चुनाव आयोग के रडार पर आया दूरदर्शन, अब देना होगा इन सवालों का जवाब

लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही तमाम राजनीतिक दल सक्रिय हो गए...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 April, 2019
Last Modified:
Wednesday, 03 April, 2019
Doordarshan

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही तमाम राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। इसके साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। इन सबके बीच चुनाव आयोग ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। चुनाव आयोग नहीं चाहता कि किसी भी हाल में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो। इसी के तहत 31 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दूरदर्शन पर ‘मैं भी चौकीदार’ का प्रसारण भी चुनाव आयोग के रडार पर आ गया है।

चुनाव आयोग ने इस संबंध में दूरदर्शन को पत्र लिखा है। इस पत्र में चुनाव आयोग ने पूछा है कि 31 मार्च को राष्ट्रीय प्रसारक ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक संबोधन 'मैं भी चौकीदार' का एक घंटे का लाइव प्रसारण क्यों चलाया? इस बारे में चुनाव आयोग ने दूरदर्शन से जवाब मांगा है।

दरअसल, चुनाव आयोग में दूरदर्शन द्वारा ‘मैं भी चौकीदार’ के लाइव प्रसारण को लेकर कई शिकायतें आई थीं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने शिकायत की थी कि लोकसभा चुनाव के दौरान इस तरह से आचार संहिता का उल्लंघन किया जा रहा है।

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Netflix के 2 अधिकारियों के खिलाफ FIR, जानें मामला

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
Netflix5

वेबसीरिज ‘ए सूटेबल बॉय’ (A Suitable Boy) में आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स  (Netflix) के 2 अधिकारियों पर मध्य प्रदेश में एफआईआर दर्ज कराई गई है। वेबसीरीज के एक सीन को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में नेटफ्लिक्स की वाइस प्रेजिडेंट (कंटेंट) मोनिका शेरगिल और निदेशक (पब्लिक पॉलिसी) अंबिका खुराना का नाम है। 

बता दें कि यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। तिवारी ने नेटफ्लिक्स और इस वेब सीरीज के निर्माताओं से माफी की मांग की है और इससे आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने की मांग है। उनका कहना है कि इस प्रकार के दृश्य लव जिहाद को बढ़ावा देते हैं।

पूरे विवाद पर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘ओटीटी मीडिया प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ रहे एक कार्यक्रम ‘ए सूटेबल बॉय’ में बेहद आपत्तिजनक दृश्य फिल्माए गए हैं जो एक धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते हैं। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इस बात का परीक्षण किया जाए कि क्या इसमें किसिंग सीन मंदिर में फिल्माया गया है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। प्रथमदृश्या जांच में ये पाया गया है कि ये दृश्य एक धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘गौरव तिवारी द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर, नेटफ्लिक्स के अधिकारियों मोनिका शेरगिल और अंबिका खुराना के खिलाफ रीवा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (ए) (धार्मिक भावनाओं और विश्वासों को अपमानित करने और अपमानित करने के लिए दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत एक एफआईआर दर्ज की जा रही है।’ दरअसल, इस सीन में मंदिर परिसर में किसिंग सीन को दिखाया गया था।

गौतलब है कि वेबसीरिज को लेकर अभी तक कोई सेंसरशिप नहीं है और ना ही इन्हें उसके लिए फिल्म की तरह इजाजत लेनी होती है। हालांकि, हाल में केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस बाबत नोटिफिकेशन जारी कर इसे अपने अंतर्गत लिया है, जिसके बाद आने वाले दिनों में इसके दृश्यों पर सेंशर लग सकते हैं।

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‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर के मामले में एडिटर्स गिल्ड ने कही ये बात

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
EditorsGuild54

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि यह मामला देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े खतरे को प्रदर्शित करता है।

बता दें कि मुखिम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध कानून के विभिन्न प्रावधानों को किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है, मुखिम का मामला इसका उदाहरण पेश करता है।

कुछ दिन पहले ही मुखिम ने एडिटर्स गिल्ड की ‘चुप्पी’ हवाला देते हुए विरोध स्वरूप इस संगठन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने से मना कर दिया था। अदालत ने मुखिम को उनके द्वारा जुलाई में लिखी फेसबुक से सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का दोषी पाया था।

