सईद, श्वेता, अंजना के होर्डिंग्स और टीवी कमर्शियल के जरिए 'आजतक' का 'सबसे सच्चा' कैंपेन

हिन्दी न्‍यूज चैनल 'आजतक' 17 वर्षों से लगातार सफलता के नए आयाम...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 September, 2018
Last Modified:
Wednesday, 26 September, 2018
said-ansari

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।                    

टीवी न्यूज मीडिया इंडस्ट्री बहुत कॉम्पटेटिव होती जा रही है। ऐसे में लगातार हर चैनल की स्ट्रेटिजी है वे अपना माहौल (Buzz) क्रिएट करें। ऐसे में नंबर वन चैनल जो ‘सबसे तेज’ रहने का दावा करता है, अब ‘सबसे सच्चा’ भी हो गया है।


चैनल ने एक नया कैंपेन ‘सारे जहां से सच्चा’ लॉन्च किया है। इस कैपेन को धारदार बनाने के लिए अपनी तीन एंकर्स के होर्डिंग्स भी पूरे देश में लगवाए हैं। प्राइम टाइम शो ‘दस्तक’ के संजीदा एंकर सईद अंसारी, आक्रमक तौर पर डिबेट शो ‘हल्लाबोल’ होस्ट करने के लिए प्रख्यात अंजना ओम कश्यप और ‘सीधी बात’ की सौम्य श्वेता सिंह के जरिए इस कैंपेन को देशव्यापी बनाया जा रहा है।  बड़ी बात ये है कि जहां दिल्ली में सईद अंसारी के होर्डिंग्स बहुतायत में है, तो दिल्ली के बाहर अंजना और श्वेता का जलवा बरकरार है।


चैनल की ओर से प्राप्त विज्ञप्ति की अनुसार हिन्दी न्‍यूज चैनल 'आजतक' 17 वर्षों से लगातार सफलता के नए आयाम गढ़ता जा रहा है। सामाजिक सरोकार, दर्शकों के प्यार और भरोसेमंद रिपोर्टिंग की बदौलत इसने जो मुकाम हासिल किया है, वह अब तक चुनिंदा न्यूज ब्रैंड्स ही हासिल कर सके हैं।

सामाजिक सरोकारों की दिशा में अब एक कदम और आगे आज बढ़ाते हुए चैनल ने नया कैंपेन ‘सारे जहां से सच्चा’ (Saare Jahaan Se Sachcha) शुरू किया है। इस कैंपेन के जरिए चैनल का फोकस सच दिखाने के साथ इस बात पर ज्यादा रहेगा कि आखिर सच क्यों जरूरी है।

यह कैंपेन तीन टीवी कॉमर्शिययल (TVC) के द्वारा चलाया जा रहा है, इसमें रोजाना के उन हालातों को दिखाया जाएगा, जिनमें कोई आम आदमी बेवकूफ बनता है या झूठ का शिकार होता है। इसके बावजूद न तो इसे रोकने के लिए किसी की जबावदेही तय होती है और न ही यह स्थिति समाप्त होती है। 

टीवी कॉमर्शियल की हर कहानी में ऐसे लोगों पर प्रहार करने वाला रियलिटी चेक दिखाया जाएगा,  जिसे हम रोजाना अपने आसपास देखते हैं। चैनल के अनुसार, इस अभियान की टैग लाइन 'सारे जहां से सच्चा'  को काफी सोच-समझकर तैयार किया गया है ताकि यह लोगों के दिलों में जगह बना ले और देश की 'सारे जहां से अच्छा' जैसी सकारात्मक भावना को इस ब्रैंड से जोड़ सके।

 

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Paytm की गूगल प्ले स्टोर पर हुई वापसी, 4 घंटे बाद लिया गया फैसला

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Paytm-Google

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं। इसकी जानकारी पेटीएम ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी। बीते शुक्रवार को गूगल ने यह ऐप प्ले स्टोर से हटा दिया था, हालांकि इसकी वजह तब सामने नहीं आई थी। कंपनी ने गूगल पर कॉम्पिटिशन रूल तोड़ने का आरोप लगाया।

