राजनीति के चढ़ते पारे के साथ सियासी रिश्तों में घुलती नफरत के बीच ‘आजतक’ ने...
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राजनीति के चढ़ते पारे के साथ सियासी रिश्तों में घुलती नफरत के बीच ‘आजतक’ ने हास्य से लोटपोट एक अनोखी शुरुआत की है। अनोखी इस लिहाज से कि मौजूदा वक़्त में ऐसा कुछ कहीं नज़र नहीं आ रहा, हालांकि इस शुरुआत में 90 के दशक की एक झलक ज़रूर देखने को मिलती है। खास बात ये है कि इस शो को कोई न्यूज़ एंकर या मंझा हुआ पत्रकार नहीं बल्कि कवि के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाकर राजनीति के समंदर में डुबकी लगाने वाले कुमार विश्वास होस्ट कर रहे हैं। शो का नाम भी कुमार विश्वास के नाम पर ‘KV सम्मेलन’ रखा गया है। इस मनहर मंच पर कुमार राजनीति, खेल से लेकर सामाजिक मुद्दों और फिल्मों पर अलग अंदाज़ में अपनी बात रखते हैं और नामी-गिरामी हस्तियों को भी शो पर आमंत्रित किया जाता है।

‘KV सम्मेलन’ में हास्य है, व्यंग्य है, मसालेदार न्यूज का पंच है। बॉलिवुड से लेकर सियासी हस्तियों का, खेल के धुरंधरों से लेकर न्यूज मेकर्स का निराले अंदाज में इंटरव्यू है। राजनीति के दांव-पेंचों को हंसी, ठहाकों और मनोरंजन के माध्यम से जनता को समझाने की कोशिश है। ‘KV सम्मेलन’ न सिर्फ दर्शकों को गुदगुदाता है बल्कि पत्रकारिता की व्यंग्य विधा को जिंदा रखता है। ये शो मौजूदा राजनीतिक हालात पर तंज भी कसता है। कुमार विश्वास की एंकरिंग दर्शकों को रोमांच से भर देती है और कविताएं मंत्रमुग्ध कर देती हैं। कुल मिलाकर ‘KV सम्मेलन’ एक ऐसा मंच है, जहां न्यूज है, म्यूजिक है, मस्ती है, हास्य है, परिहास है, ठहाकों की गूंज है और है राजनीति पर कटाक्ष। जैसा कि कुमार कहते हैं 'जब तक मस्ती ज़िंदा है, तब तक हस्ती ज़िंदा है।', वो ही इस शो की थीम भी लगती है।
‘KV सम्मेलन’ एक बार फिर दर्शकों को 90 के दशक के सुपरहिट शो ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ की याद दिलाता है, जिसे नए कलेवर, नए रंग में एक नए मंच पर पेश किया जा रहा है। ‘KV सम्मेलन’ का एक बड़ा पॉजिटिव पॉइंट यह भी है कि मूवर्स एंड शेकर्स को समाप्त हुए एक ज़माना हो चुका है, इसलिए ज़्यादातर यूथ शायद उससे इसको रिलेट न भी कर पाएं।
1997 से 2001 तक सोनी टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाले मूवर्स एंड शेकर्स को शेखर सुमन होस्ट करते थे। उस दौर में सियासी हलचल और सामाजिक मुद्दों पर सटीक चोट करने के लिए इस शो को पहचाना जाता था। कुमार विश्वास की अपनी एक अलग शख्सियत ज़रूर है, लेकिन लगता है कि उन्होंने शेखर सुमन को काफी अच्छी तरह से स्टडी किया है। उनका खड़े होने, बोलने का अंदाज़ और बीच-बीच में संगीत मंडली की ओर देखकर कमेंट पास करना अपने आप शेखर सुमन की याद दिला देता है। शेखर न केवल माहिर अभिनेता और होस्ट रहे हैं, बल्कि इस तरह के शो में उन्हें महारत हासिल है। लिहाजा, ये देखने वाली बात होगी कि उनके पदचिन्हों पर चलते हुए क्या कुमार विश्वास उनके जैसी कामयाबी हासिल कर सकते हैं? फ़िलहाल, तो ‘KV सम्मेलन’ का पहला एपिसोड काफी धमाकेदार गया। यहां प्रॉडक्शन टीम भी तारीफ की हक़दार है, जिसने लगभग एक जैसे कंटेंट को नए अंदाज़ में परोसने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। स्वेता सिंह के नेतृत्व वाली ये टीम इस उम्दा प्रॉडक्शन और स्क्रिप्टिंग के लिए बधाई की पात्र है।
इस शो
के बारे में ‘आजतक’ के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय
प्रसाद कहते हैं कि ये तो पहला शो था, अभी आगे-आगे देखिए
कितने मजेदार एपिसोड तैयार हो रहे हैं। पीएम मोदी पर इतना करारा व्यंग्य करने के
साहस पर वे तपाक से जवाब देते हैं कि पीएम ने स्वयं ही कई बार कहा है कि वे व्यंग्य
पसंद करते हैं, ऐसे में कहीं कोई दवाब या साहस का सवाल ही
नहीं उठता है। अगले शनिवार आप हमारे शो में राहुल गांधी पर भी वैसे ही करारे
व्यंग्य पाएंगे। शो की टाइमिंग पर सुप्रिय प्रसाद का कहना है कि चूंकि ये इलेक्शन ईयर है, ऐसे में पॉलिटिकल सटायर शो के प्रति दर्शकों की रुचि रहती है। सटायर शो
की स्क्रिप्टिंग बहुत कठिन मानी जाती है, ऐसे में आप ये
रिस्क क्यों लेते हैं, पर सुप्रिय ने जवाब दिया कि स्वेता
सिंह की दमदार टीम इसे प्रड्यूस कर रही है और यही हमारे समूह की ताकत है कि हम
चुनौतियों को पूरी शिद्दत से स्वीकारते हैं। शेखर सुमन के मूवर्स ऐंड शेकर्स की
तुलना पर वे कहते है कि हमने तो पिछली बार शेखर सुमन के साथ ही शो किया था,
इस बार कुमार विश्वास हमारे साथ हैं।
29 सितम्बर को ऑन-एयर हुए पहले एपिसोड की शुरुआत कुमार विश्वास ने अपनी उसी शायरी के साथ की, जिसने उन्हें असल मायनों में प्रसिद्धि दिलाई यानी ‘कोई दीवाना कहता है...कोई पागल समझता है’। इसके बाद उन्होंने देश-दुनिया की कुछ ख़बरों को हास्य का तड़का लगाते हुए पेश किया। विश्वास को भी कहीं न कहीं इस बात का इल्म है कि शायद उनका शो लोगों को ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ की झलक दे जाएगा, इसलिए उन्होंने शुरुआत में ही साफ़ कर दिया कि नक़ल के दौर में असल की उम्मीद करना ही बेमानी है। शो के आगाज़ को विस्फोटक बनाने के लिए नोटबंदी, जीएसटी और रुपए की कमजोरी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाया गया। आम आदमी और विपक्ष की यही शिकायत रहती है कि प्रधानमंत्री ऐसे मुद्दों पर मौन रहते हैं, लेकिन इस शो में उन्हें जवाब मिले। हालांकि ये बात अलग है कि जवाब सीधे पीएम की तरफ से नहीं बल्कि उनके गेटअप में मौजूद कलाकार सिराज खान की ओर से आए। विश्वास के सवालों पर खान ने जिस अंदाज़ में जवाब दिए, उसने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इसके अलावा, मोदी की विदेश यात्राओं और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके संबंधों पर भी चुटकी ली गई।
यहां देखें विडियो-
लगभग 45 मिनट
के ‘KV सम्मेलन’ को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसके दूसरे भाग में कवि वेद
प्रकाश, कवयित्री मुमताज़ नसीम और कवि शंभू शिखर को
आमंत्रित किया गया। जिन्होंने कश्मीर के वर्तमान हालात के साथ-साथ राफेल डील जैसे
भारी-भरकम और पेचीदा मुद्दों को बेहद सुलझे और व्यंग्यात्मक तरीके से सबके सामने
रखा। शो के तीसरे और आखिरी भाग में उदासी के पर्वत पर हथौड़ा चलाने के लिए उस शख्स
को बुलाया गया, जिसे ‘माउंटेन मैन’ कहा
जाता है यानी अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी। इस पूरे शो के दौरान कुमार विश्वास आम
आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते नज़र आए। कुल मिलाकर कहा जाए तो कुमार और ‘KV सम्मेलन’ के लिए शुरुआत अच्छी रही, लेकिन अमूमन देखा गया है कि एक जैसी स्क्रिप्ट ज्यादा लंबे समय तक
दर्शकों को बांधे नहीं रख पाती।
कुमार को कविता पठन के अलावा अपनी ऑरिजिनल छवि भी विकसित करनी होगी। शेखर के पास लंबा अनुभव था, राजनीतिक कटाक्ष की धार कितनी तेज़ या कुंद रहेगी, वो बेहतर समझते थे, जबकि विश्वास के लिए यह बिल्कुल नया मंच है, लिहाजा कॉपी करने के फेर में वह खुद को और चैनल को नुकसान पहुंचा बैठेंगे। वैसे, इन बातों का फैसला तो वक़्त ही करेगा, लेकिन यदि आप टीवी चैनलों पर बहस के नाम पर होने वाली बेहूदा हरकतों से आजिज़ आ चुके हैं तो ‘KV सम्मेलन’ कुछ वक़्त के लिए ही सही, मगर आपका हाजमा दुरुस्त कर देगा।