रविवार को जारी किये गए बयान में गिल्ड ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त शिलॉन्ग टाइम्स की एडिटर मुखिम पर उनके द्वारा लिखी गई एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आपराधिक मामला चलाना चिंताजनक है। लॉसेतुन में एक बॉस्केटबाल कोर्ट में आदिवासी और गैर आदिवासी युवकों के बीच झड़प पर जुलाई 2020 में लिखी गई फेसबुक पोस्ट के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। गिल्ड ने कहा, ‘मुखिम का मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े स्तर पर खतरे को प्रदर्शित करता है, जो कानून के अस्पष्ट ढांचे के तहत संचालित होता है और जिसका अकसर असहमति को दबाने के लिए सरकार और एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग किया जाता है।’

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TRP को ध्यान में रखकर की जा रही पत्रकारिता का तरीका सही नहीं: सूचना-प्रसारण मंत्री

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी लोगों तक पहुंचाएं।’

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
PrakashJavedkar

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी समाचार मानकर लोगों तक पहुंचाएं।’ पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए उक्त बात भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के शैक्षणिक सत्र 2020-21 का सोमवार को ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन करते हुए केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कही।

जावड़ेकर ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलाव का हम सभी को स्वागत करना चाहिए और उसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नम्बूदिरिपाड सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, दुरुपयोग का साधन नहीं। आपकी स्टोरी में यदि दम है, तो उसके लिए किसी नाटक अथवा सनसनी की जरूरत नहीं है। समाज में अच्छी खबरें इतनी हैं, परन्तु दुर्भाग्य से उन्हें कोई दिखाता नहीं है। रचनात्मक पत्रकारिता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब से सरकार ने खाद की नीम कोटिंग शुरू की, तब से खाद की कालाबाजारी रुकी है। रेलवे का कोई गेट अब ‘अनमैन’ नहीं रहा, इसलिए दुर्घटनाएं बंद हो गई हैं। स्वच्छता की दृष्टि से भी रेलवे में बहुत सुधार हुआ है। पांच हजार रेलवे स्टेशन आज वाई-फाई से जुड़े हैं। करीब 100 नए एयरपोर्ट देश में शुरू हुए हैं, जिनका लाभ लाखों लोग ले रहे हैं। क्या ये सभी खबरें नहीं हैं?

उन्होंने कहा कि करीब दो लाख गांवों तक फाइबर कनेक्टिविटी पहुंची है, जिससे वहां के जीवन में बदलाव आया है। फ्री डिश के माध्यम से अब 104 चैनल और 50 एजुकेशनल चैनल निशुल्क देखे जा सकते हैं। देश में 300 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चल रहे हैं। कभी जाकर देखिए इनसे कितने स्थानीय कलाकारों को अवसर मिल रहा है और उनसे समाज जीवन में कैसा बदलाव आया है। ढाई करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मकान मिले हैं, बारह करोड़ लोगों को टॉयलेट्स मिले हैं, उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन मिले हैं, चालीस करोड़ लोगों के बैंक खाते खुले हैं, पचास करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। क्या ये सब खबरें नहीं हैं?

'हर घर नल से जल' का सपना अब आजादी के 70 साल बाद पूरा होने जा रहा है। प्रत्येक गांव में बिजली पहुंच चुकी है। आज चार-पांच सौ योजनाओं की सब्सिडी और मदद लोगों को डीबीटी के माध्यम से सीधे मिल रही है। इससे एक लाख 75 हजार रुपए की चोरी रुकी है। क्या ये न्यूज नहीं है? दूसरी घटनाएं भी न्यूज हैं, परन्तु ये भी न्यूज है, यह हमें समझना चाहिए। समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में योगदान ही पत्रकारिता का धर्म है।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता का पहला मंत्र यह है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली सारी घटनाएं खबर हैं, जो ठीक से लोगों तक पहुंचानी हैं। मीडिया की आजादी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आयाम है। इसे संभालकर रखना है। परंतु यह आजादी जिम्मेदारी के साथ आती है। इसलिए हम सभी को जिम्मेदार भी होना है। पत्रकार के रूप में आप सभी पक्ष-विपक्ष को सुनें, परंतु समाज को अच्छी दिशा में ले जाने के लिए ही हमारी पत्रकारिता काम करे। टीआरपी को ध्यान में रखकर जो पत्रकारिता हो रही है, वह सही रास्ता नहीं है। 50 हजार घरों में लगा मीटर 22 करोड़ दर्शकों की राय नहीं हो सकता। हम इसका दायरा बढाएंगे, ताकि इस बात का पता चल सके कि सही मायने में लोग क्या देखते हैं और क्या देखना चाहते हैं।