शुक्रवार दोपहर गूगल ने प्ले स्टोर से पेटीएम ऐप को हटाने की जानकारी दी थी। इसके बाद पेटीएम ने ट्वीट किया था कि उसका एंड्रॉयड ऐप नए डाउनलोड या अपडेट के लिए गूगल प्ले स्टोर पर अस्थायी तौर पर उपलब्ध नहीं है। हम जल्द ही वापसी करेंगे। कंपनी ने यूजर्स से कहा था कि आपकी राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। आप पेटीएम ऐप को सामान्य तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, गूगल प्ले स्टोर से बैन होने के महज चार घंटे बाद ही पेटीएम की प्ले स्टोर पर दोबारा वापसी हो गई।

बता दें कि पेमेंट ऐप पेटीए की ओर से ऑफर किए जा रहे ‘पेटीएम गेमिंग’ (Paytm Gaming) ऐप को भी प्ले स्टोर से हटा दिया गया था, जिसके बाद कंपनी ने ट्वीट कर यूजर्स को भरोसा दिलाया कि उनके पैसे पूरी तरह सेफ हैं और जल्द ही ऐप प्ले स्टोर पर लौट आएगा।

भारत में लोकप्रिय क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही ढेरों ऐसे ऐप्स खूब डाउनलोड होने लगते हैं, जिनपर गेसवर्क करके और तुक्का लगाकर यूजर्स पैसे जीत सकते हैं।

वैसे तो गूगल ने पेटीएम ऐप के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन कंपनी की ओर से हाल ही में सट्टेबाजी (गैंबलिंग) से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने से पर एक अपडेटेड ब्लॉग पोस्ट शेयर किया गया है। एंड्रॉयड सिक्योरिटी और प्राइवेसी, प्रॉडक्ट के वाइस प्रेजिडेंट सुजेन फ्रे ने इस बारे में लिखा  कि हम ऑनलाइन कसीनो की अनुमति नहीं देते या किसी भी ऐसे ऐप को सपोर्ट नहीं करते जो सट्टेबाजी से जुड़ा हो और स्पोर्ट्स पर तुक्का लगाने पर गेम्स ऑफर करता हो। इसमें वे ऐप्स भी शामिल हैं, जो पैसे या प्राइज जितवाने का लालच देकर यूजर्स को किसी सट्टेबाजी की वेबसाइट पर भेजते हैं। यानी गूगल ऐसे कोई भी ऐप्स प्ले स्टोर पर नहीं चाहता, जिनकी मदद से सट्टेबाजी की जा सके या जुआ खेला जा सके।

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गंभीर आरोपों में पत्रकार गिरफ्तार, मजिस्ट्रेट ने छह दिन की रिमांड पर भेजा

पीतमपुरा निवासी इस फ्रीलॉन्स पत्रकार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Arrest

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फ्रीलान्स पत्रकार राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया है। उन्हें ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें छह दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में पीतमपुरा निवासी राजीव शर्मा के पास से डिफेंस से जुड़े क्लासीफाइड डॉक्यूमेंट मिले हैं। राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बारे में न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’(ANI) ने एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।  

बताया जाता है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर पुलिस लंबे समय से राजीव शर्मा के फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जुटा रही थी। इसके बाद पुलिस ने 14 सितंबर को राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। 15 सितंबर को राजीव शर्मा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। राजीव की जमानत याचिका पर 22 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव शर्मा कथित रूप से अपने देश से जुड़ी कुछ संवेदनशील सूचनाएं चीन की खुफिया एजेंसी को सौंप रहे थे। पुलिस ने अब चीन की एक महिला व उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने शैल कंपनियों द्वारा उन्हें काफी पैसा दिया था। 

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मीडिया को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Manish Tewari

पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया सरकार के इशारे पर काम कर रही है। ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में न्यूज चैनल्स पर बरसते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि मीडिया अब लोक हितैषी नहीं रह गई है।

