हरिवंश का सवाल- क्षेत्रीय अख़बारों का यह ताक़तवर हथियार कैसे जंग खा गया?

दिल्ली में प्रेस क्लब के ऑडिटोरियम में शुक्रवार की शाम अरसे तक याद...

Last Modified:
Monday, 11 March, 2019
Book launch

राजेश बादल।।

दिल्ली में प्रेस क्लब के ऑडिटोरियम में शुक्रवार की शाम अरसे तक याद रहेगी। भाई हरीश पाठक का एक दशक से चल रहा शोध एक ग्रन्थ की शक़्ल में हम सबके सामने आ गया। आंचलिक पत्रकारिता और राष्ट्रीय पत्रकारिता के अंतर्संबंध को रेखांकित करने वाली पहली पुस्तक। हरीश भाई के जज़्बे को सलाम कि उन्होंने आधी सदी के दरम्यान आंचलिक और प्रादेशिक पत्रकारिता की अनेक प्रतिनिधि कथाओं को स्थान दिया। ये समाचार कथाएं हिन्दुस्तान की ज़मीन से निकलीं और राष्ट्रीय सरोकारों में शामिल हो गईं।

हरीश इनके बारे में लिखते हैं, ‘भूमंडलीकरण, उदारीकरण और बाज़ारवाद के इस महा दौर में आंचलिक पत्रकारिता से जुड़े बड़े सवाल इस शोध की आधारभूमि हैं। इन्हें हल करने की तत्परता सब तरफ से दिखनी चाहिए। सवाल उठाने भर से कोई भूमिका ख़त्म नहीं हो जाती। वह शुरू होती है उस क्षण से, जब ये सवाल उभरते, उफ़नते और उबलते हैं। जो उत्तर इन उफनते सवालों के मिले हैं, वे मेरी संतुष्टि का कारण हो सकते हैं, पर मेरी यात्रा का अंतिम सच नहीं’। क्या बात है हरीश भाई! सब कुछ कह दिया। इसी वजह से आप सत्य के प्रतिनिधि हैं। संदर्भ के तौर पर बता दूं कि यह किताब राजेन्द्र माथुर शोध परियोजना के तहत आई है ।

बहरहाल, समारोह में जिन कथाओं का ज़िक्र है, उनमें से दो का संबंध मेरे सफ़रनामे से भी है। इस कारण मुझे तो वहां होना ही था। इसके अलावा रायपुर के आसिफ़ इक़बाल, जम्मू की स्मिता मिश्रा और पंजाब से रंजू बेरी से मिलना सुखद अनुभव रहा। यहां अपनी ज़िंदगी से जुड़े दो वाक्यों का ज़िक्र सिर्फ कुछ पंक्तियों में। एक बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन पर पुलिस ने गोली चलाई। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच हुई। रिपोर्ट गोपनीय थी। इसमें माना गया था कि पुलिस और प्रशासन की ग़लती थी। कलेक्टर आरोपियों को बचाना चाहते थे। हम पत्रकारों को रिपोर्ट की गोपनीय प्रति मिल गई। तय हुआ कि स्थानीय दैनिक ‘शुभभारत’ में रिपोर्ट छपेगी। संपादक श्यामकिशोर अग्रवाल के समर्थन से साथी शिव अनुराग पटेरिया ने अनेक किस्तों में रिपोर्ट छापी। इससे कलेक्टर बौखला गए।