हर शनिवार रात 8 बजे और रविवार दोपहर 1 बजे देश के नंबर-1 न्यूज चैनल आजतक पर ‘KV सम्मेलन’ का प्रसारण होता है।
समाचार4मीडिया की ओर से कुमार विश्वास और आजतक को शुभकामनाएं।
इस नियुक्ति के साथ कंपनी का लक्ष्य टेलीविजन, डिजिटल, सोशल मीडिया और अन्य उभरते प्लेटफॉर्म पर Good Times को लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के प्रमुख ब्रैंड्स में से एक के रूप में आगे बढ़ाना है।
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Samachar4media Bureau
‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने मेहर बाजवा को NDTV Good Times का एडिटर नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ कंपनी का लक्ष्य टेलीविजन, डिजिटल, सोशल मीडिया और अन्य उभरते प्लेटफॉर्म पर Good Times को लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के प्रमुख ब्रैंड्स में से एक के रूप में आगे बढ़ाना है।
मेहर बाजवा को मीडिया क्षेत्र में 15 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में लाइफस्टाइल, ट्रैवल, लग्जरी और डिजिटल पब्लिशिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया है। उनकी नई भूमिका में एडिटोरियल विजन और कंटेंट स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करना, नए कंटेंट प्रॉपर्टीज विकसित करना, डिजिटल और सोशल मीडिया पर दर्शकों की भागीदारी बढ़ाना और लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड, फैशन, कल्चर तथा समकालीन जीवनशैली से जुड़े नए स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट तैयार करना शामिल है।
इससे पहले मेहर बाजवा Travel + Leisure India & South Asia की एडिटर-इन-चीफ थीं। इस भूमिका में उन्होंने ब्रैंड की एडिटोरियल दिशा को विकसित करने, उसकी डिजिटल पहुंच बढ़ाने और कंटेंट व अनुभवों पर आधारित नई पहल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
इससे पहले वह Hubert Burda Media में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। यहां उन्होंने डिप्टी रीजनल डायरेक्टर, डिजिटल ऑपरेशंस, एशिया के रूप में भारत, हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के बाजारों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान Lifestyle Asia, Augustman और Travel + Leisure जैसे ब्रैंड्स की डिजिटल पहुंच बढ़ाने, कंटेंट क्षमताओं को मजबूत करने और विकास को गति देने पर काम किया।
मेहर बाजवा Microsoft News में न्यूजरूम डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। इस भूमिका में उन्होंने 16 देशों में एडिटोरियल ऑपरेशंस का नेतृत्व किया और 140 से ज्यादा एडिटर्स व पत्रकारों की टीम संभाली। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने Maxim और Cosmopolitan में भी एडिटोरियल भूमिकाओं में काम किया और कंटेंट स्ट्रैटेजी तथा नई एडिटोरियल पहलों को विकसित करने में योगदान दिया।
NDTV के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने मेहर बाजवा की नियुक्ति पर कहा कि Good Times लाइफस्टाइल मीडिया का एक प्रतिष्ठित नाम रहा है और इसके पास दर्शकों का मजबूत आधार है। मीडिया उपभोग के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ इस ब्रैंड को नई पीढ़ी के लिए नए रूप में पेश करने के अवसर हैं। उन्होंने मेहर के एडिटोरियल अनुभव, डिजिटल दर्शकों की समझ और कंटेंट के जरिए ब्रैंड विकसित करने की क्षमता को इसकी अगली पारी के लिए अहम बताया।
अपनी नियुक्ति पर मेहर बाजवा ने कहा कि Good Times की विरासत शानदार है और इसका भविष्य भी संभावनाओं से भरा है। उनके मुताबिक, आज लाइफस्टाइल कंटेंट केवल जीवनशैली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्कृति, अनुभव, आकांक्षाएं और आधुनिक जीवन को आकार देने वाली कहानियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दर्शक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर प्रामाणिक, प्रासंगिक और आकर्षक कंटेंट चाहते हैं। वह Good Times की मौजूदा खूबियों को आगे बढ़ाने, नई कंटेंट सीरीज विकसित करने और दर्शकों के साथ इसके जुड़ाव को मजबूत करने के लिए काम करेंगी।
मुंबई में कार्यरत पत्रकार अविनाश पाण्डेय ने अनादि टीवी जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश पाण्डेय ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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Samachar4media Bureau
मुंबई में कार्यरत पत्रकार अविनाश पाण्डेय ने राष्ट्रीय न्यूज चैनल अनादि टीवी (Anaadi TV) जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश पाण्डेय ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले पाण्डेय को टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में करीब 20 साल का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 2006 में इंडिया टीवी (India TV) में ट्रेनी रिपोर्टर के तौर पर पत्रकारिता की शुरुआत की थी।
इसके बाद उन्होंने सीटीवी (CTV), लाइव इंडिया (Live India), न्यूज 24 (News 24), एनबीटी ऑनलाइन (NBT Online) और लीड न्यूज टुडे डिजिटल (Lead News Today Digital) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया।
अविनाश पाण्डेय एनबीटी ऑनलाइन में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (महाराष्ट्र हेड) और लीड न्यूज टुडे डिजिटल में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर काम कर चुके हैं। न्यूज 24 में उन्होंने प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट, जबकि लाइव इंडिया और मी मराठी (Mi Marathi) में कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर काम किया।
पत्रकारिता के दौरान अविनाश पाण्डेय ने राजनीति, अपराध, अदालत, नागरिक मामलों, रक्षा और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग की है।
समाचार4मीडिया की ओर से अविनाश पाण्डेय को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
पंकज पिसोलकर को प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 26 साल से अधिक का अनुभव है। वह सकाल मीडिया ग्रुप, दैनिक भास्कर और लोकमत ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
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सीनियर मीडिया प्रोफेशनल पंकज जगदीश पिसोलकर पुढारी पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड (Pudhari Publications Private Limited) से जुड़ गए हैं। कंपनी ने उन्हें पीसीएमसी क्षेत्र के लिए असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एडवरटाइजमेंट सेल्स) नियुक्त किया है।
पुढारी पब्लिकेशंस ने सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए पंकज पिसोलकर का स्वागत किया है। कंपनी को उम्मीद है कि एडवरटाइजमेंट सेल्स के कामकाज को मजबूत करने और ग्राहकों व साझेदारों के साथ बेहतर संबंध बनाने में उनका अनुभव उपयोगी साबित होगा।
