हिन्दी पत्रकारिता का पहले से बहुत विस्तार हुआ है, लेकिन वक्त बीतने के साथ उसमें गंभीरता की कमी हुई है। विचारो में उथलापन हुआ है और प्रतिबद्धता घटी है। हिन्दी पत्रकारिता की मूल प्रेरणा आजादी की लड़ाई में योगदान की थी। और आज जब समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति के संघर्ष को अभिव्यक्ति मिलेगी, तभी हिन्दी पत्रकारिता सार्थक होगी। पिछले कुछ दशकों में पत्रकार
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समाचार4मीडिया ब्यूरो