने के साथ ही सर्कुलेशन मॉडल में भी परिवर्तन किया था। ऐसे में उन पर इस मूल्य वृद्धि का प्रभाव सिर्फ 20-25 प्रतिशत पड़ा था।’

नवल सेठ का भी यही मानना है कि न्यूजप्रिंट की कीमतों में इस कमी असर वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में दिखाई देगा, क्योंकि ज्यादा अखबारों ने पहले से इनका स्टॉक कर रखा है, जो पहली तिमाही तक रहेगा। यह स्टॉक खत्म होने पर जब वे आज के मूल्य पर न्यूजप्रिंट का इस्तेमाल शुरू कर देंगे, तब काफी अंतर दिखाई देगा।  

हालांकि, न्यूजप्रिंट की वर्तमान कीमतों ने कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ ही कुछ चिंताएं भी हैं। बिजनेस लीडर्स न्यूजप्रिंट के भविष्य और कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर अभी निश्चित रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।   

‘मातृभूमि’ ग्रुप के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्‍स कुमार का कहना है, ‘न्यूजप्रिंट खरीदने में ही अखबार का काफी खर्च होता है, इसलिए इसकी कीमतों में बढ़ोतरी अथवा उतार-चढ़ाव का असर पूरी न्यूजपेपर इंडस्ट्री पर पड़ता है। सर्कुलेशन मनी से कभी भी इस कीमत को पूरा नहीं किया जा सकता है। केरल में सबसे महंगा अखबार सात रुपए का है, जो पिछले साल न्यूजप्रिंट की कीमतों में हुई वृद्धि को नहीं झेल सकता था, जो करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। भारतीय मार्केट के लिए न्जूजप्रिंट की कीमतें 600 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से अधिक होने पर न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किल होती है।’

एक्सपर्ट्स का मानना है कि न्यूजप्रिंट की कीमतें घटने और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू बढ़ने से ही अखबार फायदे में आ सकते हैं। 'मलयाला मनोरमा' के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग सेल्‍स) वर्गीस चांडी का कहना है, ‘कच्चे माल की कीमतों में कमी अच्छी खबर है, खासकर जब पिछले साल न्यूजप्रिंट की कीमतों में 50-60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इस साल कीमतों में कमी आना वाकई राहत की बात है। लेकिन अखबारों को फायदे में लाने के लिए इस साल एडवर्टाइजमेंट का काफी बढ़ाना होगा।’ वर्गीस चांडी के अनुसार, ‘अभी हम जिस स्थिति में हैं, वहां पर न्यूजप्रिंट का भविष्य अनिश्चित है, क्योंकि हम न्यूजप्रिंट के आयात के लिए अमेरिका और कनाडा पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, जो किसी भी दिन न्यूजप्रिंट का उत्पादन बंद कर किसी भी तरह के ज्यादा कॉमर्शियल पेपर मैटीरियल का उत्पादन शुरू कर सकते हैं।’

ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि इस तरह की स्थिति से निपटने का क्या बेहतर तरीका हो सकता है? तो इस बारे में ‘इंडियन न्यूजप्रिंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन’ के महासचिव विजय कुमार का कहना है कि हमें स्वदेशी न्यूजप्रिंट पर निर्भरता बढ़ानी होगी। उनका कहना है, ‘देश में 132 मिल हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ अभी 32 चल रही हैं, बाकी पिछले कुछ वर्षों में बंद हो चुकी हैं। न्यूजपेपर इंडस्ट्री को स्वदेशी पर ज्यादा ध्यान देना होगा, क्योंकि यदि सभी मिल बंद हो गईं तो अंतरराष्ट्रीय मार्केट इंडस्ट्री पर हावी हो जाएगा। अखबारों को भी भारतीय न्यूजप्रिंट को प्रमोट करना चाहिए। यह स्थिति दोनों के लिए बेहतर होगी।’


टैग्स प्रिंट इंडस्ट्री हिन्दुस्तान टाइम्स मलयाला मनोरमा मातृभूमि न्यूज पेपर्स
सम्बंधित खबरें

Edelman India ने लीडरशिप टीम में किए ये बड़े बदलाव

Edelman India ने अपने भारत ऑपरेशन में बड़े स्तर पर बदलाव का ऐलान किया है

8 hours ago

प्रसार भारती ने WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाई

प्रसार भारती ने अपने OTT प्लेटफॉर्म WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है।

8 hours ago

OpenAI के CEO ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत को बताया AI का बड़ा केंद्र

पीएम मोदी ने दुनिया भर के निवेशकों और टेक कंपनियों को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा हैं, जिनमें AI के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की ताकत है।

9 hours ago

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की फैक्ट-चेकिंग यूनिट मामले में याचिका फिर से की बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस याचिका को फिर से बहाल कर दिया है, जिसमें केंद्र ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

9 hours ago

AI बना सकता है भारत को दुनिया की क्रिएटिव कैपिटल: उदय शंकर

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने कहा कि अब भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर में है।

1 day ago


बड़ी खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की फैक्ट-चेकिंग यूनिट मामले में याचिका फिर से की बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस याचिका को फिर से बहाल कर दिया है, जिसमें केंद्र ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

9 hours ago

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की किताब ‘Revolutionary Raj’ का लोकार्पण आज

वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित आलोक मेहता अपनी नई कॉफी-टेबल बुक “Revolutionary Raj – Narendra Modi’s 25 Years” का लोकार्पण 21 फरवरी 2026 को करने जा रहे हैं।

9 hours ago

प्रसार भारती ने WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ाई

प्रसार भारती ने अपने OTT प्लेटफॉर्म WAVES पर सैटेलाइट टीवी चैनलों को जोड़ने के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है।

8 hours ago

WBD डील पर Paramount को शुरुआती राहत, अमेरिका में एंटीट्रस्ट अवधि पूरी

Warner Bros. Discovery को खरीदनें को लेकर बड़ी कंपनियों के बीच जोरदार मुकाबला चल रहा है। अब देखना होगा कि आखिर यह डील किसके हाथ लगती है

8 hours ago

OpenAI के CEO ने पीएम मोदी से की मुलाकात, भारत को बताया AI का बड़ा केंद्र

पीएम मोदी ने दुनिया भर के निवेशकों और टेक कंपनियों को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा हैं, जिनमें AI के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की ताकत है।

9 hours ago