पंकज पिसोलकर को प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 26 साल से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान वह सकाल मीडिया ग्रुप, दैनिक भास्कर और लोकमत ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
पुढारी पब्लिकेशंस के मुताबिक, पंकज पिसोलकर का अनुभव कंपनी के विज्ञापन बिक्री से जुड़े कामकाज को मजबूत करने में मददगार होगा। कंपनी को क्लाइंट्स और पार्टनर्स के साथ लंबे समय तक मजबूत संबंध बनाने में भी उनके योगदान की उम्मीद है।
इप्सिता जौहरी राणे डायरेक्टएक्स से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह रणनीति, ब्रांड निर्माण और तकनीक के जरिए कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजों पर काम करेंगी।
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इप्सिता जौहरी राणे (Ipsita Johri Rane) डायरेक्टएक्स (DirectX) से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस (Senior Vice President-Strategy and Head-Brand Solutions) के तौर पर जुड़ी हैं। उन्हें मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस, ब्रांड निर्माण और उद्यमिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
डायरेक्टएक्स में इप्सिता जौहरी राणे कंपनी की रणनीति और ब्रांड सॉल्यूशंस को मजबूत करने पर काम करेंगी। उनकी भूमिका में कंज्यूमर इनसाइट, एक्सपीरियंस और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़कर ब्रांड की चुनौतियों के समाधान तैयार करने और कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर रहेगा।
अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर इप्सिता जौहरी राणे ने कहा कि ब्रांड्स के लिए स्थानीय बाजारों में केवल लोगों तक पहुंचना या उनकी भागीदारी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझना जरूरी है कि उपभोक्ताओं के व्यवहार को कौन-सी चीज प्रभावित करेगी, अवसर कहां मौजूद है और उस अवसर को प्रभावी कार्रवाई में कैसे बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि डायरेक्टएक्स में उनका फोकस रणनीतिक सोच को और मजबूत करने तथा लोगों, संस्कृति और परिस्थितियों की गहरी समझ को समाधान तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने पर रहेगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को केवल किसी कैंपेन की योजना बनाने से आगे ले जाकर उनकी वास्तविक ब्रांड या कारोबारी समस्या का समाधान करने में मदद करना होगा।
अपने करियर के शुरुआती दौर में इप्सिता जौहरी राणे द वॉल्ट डिज्नी कंपनी इंडिया (The Walt Disney Company India), सोनी पिक्चर्स (Sony Pictures) और टीबीडब्ल्यूए इंडिया (TBWA India) समेत कई प्रमुख कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Ebix Inc. के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है।
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Samachar4media Bureau
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स इंक. (Ebix Inc.) के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब एबिक्स और एराया लाइफस्पेसेज (Eraaya Lifespaces) से जुड़े कारोबारी विकास गर्ग प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अटलांटा के पास जॉन्स क्रीक में स्थित एबिक्स का 17 एकड़ में फैला कॉरपोरेट मुख्यालय इस कर्ज के लिए गिरवी रखा गया है। मामला इसलिए अहम है, क्योंकि भारतीय जांच एजेंसी ने पहले ही एराया की एबिक्स में हिस्सेदारी समेत करीब 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी एबिक्स को महादेव बेटिंग नेटवर्क से जुड़े कथित अवैध धन के जरिये खरीदा गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। एराया लाइफस्पेसेज भारत में सूचीबद्ध कंपनी है और विकास गर्ग से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईडी ने उसकी संपत्तियां भी कुर्क की हैं।
5 जून 2026 को जारी अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 के तहत 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। इसमें एबिक्स में एराया की हिस्सेदारी भी शामिल थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि एबिक्स के अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा स्काईएक्सचेंज (SkyExchange) से जुड़े कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार से आया और दुबई के हवाला नेटवर्क के जरिये आगे भेजा गया।
अमेरिका में कर्ज का समझौता कैसे हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों ने एबिक्स के प्रबंधन को लिखित निर्देश देकर कहा था कि संबंधित संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण, उन पर किसी दूसरे पक्ष का अधिकार बनाने या पहले से मौजूद अधिकारों में बदलाव की अनुमति न दी जाए।
इसके बावजूद, 4 अगस्त 2026 को एबिक्स के अमेरिकी अध्यक्ष गगन सेठी ने कैलिफोर्निया की कर्ज देने वाली कंपनी वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल एलएलसी (Velocity Commercial Capital LLC) के साथ कर्ज सुरक्षित करने के लिए एक कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह तारीख विकास गर्ग की दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तारी के करीब तीन सप्ताह बाद की बताई गई है।
जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में यह दस्तावेज 12 अगस्त को दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एबिक्स ने अपने '1 एबिक्स वे' (1 Ebix Way) परिसर को कर्ज के बदले गिरवी रखा। दस्तावेज में कंपनी ने कर्जदाता को यह भरोसा भी दिया कि उसे संपत्ति गिरवी रखने का पूरा अधिकार है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेज में भारत में लागू संपत्ति कुर्की से जुड़ी रोक का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, इस लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
संपत्ति से होने वाली कमाई भी कर्जदाता को मिलेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, 1.26 करोड़ डॉलर के इस कर्ज से जुड़ा समझौता 2056 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत इमारत से मिलने वाला किराया भी कर्जदाता को सौंप दिया गया है।
इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कर्ज से मिले 1.15 करोड़ डॉलर का इस्तेमाल पहले से मौजूद कर्ज चुकाने में किया गया। यह बकाया वॉच हिल (Watch Hill) और मेलानी लेन (Melanie Lane) से जुड़ा बताया गया है। इन निवेशकों ने एबिक्स और एराया, दोनों कंपनियों में निवेश किया था।
