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माखनलाल विश्वविद्यालय: नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया तेज, इन नामों पर चर्चा
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। अभी हाल ही में इसके लिए बनी सर्च कमेटी की बैठक भी हुई है। हालांकि बैठक में अभी कोई फाइनल निर्णय नहीं लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले हफ्ते सर्च कमेटी तीन नाम फाइनल करके महापरिषद को सौंप सकती है। फिर महापरिषद मुख्यमंत्री की सहमति से एक नाम पर मुहर लगा देगी।
अच्छी बात ये है कि मध्यप्रदेश के कवि व पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी के नाम पर बने इस विश्वविद्यालय के नए कुलपति चुनने का काम मध्यप्रदेश की भूमि के ही तीन अनुभवी पत्रकारों के दिया गया है। नये कुलपति के लिये शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के गठन के बाद ही यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि अबकी बार मध्यप्रदेश के ही किसी प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार को कुलपति की कमान मिलेगी।
शासन के जनसम्पर्क विभाग द्वारा गठित सर्च कमेटी के तीनों सदस्यों- वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी, विजयदत्त श्रीधर और मनोज मनु लगातार मध्यप्रदेश की भूमि से जुड़े हुए हैं।
इस सर्च कमेटी के गठन के बाद पत्रकारिता जगत में यह चर्चा चल रही थी कि अबकी बार मध्यप्रदेश के बाहर का व्यक्ति नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश का ही व्यक्ति कुलपति के पद पर नियुक्त होगा। साथ ही ऐसे व्यक्ति को कमान दी जायेगी, जिसका प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और अकादमिक अनुभव का लाभ विश्वविद्यालय को मिल सके।
मिली जानकारी के मुताबिक नए कुलपति के तौर पर पंकज पचौरी, पंकज शर्मा, राजेश बादल, मुकेश कुमार, ए हाशमी, दीपक तिवारी आदि पत्रकारों के नाम पर चर्चा हुई है। ये माना जा रहा है कि इस बार कुलपति के मध्यप्रदेश के होने की बात भी काफी अहम है, क्योंकि पिछले सालों में मध्यप्रदेश के बाहर के कुलपतियों का कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा है।
वैसे पंकज पचौरी के पीएम मनमोहन सिंह के एडवाइजर रहने के कारण उनकी मजबूत पैठ मानी जा रही है, पर चूंकि पंकज पचौरी ने दिल्ली में अपनी एक मीडिया कंपनी लॉन्च की हुई है, ऐसे में वे कितना समय यूनिवर्सिटी और मध्यप्रदेश को दे पाएंगे, ये भी सवाल लोगों के मन में है। साथ ही उनका मध्यप्रदेश का न होनाा उनके लिए थोड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है।
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