इसके बाद हम लोगों का दमन शुरू हो गया। अंगरेज़ी हुकूमत की तरह प्रशासन हमारे साथ बरताव करने लगा। हम लोग यानी शहर के सारे पत्रकारों का दल-सुरेंद्र अग्रवाल, जगदीश तिवारी, अजय दोसाज, विभूति शर्मा, श्याम अग्रवाल, शिव अनुराग (कुछ और भी साथी थे। नाम रह गए हों तो माफ़ करिएगा) उनतालीस साल पहले भोपाल की सड़कों पर कई दिन भटके। एक-दो दिन तो पेट भरने के लिए भी पैसे न बचे थे। आंचलिक पत्रकार संघ के संयोजक श्री विजयदत्त श्रीधर हमारे लिए फ़रिश्ते की तरह आए, जबकि बड़े-बड़े पत्रकार सरकार-प्रशासन से रार नहीं ठानने का सुझाव दे रहे थे। श्रीधर जी के प्रयासों से ही विधान सभा में सात-आठ घंटे इस मामले पर बहस चली। मुख्यमंत्री को ज्यूडीशियल इंक्वायरी का ऐलान करना पड़ा। भारत की आज़ादी के बाद यह अब तक पहला और संभवतः आख़िरी मामला है, जिसमें जांच आयोग ने हमारे सभी आरोप सच माने। इसके अलावा प्रेस काउंसिल ने भी इस मामले की जांच कराई। उसमें भी हम लोगों को न्याय मिला। हम जीते। फिर भी सरकार कमबख़्त कलेक्टर को बचा ले गई।

इस मामले में महान संपादक राजेंद्र माथुर और उन दिनों ‘रविवार’ के संपादक एसपी सिंह ने बेहद मदद की। मेरी ज़िन्दगी की दिशा मुड़ गई। आज जो भी आपके सामने हूं-इसी कांड की बदौलत हूं। दूसरा मामला 1991 का है। मुल्क़ के बड़े जुझारू श्रमिक नेता शंकरगुहा नियोगी की ह्त्या हुई। मैंने सप्रमाण अपनी समाचार कथा अपने अख़बार में प्रकाशित की। मैं उसका विशेष संवाददाता/समाचार संपादक था। इससे ख़लबली मच गई। मैंने हत्या के सभी आरोपियों को उजागर किया था। अख़बार के संपादक पूंजीपतियों के हाथों बिक गए। वे जीते, मैं हार गया। हालांकि बरसों बाद मेरी समाचार कथा अक्षरशः सत्य साबित हुई। फिर भी उस समय तो आठ अक्टूबर, 1991 की मनहूस सुबह 9 बजकर बीस मिनट पर अख़बार मालिक को अपना इस्तीफ़ा मुझे सौंपना पड़ा। वे खंडन छापने का दबाव डाल रहे थे। मुझसे माफ़ीनामा लिख कर देने को कहा जा रहा था। संघर्ष के वे दिन कैसे भूलूं, जब 400 रूपए का टेलिफोन बिल नहीं चुका पाने के कारण कनेक्शन काट दिया गया था। संघर्ष की ये दो कहानियां एकदम फ़िल्मी हैं और मेरी ज़िंदगी में हर पल नए नाटकीय दृश्य के साथ उपस्थित होते रहे।

लौटता हूं हरीश भाई के ग्रन्थ के लोकार्पण पर। आयोजन में रविवार के दिनों के साथी वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश बतौर ख़ास मेहमान थे। वे इन दिनों राज्य सभा के उप सभापति थे। अपनी बिरादरी में पहुंचते ही उनकी आँखों में चमक आ जाती है।  हम सब लोगों ने इसे महसूस किया। हरिवंश जी ने ‘रविवार’, ‘धर्मयुग’, ‘नई दुनिया’ और ‘प्रभात ख़बर’ की पत्रकारिता का उल्लेख किया। उनका सवाल था कि क्षेत्रीय अख़बारों का यह ताक़तवर हथियार कैसे जंग खा गया? भाषाई पत्रकारिता की असली ताकत तो उनके मुद्दे थे, जो समय-समय पर हमें झकझोरते रहे।

हरिवंश जी भी राजेन्द्र माथुर से प्रेरित रहे। उन्होंने कहा,‘अच्छे अख़बार के लिए आज पाठक भी ख़र्च करना चाहते हैं। हज़ारों करोड़ रुपए सरकार के खजाने से निकलते हैं, पर समाज के काम नहीं आते। अखबारों की आर्थिक सोच और दबाव से पत्रकारिता चरमरा गई। आर्थिक उदारीकरण में पूंजी और तकनीक प्रभावी हो गए। विचारधारा हाशिए पर चली गई। गांधी के रास्ते पर होते तो आज पत्रकारिता संकट का सामना नहीं करती। इन दिनों हर कीमत पर मुनाफ़ा ज़रूरी हो गया है। पूंजी ने सारा गणित बिगाड़ दिया है। अब मिलकर काम करने की आवश्यकता है। गांधी की आर्थिक सोच पर काम होना चाहिए।‘ वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी ने कहा, ‘क्षेत्रीय पत्रकारिता को ही वैकल्पिक पत्रकारिता माना जाए। राजेन्द्र माथुर जैसे विचार पुंज आज नहीं हैं। यह चिंता की बात है। हिंदी पत्रकारों पर आरोप लगता है कि हम भावना प्रधान होते हैं। तथ्यपरक कम होते हैं। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।‘

इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय और वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी भाषा के लिए दिल की गहराइयों से प्रयास करने वाले राहुल देव भी इसमें मौजूद थे। उन्होंने भी आंचलिक पत्रकारिता का हौसला बढ़ाने पर ज़ोर दिया। हमारी पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने आज की पत्रकारिता का समग्र विश्लेषण किया। उन्होंने कहा, ‘टिमटिमाता दीया है। रौशनी के प्रयास जारी हैं। आज़ादी के बाद सभी भाषाओं की पत्रकारिता पर सप्रे संग्रहालय में काम हो, इस पर विचार करेंगे। उन्होंने बताया कि आज समाचारपत्र का वर्गीकरण इस आधार पर होगा कि एक तरफ़ बाज़ार है दूसरी तरफ आदर्श और सरोकार हैं। सौ बरस पहले भी इंडिया और भारत का अंतर था। आज भी वही है। बाज़ार की जकड़न बढ़ी है। मीडिया मानसिक गुलामी से ग्रस्त है। उन्माद का शिकार है। किसान मीडिया में नहीं है। गांव उसमें नहीं हैं। सामाजिक सरोकार गायब हैं। अखबार न प्रोडक्ट है न उसे साबुन की तरह बेच सकते हैं। आज उन्माद का माहौल है। इससे बचें। मानसिक गुलामी से बचें। भाषा के कॉकटेल से बचें। उन्होंने उमा भारती की शादी की ग़लत ख़बर दिखाने का उदाहरण बताया। बाद में उस चैनल को किस तरह लगातार माफीनामा दिखाना पड़ा था। साथी पत्रकार डॉक्टर राकेश पाठक का संचालन चमत्कृत करने वाला था। इस आयोजन के बहाने श्रीमती कमलेश पाठक से करीब तीस-पैंतीस बरस बाद मिलने का अवसर मिला। कमलेश और मैं बीएससी में साथ पढ़ते थे। इन दिनों वे मुंबई आकाशवाणी में अपनी स्वर लहरी बिखेरती हैं। हरीश पाठक जी की अर्धांगिनी हैं। चित्र भी ज़ाहिर हैं इसी अवसर के हैं।

चित्रों में देखें कार्यक्रम की झलकियां-

 

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मानहानि के मामले में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुराता की बढ़ीं मुश्किलें

अडानी समूह द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुराता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
Thakurta6465

अडानी समूह द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुराता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में गुजरात के कच्छ जिले में मुंद्रा की एक अदालत ने मंगलवार को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली की निजामुद्दीन थाना पुलिस को निर्देश जारी करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप सोनी की अदालत ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 500 के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय किया जाता है। आपको उक्त आरोपी को गिरफ्तार करने और मेरे समक्ष पेश करने का निर्देश दिया जाता है।’

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार परांजय ठाकुराता ने 2017 में अडानी समूह को सरकार की ओर से ‘500 करोड़ रुपए का उपहार’ मिलने की खबर प्रकाशित की थी, इसी को लेकर समूह ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

रिपोर्ट्स मुताबिक, उनके वकील आनंद याग्निक ने कहा, ‘हमें अभी तक (अदालत से) सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हमारे पास यह सूचना (गिरफ्तारी वारंट की) मीडिया के माध्यम से पहुंची है।’ उन्होंने कहा कि अडानी समूह ने पत्रिका के संपादक सहित सभी के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले ली है, सिर्फ पत्रकार के खिलाफ शिकायत कायम है। वकील ने कहा कि ‘लेख प्रकाशित करने वाली पत्रिका आपराधिक मानहानि के लिए जिम्मेदार नहीं है, सह-लेखक के खिलाफ भी मामला वापस ले लिया गया है लेकिन आप लेखक के खिलाफ शिकायत वापस नहीं ले रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमने अदालत में मुकदमा खरिज करने की अर्जी दी है।’