भारतीय जांचकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि संपत्ति को गिरवी रखकर कर्ज लेने से भविष्य में उससे वसूली की जा सकने वाली रकम प्रभावित हो सकती है। यदि भारतीय अदालतें आगे चलकर संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देती हैं, तो अमेरिका स्थित मुख्यालय पर पहले से बने कर्ज और दूसरे वित्तीय अधिकार वसूली की प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एबिक्स का यह परिसर बिक्री के लिए रखा गया है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी क्रेसा (Cresa) के जरिये इसकी बिक्री की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। यह भी दावा है कि पास में स्थित जॉन्स क्रीक अस्पताल का संचालन करने वाली स्वास्थ्य सेवा कंपनी एमोरी हेल्थकेयर (Emory Healthcare) इस संपत्ति को खरीदने में दिलचस्पी रखती है। हालांकि, इस संभावित सौदे की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में जानकारी नहीं देने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, एराया लाइफस्पेसेज ने भारतीय शेयर बाजारों को अमेरिका में हुए 1.26 करोड़ डॉलर के इस गिरवी समझौते की जानकारी नहीं दी। आरोप है कि कंपनी ने भारतीय नियामकों और सार्वजनिक निवेशकों के सामने इस कर्ज का खुलासा नहीं किया, जबकि ऐसी जानकारी देना उसके लिए जरूरी हो सकता था।
इस मामले में एक और कानूनी पेच सामने आया है। अमेरिका में हुए कर्ज समझौते के अनुसार, किसी सरकारी एजेंसी की ओर से संपत्ति कुर्क करने या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई को कर्ज चूक यानी डिफॉल्ट की स्थिति माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल को कर्ज की पूरी रकम वापस मांगने का अधिकार मिल सकता है।
यदि ईडी अमेरिका में स्थित परिसर को कुर्क करने के अपने आदेश को लागू कराने की कोशिश करती है, तो भारतीय एजेंसी की कार्रवाई और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। इससे भारत और अमेरिका में लंबी कानूनी प्रक्रिया की आशंका पैदा हो सकती है।
विकास गर्ग, जिन्हें दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ का पूर्व संयोजक बताया गया है, फिलहाल जमानत पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतें इस बात पर भी विचार करती हैं कि आरोपी सबूतों को प्रभावित कर सकता है या संपत्तियों को बेचकर अथवा उनका स्वरूप बदलकर जांच और वसूली की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कुर्क की गई संपत्तियों पर कर्ज लेने से गर्ग की जमानत की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जमानत पर अंतिम फैसला अदालत संबंधित तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर करेगी।
भारतीय ईडी का आदेश अपने आप अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के भूमि रिकॉर्ड में किसी लेन-देन को रोक नहीं सकता। ऐसे में भारत को संपत्ति पर अपने दावे को लागू कराने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty यानी MLAT) जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों का सहारा लेना पड़ सकता है।
लंदन में हुई बैठकों से जुड़ा कथित नेटवर्क
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स के अधिग्रहण की योजना के पीछे लंदन में हुई कुछ गोपनीय बैठकें थीं। इन बैठकों में दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग और दुबई में रहने वाले हरि शंकर तिबरेवाल के बीच बातचीत होने का आरोप लगाया गया है। तिबरेवाल को महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़ा एक प्रमुख हवाला कारोबारी बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तिबरेवाल को कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उनके पेश नहीं होने की जानकारी ईडी के रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्हें कोलकाता में जन्मा कारोबारी बताया गया है, जिसकी भूमिका कथित सट्टेबाजी से हासिल धन को कंपनियों तक पहुंचाने में जांच के दायरे में है।
आरोप है कि लंदन में हुई रणनीतिक बैठकों के दौरान गर्ग और तिबरेवाल ने स्काईएक्सचेंज से आने वाले कथित अवैध धन का इस्तेमाल कर अमेरिका की नैस्डैक में सूचीबद्ध एक बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी को खरीदने की योजना बनाई थी। इस योजना के जरिये सट्टेबाजी से कमाए गए धन को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सौदे में लगाने का आरोप है।
स्काईएक्सचेंज और हवाला नेटवर्क का कथित कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, स्काईएक्सचेंज एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच के रूप में काम करता था। इसके जरिये छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों से रोजाना बड़ी रकम जुटाए जाने का आरोप है।
ईडी की अभियोजन शिकायतों में स्काईएक्सचेंज को तिबरेवाल के साथ सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल से जुड़ा हुआ बताया गया है। ये दोनों महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
रिपोर्ट के मुताबिक, इन गतिविधियों को मिलाकर इस कथित नेटवर्क का सालाना कारोबार 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। यह रकम किसी वैध मध्यम आकार की सूचीबद्ध कंपनी के कारोबार के बराबर बताई गई है।
आरोप है कि दुबई से संचालित शेल कंपनियों, एक-दूसरे से जुड़े बैंक खातों और ऐसे वित्तीय रिकॉर्ड के जरिये धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया गया, जिनका पता लगाना मुश्किल था। इसके बाद इस रकम को वैध कारोबारी पूंजी के रूप में दिखाकर कंपनियों में निवेश किए जाने का दावा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि धन को भारत में वापस लाने और सूचीबद्ध कंपनियों में लगाने के लिए योग्य संस्थागत निवेश (Qualified Institutional Placements यानी QIPs), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investments यानी FPIs) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments यानी FDIs) जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस तरह का निवेश गर्ग से जुड़ी कंपनियों में पहुंचाया गया।
13 रुपये के शेयर से 36.1 करोड़ डॉलर के अधिग्रहण तक का सफर
इस पूरे मामले में जस्टराइड एंटरप्राइजेज (Justride Enterprises) का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कंपनी पहले एक छोटी कंपनी थी, जिसके शेयर की कीमत करीब 13 रुपये थी। बाद में इसका नाम बदलकर एराया लाइफस्पेसेज कर दिया गया।
दावा किया गया है कि 2024 में कंपनी के शेयर में असाधारण तेजी आई और अगस्त 2024 तक इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति शेयर पहुंच गई। रिपोर्ट इस तेजी को एक साल में लगभग 6,000 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताती है। आरोप है कि बाद में कंपनी का इस्तेमाल कथित अवैध धन को निवेश करने और बड़े कारोबारी सौदे को पूरा करने के लिए किया गया।
इसके बाद एराया ने अमेरिका की दिवालियापन अदालत में एबिक्स इंक. की संपत्तियों की नीलामी में 36.1 करोड़ डॉलर (361 मिलियन डॉलर) की बोली जीतने का दावा किया। एबिक्स बीमा क्षेत्र के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी रही है, जो वित्तीय संकट में फंस गई थी।
रिपोर्ट इस अधिग्रहण को कथित अवैध सट्टेबाजी से हासिल धन को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के अधिग्रहण में लगाने की कोशिश के रूप में पेश करती है। इसके मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित रास्ता रायपुर से शुरू होकर दुबई के हवाला कारोबार और फिर अमेरिका के अटलांटा स्थित कॉरपोरेट मुख्यालय तक पहुंचा।
मामले में आगे क्या?