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान मनीष तिवारी का यह भी कहना था, ‘समय के साथ मीडिया सरकार के इशारे पर काम करने वाली बनती जा रही है और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एक मिथक है।’

कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि देश में लगभग 950 मिलियन लोगों के यहां घरों पर टीवी है। इनमें से लगभग 93 प्रतिशत न्यूज चैनल्स नहीं देखते हैं, केवल सात प्रतिशत ही न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल्स देखते हैं और मौजूदा करीब 391 न्यूज व करेंट अफेयर्स चैनल्स उसी सात प्रतिशत से पैसा कमाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके साथ ही मनीष तिवारी का यह भी कहना था कि मीडिया को अपने रेवेन्यू मॉडल्स को दोबारा से देखने की जरूरत है और यह पूरी तरह से विज्ञापन संचालित मॉडल नहीं हो सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या रेवेन्यू मॉडल को पॉलिसी से रेगुलेट किया जा सकता है, तिवारी ने कहा कि जब वे सूचना-प्रसारण मंत्री थे तो उन्होंने टीआरपी को लेकर पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिये साफ किया था कि टीआरपी बनाने वाली कंपनियों को किस तरह रेगुलेट किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘यदि आप अपना रेवेन्यू मॉडल सही करना चाहते हैं और चाहते हैं कि लोग अखबार व टीवी चैनल के सबस्क्रिप्शन के लिए ज्यादा पैसा दें तो आपको उन्हें बेहतर कंटेंट पेश करना होगा। आपको अपने प्रॉडक्ट का उचित मूल्य निर्धारण शुरू करना होगा और लोगों को भुगतान करने की आदत डालनी होगी, लेकिन जब आप विज्ञापन पर निर्भर रहते हैं, तब यह फेक करेंसी से मापा जाएगा, जिसे टीआरपी कहते हैं।’

पूर्व मंत्री का कहना था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी समान रूप से खराब है। उन्होंने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी पूरी तरह से विज्ञापन पर आधारित मॉडल है। विज्ञापन पर आधारित मॉडल की वजह से आमतौर पर क्वालिटी कंटेंट तैयार नहीं हो पाता है।

पेज न्यूज के मुद्दे पर पूर्व मंत्री ने कहा कि जब वह प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में संशोधन करने की कोशिश कर रहे थे और विशेष रूप से पेड न्यूज और दंड प्रावधानों को धाराओं के तहत लाने की कोशिश कर रहे थे, तब मीडिया इंडस्ट्री ने इसे इतना पीछे धकेल दिया कि यह बिल आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। उनका कहना था, ‘न्यूज और करेंट अफेयर्स मीडिया का काम लोगों को शिक्षित व जागरूक करना है। इसका काम तथ्यों को सही रूप मं पेश करना व जनहित को देखते हुए गंभीरता लाना है।’

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मुश्किल घड़ी में महिला पत्रकार को राज्य सरकार ने यूं दिया ‘सहारा’

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Soniya Devi

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में सरकार की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ‘Poknapham’ अखबार की रिपोर्टर‘एस.सोनिया देवी’(Sorensangbam Soniya Devi)को यह वित्तीय सहायता‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’(MSJWS)के तहत दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना और जनसंपर्क निदेशालय के उप निदेशक, एल अशोक कुमार ने गुरुवार को सोनिया देवी को एक लाख रुपये का चेक सौंप दिया है।

बता दें कि ‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’ मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 30 जून 2017 को शुरू की थी। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इस योजना के तहत किसी पत्रकार के निधन पर पीड़ित परिजनों को दो लाख रुपये तक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है।

स्थायी रूप से दिव्यांग होने के मामले में भी पत्रकार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए एक लाख रुपये और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने पर 50,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। बताया जाता है कि योजना शुरू होने के बाद से 17 पत्रकारों को इसके तहत आर्थिक मदद दी जा चुकी है।

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TRAI चेयरमैन ने ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के लिए जताई इस बात की जरूरत

'टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ के चेयरमैन आरएस शर्मा का कहना है कि पूंजी जुटाने से अपने इक्विपमेंट को अपग्रेड कर सकेगा यह सेक्टर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
TRAI CHAIRMAN

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) के चेयरमैन आरएस शर्मा का कहना है ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर को बुनियादी ढांचा (infrastructure status) दिए जाने की जरूरत है, ताकि वह पूंजी जुटाने (capital borrowing) जैसी सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम हो सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्राई चेयरमैन ने यह भी कहा है कि सरकार को टीवी बिजनेस में इंफ्रॉस्ट्रक्चर को शेयर करने की अनुमति दिए जाने के बारे में भी विचार करने की जरूरत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूंजी जुटाने से टीवी प्लेयर्स अपने उपकरणों (equipments) और इंफ्रॉस्ट्रक्चर को अपग्रेड कर पाएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘व्यापक नीति दिशानिर्देश’ (comprehensive policy guideline) जारी किए जाने की भी सिफारिश की है। शर्मा के अनुसार, ‘सरकार को प्रसारण सेवाओं के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति दिशानिर्देश जारी करने पर भी विचार करना चाहिए।’

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विधानसभा चुनाव में पत्रकारों को भी टिकट देगी यह पॉलिटिकल पार्टी

पार्टी अध्यक्ष के आवास पर हुई पदाधिकारियों की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है।

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Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Election

बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राज्य में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) सुप्रीमो और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने घोषणा की है कि इस बार उनकी पार्टी पत्रकारों को भी विधानसभा का टिकट देगी और उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को चिराग पासवान ने अपने आवास पर चुनाव की तैयारियों के संबंध में पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी। बैठक में तमाम मुद्दों के साथ पत्रकारों को भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों की ओर से मुहर लगा दी गई।

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अभिनेत्री की इस याचिका पर दिल्ली HC ने MIB, PCI व प्रसार भारती को दिया नोटिस

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जांच के दौरान अपना नाम सामने आने के बाद अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
Delhi High Court

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जांच के दौरान अपना नाम सामने आने के बाद अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस दौरान उन्होंने रिया चक्रवर्ती ड्रग मामले से उन्हें जोड़ने वाली मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मीडिया में चलाई जा रही खबरों के जरिए उनकी इमेज खराब करने की कोशिश की जा रही है।

रकुलप्रीत ने याचिका में कहा है कि रिया चक्रवर्ती मामले में उनका नाम सामने आने के बाद मीडिया ट्रायल शुरू हो गया है। रकुलप्रीत ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह सूचना-प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दें कि उनके खिलाफ मीडिया में कवरेज बंद की जाए।

अपनी याचिका में ​रकुलप्रीत ने बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान पता चला कि रिया चक्रवर्ती ने ड्रग्स मामले में उनका और सारा अली खान का नाम लिया है, जिसके बाद से मीडिया में उनको लेकर कई तरह की गलत खबरें चलाई जाने लगी हैं।  

हालांकि उनकी इस याचिका पर जस्टिस नवीन चावला ने केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्रालय, प्रसार भारती और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया तथा जवाब मांगा है। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि वे अभिनेत्री रकुल की याचिका को अभिवेदन मानें और सुनवाई की अगली तारीख 15 अक्टूबर से पहले इस पर फैसला लें।

हाई कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि रिया चक्रवर्ती से जुड़े मामले में रकुलप्रीत सिंह से संबंधित खबरों में मीडिया संयम बरतेगा। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि याचिकाकर्ता से संबंधित खबरें बनाते वक्त मीडिया प्रतिष्ठान अपनी खबरों में संयम बरतेंगे, केबल टीवी नियमों, प्रोग्राम कोड तथा अन्य दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।

अभिनेत्री ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि रिया चक्रवर्ती अपना वह बयान वापस ले चुकी है जिसमें उसने कथित तौर पर याचिकाकर्ता का नाम लिया था, उसके बावजूद मीडिया में आ रही खबरों में उन्हें इस मामले से जोड़ा जा रहा है। हाई कोर्ट में अभिनेत्री का प्रतिनिधित्व वकील अमन हिंगोरानी ने किया।

