ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को लेकर एक्सपर्ट ने जताया ये भरोसा, खूब बढ़ेगा रेवेन्यू...

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी (demonetisation) की घोषणा के बाद से टेलिविजन इंडस्ट्री को अब तक लगभग 850 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। लेकिन लगता है कि अब संकट के बादल छंट चुके है

Last Modified:
Monday, 20 March, 2017
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समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी (demonetisation) की घोषणा के बाद से टेलिविजन इंडस्ट्री को अब तक लगभग 850 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। लेकिन लगता है कि अब संकट के बादल छंट चुके हैं। आश्चर्यजनक रूप से जनवरी 2017 में टीवी चैनलों पर नवंबर 2016 के बाद से विज्ञापन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

टेलिविजन रेटिंग एजेंसी ‘बार्क इंडिया’ (BARC India) के आधार पर जारी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जनवरी 2017 में विज्ञापनदाताओं ने विभिन्‍न चैनलों पर 4.79 मिलियन विज्ञापन दिए हैं, जबकि नवंबर 2016 में यह संख्‍या 4.56 मिलियन और दिसंबर 2016 में 3.98 मिलियन थी।

नोटबंदी के बाद अब जब ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री फिर तरक्की के रास्‍ते पर है, मीडिया विशेषज्ञों और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में हालात और बेहतर होंगे और यह इंडस्ट्री फिर अपने पुराने रूप में वापस आ जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है, ‘हाल ही में आए चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि लोग नोटबंदी को भूल चुके हैं और अब यह बीते समय की बात हो गई है। बिजनेस में भी सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं और मार्केट भी काफी बेहतर स्थिति में है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से विज्ञापन रेवेन्‍यू में काफी बेहतर परिणाम दिखाई देने लगेंगे।’

‘सब ग्रुप’ (SAB Group) के सीईओ मानव ढांडा ने उम्मीद जताई है कि अगस्‍त तक इंडस्‍ट्री काफी अच्‍छी रफ्तार पकड़ लेगी। हालांकि उनका यह भी कहना है कि इन्‍वेंट्री लेवल पर अधिकांश चैनल पहले से ही ओवरफुल चल रहे हैं। ढांडा का कहना है, ‘हमारा इन्‍वेंट्री लेवल नोटबंदी से पहले वाली स्थिति में वापस आ गया है। इस साल मार्च का महीना हमारे लिए काफी अच्‍छा रहा है। यदि एक दो महीने और ऐसी ही स्थिति रही तो चीजें फिर उसी तरह हो जाएंगी। हम अपने क्‍लाइंट्स से रेट बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रहे हैं और हमारी वर्तमान ग्रोथ भी दो अंकों (double digit) में पहुंच चुकी है।

‘9X मीडिया’ (9X Media) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर पवन जैलखानी का मानना है कि इंडस्‍ट्री को पूरी तरह से अपने पुराने रूप में आने के लिए एक तिमाही और लगेगा। उदाहरण के लिए- इंडस्‍ट्री को वापस अपनी पुरानी स्थिति में वापस आने के लिए आईपीएल ज्‍यादा मदद नहीं कर सकता है। जैलखानी का कहना है, ‘इंडस्‍ट्री को नोटबंदी से पूर्व वाली अपनी पुरानी स्थिति में वापस आने के लिए अभी एक तिमाही और लगेगी। इसका प्रमुख कारण यह है कि टेलिविजिन इंडस्‍ट्री ‘फास्‍ट मूविंग कंज्‍यूमर गुड्स’ (FMCG) पर निर्भर है और तीसरी तिमाही में उसके नतीजे ज्‍यादा बेहतर नहीं रहे हैं। हालांकि वे इसे रिकवर कर लेंगे लेकिन चौथी तिमाही में ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे में यह उम्‍मीद नहीं की जा सकती है कि सिर्फ एक बड़े ईवेंट जैसे आईपीएल और चैंपियंस ट्रॉफी से इंडस्‍ट्री की स्थिति बेहतर हो जाएगी। नोटबंदी से पहले 9X Media की ग्रोथ दो अंकों (double digit) में थी और अब यह वापस अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ रही है।’

हालांकि ‘हवस मीडिया ग्रुप’(Havas Media Group, India and South Asia) की सीईओ अनीता नैय्यर को डबल डिजिट की ग्रोथ में संदेह है लेकिन उनका मानना है कि वर्ष 2017 के मध्‍य से इंडस्‍ट्री फिर अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ जाएगी। अनीता का कहना है, ‘इस समय कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता है कि इंडस्‍ट्री की ग्रोथ एक अंक अथवा दो अंक में होगी। लेकिन अगस्‍त तक चीजें बेहतर होने की उम्‍मीद है। मुझे उम्‍मीद है कि साल के मध्‍य से चीजें सुधरनी शुरू होंगी क्‍योंकि यह त्‍योहारी सीजन है।’

‘एलाइड मीडिया नेटवर्क’ (Allied Media Network) के सीईओ पीएम बालाकृष्णन ने उम्मीद जताई है कि अगली तिमाही से इंडस्‍ट्री काफी बेहतर स्थिति में आ जाएगी। उनका कहना है, ‘सभी कैटेगरी जैसे ऑटोमोबाइल, टेलिकॉम आदि फिर से वापस आ रही हैं। जमीनी स्‍तर पर भी काफी अच्‍छे संकेत दिखाई दे रहे हैं और नए साल के बजट में यह चीजें वास्‍तविक रूप में दिखाई देने लगेंगी। आने वाले समय में इंडस्‍ट्री की हालत ठीक वैसी ही अच्‍छी हो जाएगी जैसी नोटबंदी से पहले थी। अ्रपैल 2017 से मार्च 2018 वित्‍तीय वर्ष में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिलेगा और इसकी ग्रोथ दो अंकों में (10-11 प्रतिशत) हो जाएगी।’