अमेरिका में एबिक्स के मुख्यालय को गिरवी रखने, उससे जुड़े कर्ज की शर्तों और संपत्ति की संभावित बिक्री को लेकर सामने आए दावों से महादेव बेटिंग मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। यदि भारतीय एजेंसियों की कुर्की और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच टकराव होता है, तो संपत्ति पर दावे को लेकर दोनों देशों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, इन आरोपों और लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि, संबंधित कंपनियों का पक्ष और अदालतों के अंतिम निष्कर्ष इस मामले की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। Netflix India की कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने CII Big Picture Summit 2026 में बताया कि इस साल दक्षिण भारतीय कंटेंट ने Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों में जगह बनाई है। पिछले साल यह संख्या 20 से भी कम थी। यह बदलाव दिखाता है कि क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।
‘Into the Southverse: Dissecting the South Indian Content Boom’ नाम के इस सत्र में फिल्मकारों और कलाकारों ने चर्चा की कि दक्षिण भारतीय कहानियों की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और वे भाषा व भौगोलिक सीमाओं को पार कर दुनिया भर के दर्शकों तक कैसे पहुंच रही हैं। रेडियो प्रेजेंटर ऋषिकेश कन्नन ने इस चर्चा का संचालन किया। इसमें निर्माता सौंदर्या रजनीकांत, तमिल अभिनेता और फिल्मकार एलन, अभिनेता अर्जुन दास और अभिनेत्री प्रियंका मोहन शामिल हुईं। प्रियंका मोहन कोरिया पर्यटन की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब Netflix भारत में अपने 10 साल पूरे कर रहा है। कंपनी ने जनवरी 2016 में भारत में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। Netflix में पिछले सात साल से काम कर रहीं मोनिका शेरगिल ने बताया कि इन वर्षों में कंपनी के काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। शुरुआत में कंपनी भारतीय दर्शकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कंटेंट लाने पर ध्यान दे रही थी, लेकिन अब वह स्थानीय रचनाकारों के साथ मिलकर भारतीय कहानियों को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने पर काम कर रही है।
भारत में शुरुआत से लेकर स्थानीय कहानियों तक का सफर
जब Netflix ने भारत में कदम रखा था, तब उसकी शुरुआती ओरिजिनल फिल्मों और सीरीज को अमेरिका स्थित कार्यालय के जरिए तैयार किया जाता था। उस समय भारत में कंपनी का कोई स्थानीय कार्यालय नहीं था। धीरे-धीरे Netflix ने भारतीय दर्शकों की पसंद को समझना शुरू किया। शुरुआती दो से तीन साल तक कंपनी ने अलग-अलग तरह के कंटेंट के साथ प्रयोग किए। इसके बाद उसने दर्शकों के सामने ज्यादा विविधता वाली कहानियां पेश करने की दिशा में काम किया।
शेरगिल के मुताबिक, अब कंपनी का मकसद सिर्फ ऐसी कहानियां दिखाना नहीं है, जिन्हें दर्शक पहले से पसंद करते हैं। वह ऐसी कहानियां भी सामने लाना चाहती है, जिन्हें देखकर दर्शकों को महसूस हो कि वे भी इस तरह का कंटेंट देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसका पहले अंदाजा नहीं था।
दक्षिण भारतीय कंटेंट के लिए इस बदलाव ने नए मौके खोले हैं। पहले कई दशकों तक दक्षिण भारतीय फिल्मों की कहानियों को दूसरी भाषाओं में दोबारा बनाया जाता रहा। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ की मूल कहानियां हिंदी समेत भारत की दूसरी भाषाओं के दर्शकों और विदेशों में रहने वाले लोगों तक अपनी अलग पहचान के साथ पहुंच रही हैं।
शेरगिल ने कहा कि दक्षिण भारत के फिल्मकार लंबे समय से अलग-अलग तरह की और अपनी खास पहचान रखने वाली कहानियां बना रहे हैं। हालांकि, पहले इन कहानियों को ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने इस कमी को दूर करने में मदद की है। अब ऐसे दर्शक भी इन कहानियों को देख सकते हैं, जिन्हें पहले इनके बारे में पता नहीं था।
‘मेड इन कोरिया’ ने दुनिया भर में बनाई पहचान
इस चर्चा में Netflix की तमिल फिल्म ‘Made in Korea’ का उदाहरण दिया गया। प्रियंका मोहन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म की कहानी तमिलनाडु के एक गांव की युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका सफर उसे दक्षिण कोरिया के सियोल शहर तक ले जाता है। फिल्म में स्थानीय परिवेश के साथ दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच जुड़ाव दिखाया गया है।
शेरगिल ने बताया कि फिल्म का विचार देखने में काफी सरल था, लेकिन यह Netflix के लिए बड़ी सफलता साबित हुई। जब इस परियोजना पर चर्चा हो रही थी, तब कुछ सहयोगियों ने सवाल उठाया था कि क्या भारत की कहानी किसी दूसरी संस्कृति से जुड़े परिवेश में भी दर्शकों को पसंद आएगी। भाषा और सांस्कृतिक अंतर को देखते हुए इस पर संदेह जताया गया था।
इसके बावजूद Netflix की दक्षिण भारतीय टीम ने इस विचार के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। शेरगिल के अनुसार, फिल्म बाद में Netflix की दुनिया भर की गैर-अंग्रेजी कंटेंट की टॉप-10 सूची में पहले स्थान पर पहुंच गई। साथ ही, इसने 53 देशों की टॉप-10 सूची में भी जगह बनाई।
इस सफलता से प्रियंका मोहन को भी व्यापक पहचान मिली। शेरगिल ने बताया कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान आयोजित राजकीय रात्रिभोज में प्रियंका मोहन को आमंत्रित किया गया था। उन्हें कोरिया पर्यटन की मानद एंबेसडर भी बनाया गया।
Netflix के लिए यह फिल्म इस बात का उदाहरण बनी कि किसी खास जगह और संस्कृति से जुड़ी कहानी भी अपने घरेलू बाजार से बाहर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच सकती है। फिल्म की सफलता के लिए उसकी तमिल पहचान को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय, तमिलनाडु से सियोल तक का सफर ही अलग-अलग संस्कृतियों के दर्शकों को कहानी से जोड़ने का जरिया बना।
‘मिन्नल मुरली’ और ‘आरआरआर’ का भी दिया उदाहरण
शेरगिल ने दक्षिण भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच समझाने के लिए मलयालम फिल्म ‘Minnal Murali’ का भी जिक्र किया। सुपरहीरो पर आधारित इस फिल्म को भारत के बाहर भी ध्यान मिला था। यहां तक कि अभिनेता टॉम हॉलैंड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस किरदार में दिलचस्पी दिखाई थी।
उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘RRR’ का भी उल्लेख किया। इस फिल्म को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान ने तेलुगु सिनेमा और उससे जुड़े कलाकारों को दुनिया भर में होने वाली चर्चाओं में जगह दिलाने में मदद की।
शेरगिल ने यह भी कहा कि दक्षिण भारतीय सिनेमा को एक जैसी कहानियां बनाने वाले उद्योग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस क्षेत्र की हर फिल्म इंडस्ट्री की अपनी कहानी कहने की शैली और दर्शकों की पसंद है।
उनके मुताबिक, मलयालम सिनेमा की शैली तमिल सिनेमा से अलग है। तेलुगु फिल्मों में अक्सर बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण के साथ एक्शन या कॉमेडी पर जोर दिया जाता है। वहीं, तमिल सिनेमा में कई बार ऐसे विचारों पर आधारित कहानियां देखने को मिलती हैं, जिनका आधार अपने आप में खास और नया होता है।
इस तरह की विविधता और लगातार बन रहे नए कंटेंट की वजह से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के पास दुनिया भर के दर्शकों को दिखाने के लिए कई तरह की कहानियां मौजूद हैं।
सबटाइटल और डबिंग से भाषा की बाधा हो रही कम
क्षेत्रीय कहानियों के लिए भाषा हमेशा एक अहम पहचान रही है, लेकिन अब यह दर्शकों तक पहुंचने में पहले जैसी बड़ी बाधा नहीं रह गई है। शेरगिल ने बताया कि Netflix पर होने वाली कुल व्यूइंग का 70 प्रतिशत हिस्सा सबटाइटल और डबिंग के जरिए देखा जाता है।
सबटाइटल के जरिए दर्शक अपनी भाषा में लिखे संवाद पढ़ सकते हैं, जबकि डबिंग में फिल्म या सीरीज के संवाद दूसरी भाषा में सुनाई देते हैं। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की कहानियां देखना आसान हो जाता है, भले ही दर्शक मूल भाषा न समझते हों।
सत्र में पेश किया गया यह आंकड़ा बताता है कि दर्शक अब अपनी भाषा और सांस्कृतिक दायरे से बाहर का कंटेंट देखने के लिए भी तैयार हैं। इससे क्षेत्रीय फिल्मकारों को उन दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है, जिन्हें किसी कहानी की संस्कृति, जगह या सामाजिक परिवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।
दर्शकों की पसंद में बदलाव से फिल्मकारों को मिल रही आजादी
इस बदलाव का असर दर्शकों की पसंद पर भी पड़ रहा है। एलन ने कहा कि बीते वर्षों में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक दर्शकों की पहुंच बढ़ी है। पहले इंटरनेट के जरिए और फिर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के आने से लोगों को घर बैठे दुनिया भर के सिनेमा को देखने का मौका मिला।
इससे दर्शकों की सोच और पसंद में बदलाव आया है। अब फिल्मकारों के लिए अलग-अलग विधाओं और कहानी कहने के नए तरीकों के साथ प्रयोग करने की गुंजाइश बढ़ी है।
अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए एलन ने बताया कि उन्होंने ‘The Silence of the Lambs’ और ‘Memories of Murder’ जैसी फिल्मों से प्रेरित एक थ्रिलर बनाने के लिए 100 से ज्यादा निर्माताओं से संपर्क किया था। लेकिन उस समय उन्हें इस परियोजना के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।
निर्माताओं को संदेह था कि भारतीय दर्शक इस तरह की कहानी को समझ पाएंगे या पसंद करेंगे। एलन के मुताबिक, अब माहौल बदल चुका है। आज ऐसी फिल्मों और थ्रिलर कहानियों को भी दर्शक मिल रहे हैं, जिन्हें पहले व्यावसायिक रूप से जोखिम भरा माना जा सकता था।
इस बदलाव से फिल्मकारों को नए विचारों और अलग तरह की कहानियों पर काम करने की ज्यादा आजादी मिल रही है। साथ ही, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं, जो पारंपरिक सिनेमाघरों की व्यावसायिक उम्मीदों पर पूरी तरह खरी न उतरती हों।
सौंदर्या रजनीकांत ने बताया, सीरीज बनाने का अनुभव फिल्मों से अलग
निर्माता सौंदर्या रजनीकांत ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में अलग-अलग माध्यमों के साथ काम करने से नए अवसर सामने आ रहे हैं। वह एनीमेशन, परफॉर्मेंस कैप्चर, लाइव-एक्शन फिल्मों और अब स्ट्रीमिंग सीरीज के साथ काम कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि Netflix के लिए तमिल भाषा में लंबे प्रारूप का प्रोजेक्ट बनाना फीचर फिल्म बनाने से अलग अनुभव था। इसमें लेखन, संपादन और कहानी को दर्शकों के सामने पेश करने का तरीका भी अलग रखना पड़ा।
उनकी सीरीज ‘#Love’ का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। चेन्नई की पृष्ठभूमि पर बनी यह सीरीज दो ऐसे लोगों के रिश्ते की कहानी दिखाती है, जिनकी प्यार में आपसी तालमेल और एक-दूसरे से जुड़ाव को लेकर सोच अलग-अलग है। शेरगिल ने इसे युवाओं से जुड़ी, नई और ऐसी प्रेम कहानी बताया, जिससे अलग-अलग जगहों के दर्शक जुड़ सकते हैं, जबकि इसकी जड़ें तमिल परिवेश में हैं।
रजनीकांत ने कहा कि यह परियोजना लंबे प्रारूप वाले कंटेंट की दुनिया में उनके लिए एक अहम कदम रही है और वह आगे भी ऐसी और सीरीज बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि तमिल दर्शक पारंपरिक रूप से फिल्मों को देखने के ज्यादा आदी रहे हैं। ऐसे में एपिसोड के रूप में कहानी पेश करना दर्शकों से लंबे समय तक जुड़ने का एक नया अवसर है।
रचनाकारों को भरोसा देना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को फिल्मकारों और रचनाकारों को नए प्रयोग करने का भरोसा देना चाहिए।
सौंदर्या रजनीकांत के मुताबिक, किसी भी मंच की ओर से कहानीकार को दिया जाने वाला सबसे अहम सहयोग भरोसा है। रचनाकार को यह विश्वास होना चाहिए कि उसके विचार में दम है और उसकी कहानी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसे सहयोगी का होना जरूरी है, जो परियोजना को समझे और उसके साथ खड़ा रहे। साथ ही, रचनाकारों को यह भी समझना चाहिए कि दर्शक किसी कहानी को उस नजरिए से न देखें, जिस नजरिए से उसे बनाते समय सोचा गया था।
उनकी बातों से स्ट्रीमिंग कारोबार से जुड़ा एक अहम सवाल सामने आया कि प्लेटफॉर्म रचनाकारों की अलग पहचान को बनाए रखते हुए उनका समर्थन कैसे कर सकते हैं, बिना हर परियोजना को एक ही तरह के ढांचे में ढाले।
क्षेत्रीय कहानियां जब बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करती हैं, तो फिल्मकारों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी कहानी की खासियत और स्थानीय पहचान को बनाए रखें। साथ ही, कहानी में ऐसा जुड़ाव भी होना चाहिए, जिससे दूसरी जगहों के दर्शक भी उससे खुद को जोड़ सकें।
क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को कोरियाई सितारों जैसा प्यार मिल सकता है?