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत, SC ने अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी से मिले अंतरिम सुरक्षा की अवधि को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
vinod-dua

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी से मिले अंतरिम सुरक्षा की अवधि को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामले में 18 सितंबर को अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि मामले में अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। दुआ के खिलाफ उनके यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने राजद्रोह का मामला दर्ज कराया है।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा, 'विनोद दुआ पर अपने यू-ट्यूब कार्यक्रम, 'द विनोद दुआ शो' में कुछ बयान देने का आरोप हैं, जो कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा को उकसाने की प्रकृति के थे और शांति भंग करने और सांप्रदायिक विद्वेष के कारण हो सकते हैं।'

पत्रकार पर राजद्रोह के आरोप की जांच के संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पहले अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में पेश की थी।

वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विकास सिंह ने दुआ के लिए अपील करते हुए, शीर्ष अदालत से कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी अधिकार हैं और सरकार की आलोचना करने का वैध अधिकार भी है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट विनोद दुआ द्वारा राजद्रोह के आरोपों के खिलाफ दायर याचिका और शिमला में उनके यूट्यूब वीडियो को लेकर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और केंद्र के खिलाफ सुनवाई कर रही थी।

भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर 6 मई, 2020 को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

स्थानीय नेता का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर विनोद दुआ की याचिका पर 14 जून को सुनवाई करते हुये अगले आदेश तक उन्हें गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। न्यायालय ने सात जुलाई को विनोद दुआ को प्राप्त संरक्षण की अवधि पहले 15 जुलाई तक और फिर 20 जुलाई और फिर 27 जुलाई तक के लिये बढ़ा दी थी। इसके बाद अब कोर्ट ने 18 सितंबर तक यह अवधि बढ़ा दी है।

दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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MIB ने SC से कहा- इलेक्ट्रॉनिक से पहले डिजिटल मीडिया की गाइडलाइन देखना जरूरी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट मीडिया नियमन के मुद्दे पर कोई फैसला लेता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
MIB

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट मीडिया नियमन के मुद्दे पर कोई फैसला लेता है तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पहले यह डिजिटल मीडिया के संबंध में लिया जाना चाहिए, क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया में प्रकाशन और प्रसारण तो एक बार का कार्य होता है, लेकिन डिजिटल मीडिया की तो बड़ी संख्या में दर्शकों और पाठकों तक पहुंच है और इसमें वॉट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक जैसे कई जैसे एप्लिकेशन्स के चलते किसी भी जानकारी के वायरल होने की संभावना रहती है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में कहा गया, यदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के गंभीर प्रभाव और क्षमता को देखते हुए अदालत ने यह अभ्यास करने का फैसला किया है, तो इसे पहले डिजिटल मीडिया के संबंध में किया जाना चाहिए, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के संबंध में पर्याप्त रूपरेखा और न्यायिक घोषणाएं मौजूद हैं। मंत्रालय ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मामलों व मिसालों से संचालित होता है। लिहाजा हमें पहले डिजिटल मीडिया पर काम करना चाहिए।

मंत्रालय ने अदालत में ये भी कहा कि याचिका केवल एक चैनल यानी ‘सुदर्शन टीवी’ तक ही सीमित है, इसलिए कोर्ट को मीडिया के लिए दिशा-निर्देश जारी करने से लिए एमिकस क्यूरी या समिति के गठन की कवायद नहीं करनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि बोलने की स्वतंत्रता और जिम्मेदार पत्रकारिता के संतुलन का क्षेत्र पहले से ही वैधानिक प्रावधानों और पिछले निर्णयों से संचालित होता है।