‘मीडियाकॉम’ (MediaCom) के मैनेजिंग डायरेक्टर देबराज त्रिपाठी ने उम्मीद जताई है कि अप्रैल तक या ज्‍यादा से ज्‍यादा जून 2017 तक इंडस्‍ट्री फिर से अपनी पहले वाली स्थिति में वापस आ जाएगी। उनका कहना है, ‘इनवेस्‍टमेंट फिर से होना शुरू हो गया है हालांकि अभी यह वैसा नहीं है, जिसकी हमें उम्‍मीद थी। हमें उम्‍मीद है कि मार्च अथवा अप्रैल के मध्‍य तक चीजें फिर और बेहतर होने लगेंगी।’ उन्‍होंने उम्‍मीद जताइ कि इस साल टेलिविजन की बढ़ोतरी की दर (growth rate) आठ प्रतिशत हो सकती है।

इन चीजों का पड़ेगा प्रमुख प्रभाव

नोटबंदी के कारण FMCG  के सबसे ज्‍यादा प्रभावित होने के बावजूद ब्रॉडकास्टिंग इंडस्‍ट्री को उम्‍मीद है कि यह सेक्‍टर फिर बेहतर स्थिति में आएगा और इसका ऐड रेवेन्‍यू भी बढ़ेगा। ‘पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2017’ (Pitch Madison Advertising Report 2017) के अनुसार, FMCG प्‍लेयर्स की ग्रोथ से इंडस्‍ट्री को 21,300 करोड़ रुपये का आंकड़ा प्राप्‍त करने में काफी मदद मिलेगी। पतंजलि आयुर्वेद द्वारा विज्ञापन में किए जा रहे जबरदस्‍त खर्च से भी इसे काफी रफ्तार मिलेगी। इसके अलावा अन्‍य FMCG कंपनियों भी इसमें अहम भूमिका निभाएंगी।

मार्केट रिसर्च फर्म ‘नील्‍सन’ (Nielson) के अनुसार, दिसंबर 2016 और जनवरी 2017 में फूड और नॉन फूड सेगमेंट में FMCG सेक्‍टर की ग्रोथ 11 प्रतिशत थी। इस फर्म द्वारा दिसंबर 2016 में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में कंज्‍यूमर गुड्स सेल में उसके पिछले महीने के मुकाबले 1 से 1.5 प्रतिशत की कमी आई थी। इस बारे में एमके आनंद का कहना है, मेरा मानना है कि विभिन्‍न महत्‍वपूर्ण ऐड कैटेगरी जैसे ऑटो, टेलिकॉम, बैंकिंग, ई-कॉमर्स आदि फिर वापस आएंगी।

वहीं ढांडा ने भी ऑटोमोबाइल के साथ इन कैटेगरी में पिछली तिमाही के मुकाबले काफी अच्‍छे प्रदर्शन की उम्‍मीद जताई है। उन्‍होंने कहा, ‘ऑटोमोबाइल में फरवरी 2017 में सबसे ज्‍यादा सेल हुई। ऐसा सिर्फ डिस्‍काउंट और ब्‍याज दरों में कटौती की वजह से नहीं हुआ है। यह काफी अच्‍छे संकेत हैं। यदि एक-दो महीने स्थिति ऐसी ही रही तो ऑटोमोबाइल कैटेगरी का इस दिशा में काफी अच्‍छा योगदान होगा। इसके अलावा गर्मी शुरू हो रही हैं ऐसे में FMCG में साबुन, पाउडर और फेयरनेस क्रीम का भी ग्रोथ बढ़ाने में अहम योगदान रहेगा, नोटबंदी का भी इन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़़ा था। जैलखानी ने भी उम्‍मीद जताई कि FMCG, टेलिकॉम, ऑटोमोबाइल  और ई-कॉमर्स कंपनियां भी अगली दो तिमाही में विज्ञापन पर ज्‍यादा खर्च करेंगी। उनका कहना है कि छोटे शहरों से ग्रोथ ज्‍यादा मिल रही है।

हालांकि लगभग सभी एक्‍सपर्ट की इस बारे में एक जैसी राय है। वहीं नायर ने उम्‍मीद जताई है कि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्‍ट्री की ग्रोथ में सरकार भी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी। उनका कहना है कि FMCG, ऑटोमोबाइल, मोबाइल वॅालेट आदि की इस दिशा में अहम भूमिका होगी लेकिन सरकार भी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्‍ट्री के लिए रेवेन्‍यू जुटाने में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्‍योंकि पिछले चुनावों में पांच राज्‍यों में राज्‍य व केंद्र सरकार से अच्‍छा इनपुट मिला है। इनसे विज्ञापन भी अच्‍छे मिले हैं, इसलिए उम्‍मीद है कि अगले ढाई साल में भी सरकार विज्ञापन पर ठीकठाक खर्च करेगी। ब्रॉडकास्‍ट इंडस्‍ट्री को उम्‍मीद है कि सरकार विभिन्‍न समस्‍याओं से निपटने में मदद करेगी।