इस चर्चा में यह सवाल भी उठा कि क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी लोकप्रियता मिल सकती है, जैसी कोरियाई ड्रामा के सितारों को मिलती है।
‘#Love’ में नजर आने वाले अभिनेता अर्जुन दास ने कहा कि भारतीय कलाकारों की तुलना सीधे कोरियाई ड्रामा के सितारों से करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी कहानियों की ताकत पर जोर दिया।
यह सवाल भारत में कोरियाई मनोरंजन की बढ़ती लोकप्रियता और दक्षिण भारतीय कलाकारों के लिए दूसरे देशों में प्रशंसक वर्ग तैयार होने की संभावना को भी दिखाता है।
शेरगिल ने कहा कि क्षेत्रीय कंटेंट की सफलता से पता चलता है कि अगर कहानी दर्शकों से जुड़ने में सफल रहती है, तो वे अनजान जगहों और संस्कृतियों के किरदारों को भी पसंद कर सकते हैं।
यह अवसर सिर्फ प्रेम कहानियों तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारतीय कंटेंट में थ्रिलर, एक्शन फिल्में, सुपरहीरो की कहानियां और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आगे बढ़ने वाले किरदारों की कहानियां भी शामिल हैं। इस विविधता से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दर्शकों के सामने दक्षिण भारतीय सिनेमा पेश करने के कई रास्ते मिलते हैं। इसके लिए किसी एक भाषा या शैली पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
स्थानीय पहचान बनाए रखते हुए दुनिया तक पहुंचने की चुनौती
पूरी चर्चा में बार-बार यह बात सामने आई कि किसी कहानी को उसकी स्थानीय पहचान से अलग किए बिना दूसरे देशों के दर्शकों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म फिल्मों और सीरीज को दुनिया भर में दिखाने और नए दर्शकों तक पहुंचाने का मौका दे सकते हैं। लेकिन अंत में कहानी का दमदार होना जरूरी है। किरदार असली लगने चाहिए, कहानी का विचार दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने वाला होना चाहिए और उसमें कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे अलग-अलग जगहों के लोग भी जुड़ सकें।
Netflix भारत में अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में ‘Southverse’ पर हुई यह चर्चा दिखाती है कि क्षेत्रीय कहानियां भारत की वैश्विक मनोरंजन महत्वाकांक्षाओं का एक बड़ा हिस्सा बनती जा रही हैं।
इस साल दक्षिण भारतीय फिल्मों और सीरीज का Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों तक पहुंचना इस बदलाव का संकेत है। अब आगे की चुनौती यह है कि फिल्मकार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म इस पहुंच को कैसे बढ़ाते हैं, नए विचारों के साथ और प्रयोग कैसे करते हैं और एक सफल अंतरराष्ट्रीय कहानी के बाद ऐसी कई दूसरी कहानियों के लिए भी दुनिया भर में दर्शक कैसे तैयार करते हैं।
Prime Focus Limited ने अपनी सहयोगी कंपनियों Brahma AI Holdings Limited और Brahma AI Services India Limited पर नियंत्रण छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों की बैठक बुलाई है।
by
Vikas Saxena
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Prime Focus Limited ने अपनी सहयोगी कंपनियों Brahma AI Holdings Limited और Brahma AI Services India Limited पर नियंत्रण छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों की बैठक बुलाई है। कंपनी की एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EOGM) 7 नवंबर, 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। कंपनी ने इस बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए चार प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं। इनमें Brahma AI पर नियंत्रण छोड़ना, संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन और एआई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़ा समझौता शामिल है।
कंपनी ने 16 अक्टूबर को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में शेयरधारकों से इन प्रस्तावों पर मतदान कराया जाएगा। बैठक का नोटिस कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
Brahma AI में 10 करोड़ डॉलर का निवेश
Prime Focus के नोटिस के मुताबिक, निवेश से जुड़े प्रस्ताव के तहत Multiples Private Equity के दो फंड Brahma AI Holdings और Brahma AI Services India में कुल 10 करोड़ डॉलर का निवेश करेंगे। इसमें Multiples Private Equity Gift Fund IV की ओर से Brahma AI Holdings में 5.44 करोड़ डॉलर और Multiples Private Equity Fund IV की ओर से Brahma AI Services India में करीब 4.56 करोड़ डॉलर के बराबर निवेश प्रस्तावित है। यह निवेश अनिवार्य रूप से इक्विटी शेयरों में बदलने वाले प्रेफरेंस शेयरों के जरिए किया जाना है।
कंपनी ने बताया कि Multiples के नेतृत्व में होने वाली इस व्यापक फंडिंग प्रक्रिया का लक्ष्य कुल 15 करोड़ डॉलर जुटाना है। इसमें Multiples के दोनों फंडों का प्रस्तावित निवेश 10 करोड़ डॉलर है।
कंपनी को यह जानकारी भी दी गई थी कि 23 सितंबर, 2026 तक Brahma AI Holdings में निवेश के लिए दुनियाभर के निवेशकों से अतिरिक्त 15 करोड़ डॉलर से अधिक की मांग के संकेत और ऑर्डर की पुष्टि मिली थी। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि ये संकेत और ऑर्डर निवेश पूरा होने के बराबर नहीं हैं। इनके लिए अंतिम आवंटन, जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तें पूरी होना बाकी है। अतिरिक्त निवेश की यह संभावित राशि Multiples के 10 करोड़ डॉलर के निवेश का हिस्सा नहीं है और न ही उस निवेश को पूरा करने की शर्त है।
65.67% हिस्सेदारी के बावजूद नियंत्रण नहीं रहेगा
इस प्रस्ताव का सबसे अहम पहलू यह है कि Prime Focus की Brahma AI में आर्थिक हिस्सेदारी 50% से अधिक रहने के बावजूद उसका नियंत्रण समाप्त हो जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित सौदा पूरा होने के बाद Prime Focus की सहयोगी कंपनी Double Negative Holdings Limited के जरिए Brahma AI Holdings में उसकी हिस्सेदारी 65.67% रहेगी। Brahma AI Services India में भी उसकी अप्रत्यक्ष आर्थिक हिस्सेदारी 65.67% बनी रहेगी।
हालांकि, Brahma AI Holdings में उसके वोटिंग अधिकार मौजूदा 89.27% से घटकर 24.99% रह जाएंगे। इसके अलावा, Prime Focus को Brahma AI Holdings के छह सदस्यों वाले बोर्ड में केवल एक निदेशक नियुक्त करने का अधिकार होगा, बशर्ते उसकी संबंधित Class C शेयरों में हिस्सेदारी 50% से अधिक बनी रहे।
इसके विपरीत, Brahma AI Holdings के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Prabhu Narasimhan को छह में से तीन निदेशक नियुक्त करने का अधिकार होगा।
इस बदलाव के बाद Brahma AI Holdings और Brahma AI Services India, कंपनी की सहायक कंपनियां नहीं रहेंगी। इसके बजाय वे Prime Focus की एसोसिएट कंपनियां बन जाएंगी। यानी Prime Focus की आर्थिक हिस्सेदारी तो बनी रहेगी, लेकिन कंपनी उन पर पहले की तरह नियंत्रण नहीं रख सकेगी। इस प्रस्ताव के लिए शेयरधारकों की विशेष मंजूरी जरूरी है। इसलिए कंपनी ने इसे विशेष प्रस्ताव के रूप में बैठक में रखा है।
DNEG और Brahma AI के बीच क्षतिपूर्ति समझौता
बैठक में दूसरा प्रस्ताव DNEG S.à.r.l. और Brahma AI Holdings के बीच प्रस्तावित संबंधित पक्ष लेनदेन से जुड़ा है। इस व्यवस्था के तहत DNEG S.à.r.l. एक फ्रेमवर्क समझौते में शामिल होगी। इसमें Brahma AI समूह से जुड़ी कुछ देनदारियों के लिए क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी लेने का प्रावधान है। समझौते के मुताबिक, तय शर्तों और सीमाओं के अधीन उन देनदारियों के लिए भुगतान करना पड़ सकता है, जिनकी जानकारी समझौते की तारीख से सात साल के भीतर DNEG S.à.r.l. को दी जाएगी।
कंपनी ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत संभावित भुगतान की कुल राशि अभी तय नहीं की जा सकती। यह इस बात पर निर्भर करेगी कि किस तरह की देनदारी सामने आती है और उसके लिए भुगतान की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
इस प्रस्ताव को ऑडिट कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है और निदेशक मंडल ने भी इसे शेयरधारकों के सामने रखने की सिफारिश की है। इस पर साधारण प्रस्ताव के जरिए मंजूरी मांगी जाएगी।
DNEG Holdings के लिए भी मंजूरी जरूरी
तीसरा प्रस्ताव Double Negative Holdings Limited और Brahma AI Holdings के बीच शेयरधारक समझौते से संबंधित है। इस समझौते के तहत Double Negative Holdings सहित संबंधित शेयरधारकों को कुछ कर संबंधी देनदारियों के लिए क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसमें लागू कानून के तहत रोके जाने, काटे जाने या भुगतान किए जाने वाले कर के साथ उससे जुड़े ब्याज, जुर्माने और लागत भी शामिल हो सकते हैं।