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e4m PR & Corp Comm 40 under 40: इन दिग्गजों की जूरी करेगी विजेताओं का चुनाव

वर्चुअल रूप में दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा एंट्रीज में से 40 को शॉर्टलिस्ट कर उन्हें इस लिस्ट में शामिल किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
PRCC

‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की ‘पब्लिक रिलेशंस और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस’ (PR & Corporate Communications)  के दूसरे एडिशन के तहत 40 साल से कम उम्र वाले प्रतिभाशाली 40 युवाओं (40 Under 40)  के चयन के लिए 21 नवंबर को जूरी मीट का आयोजन किया जाएगा। इस लिस्ट को तैयार करने का उद्देश्य ऐसे युवाओं की पहचान कर उन्हें सम्मानित करना है, जिन्होंने न सिर्फ खुद को साबित किया है, बल्कि अपने संस्थान के साथ ही पब्लिक रिलेशंस और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री की ग्रोथ में काफी योगदान दिया है। 

वर्चुअल रूप में दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा एंट्रीज में से 40 को शॉर्टलिस्ट कर उन्हें इस लिस्ट में शामिल किया जाएगा। 'बिजनेस वर्ल्ड' और 'एक्सचेंज4मीडिया' ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ.अनुराग बत्रा और रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड के ग्रुप हेड ऑफ कम्युनिकेशंस रोहित बंसल की अध्यक्षता में जूरी विभिन्न मापदंडों (उपलब्धियों, भविष्य की संभावनाओं, उद्योग में योगदान आदि) के तहत नॉमिनीज का मूल्यांकन करेगी। मानदंडों को पूरा न करने वाली एंट्रीज को अयोग्य (disqualified) घोषित कर दिया जाएगा।

जूरी में शामिल सम्मानित सदस्यों में Arwa Hussain- Director, Adfactors PR ; Gaurav Bhaskar- Director, Corporate Communications & Public Affairs, Google India ; Deepali Naair- Director, Marketing (CMO), IBM; Gauri Kohli- Partner & Luxury Director, PR Pundit; Minari Shah- Director, Public Relations, Amazon India; Nitin Thakur- Director - Brand & Communications, The Max Group ; Sameer Bajaj- Global Head - Communications and External Affairs at WhiteHat Jr; Sarah Gideon- Senior Director and Head Corporate Communication, Flipkart; Pooja Pathak- Co - Founder and Director, Media Mantra; Rishi Seth, Group CEO, 6 degrees BCW; Sonia Huria, Head Communications, Amazon Prime Video India; Sujit Patil, Vice President & Head of Corporate Brand & Communications, Godrej; Shivani Gupta, Managing Director, SPAG ; Varghese M Thomas, Vice President – Corporate Communication, TVS and Valerie Pinto, CEO, Weber Shandwick; Bharatendu Kabi- Head - Corporate Communication, Hero; Janet Arole- AVP & Head – Corporate Communications, Aditya Birla Fashion and Retail Ltd.; Gaurav Patra- Founder Director, Value 360 Communications and Rachana Chowdhary- Founder & Director, Media Value Works शामिल हैं।

इस लिस्ट में अपनी जगह बनाने वाले युवाओं के नामों की घोषणा व पुरस्कार वितरण समारोह 27 नवंबर को वर्चुअल सेरेमनी में किया जाएगा।

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एडिटर्स गिल्ड ने असम के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, जताई ये चिंता

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पत्र लिखकर राज्य में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
EGI

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पत्र लिखकर राज्य में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। गिल्ड ने राज्य में 1991 के बाद मारे गए 32 पत्रकारों की सूची भी दी है।

पत्र में कहा गया है कि असम में पत्रकारों पर भीड़ द्वारा हमले किये जाने और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं से स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया के कामकाज के लिए जरूरी माहौल खराब हो रहा है।