बता दें कि मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ‘सुदर्शन टीवी’ के 'UPSC जिहाद' शो के प्रसारण पर यह कहकर रोक लगा दी थी कि यह एक समुदाय विशेष का अपमान करने की कोशिश है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पांच सदस्यीय एक कमेटी के गठन करने के पक्ष में है, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ निश्चित मानक तय कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्ताव दिया कि मीडिया की भूमिका पर विचार कर सुझाव देने के लिए गणमान्य नागरिकों की एक 5 सदस्यीय कमेटी बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या हाई कोर्ट के कोई पूर्व चीफ जस्टिस करें। हालांकि इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 17 सितंबर को फैसला लिया जाना है।

वहीं, इस मुद्दे पर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) की ओर से भी हलफनामा दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी विशेष समुदाय के सांप्रदायिकता के आरोपों के बारे में निजामुद्दीन मरकज मामले में समान मुद्दों पर याचिका प्रधान न्यायाधीश की अदालत में लंबित है। एनबीए ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को नियंत्रित करने वाले नियम और कानून पहले से ही मौजूद हैं। इतना ही नहीं, पहले से इस संबंध में न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड रेगुलेशन (एनबीएसआर) भी है। इसमें पूरी तरह से स्वतंत्र नियामक निकाय न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एनबीएसए) स्थापित करने की योजना है। यदि एनबीएसए को पता चलता है कि कोई भी प्रसारण उनके आचार संहिता या नियमों के खिलाफ है, तो इसकी जांच होती है। इसमें चैनल के पक्ष को भी सुना जाता है। दोषी पाए जाने पर प्रसारणकर्ता पर अधिकतम एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है।

इसके अलावा एनबीए ने सुप्रीम कोर्ट को लाइसेंस के निरस्तीकरण या निलंबन के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय के कदम की जानकारी भी दी है। इसमें प्रसारकों को सेंसर करने का प्रावधान भी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, चूंकि प्रिंट मीडिया से अलग है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के नियंत्रण के लिए नियम-कायदे पहले से मौजूद हैं।

  

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Share Chat ने इस वीडियो प्रॉडक्शन कंपनी का किया अधिग्रहण

भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (Share Chat) ने बुधवार को वीडियो उत्पादन करने वाली कंपनी ‘एचपीएफ फिल्म्स’ (HPF Films) का अधिग्रहण कर लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
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भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (Share Chat) ने बुधवार को वीडियो उत्पादन करने वाली कंपनी ‘एचपीएफ फिल्म्स’ (HPF Films) का अधिग्रहण कर लिया है। ‘एचपीएफ फिल्म्स’ को डिजिटल कंटेंट में विशेषज्ञता हासिल है।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि अधिग्रहण से शेयरचैट और इसके लघु वीडियो प्लेटफॉर्म मौज (Moj) को बेहतर कंटेंट इकोसिस्टम बनाने की दिशा में मदद मिलेगी और ब्रैंड के लिए उसके विज्ञापन समाधानों में वृद्धि होगी।

कंपनी ने हालांकि इस सौदे की राशि की जानकारी नहीं दी। बयान के मुताबिक 2018 में शुरू हुई एचपीएफ फिल्म्स ने वेब-सीरीज, डिजिटल ऐड, शॉर्ट फिल्म्स और विभिन्न प्रकार के 20 से अधिक ब्रैंड्स के लिए डॉक्यूमेंट्रीज बनाई हैं।

अधिग्रहण की घोषणा के बाद शेयरचैट में कॉरपोरेट डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटजिक फाइनेंस के वाइस प्रेजिडेंट मनोहर चरन ने कहा कि शेयरचैट तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। हमारे लिए यह जरूरी है कि बड़े स्तर पर इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए हम जरूरी चीजों पर निवेश और उसका निर्माण करें।

बता दें कि इस अधिग्रहण के बाद ‘एचपीएफ फिल्म्स’ की 15 सदस्यों की टीम शेयरचैट के साथ जुड़ गई है। एचपीएफ फिल्म्स ने 12 भाषाओं में अपने वीडियो का उत्पादन और कंटेंट को विकसित किया है।  

वर्तमान में शेयर चैट के 130 मिलियन से अधिक मंथली यूजर्स हैं, जबकि Moj के 50 मिलियन से अधिक मंथली यूजर्स हैं।

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