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जानिए, पत्रकारों के फोन को पुलिस अधिकारी ने क्यों बताया ‘कैकेयी प्रथा’
उत्तर प्रदेश में बदमाशों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और पुलिस उनके खिलाफ...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
उत्तर प्रदेश में बदमाशों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय कैसे पीड़ितों को ही धमकाती है, इसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली है।
दरअसल, पत्रकार की पिटाई के मामले में पुलिस की लचर कार्यप्रणाली से खफा पत्रकारों के समूह ने जब इस मामले में मजबूर होकर धरना-प्रदर्शन की बात कही तो भी पुलिस अधिकारी पर कोई असर नहीं पड़ा। अधिकारी ने इस मामले को रामायण के प्रसंग से जोड़ते हुए कैकेयी प्रथा बता दिया। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीड़ित के मामले में पुलिस का रवैया कैसा रहता है। ऐसे में पीड़ित पत्रकार अभी भी न्याय के लिए भटक रहा है।
मामला जनपद औरैया के अजीतमल थाना क्षेत्र के अटसू नगर पंचायत क्षेत्र का है। इटावा से प्रकाशित दैनिक ‘दिनरात’ समाचार पत्र के अजीतमल क्षेत्र के तहसील संवाददाता रामजी पोरवाल ने एक सप्ताह पूर्व 20 दिसंबर को समाज का माहौल बिगाड़ने वाले अराजक तत्वों से जुड़ी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी, जो बदमाशों को नागावार गुजरी।
पत्रकार रामजी पोरवाल ने समाचार4मीडिया.कॉम से बातचीत के दौरान बताया कि रात करीब आठ बजे गुंडों की पूरी टोली उनके घर पर आ धमकी और रॉड व डंडों से हमला कर दिया, वहीं बचाव करने आए परिवारिक सदस्यों को भी घायल कर धमकी देते हुए निकाल गए। पत्रकार का आरोप है कि बदमाशों के आने की सूचना उन्होंने तत्काल पुलिस को दी थी, लेकिन इस पूरे वाकये के दौरान मूकदर्शक बनी रही।
इसके बाद पीड़ित पत्रकार ने इस घटना की सूचना स्थानीय पत्रकारों के साथ औरैया जनपद मुख्यालय के साथियों को दी। इस मामले में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अवधेश अवस्थी ने पत्रकारों के गुट के साथ जनपद के पुलिस कप्तान प्रो.त्रिवेणी सिंह से मुलाकात कर पीड़ित पत्रकार को न्याय देने व हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। पुलिस कप्तान ने पूरे मामले की जांच सीओ अजीतमल लालता प्रसाद शुक्ला को देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
आरोप है कि अजीतमल पुलिस ने पूरे मामले में लीपापोती कर शांति भंग की मामूली दफा लगाकर पत्रकार के हमलावरों को थाने से छोड़ दिया। ऐसे में पीड़ित पत्रकार का घर से निकलना दूभर हो गया है, वहीं उनके बच्चे खौफजदा माहौल में स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
पुलिस पर आरोप यह भी है कि न्याय न मिलता देख पत्रकारों ने सीओ को फिर से पूरे मामले से अवगत कराते हुए धरने पर बैठने की बात कही तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि धरने पर बैठने से न पुलिस महकमे की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला है और न सरकार पर। पत्रकार दलील देते रहे, लेकिन सीओ अजीतमल ने उनकी एक नहीं सुनी। इस बारे में समाचार4मीडिया.कॉम ने दोनों अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
गौरतलब है कि मीडियाकर्मियों के लिए वर्ष 2018 बेहद मुश्किलों भरा रहा है। खासकर यूपी में पत्रकारीय पेशे के चलते सही खबर लिखने की एवज में पत्रकारों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। बदमाशों के खिलाफ खबर लिखना पत्रकार व उसके पूरे परिवार के लिए मुसीबत का सबब बन जाए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि यूपी में कानून और पुलिसिंग व्यवस्था कैसी है।
सीओ अजीतमल की व पत्रकार नेता अवधेश अवस्थी की बातचीत आप समाचार4मीडिया.कॉम के पास मौजूद इस ऑडियो टेप के जरिये सुन सकते हैं।
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