बालाकृष्‍णन का भी मानना है कि FMCG से ब्रॉडकास्‍टर सेक्‍टर को काफी मजबूती मिलेगी। उनका कहना है, ‘इंश्‍योरेंस, ऑटोमोबाइल और फाइनेंस सर्विस ने अच्‍छा प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऐसे में इस बात पर कोई शक नहीं है कि FMCG भी ग्रोथ करेगा। एक बार मांग और आपूर्ति में बेहतर तालमेल शुरू हो जाने के बाद से चीजें बदलने लगेंगी और यह जून 2017 के बाद से होने की उम्‍मीद है। त्रिपाठी ने भी बालाकृष्‍णन की बात का समर्थन करते हुए कहा कि मार्च तक FMCG अपनी पुरानी स्थिति में लौट आएंगी। ऑटोमोबाइल की भी वापसी होगी। हालांकि लग्‍जरी चीजों को वापस आने में थोड़ा समय लगेगा, रियल एस्‍टेट की रफ्तार भी थोड़ी सुस्‍त रहने की संभावना है।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन ने बार्क इंडिया के समक्ष फिर उठाया ये मुद्दा

तमाम आरोपों पर टीवी9 के सीईओ बरुण दास ने कहा कि कंपनी की छवि धूमिल करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
BARC INDIA

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स और देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के बीच टीवी चैनल्स की रेटिंग्स का मुद्दा अभी भी छाया हुआ है। एक नए घटनाक्रम में ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (NBF) ने न सिर्फ बार्क के समक्ष रेटिंग्स को लेकर चिंता जताई है, बल्कि रेटिंग एजेंसी की अखंडता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।

एनबीएफ की ओर से भेजे गए लेटर में कहा गया है, ‘इस बात के सबूत हैं जो टीवी9 ग्रुप द्वारा बार्क के मीटरों में हेरफेर और छेड़छड़ का संकेत देते हैं। 10 जून से लेकर हमने कई बार बार्क को इस बारे में अवगत कराया है। हालांकि, आपने स्वीकार किया है कि ये गंभीर आरोप हैं, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।’

एनबीएफ की ओर से यह भी कहा गया है,‘आपकी रेटिंग्स में कथित विसंगति की ओर इशारा करते हुए हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो काफी समय से चर्चा में हैं। इन टेप्स से पता चलता है कि चैनल देखने में बिताए जाने वाले औसत समय (Average Time Spent) के डाटा में कृत्रिम रूप से बढ़ोतरी के लिए किसी खास सिस्टम (a well-oiled system) का प्रयोग किया गया।’

11 जुलाई को बार्क को भेजे गए लेटर में एनबीएफ ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन्हें आप हूबहू यहां पढ़ सकते हैं।

1: TAPES ESTABLISH WANTON CONSPIRACY TO MANIPULATE BARC DATA: It is incomprehensible how on public platforms BARC has gone on to make an assertion that the videos showing manipulation of BARC data are “fake”. In the interest of transparency and fairplay, it is paramount that the details of the third party auditor who determined the visual evidence is fake be made public. This is especially crucial considering these videos, prima facie, establish a wanton conspiracy to manipulate BARC data right under the nose of the organisation.

2: 6 VIDEOS PROVE WELL-OILED SYSTEM TO ARTIFICIALLY MANIPULATE TSVs: The six shocking videos show how homes with BAR-O-meters were identified in a categorical manner, and payments were allegedly made by TV9 to ensure the channel is turned-on for a fixed minimum period on a daily basis. The tapes indicate a well-oiled system was put in place to artificially increase Average Time Spent data.

3: POSSIBLE BREAKDOWN OF BARC SYSTEM: If any of the abovementioned videos are true, then they point to a breakdown of BARC systems, and a complete compromise of the BARC sample. If the videos are true, they prove beyond doubt that BARC’s claims of being a ‘transparent, accurate, and inclusive TV audience measurement system’ are incorrect. Any attempt to dismiss this as a solitary instance would be shocking and scurrilous, considering there is not one, not two but at least 6 videos from different homes all fitted with BARC meters that appear to have been compromised.

4: BARC PRECEDENT OF SUSPENDING RATINGS HAS NOT BEEN APPLIED: BARC’s inaction on the allegations against the TV9 Group and TV9 Bharatvarsh raise questions on whether the organisation is acting prejudicially. In the past, allegations of tampering with BARC meters has led to suspension of ratings of channels. BARC had in 2016, suspended the ratings of TV9’s Telugu news channel, V6 News and India News on similar charges, the non-application of this precedent in the current case raises massive questions of bias.

5: INTEGRITY & IMPARTIALITY OF BARC IN QUESTION: Exercise and mechanism on which BARC is operating and determining ratings. The lack of confidentiality of metered homes indicates there are gaping holes in what should be an impartial process of ratings determined by BARC reliable data, however, should TV9 go uninvestigated the integrity of the entire system stands tainted. It is now incumbent upon BARC to make it expressly clear, whether or not they acknowledge any and all of the videos annexed herewith.

6: COMPLICITY OF THE CHANNEL’S HIGHER MANAGEMENT TO BE INVESTIGATED: Significant to note that should following incontrovertible conclusions: One, that cash payments are being made to viewers by the TV9 Group and Two, that TV9 has access to the homes that have been metered by BARC. This would not be possible without complicity at a higher managerial level of the network involved. BARC is already aware that TV9 is centrally controlled with a common board of directors for the entire network, and a joint management. TV9 Telugu, TV9 Marathi, TV9 Guj TV9 Kannada, TV9 Bharatvarsh and NEWS9 are all part of one operation. Therefore, evidence of manipulation by one of the network channels comes with an implicit allegation of corrupt practice by the remaining TV9 network entities.

