हिन्दी पत्रकारिता के कल और आज की तुलना करना बेहद आवश्यक है क्योकि अतीत को हमेशा वर्तमान और भविष्य को संवारने के लिए याद किया जाता है। यह सच हिन्दी पत्रकारिता के साथ भी लागू होता है। जब हम बीते कल की बातें करते है तो यह तथ्य उभरकर सामने आता है कि गुलाम भारत में स्वत्त्रता की लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा हिन्दी पत्रकारिता के माध्यम से ही लड़ा गया। लेकिन व
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समाचार4मीडिया ब्यूरो