वकील ने बताया कि महामारी के कारण अदालत में सुनवाई बाधित होने की वजह से अडानी समूह द्वारा दायर मुकदमे पर सोमवार को सुनवाई हुई और अदालत ने कहा कि वह समुचित आदेश देगी। उन्होंने कहा, ‘आज उन्होंने समुचित आदेश दिया है।’

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BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

बार्क (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Partho Dasgupta

बार्क (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। बता दें कि उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कम हो गया था, जिसके बाद तंजोला जेल प्रशासन ने उन्हें शुक्रवार दोपहर एक बजे अस्पताल में शिफ्ट किया था।

उनकी पत्नी सम्राज्नी दासगुप्ता (Samrajni Dasgupta) के मुताबिक, डॉक्टर्स की देखरेख में आज सुबह उन्हें आईसीयू (Intensive Care Unit) में शिफ्ट किया गया। उन्होंने बताया, ‘पार्थो किसी भी वॉयस कमांड का जवाब नहीं दे पा रहे हैं और न ही कुछ बोल पा रहे हैं। वह ब्लड शुगर के मरीज हैं और उनका ब्लड प्रेशर भी घट-बढ़ रहा है। हमें आज सुबह ही उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी गई थी। उनकी हालत नाजुक है।’

बता दें कि टीआरपी घोटाले मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में मुंबई पुलिस ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में उन्हें गिरफ्तार किया था। वे 31 दिसंबर, 2020 तक पुलिस हिरासत में थे, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

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प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने पत्रकारिता से बनाई दूरी, इस कंपनी में बने COO

प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने फिलहाल पत्रकारिता से दूरी बना ली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
KaranJohar5454

प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने फिलहाल पत्रकारिता से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब उन्होंने बतौर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर यानी COO टैलेंट मैनेजमेंट फर्म धर्मा कॉर्नरस्टोन एजेंसी (DCA) जॉइन कर लिया है। कंपनी में चलने वाले ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी अब राजीव मसंद के कंधो पर होगी।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में फिल्म निर्माता करण जौहर ने बंटी सजदेह के साथ अपनी इस टैलेंट मैनेजमेंट फर्म की घोषणा की थी। सजदेह की कंपनी कॉर्नरस्टोन की स्थापना 2008 में हुई थी। कंपनी विराट कोहली, विनेश फोगाट, के एल राहुल, सानिया मिर्जा और युवराज सिंह जैसे खिलाड़ियों का कामकाज देखती है।

बता दें कि 41 वर्षीय मसंद दो दशक से अधिक समय तक पत्रकार और मनोरंजन उद्योग के समीक्षक के तौर पर काम कर चुके हैं। राजीव मसंद ने 16 साल की उम्र में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा था, उसके बाद वे कई मीडिया ग्रुप्स के साथ काम कर चुके हैं। वो हमेशा के लिए पत्रकारिता छोड़ चुके हैं या नहीं, इस पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

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रिपोर्टिंग के दौरान इस तकलीफ को बर्दाश्त नहीं कर पाई रिपोर्टर, फूट-फूटकर रोई

सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस तरह लोगों के मौत से होने वाली तकलीफ को बयां कर रहा है।

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
reporter5454

कोरोना महामारी ने अपनों को खोने का बहुत से लोगों को दर्द दिया है और वो सारे रस्म और दस्तूर बदल डाले जो हमारे जीवन का हिस्सा थे। इस महामारी के सामने हमारी सारी परम्पराओं ने एक पल में घुटने टेंक दिए। कोरोना से हुई मौतों से उबर पाना हरगिज आसान नहीं है। इस महामारी से दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश अमेरिका में अब लोगों का धैर्य टूटने लगा है। सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस तरह लोगों के मौत से होने वाली तकलीफ को बयां कर रहा है।