7: INTEGRITY & IMPARTIALITY OF BARC IN QUESTION: The videos raise questions on the entire exercise and mechanism on which BARC is operating and determining ratings. The lack of metered homes indicates there are gaping holes in what should be an impartial process of ratings determination by BARC. The fulcrum of operation of BARC is to provide reliable data, however, should TV9 go uninvestigated the integrity of the entire system tands tainted. It is now incumbent upon BARC to make it expressly clear, whether or not they acknowledge any and all of the videos annexed herewith.

8: COMPLICITY OF THE CHANNEL’S HIGHER MANAGEMENT TO BE INVESTIGATED: Significant to note that should the any of the videos be proven to be authentic it leads to the following incontrovertible conclusions: One, that cash payments are being made to viewers by the TV9 Group and Two, that TV9 has access to the homes that have been metered by BARC. This ot be possible without complicity at a higher managerial level of the network involved. BARC is already aware that TV9 is centrally controlled with a common board of directors for the entire network, and a joint management. TV9 Telugu, TV9 Marathi, TV9 Guj TV9 Kannada, TV9 Bharatvarsh and NEWS9 are all part of one operation. Therefore, evidence of manipulation by one of the network channels comes with an implicit allegation of corrupt practice by the remaining TV9 network entities.

9: The overall trend across news channels from Week 7 to Week 26 has been that of an 11% increase in Time Spent (TSV). The one exception to the pattern is TV9, which has seen a massive 93% increase in TSV over the last 20 weeks.

10: In fact, while most channels showed a maximum increase in TSVs of upto 13%, TV9 Bharatvarsh was the only channel in the genre to mark up a 93% increase in the period. While there is no doubt that a single channel can see an increase in time spent due to the nature of the news story they are covering, it is completely unprecedented that one channel sees such a large spike in Average Time Spent (TSVs) completely at odds with the rest of the industry. TV9 PERFORMANCE DEFIES BARC’S BIO NEWS ANALYSIS

11: BARC’s own content analysis tool BIO News indicates that TV9 Bharatvarsh has measly onlocation coverage compared to its contemporaries in the genre. This casts further doubts on the credibility of the ratings TV9 has been receiving on account on an increase in Average Time Spent. BARC must provide an explanation as to how a channel with some of the lowest on location coverage has been seeing a disproportionate increase in time spent defying genre trends.
Ignoring the plausible gross malpractice by the organization and shielding it at the current juncture would raise serious questions on the credibility, robustness and dependability of BARC.

वहीं, इस लेटर के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए टीवी9 के सीईओ बरुण दास ने हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से कहा, ‘बार्क इन वीडियोज की सत्यता से पहले ही इनकार कर चुका है। इस संदर्भ में, ऐसा प्रतीत होता है कि एनबीएफ पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए इन गुमनाम नकली वीडियोज की सत्यता का समर्थन कर रहा है। संयोग से मुझे भी कुछ ऐसे वीडियोज मिले हैं। किसी भी मामले में हम अपनी कंपनी की छवि खराब करने के लिए इस तरह के दुर्भावनापूर्ण प्रचार के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठा रहे हैं।’

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डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनने का सपना देख रहे युवा प्रफेशनल्स को FB इंडिया के MD की सीख

फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन ने ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
Ajit Mohan

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था में से एक है, जो चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में 480 मिलियन से ज्यादा एक्टिव इंटरनेट यूजर्स हैं, जो इसे दुनियाभर में एक महत्वपूर्ण विकासशील मार्केट बनाते हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी किस तरह से कंज्यूमर्स के व्यवहार को प्रभावित करती है? और वैश्विक स्तर पर भारत एक महत्वपूर्ण डिजिटल बाजार क्यों है? यह समझने के लिए ‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया गया। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक आयोजित इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से इन मुद्दों पर चर्चा की।

वर्तमान दौर के बारे में अजीत मोहन का कहना था कि भारत इन दिनों मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है और कोरोनावायरस (कोविड-19) से लड़ाई में भारत के सहयोग के लिए फेसबुक आर्थिक के साथ-साथ स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी अपना योगदान देने का प्रयास कर रही है। अजीत मोहन ने कहा, ‘हेल्थ केयर के मोर्चे पर फेसबुक ने सरकार के साथ हाथ मिलाया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां के लोगों के पास स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी उपलब्ध हो। इसके अलावा हमने छोटे व्यवसायों के लिए 100 मिलियन डॉलर का ग्लोबल फंड भी तैयार किया है।’

फेसबुक एमडी के अनुसार, उनकी कंपनी ने ‘कोविड-हब’ (Covid-hub) तैयार किया है, यह एक इंफॉर्मेशन पोर्टल है, जहां पर लोग एक क्लिक कर महामारी से संबंधित सभी सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘करीब दो बिलियन लोगों ने इस हब को देखा है और 350 मिलियन से ज्यादा लोगों ने इस पर क्लिक किया है और सक्रिय रूप से वहां से जानकारी ले रहे हैं।’ अजीत मोहन ने बताया कि भारत के आर्थिक पुनरुद्धार (economic revival) खासकर छोटे व्यवसायों के पुनरुद्धार पर फेसबुक का फोकस है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि छोटे व्यवसायों की मदद करने, बाजारों को सक्रिय करने, कस्टमर्स तक पहुंचने के मामले में यह हमेशा हमारी विशेष ताकत रही है।’   

