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भारतीय पत्रकारों की रिपोर्टस को यूं 'हथियार' बना रही है पाक सरकार
पाकिस्तान ने गुरुवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) से कुलभूषण जाधव को...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।
पाकिस्तान ने गुरुवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) से कुलभूषण जाधव को राहत देने के मामले में भारत के दावों को ‘खारिज या अस्वीकार’ करने की मांग की है। लेकिन ये वाकई में दिलचस्प मामला है कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में जहां कुलभूषण जाधव का केस चल रहा है, वहां पाकिस्तान का वकील खुद के दावे को मजबूत करने के लिए भारतीय पत्रकारों के आर्टिकल्स को सुबूतों के तौर पर पेश कर रहा है। ये सारे आर्टिकल्स भारतीय अख़बारों में ही छपे हैं।
पाकिस्तान ने वर्ष 2016 में कुलभूषण जाधव को ईरान के चाहबहार पोर्ट से गिरफ्तार किया था और बताया था कि ये गिरफ्तारी बलूचिस्तान से हुई है। भारत को काउंसलर एक्सेस भी नहीं दिया। मामला इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में चल रहा है। सुनवाई के दौरान पाकिस्तानी वकील ने सुबूत के तौर पर तीन भारतीय पत्रकारों करण थापर, प्रवीण स्वामी और चन्दन नंदी के लेख कोर्ट में प्रस्तुत किए।
सुबूत के तौर पर पेश किया गया करण थापर का आर्टिकल 21 अप्रैल 2017 का है। पाकिस्तानी वकील खाबर कुरैशी के मुताबिक, ’इसमें जाधव को लेकर भारतीय सरकार के स्टैंड पर तमाम सवाल उठाये गए हैं, जो हमारे दावे को पुष्ट करते हैं। इतना ही नहीं, प्रवीण स्वामी के जनवरी 2018 में फ्रंटलाइन मैगजीन में लिखे आर्टिकल से साफ़ पता चलता है कि जाधव रॉ के मिशन पर था और अजित डोभाल उसे डायरेक्ट कर रहे थे।’ पाकिस्तानी वकील ने चंन्दन नंदी के एक आर्टिकल का भी अपने जवाब में जिक्र किया है।
करण थापर 'डेविल्स एडवोकेट' टीवी शो के जरिये अपने तीखे सवालों के लिए मशहूर पत्रकार हैं, 1962 में उनके पिता आर्मी चीफ थे। प्रवीण स्वामी की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट अक्सर सरकारों को परेशानी में डालती रही हैं, लेकिन अब उनकी रिपोर्ट्स के चलते देश परेशानी में है। ऐसे में सोशल मीडिया में ये सभी पत्रकार अब लोगों के निशाने पर आ गए हैं। ये मांग भी उठ रही है कि देश की सुरक्षा और रॉ जैसी एजेंसियों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर क्या कोई मीडिया गाइडलाइन नहीं होनी चाहिए? जो लोग अपनी पहचान छिपाकर देश के लिए जान जोखिम में डालकर खतरनाक जगहों पर काम करते हैं, उनकी सुरक्षा, उनके परिवारों की भावना और देश के सम्मान के लिए क्या मीडिया की कोई जिम्मेदारी नहीं है?
गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को जासूसी के मामले में पाकिस्तान स्थित मिलिट्री कोर्ट ने 2 साल पहले 2017 में अप्रैल में मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की थी।
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