पत्र में कहा गया है, 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने असम में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों को लेकर बेहद चिंता के साथ आपको पत्र लिखा है। हम आपके द्वारा इन घटनाओं की कड़ी निंदा किए जाने की प्रशंसा करते हैं, लेकिन हालात इस मामले में आपके तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हैं।'

गिल्ड ने पत्र में यह भी कहा कि 1991 के बाद राज्य में मारे गए पत्रकारों के मामलों में अभी तक ठीक से जांच नहीं हुई है। काफी सारे मामलों में अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पत्रकारों के परिवार को डरा रहे हैं। हम आशा करते हैं कि आप राज्य की पुलिस को उचित कदम उठाने को कहेंगे ताकि मीडिया में विश्वास की बहाली हो सके और बिना डरे वे काम कर पाएं।

पत्र में गिल्ड ने पिछले हफ्ते पत्रकार मिलन महंता पर हुए हमले का भी जिक्र किया। कथित तौर पर रविवार को महंता पर कुछ लोगों ने हमला किया, जिसमें उन्हें एक बिजली के खंभे में बांधा गया और पिटाई की गई।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए फुटेज में असम के बड़े दैनिक अखबार ‘प्रतिदिन’ के पत्रकार मिलन महंता हैं, जो करुप जिले के रहने वाले हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि उनके हाथ खंभे से बांध दिए गए हैं और पांच व्यक्ति उन पर हमला कर रहे हैं।

यह घटना रविवार को गुवाहाटी से 40 किमी पश्चिम के मिर्जा में घटी। उन्होंने पलाश बारी पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी एफआईआर में बताया है कि उनके हमलावर जुआरी थे।

अपनी शिकायत में महंता ने बताया कि असम में दीवाली से पहले ग्रामीण इलाकों में जुए की खबरें सामने आई थीं, जिसकी खबर उन्होंने कई बार की, जिसके चलते ही कुछ जुआरियों ने उन पर हमला किया। पत्रकार मिलन महंता को गर्दन, सिर और कानों पर चोट आई है।  

पत्रकार की शिकायत पर कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस तरह की घटना के बाद पूरे देश के पत्रकारों में आक्रोश है।

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रजत शर्मा फिर बने NBA के प्रेजिडेंट, बोर्ड मेंबर्स में शामिल हुए ये नाम

न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड की चेयरपर्सन कम मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद शुक्ला NBA में वाइस प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 19 November, 2020
Rajat Sharma

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को एक बार फिर निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) का प्रेजिडेंट चुना गया है। गुरुवार को हुई एनबीए की बोर्ड मीटिंग में सदस्यों ने इस पद के लिए रजत शर्मा के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी।

बोर्ड मीटिंग में ‘न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड’ (News24 Broadcast India Ltd) की चेयरपर्सन कम मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद शुक्ला को वाइस प्रेजिडेंट और ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के एमडी और सीईओ एमके आनंद को मानद कोषाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। यह चुनाव वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। 

एनबीए बोर्ड के सदस्यों की सूची आप यहां देख सकते हैं। 

: एमवी श्रेयम्स कुमार- मैनेजिंग डायरेक्टर-मातृभूमि प्रिंटिंग एंड पब्लिशिंग कंपनी लिमिटेड
: राहुल जोशी- मैनेजिंग डायरेक्टर-टीवी18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड
: अविनाश पांडेय-चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर-एबीपी नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड
: आई वेंकट- डायरेक्टर-इनाडु टेलिविजन प्राइवेट लिमिटेड
: कली पुरी-वाइस चेयरपर्सन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर-टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड
: सोनिया सिंह, एडिटोरियल डायरेक्टर-एनडीटीवी
: सुधीर चौधरी, चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर-क्लस्टर1-जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड

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नेटवर्क18 में हुए प्रमोशन, जक्का जैकब को मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

संतोष नायर, विनय सरावगी, अविनाश दत्त और दयाशंकर मिश्र को एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर प्रमोट किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 19 November, 2020
Network18

अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘सीएनएन-न्‍यूज 18’ (CNN-News18) के एग्जिक्यूटिव एडिटर जक्का जैकब (Zakka Jacob) को प्रमोट कर चैनल का मैनेजिंग एडिटर बनाया गया है। बुधवार को इस बात की घोषणा की गई। अपनी नई भूमिका में वह सीएनएन न्यूज18 की एडिटोरिटल स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे।  