इस चर्चा के दौरान यह पूछे जाने पर कि कंपनी की वैश्विक योजनाओं में भारत की स्थिति क्या है? अजीत मोहन का कहना था कि फेसबुक के लिए भारत काफी महत्वपूर्ण बाजार है। उन्होंने कहा, ‘हमने ‘जियो’ (Jio) में 5.7 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। इससे साफ पता चलता है कि भारत की ओर हमारा झुकाव कितना है। फेसबुक और वॉट्सऐप पर सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। यहां पर इंस्टाग्राम भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में इन तीनों ऐप्स की भूमिका बहुत ज्यादा है और बड़ी संख्या में यहां के लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हम इस वास्तविकता से इनकार नहीं कर सकते हैं कि अधिकांश लोगों की दिनचर्या वॉट्सऐप से ही शुरू होती है और इससे ही खत्म होती है। फेसबुक भी दोस्तों और परिवार से जुड़ने में काफी महत्वूर्ण भूमिका निभाती है।’

भारत के महत्व पर जोर देते हुए अजीत मोहन ने यह भी कहा, ‘यदि आप पिछले पांच वर्षों को देखें तो पता चलेगा कि भारत को बदलने में डिजिटल की विशेष भूमिका रही है। चीन समेत कोई भी ऐसा देश नहीं है, जहां पर चार सालों में हमने 400-500 मिलियन लोगों को ऑनलाइन आते हुए और मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हुए देखा है। जियो ने इसमें काफी प्रमुख भूमिका निभाई है। भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ी है और इंटरनेट की दरें काफी सस्ती हुई हैं, यह तो सिर्फ शुरुआत है। इससे सभी प्रकार के उद्योगों को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिला है। अभी हम कंज्यूमर्स को ऑनलाइन लेकर आए हैं और हमारा अगला काम 60 मिलियन छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन लेकर आना है।’

अजीत मोहन ने इसके साथ यह भी जोड़ा कि एक अमेरिक टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में फेसबुक का मानना है कि भारत एक खुला लोकतांत्रिक देश है। यहां फेसबुक सभी के लिए एक ओपन प्लेटफॉर्म है। इस दौरान अजीत मोहन ने इंस्टाग्राम में हाल के दिनों में हुई ग्रोथ और पिछले दिनों लॉन्च किए गए इसके शॉर्ट फॉर्म विडियो प्रॉडक्ट ‘रील्स’ (Reels) के बारे में भी बातचीत की। अजीत मोहन का कहना था, ‘देश में इंस्टाग्राम में हुई ग्रोथ अभूतपूर्व है। इसने वैश्विक संस्कृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें शॉर्ट फॉर्मेट के वीडियो तैयार करने में अवसर दिखे हैं और हमने अब इसके लिए रील्स को लॉन्च किया है।‘

इस मौके पर फेसबुक के एमडी ने यह भी बताया कि दुनिया में सबसे पहले रील को कहीं और की जगह भारत में ही क्यों लॉन्च किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब भी हम किसी प्रॉडक्ट को कहीं लॉन्च करने के बारे में सोचते हैं, भारत उस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इस नए प्रॉडक्ट को लॉन्च करने का आइडिया काफी पहले से था, अब इसे लागू करने का सही समय था। यदि हम इंस्टाग्राम की ग्रोथ देखें तो यह काफी तेजी से हुई है।’ अजीत मोहन ने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें बड़े शहरों की तुलना में  छोटे कस्बों और शहरों से कंटेंट निर्माण में बढ़ोतरी देखने को मिली है औऱ इससे उन्हें समझ आया कि इंस्टाग्राम ने सोसायटी में कितनी गहराई तक अपनी जगह बना ली है। मौजूदा समय में इंस्टाग्राम बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी के साथ-साथ उनके फॉलोअर्स के लिए एक जगह बन गया है और यह ऐसा ही रहेगा, पर रील्स ने नए क्रिएटर्स के लिए भी रास्ते खोले हैं।

ऐसे युवा प्रफेशनल्स जो डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनना चाहते हैं और नई चीजें सीखना चाहते हैं, उन्हें सलाह देते हुए सेशन के आखिर में अजीत मोहन ने कहा, ‘चीजों को जानने-समझने और उसके अनुसार निर्णय लेने के साथ सीखने की दक्षता (learning agility) ये दो लीडरशिप स्किल हैं और इनका अभ्यास करना चाहिए।’

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पत्रकार खुदकुशी केस में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने की ये बड़ी कार्रवाई

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
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दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स ट्रॉमा सेंटर (जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि 6 जुलाई को कोरोना पाड़ित पत्रकार ने AIIMS के ट्रामा सेंटर की चौथी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पत्रकार की पहचान करीब 34 वर्षीय तरुण सिसोदिया के रूप में हुई थी, जो दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। सिसोदिया कोरोना पॉजिटिव थे और इलाज के लिए एम्स में भर्ती थे।