दरअसल, पिछले सप्ताह सीएनएन की एक रिपोर्टर सारा सिडनर लॉस एंजिलिस से लाइव रिपोर्टिंग के दौरान इस कदर भावुक हुईं कि फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनका वीडियो पूरी दुनिया में तेजी से वायरल हो गया। वह कोरोना के कारण 12 जनवरी को अपने माता और सौतेले पिता दोनों को खो चुकीं एक महिला की व्यथा कवर रही थीं। सारा ने इस लाइव रिपोर्टिंग के दौरान कहा कि वह रिपोर्टिंग के लिए लगातार 10 अस्पतालों में गईं, जहां उन्होंने कोरोना से पीड़ित मरीजों व उनके परिवार के लोगों को जिस तरह से अस्पताल में रहते हुए देखा, इससे उन्हें बेहद दु:ख हुआ। 

लाइव रिपोर्टिंग के दौरान सिडनर ने रोते हुए कहा कि कोरोना वायरस सभी समुदायों के लोगों को ‘असम्मानजनक’ रूप से मार रहा है। वे इसका खामियाजा उठा रहे हैं। उन लोगों में से कई ऐसे लोग हैं, जिन पर हम अपना दैनिक जीवन जीने के लिए भरोसा करते हैं। 

सारा ने कहा कि यह सब होने के बाद इन परिवारों के लिए जीवन जीना कितना कठिन है और इनके दिल में कितना दर्द है, इस बात को समझ पाना वास्तव में काफी कठिन है।

सिडनर के कहा कि मुझे गुस्से में रोना आया। गुस्सा उन लोगों पर, जिन्होंने बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया और सच्चाई के खिलाफ लड़ते रहे। ऐसे लोगों ने अन्य लोगों की जान जोखिम में डाली। सिडनर ने इस दौरान आंसुओं से सराबोर रहीं।

यही नहीं कार्यक्रम में दौरान भावुक होने के बाद रिपोर्टर ने एंकर से माफी भी मांगी। इसके बाद एंकर ने अपनी सहकर्मी को बार-बार आश्वासन देते हुए कहा कि कोई माफी की जरूरत नहीं है। साथ ही एंकर ने कहा कि उसके सहयोगियों और दर्शकों ने आपके दिल से किए गए इस उत्कृष्ट रिपोर्टिंग की सराहना की है।

इस वीडियो को साझा करते हुए सारा ने लिखा कि रिपोर्टर के तौर पर मैं अपने काम को भले ही अच्छे से नहीं कर पाई लेकिन अब वापस उस समय को नहीं लाया जा सकता है।

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इस मीडिया वर्कशॉप में मिलेंगे बेहतरीन नौकरी के अलावा उद्यमी बनने के टिप्स

दि ग्रोथ स्कूल के एसोसिएट पार्टनर के रूप में समाचार4मीडिया पत्रकारिता के क्षेत्र में आने के इच्छुक लोगों के लिए कार्यशाला शुरू करने जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 19 January, 2021
Media Workshop

इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना ने सारे संसार को घुटनों पर ला दिया। कई व्यवसाय बंद हो गए, नौकरियां खत्म हुईं और वेतन घट गए। इस महामारी से मीडिया उद्योग भी अछूता नहीं रहा और बहुत से मीडिया घरानों के शटर गिर गए। कई अखबारों के अलाभप्रद संस्करण बंद हो गए। पत्रकारों और मीडिया उद्योग से जुड़े बहुत से कर्मियों का बड़ा वर्ग सड़क पर आ गया। जब तक लोग नौकरी में थे, सुखी थे, कंफर्ट जोन में थे, कुछ और सोचने की जरूरत ही नहीं थी। बेरोजगार हुए तो बहुत से लोगों ने विकल्पों के बारे में सोचना शुरू किया और कुछ लोगों ने अलग-अलग छोटी-मोटी नौकरियां पकड़ लीं, पर कुछ लोगों ने उद्यम की राह पकड़ी। इतिहास गवाह है कि जब-जब भी मंदी आती है या नौकरियों का अकाल पड़ता है तो उद्यम सबसे ज्यादा अच्छा विकल्प बनकर उभरता है और ज्यादा से ज्यादा लोग उद्यमी बनने के रास्ते तलाशते हैं।