जक्का जैकब को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘सीएनएन न्यूज18’ को जॉइन करने से पहले उन्होंने वर्ष 2011 से 2014 के बीच ‘चाइना सेंट्रल टेलिविजन’ (China Central Television) के साथ काम किया था। जैकब ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2001 में रीजनल चैनल ‘सन न्यूज’ (Sun News) के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में ‘हेडलाइंस टुडे’ (Headlines Today) के साथ नया सफर शुरू किया था।

इसके साथ ही ‘नेटवर्क18’ (Network18) ने संतोष नायर, विनय सरावगी, अविनाश दत्त और दयाशंकर मिश्र को एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर प्रमोट किया है। ये सभी क्रमश:  CNBC Digital, News18 English, News18 Languages और News18 Hindi का नेतृत्व कर रहे हैं।

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लॉकडाउन को लेकर गवर्नेंस नाउ से BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कही ये बात

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ बातचीत में तमाम पहलुओं पर रखी अपनी राय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 19 November, 2020
Sambit Patra

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। संबित पात्रा के अनुसार भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में बहुत सुधार किए जाने के साथ ही सरकार को बैंकिंग स्तर पर कार्यान्वयन की मॉनीटरिंग करने की आवश्यकता है।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में संबित पात्रा का कहना था, ‘जहां तक भारतीय बैंकिंग सिस्टम की बात है, अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और इस दिशा में कार्य प्रगति पर है। सरकार इन कार्यों के कार्यान्वयन की मॉनीटरिंग कर रही है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान संबित पात्रा ने कहा कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों का हाल ही में हुआ विलय और ‘द इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ (IBC) 2016  जैसे कुछ महत्वपूर्ण बैंकिंग सुधार हैं और धीरे-धीरे अन्य सुधार लाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर पैकेज और महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) सेक्टर को यह कैसे मदद कर रहा है, के बारे में बीजेपी नेता ने कहा कि आत्मनिर्भर पैकेज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सेक्टर के लिए पूरी तरह से काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं इस वेबिनार के माध्यम से आप लोगों से गुजारिश करता हूं कि संयम बनाए रखें। हम सही नेतृत्व में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’

इस बातचीत के दौरान संबित पात्रा का कहना था कि दुनियाभर की कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां चीन से बाहर निकलने की तलाश में हैं और वे अब भारत आ रही हैं, जो आज इन कंपनियों के लिए पसंदीदा स्थान बन गया है। संबित पात्रा के अनुसार, ‘अब हमें इस बदलाव के स्वागत के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। 20 लाख करोड़ का आत्मनिर्भर पैकेज ग्रामीण और छोटे शहरों में बुनियादी ढांचे के लिए काफी बड़ा प्रोत्साहन साबित होगा और इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।’    

यह पूछे जाने पर कि भारत किस तरह अपने यहां के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित कर सकता है, संबित पात्रा (जो कि एक जनरल सर्जन भी हैं) ने स्वीकार किया कि भारत को अपने हेल्थ बजट को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की तरह जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे के लिए जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा आवंटित करना होगा, उसी से देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में और बेहतर सुधार हो सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की आयुष्मान भारत योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना ने देश भर के 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराया है। यही नहीं, मेडिकल सीट और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ ही एम्स जैसे तृतीयक देखभाल केंद्रों और जन औषधि केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर कुछ बहुत ही आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले की तुलना में हृदय और घुटने के प्रत्यारोपण की लागत में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है और आवश्यक दवाओं की कीमतों में भारी कटौती की गई है।

देश में लॉकडाउन को लागू किए जाने के बारे में पात्रा ने कहा कि शुरुआत में इस महामारी के 21 दिन के चक्र को खत्म करना था और संसाधनों के लिए तैयार होना था। उन्होंने कहा कि जिस देश ने कभी एक वेंटिलेटर का निर्माण नहीं किया, उसने वेंटिलेटर का निर्माण शुरू कर दिया और आत्मनिर्भर हो गया, जब देश में एक भी कोविड-19 परीक्षण प्रयोगशाला नहीं थी, अब यह रोजाना 15 लाख परीक्षण कर रहा है। रोजाना सात-आठ लाख एन-95 मास्क का निर्माण किया जा रहा है और पीपीई किट तक का अब निर्यात हो रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। यह सब लॉकडाउन के दौरान हुआ। यह अच्छी तरह से सोच-विचार कर किया गया था। लॉकडाउन व अनलॉक की योजना किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं बनाई गई थी, बल्कि 11-12 विशेषज्ञों के समूहों की टीम थी, जिसमें चिकित्सा, संसाधन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल थे। यही कारण है कि जनसंख्या घनत्व के बावजूद भारत में दुनिया भर में मृत्यु दर सबसे कम है।   