हालांकि पत्रकार की आत्महत्या की जांच के लिए केंद्रीय मंत्री ने एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे और 48 घंटे के अंदर जांच की रिपोर्ट मांगी थी। इस जांच समिति में चीफ ऑफ न्यूरोसाइंस सेंटर से प्रोफेसर पद्मा, मनोचिकित्सा विभाग के हेड आरके चड्ढा, डिप्टी डायरेक्टर (एडमिन) डॉ. पांडा और डॉ. यू सिंह शामिल रहे।

4 सदस्यों की इस कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 संक्रमित पत्रकार द्वारा कथित तौर पर की गई आत्महत्या के मामले में एम्स द्वारा की गई जांच में पत्रकार की मौत के पीछे किसी गलत नीयत के होने का प्रमाण नहीं मिला है और न उसके इलाज की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पाई गई है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स और जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रशासन में आवश्यक बदलाव के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि समिति 27 जुलाई तक अपने सुझाव सौंपेगी।

बता दें कि दिल्ली के भजनपुरा के रहने वाले पत्रकार तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण कथित तौर पर एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह से घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि कुछ दिन पहले एलएनजीपी अस्पताल में उनके ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई थी।  

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

वहीं तरुण की पत्नी मोनिका का कहना है कि मेरे पति को कोरोना वॉरियर का सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी उनके पति अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे। उन्होंने आखिरी वक्त तक कोरोना से जुड़ी जानकारियां समाज तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं की। हमेशा अपने काम को तवज्जो देते रहे। उनकी मौत के बाद दूसरा कोई सहारा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि उनके पति को कोविड वॉरियर का सम्मान मिले जो, उनका अधिकार है।

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BCCI के CEO पद से अलग हुए राहुल जौहरी, इस्तीफा मंजूर

बीसीसीआई का सीईओ बनने से पहले राहुल डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Rahul5454

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सीईओ राहुल जौहरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल जौहरी ने पिछले साल दिसंबर में ही अपना पद छोड़ने का फैसला कर लिया था, जब बीसीसीआई द्वारा गांगुली के नेतृत्व में एक नया प्रशासक चुना गया था, लेकिन तब उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। बताया जाता है कि बोर्ड ने अब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। 

अप्रैल 2016 में बीसीसीआई के सीईओ का पद संभालने वाले राहुल उससे पहले डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

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BW Dialogue: 10 जुलाई को नजर आएंगे फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन, होगी दिलचस्प चर्चा

​​​​​​​‘बिजनेस वर्ल्ड’ ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
anuragsir8745

‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक चलने वाले इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से चर्चा करेंगे।

बता दें कि ‘बीडब्‍ल्‍यू डायलॉग’ ऐसा मंच है, जिसके जरिये ऐसे प्रख्यात व्यक्तियों, सेलेब्रिटीज और अचीवर्स से बात कर उनसे उनकी जिंदगी, उनके बिजनेस और उनके नेतृत्व क्षमता के बारे में जानने की कोशिश की जाती है, ताकि उनकी सफलता की कहानी को दुनिया के सामने लाया जा सके। ये सेलिब्रिटीज विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े होते हैं फिर चाहे वे किसी स्पोर्ट्स से हों, आर्टिस्ट हों, एक्टर हों या फिर कोई लेखक। ये वे लोग हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, प्रदर्शन और कार्यक्षमता से अपने क्षेत्र में लोहा मनवाया है।

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प्रिंट और डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने कही ये बात

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित फिल्म्स और टीवी के लिए सरकार जल्द करेगी प्रोत्साहन की घोषणा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
Amit Khare

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सेक्रेट्री अमित खरे ने कहा कि सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक स्वतंत्रता लाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के मामले में सरकार प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एक समान व्यवस्था (level playing field) के बारे में भी सोच रही है। खरे का कहना है, ’प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी 26 प्रतिशत एफडीआई लागू होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया पर लागू एफडीआई के नियम न्यूज एग्रीगेटर्स (news aggregators) पर भी लागू होने चाहिए। बता दें कि एग्रीगेटर्स इनशॉर्ट्स और डेलीहंट जैसे ऐप्स या वेबसाइट्स हैं जो अन्य पब्लिशर्स से उनके कंटेंट को क्यूरेट करती हैं और पाठकों के लिए कंटेंट को पर्सनलाइज करने के लिए एल्गोरिदम (algorithms) का इस्तेमाल करती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कहीं और से कंटेंट लेकर उसे अपने यहां इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इसकी घोषणा नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह मेरी भूमिका नहीं है, लेकिन इस बात को लेकर काफी गंभीरता से विचार चल रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रिंट मीडिया के बीच एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। इस बारे में सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही किसी तरह की घोषणा की जाएगी।’

बता दें कि पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी प्रदान की थी। इससे पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए ही यह मंजूरी थी। न्यूज चैनल्स के लिए 49 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी मिली हुई है। फिक्की फ्रेम्स 2020 के 21वें एडिशन (ऑनलाइन) में ‘Shaping the Future of M&E in Today’s Digitalised and Information Driven Economy’ सेशन के दौरान खरे ने कहा कि लेवल प्लेयिंग फील्ड का मतलब मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारी रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के अधीन लाना नहीं है। खरे ने कहा, ‘सरकार द्वारा पिछले छह सालों के दौरान बिजनेस को आसान करने और कम लेकिन प्रभावी रेगुलेशन पर फोकस किया गया है। अब कुछ और नए रेगुलेशंस लाने का विचार है, इन्हें लागू करना आसान होगा और इससे अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।’   

बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय इन दिनों अपने तमाम नियमों और अधिनियमों में संशोधन कर रहा है। जैसे- सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) अधिनियम आदि। खरे का कहना था कि विभिन्न मीडिया के लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं हैं, जैसे-प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और फिल्मों के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड हैं। उन्होंने कहा कि  नेटफ्लिक्स और डिज्नी+हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान व्यवस्था (लेवल प्लेयिंग फील्ड) तैयार किया जाना है, जो अभी तक किसी भी नियामक दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि कम रेगुलेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी स्ट्रक्चर को सिंक (sync) किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दायरे में आते हैं, अब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस तरह के कंटेंट को भी अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

खरे के पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का प्रभार भी है। इस मंत्रालय ने महामारी के मद्देनजर छात्रों की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल को बढ़ावा दिया है। खरे ने कहा कि महामारी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बढ़ गई है। मानव संसाधन विकास को मीडिया और मनोरंजन के साथ जोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग पर कई वीडियो आ गए हैं। उनका कहना था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ज्यादा स्वंतत्रता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है और यह एक नियामक (रेगुलेटर) से अधिक एक सूत्रधार और एजुकेटर के रूप में काम करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो मैसेज के जरिये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित फिल्म और टीवी प्रॉडक्शन के लिए सरकार जल्द ही प्रोत्साहन का ऐलान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिल्म और टीवी शूट्स के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) लेकर आएगी।

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CM, अखबार के संपादक समेत 4 लोगों को 50 करोड़ की मानहानि का मिला नोटिस

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
court5497

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। रघुवर दास ने रांची से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के संपादक को भी नोटिस दिया है। झूठी व भ्रामक खबर फैलाकर उन्हें बदनाम करने को लेकर यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता विनोद कुमार साहू के माध्यम से भेजा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि पूर्व सीएम रघुवर दास पर लगाए गए आरोप में अखबार के संपादक व वर्तमान सरकार की मिलीभगत है। इससे उनकी छवि धूमिल कर बदनाम करने के मकसद से किया गया है। इस कारण लीगल नोटिस सीएम हेमंत सोरेन, अखबार के संपादक समेत चार लोगों पर 50 करोड़ की मानहानि का दावा किया है।

दरअसल मामला यह है कि 27 जून 2020 को एक अखबार ने यह खबर छापी की रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी को 'वंडर कार' बनाने का ऑर्डर दिया था। मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास ने बेंटले कार का ऑर्डर 2018 में इंग्लैंड की एक कंपनी को दिया था, जिसके एवज में उन्हें 40 लाख रुपए एडवांस भुगतान किया था। लेकिन जब इंग्लैंड की कंपनी ने कार बनाने से इनकार किया, तो यह ऑर्डर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की किसी कंपनी को दे दिया।  साथ ही यह खबर प्रकाशित हुई कि नई सरकार के गठन के पश्चात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गाड़ी का मूल्य देखते हुए ऑर्डर को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसे फिजूलखर्ची मानते हैं। वहीं यह बात भी लिखी गई थी कि बेंटले कंपनी ने ऑर्डर के बारे में झारखंड सरकार को ईमेल भेजा है। इसके बाद जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हुई।

 वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को गलत बताया है, जिसके चलते उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हेमंत सोरेन और अखबार के संपादक को लीगल नोटिस भेजा है।

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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के थिंक-टैंक में न्यूज एंकर तरुण नांगिया कुछ यूं देंगे योगदान

IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
TarunNangia

जाने-माने सीनियर न्यूज एंकर तरुण नांगिया को भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले थिंक-टैंक ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स’ (IICA) के लिए गठित मॉनिटरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है। IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे।  

नंगिया के कंधों पर IEPFA को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता व सुरक्षा, विवादों से बचने के लिए सलाह, मीडिया प्रसार से संबंधित सलाह और निवेशक जागरूकता और सुरक्षा के लिए अन्य गतिविधि की पेशकश करना शामिल है। इस कार्य में भारतीय निवेशकों के बीच वित्तीय साक्षरता में सुधार करना भी शामिल है, जिससे आर्थिक रूप से लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई जा सके।

‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत टीवी सीरीज के प्रॉडक्शन और टेलिकास्ट से संबंधित प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित IICA मॉनिटरिंग कमेटी में नांगिया को एक सदस्य (मीडिया एक्सपर्ट) के रूप में नामित किया गया है।

वर्तमान में तरुण नांगिया बतौर एसोसिएट एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) आईटीवी ग्रुप (ITV Group) से जुड़े हुए हैं और लोकप्रिय साप्ताहिक टेलिविजन शो ‘लीगली स्पीकिंग’ (Legally Speaking), 'पॉलिसी एंड पॉलिटिक्‍स' (Policy & Politics) और ‘ब्रैंड स्टोरी’ (Brand Story) को प्रड्यूस और होस्ट करते हैं। नंगिया ‘द डेली गार्जियन’ अखबार में Legally Speaking, Policy & Politics आर्टिकल भी क्यूरेट और एडिट करते हैं।

बता दें कि IEPFA एक फंड है, जो सेबी और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के गाइडेंस के तहत स्थापित किया जाता है।  

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'मीडिया इंडस्ट्री को आगे ले जाना है, तो यह बदलाव करना होगा जरूरी'

