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जन्मदिन विशेष: रिटायरमेंट के दिन जस्टिस दीपक मिश्रा का मीडिया से था ये आखिरी सवाल...
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल दो अक्टूबर को समाप्त हो....
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल दो अक्टूबर को समाप्त हो गया, उनकी जगह रंजन गोगोई नए चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए हैं। अपने 13 महीने के कार्यकाल में जस्टिस मिश्रा ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए, हालांकि उन्हें कई स्तर पर विरोध का सामना भी करना पड़ा। उनके खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की गई और कई जजों ने भी उनका विरोध किया।
3 अक्टूबर 1953 को जन्मे बतौर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा मीडिया के प्रति संवेदनशील रहे। उन्होंने मीडिया की आजादी पर अंकुश की कोशिशों को परवान नहीं चढ़ने दिया। कई मौकों पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी मिलनी ही चाहिए। बिहार के एक पूर्व विधायक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा था कि रिपोर्टिंग में कुछ गलती हो सकती है, लेकिन इसे हमेशा के लिए पकड़कर नहीं रखा जा सकता। पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी की अनुमति दी जानी चाहिए। दरअसल, याचिकाकर्ता पूर्व विधायक का कहना था कि संबंधित न्यूज चैनल ने अवैध तरीके से भूमि आवंटन की खबर दिखाई जो कि गलत थी और इसलिए चैनल पर आपराधिक मानहानि का मामला फिर से चलना चाहिए, लेकिन चीफ जस्टिस ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका रद्द कर दी।
जस्टिस मिश्रा वक्त-वक्त पर मीडिया को समझाइश भी देते रहे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मीडिया को अधिक जिम्मेदार बनने की जरूरत है। खासकर जय शाह मानहानि केस की सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि आजादी का आशय कुछ भी लिखने से नहीं होना चाहिए। दीपक मिश्रा ने कहा था ‘हम प्रेस की आवाज को नहीं दबा रहे हैं, लेकिन कभी-कभी पत्रकार कुछ ऐसी बातें लिखते हैं जो पूर्ण रूप से अदालत की अवमानना होती हैं। कुछ उच्च पदों पर बैठे पत्रकार कुछ भी लिख सकते हैं, क्या यह वाकई पत्रकारिता है?' मैं हमेशा से ही प्रेस की आजादी का पक्षधर रहा हूं, लेकिन किसी के बारे में कुछ भी बोल देना और कुछ भी लिख देना यह गलत है, इसकी भी एक सीमा होती है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ये नहीं सोच सकता कि वो रातों रात पोप बन सकता है।’
आमतौर पर चीफ जस्टिस मीडिया से एक निश्चित दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन दीपक मिश्रा ने एक तरह से इस अघोषित परंपरा को खत्म करने का प्रयास किया। अपने अंतिम कार्यदिवस पर भी वह दिल्ली स्थित प्रेस लाउंज में पत्रकारों के साथ चाय पीने पहुंचे। हालांकि, यहां भी उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के बजाए सवाल पूछने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई, जैसे ‘एप्रिशिएशन और एडमायर’ के बीच क्या अंतर है? जब भी पत्रकार सवाल पूछने लगते तो वे कहते, ‘मैं यहां आपका गेस्ट हूं। मुझसे सवाल मत पूछो।’
इस मौके पर उन्होंने कहा कि वे किसी पर कभी संदेह नहीं करते, क्योंकि जो व्यक्ति संदेह के सिद्धांत पर चलता है वह कभी जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता। आप पत्रकारों का काम संदेह से शुरू होता है, फिर संदेह से पूछताछ और पूछताछ से सूचना तक पहुंचना होता है।
समाचार4मीडिया की ओर से जस्टिस दीपक मिश्रा को जन्मदिन की बधाई।
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