यह जिम्मेदारी समझौते में तय शर्तों के अनुसार लागू होगी। कंपनी ने बताया कि संभावित भुगतान की राशि अभी निर्धारित नहीं की जा सकती, क्योंकि यह भविष्य में सामने आने वाली कर संबंधी देनदारियों पर निर्भर करेगी।
इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों की साधारण मंजूरी के लिए रखा गया है। संबंधित पक्षों को नियमों के अनुसार इस तरह के महत्वपूर्ण संबंधित पक्ष लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान करने की अनुमति नहीं होगी।
Brahma AI प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का प्रस्ताव
चौथा प्रस्ताव DNEG S.à.r.l. और Brahma AI Holdings के बीच एआई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े लाइसेंस समझौते का है।
इस व्यवस्था के तहत DNEG S.à.r.l. को Brahma AI प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने का अधिकार मिलेगा और इसके बदले Brahma AI Holdings को सालाना शुल्क दिया जाएगा। कंपनी के नोटिस के मुताबिक, यह शुल्क तीन में से सबसे अधिक राशि के आधार पर तय होगा। इसमें साल के दौरान औसत उपयोगकर्ता सीटों की संख्या को 3,500 डॉलर से गुणा करने पर मिलने वाली राशि, 2.8 करोड़ डॉलर या DNEG S.à.r.l. के सालाना सकल राजस्व का 4% शामिल है। सकल राजस्व की गणना में उसी साल की फिजिकल प्रोडक्शन और निवेश से होने वाली आय शामिल नहीं होगी।
यह व्यवस्था कुल 10 साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है। कंपनी ने इस लेनदेन को संबंधित पक्ष लेनदेन बताया है और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है।
दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि Brahma AI को अलग रखने के बाद DNEG समूह के लिए यह व्यवस्था लागत के लिहाज से तटस्थ होगी।
31 अक्टूबर तक के शेयरधारक कर सकेंगे मतदान
Prime Focus ने बताया कि 31 अक्टूबर, 2026 कट-ऑफ तारीख होगी। इस तारीख तक कंपनी के शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारक मतदान कर सकेंगे। दूरस्थ ई-वोटिंग की सुविधा 3 नवंबर को सुबह 9 बजे से 6 नवंबर को शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
शेयरधारक 7 नवंबर को होने वाली बैठक के दौरान भी मतदान कर सकेंगे, लेकिन जो शेयरधारक पहले ही दूरस्थ ई-वोटिंग के जरिए अपना वोट दे चुके होंगे, वे दोबारा मतदान नहीं कर पाएंगे।
कंपनी ने ई-वोटिंग और बैठक में ऑनलाइन भाग लेने की सुविधा के लिए Central Depository Services (India) Limited (CDSL) की सेवाएं ली हैं। बैठक में शामिल होने वाले शेयरधारकों की उपस्थिति को कोरम की गणना में शामिल किया जाएगा।
कंपनी ने शेयरधारकों से यह भी कहा है कि यदि वे बैठक में सवाल पूछना या अपनी बात रखना चाहते हैं, तो उन्हें बैठक से कम से कम 10 दिन पहले कंपनी के ईमेल ir.india@primefocus.com पर अनुरोध भेजना होगा। इसके लिए नाम, डीमैट खाता या फोलियो नंबर, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर देना होगा।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं।
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Samachar4media Bureau
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट शेयर कर इस नई भूमिका की जानकारी दी है। अक्टूबर 2026 से वह इस पद पर काम कर रही हैं।
इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं। दिसंबर 2025 में उन्होंने यह भूमिका संभाली थी और सितंबर 2026 तक इस पद पर रहीं। इस दौरान वह फैशन की सभी कैटेगरी में रेवेन्यू, कस्टमर, ग्रोथ और मार्केटिंग से जुड़े काम देख रही थीं।
फ्लिपकार्ट में इससे पहले वह डायरेक्टर-होम एंड फर्नीचर के पद पर भी काम कर चुकी हैं। अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 तक उन्होंने इस भूमिका में अपनी सेवाएं दीं।
फ्लिपकार्ट के साथ सुरुचि पोपली पहले भी काम कर चुकी हैं। जनवरी 2019 में उन्होंने कंपनी में सीनियर मैनेजर-I, रेफ्रिजरेटर के तौर पर काम शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सीनियर मैनेजर-II, लार्ज अप्लायंसेज और एसोसिएट डायरेक्टर, लार्ज अप्लायंसेज जैसी भूमिकाएं निभाईं। लार्ज अप्लायंसेज कैटेगरी में उन्होंने 14 सदस्यों की टीम का नेतृत्व किया और कारोबार की ग्रोथ से जुड़े काम संभाले।
फ्लिपकार्ट के अलावा सुरुचि पोपली एमेजॉन में भी काम कर चुकी हैं। दिसंबर 2023 से अगस्त 2024 तक वह वहां कैटेगरी हेड, कलर कॉस्मेटिक्स के पद पर रहीं। इससे पहले मार्च 2022 से दिसंबर 2023 तक उन्होंने लक्जमबर्ग में प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग लीड, ईयू ऑटोमोटिव की भूमिका निभाई।
अपने करियर के शुरुआती दौर में सुरुचि पोपली महिंद्रा ग्रुप से भी जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने बिजनेस प्लानिंग, इंटरनेशनल मार्केट्स, सीईओ ऑफिस और स्पेशल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी भूमिकाओं में काम किया।
सुरुचि पोपली ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), कोझिकोड से जनरल मैनेजमेंट, फाइनेंस और स्ट्रैटेजी में पीजीडीएम किया है। वह इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं।
कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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Samachar4media Bureau
कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
दीप माल्दे ने LinkedIn पर इस नियुक्ति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह कंपनी के प्रतिष्ठित ब्रैंड्स को आगे बढ़ाने और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देने के Haleon के उद्देश्य को पूरा करने में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। कंपनी का उद्देश्य है कि लोगों को मानवीय संवेदनाओं के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।
Haleon में शामिल होने से पहले दीप माल्दे Mega LifeSciences में बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने जनवरी 2025 से मई 2026 तक इस जिम्मेदारी को संभाला। इस दौरान वह कारोबार के प्रदर्शन, मुनाफे और नुकसान से जुड़े नतीजों (P&L), बिक्री और मार्केटिंग टीमों के कामकाज के साथ-साथ संचालन की कार्यक्षमता बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार थे।
इससे पहले दीप माल्दे ने Danone India में आठ साल से ज्यादा समय तक मार्केटिंग से जुड़ी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम किया। यहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी Global Brands Portfolio में मार्केटिंग हेड की थी। इस भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े मार्केटिंग कार्यों का नेतृत्व कर रहे थे।
दीप माल्दे इससे पहले Abbott Nutrition International में भी तीन साल से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं। यहां वह PediaSure ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारियों में ब्रैंड रणनीति तैयार करना, उपभोक्ता मार्केटिंग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ जुड़ाव और डिजिटल माध्यमों से मार्केटिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल था।
दीप माल्दे का अनुभव कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड निर्माण और कारोबार में बदलाव जैसे क्षेत्रों में रहा है। Haleon में उनकी नई भूमिका में एक्सपर्ट मार्केटिंग और ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े कामों पर ध्यान रहेगा।
अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह साची एंड साची इंडिया, बीबीएच इंडिया और प्रोपेगेट इंडिया की कम्युनिकेशंस संभालेंगी।
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अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया (Publicis Groupe India) से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Associate Director-Corporate Communications) के तौर पर जुड़ी हैं। नई भूमिका में वह साची एंड साची इंडिया (Saatchi & Saatchi India), बीबीएच इंडिया (BBH India) और प्रोपेगेट इंडिया (Propagate India) के लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगी।
इससे पहले अलिफिया हिरानी ने डेंट्सू इंडिया (Dentsu India) के साथ करीब सात साल तक काम किया। वहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी सीनियर मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Senior Manager-Corporate Communications) की थी।