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
uday Shankar

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है। ये कहना है ‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney Company) कंपनी के एशिया प्रशांत के प्रेजिडेंट व फिक्की के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट उदय शंकर का। उन्होंने कहा कि विज्ञापन पर निर्भरता उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने महामारी के दौरान इसका सामना किया है।

हालांकि, उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस प्रकट किया कि भारतीय मीडिया उद्योग, विशेषकर प्रिंट, टीवी और डिजिटल क्षेत्र व्यापक स्तर पर विज्ञान राजस्व पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से साबित हुआ है कि यह व्यवस्था उद्योग के लिए काफी नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, ‘यदि उद्योग को आगे बढ़ना है तो उसे विज्ञापन पर निर्भरता कम करनी होगी।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महामारी के कारण हम सभी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि यह अस्थायी हैं, पर हम इसे आसानी से दूर कर सकते हैं। फिलहाल हम एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ चीजों में बदलाव करने की जरूरत है और मुझे लगता है कि अगले कुछ वर्षों में हमें इस पर ध्यान जरूर देना चाहिए कि इन सभी को कैसे बदलना है।’

उन्होंने कहा कि विशेषरूप से प्रिंट, टीवी और अब डिजिटल के लिए सबसे बड़ा अभिशाप यह है कि ये विज्ञापन पर कुछ जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं और वह भी इतना कि यह मीडिया को कस्टमर्स के साथ सीधा संबंध बनाने से रोकता है। उदय शंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मीडिया उद्योग उपभोक्ताओं के साथ अपने संबंधों के बल पर आगे बढ़ा है।

फिक्की फ्रेम्स के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह उद्योग बढ़कर 20 अरब डॉलर का हो गया है। इसमें से 10 अरब डॉलर के राजस्व का योगदान अकेले विज्ञापन का है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘हम सभी इसके लिए दोषी हैं। हमने दूरदर्शिता नहीं दिखाई, हमने अपने उत्पाद पर सब्सिडी लेने का प्रयास किया और छोटी चुनौतियों के लिए अड़चनें खड़ी कीं।’ शंकर ने कहा कि मीडिया उद्योग में दूरदर्शिता की कमी की वजह यह है कि बरसों से यह काफी हद तक विज्ञापनों पर कुछ अधिक निर्भर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘यदि हमें उद्योग को अगले स्तर पर ले जाना है, तो एक चीज निश्चित रूप से करने की जरूरत है। वह है, उपभोक्ता जो इस्तेमाल करें, उसके लिए भुगतान करें। इसके लिए हमें अपनी क्षमता का इस्तेमाल करना होगा और इच्छाशक्ति दिखानी होगी, क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे उद्योग बढ़ सकता है।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश में प्रिंट और फिल्में बहुत अच्छा कर रही हों, लेकिन अभी और भी बहुत कुछ किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वह उद्योग की लॉबी से जुड़े हुए हैं और देखा है कि पिछले कुछ साल में चीजें काफी बदल गई हैं।

उदय शंकर ने कहा, ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र रचनात्मक अर्थव्यवस्था का एक अहम भाग है। यह रोजगार और कारोबार पैदा कर सकता है, साथ ही भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।’  

उदय शंकर ने कहा कि इस साल कोविड-19 की वजह से उद्योग को बड़ा झटका लगेगा। विज्ञापन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से इसका प्रभाव और अधिक ‘कष्ट’ देने वाला होगा।

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मीडिया-मनोरंजन सेक्टर में नौकरियों को लेकर वित्त राज्य मंत्री ने कही ये बात

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Anuragthakur

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे। ये कहना है केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का। उन्होंने कहा कि घर से काम करने की व्यवस्था (वर्क फ्रॉम होम) आगे भी जारी रहेगी।

ठाकुर ने उद्योग मंडल फिक्की के एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन की स्थिति ने हमें दिखा दिया है कि घर से काम करने की व्यवस्था जारी रहेगी। हमें इस संकट में अवसरों को खोजना चाहिए। यह भारत के लिए आगे बढ़ने का सही समय है। ऐसे में मीडिया और मनोरंजन नौकरी देने वाले बड़े सेक्टर के रूप में उभर सकता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फिक्की फ्रेम में अपने विचार साझा करते हुए आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से हमें तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में ठाकुर ने कहा कि रचनात्मक कार्यों का क्षेत्र एक उच्च वृद्धि वाला क्षेत्र है। यदि इसको ठीक से पोषित किया जाए तो यह प्रतिस्पर्धा, उत्पादकता, सतत वृद्धि और रोजगार को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है और देश की निर्यात क्षमता को बढ़ा सकता है। भारत के सामने बड़ी चुनौती बौद्धिक संपदा अधिकारों और कॉपीराइट के डिजिटलीकरण, कुशल कार्यबल और वितरण नेटवर्क तक पहुंच की है। मीडिया और मनोरंजन उद्योग पूरी तरह से विज्ञापन पर निर्भर है जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी आय का मुख्य जरिया वितरण नेटवर्क और उपयोक्ताओं से आने वाला पैसा है। इन सभी पहलुओं को साथ लाने की जरूरत है ताकि आय और वृद्धि के नए रास्ते बनाए जा सकें।

ठाकुर ने कहा कि उनका मंत्रालय 20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू कर रहा है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के बेहतर प्रभाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोविड-19 संकट से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में उद्योग और नागरिकों के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य उसे इस तरह के अभूतपूर्व संकट से बाहर निकालेगा। 

 

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