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6 पत्रकारों के खिलाफ जांच करेगी सरकार, सामने आई ये वजह

तुर्की स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में मारे गए ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी...

Last Modified:
Tuesday, 02 April, 2019
Journalist

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

तुर्की स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में मारे गए ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी की तस्वीरों को ऑनलाइन पोस्ट करने के मामले में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने छह पत्रकारों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। ग्लोबल मीडिया वाचडॉग ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Reporters Without Borders) की ओर से यह जानकारी दी गई है।  

इस मामले में आंतरिक मंत्रालय की फेडरल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (FIA) की साइबर क्राइम विंग की ओर से 13 मार्च को आदेश दिए गए थे। ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के अनुसार, ‘फेडरल इंवेस्टीगेशन एजेंसी का कहना है कि फरवरी में सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की पाकिस्तान यात्रा के दौरान पत्रकारों ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया कैंपेन चलाया था। इस कैंपेन के दौरान प्रिंस की पूरी यात्रा के दौरान लगातार जमाल खशोगी के फोटो पोस्ट किए गए थे। खशोगी हत्याकांड में घिरने के पांच महीने बाद प्रिंस की यह यात्रा शुरू हुई थी। खशोगी प्रिंस के कट्टर आलोचक थे और उनकी हत्या के बाद से राजनयिक संकट उत्पन्न हो गया था। सऊदी अरब के साथ लंबे समय से संबद्ध पाकिस्तान इस यात्रा के दौरान बहुत निवेश की मांग कर रहा था। लेकिन खशोगी की पिक्चर्स को ऑनलाइन पोस्ट करने से प्रिंस की यात्रा के दौरान बहुत ही गलत संदेश गया है।

इस बारे में ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के हेड (एशिया पैसिफिक डेस्क) डैनियल बस्टर्ड का कहना है, ‘पत्रकारों का अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने ऑनलाइन कंटेंट पोस्ट किया है, ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह का व्यवहार बताता है कि पाकिस्तान में असंतुष्टों से किस तरह का व्यवहार किया जाता है। जिन पत्रकारों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं, उन्हें काफी मुखर माना जाता है।’

गौरतलब है कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक रहे खशोगी की पिछले साल दो अक्टूबर को उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी मंगेतर से शादी रचाने के लिए आवश्यक कागजात लेने इस्तांबुल में अपने देश के वाणिज्य दूतावास में गए थे। इसके बाद से वह लापता हो गए थे। शुरू में उनके लापता होने पर रहस्य बन गया था। तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी अरब पर उनकी हत्या करने और उनके शव को ठिकाने लगा देने का आरोप लगाया था। हालांकि सऊदी अरब ने बाद में यह माना कि खशोगी की हत्या की गई, लेकिन उनकी हत्या में खुद की किसी संलिप्तता से इनकार किया था।

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