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पद्मश्री से सम्मानित महिला संपादक ने एडिटर्स गिल्ड से दिया इस्तीफा, लगाया यह आरोप

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और ‘द शिलांग टाइम्स’ अखबार की संपादक पेट्रीसिया मुखीम ने ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ में अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 November, 2020
EGI

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और ‘द शिलांग टाइम्स’ अखबार की संपादक पेट्रीसिया मुखीम (PATRICIA MUKHIM) ने ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors guild of India) में अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुखीम ने आरोप लगाया है कि संपादकों की यह संस्था बस 'सेलेब्रिटी पत्रकारों’ का बचाव करती है।

दरअसल, पिछले हफ्ते मेघालय हाई कोर्ट ने जुलाई में मुखीम की एक फेसबुक पोस्ट को लेकर पुलिस में दाखिल की गई शिकायत पर कोई टिप्पणी करने या आदेश देने से इनकार कर दिया था। एडिटर्स गिल्ड की नवनियुक्त अध्यक्ष सीमा मुस्तफा के नाम लिखे एक पत्र में मुखीम ने कहा है कि गिल्ड को इस केस के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी, लेकिन गिल्ड की ओर से उनके मामले में पूरी तरह चुप्पी साध ली गई। ऐसे में मैं अपनी सदस्यता से इस्तीफा देना चाहती हूं।’

इस पत्र में मुखीम ने यह भी कहा है, ‘मेरे हिसाब से गिल्ड सेलेब्रिटी एडिटर्स/एंकर्स' को बचाने और जानबूझकर अपने ही एक सदस्य की आवाज को नजरअंदाज करने का का काम कर रही है।'

यह भी पढ़ें: पद्मश्री से सम्मानित एडिटर के खिलाफ पुलिस में दर्ज हुई शिकायत, लगा यह आरोप

बता दें कि मुखीम ने जुलाई में एक बास्केटबॉल कोर्ट में पांच लड़कों पर हमले के बाद हमलावारों की पहचान करने में नाकाम रहने के लिए अपनी फेसबुक पोस्ट में लॉसोहतुन के ग्राम दरबार (परिषद) की आलोचना की थी। पुलिस ने इस मामले में 11 संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। मुखीम ने मेघालय के मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन से आरोपितों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की की थी।

मुखीम की इस पोस्ट को लेकर ग्राम परिषद की ओर से उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में मुखीम पर फेसबुक पोस्ट के जरिये सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया गया था। मुखीम इसके खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची थीं। मेघालय हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 नवंबर को मुखीम को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का दोषी ठहराया था और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने से इनकार कर दिया था।

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तब्लीगी जमात की मीडिया कवरेज को लेकर केंद्र के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

कोविड-19 के दौरान तब्लीगी जमात की मीडिया कवरेज को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के हलफनामे से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 November, 2020
Supreme Court

कोविड-19 के दौरान तब्लीगी जमात की मीडिया कवरेज को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के हलफनामे से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कथित रूप से कहा है कि टीवी पर इस तरह के कंटेंट से निपटने के लिए सरकार को एक मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शीर्ष अदालत ने हलफनामे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘पहले तो आपने सही हलफनामा दायर नहीं किया और बाद में जो हलफनामा दायर किया, उसमें दो अहम सवालों को छोड़ दिया गया।’

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ का कहना था, ‘हम ये जानना चाहते हैं कि टेलिविजन पर इस तरह के कंटेंट से निपटने के लिए किस तरह का मैकेनिज्म है। यदि ऐसा नहीं है तो आपको कोई मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए। रेगुलेशन का काम एनबीएसए (NBSA) जैसे संगठनों पर नहीं छोड़ा जा सकता है।’

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस तरह के मामलों के लिए एक तंत्र (mechanism) बनाने के लिए कहा है। मामले में सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।

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