मीडिया उद्योग में पिछले कई सालों से यह हो रहा है कि रिटायर होने के बाद, नौकरी से इस्तीफा देने के बाद या नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद बहुत से पत्रकारों ने न्यूज पोर्टल बना लिए। पत्रकार रह चुकने के कारण उन्हें शायद यह सबसे आसान विकल्प लगा। दिक्कत यह है कि ऐसे बहुत से लोग बहुत छोटे से दायरे में सिमटकर रह गए और लॉकडाउन के समय उनकी दिक्कतें और बढ़ गईं,क्योंकि आय के साधन नहीं बचे। अब सवाल यह है कि जब नौकरियों का अकाल हो और व्यवसाय का आसान विकल्प भी न रह गया हो तो क्या किया जाए।

इस सारी स्थिति के मद्देनज़र दि ग्रोथ स्कूल के एसोसिएट पार्टनर के रूप में समाचार4मीडिया ने एक अनूठी पहल करते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में आने के इच्छुक लोगों के लिए वेबिनार शुरू किये हैं। इस विशिष्ट कार्यशाला में पत्रकारिता, खासकर हिंदी पत्रकारिता का ज्ञान रखने वाले लोगों को नौकरी के अलावा उद्यमी बनने के नए विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि पत्रकारिता का ज्ञान रखने वाले लोग सिर्फ नौकरी के ही मोहताज न रहें। मीडिया जगत इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है, इस दौर में आत्मनिर्भरता का यह प्रयास समय की आवश्यकता है।।

समाचार4मीडिया के पूर्व संपादक, प्रसिद्ध लेखक, स्तंभकार और मोटिवेशनल स्पीकर पी.के. खुराना इस ऑनलाइन शिविर का संचालन करेंगे, जो 30 और 31 जनवरी 2021 को दोनों दिन प्रात:10 बजे से दोपहर एक बजे तक और फिर अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक चलेगा।

पी.के खुराना ने दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी सहित कई मीडिया घरानों और प्रेस क्लबों के लिए पत्रकारिता कार्यशालाओं का सफल संचालन किया है। व्यावहारिक गतिविधियों से भरपूर उनकी कार्यशालाएं सदैव एक आनंददायक अनुभव होती हैं। अपने चुटीले अंदाज में वे प्रतिभागियों को सफलता की राह पर ले चलते हैं। यानी, वे सिर्फ पत्रकारिता के क्षेत्र में सफल होना ही नहीं सिखाते, बल्कि यह भी सिखाते हैं कि तनावरहित जीवन जीते हुए खुश कैसे रहा जाए।

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TV9 Network में जसविंदर सिंह को मिली इस बड़े पद की जिम्मेदारी

जसविंदर सिंह पूर्व में विजक्राफ्ट (Wizcraft) और जागरण सॉल्यूशंस (Jagran Solutions) आदि संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
TV9 Network

देश के बड़े मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘टीवी9 नेटवर्क’ (TV9 Network) ने जसविंदर सिंह (Jaswinder Singh) को वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स और इवेंट्स) के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में वह रेवेन्यू आधारित तमाम पहलों का नेतृत्व करेंगे।   

जसविंदर सिंह को इंडस्ट्री में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह विजक्राफ्ट (Wizcraft) और जागरण सॉल्यूशंस (Jagran Solutions) आदि संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। टीवी9 नेटवर्क’ को जॉइन करने से पहले वह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) की इनोवेशन सैल (Innovation cel) का हिस्सा थे।

इस बारे में टीवी9 स्टूडियो के सीओओ (डिजिटल और ब्रॉडकास्टिंग) रक्तिम दास ने कहा, ‘हम नेटवर्क में जसविंदर सिंह की नियुक्ति का स्वागत करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमें उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा और हम इंडस्ट्री में नए बेंचमार्क स्थापित करेंगे।’

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इस वजह से यू-ट्यूब ने राष्ट्रपति के चैनल को सात दिनों के लिए किया सस्पेंड

यू-ट्यूब ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चैनल को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया, अब इस चैनल पर अब सात दिन तक कोई नया वीडियो अपलोड नहीं किया जा सकेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 January, 2021
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यू-ट्यूब ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चैनल को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है। अब इस चैनल पर अब सात दिन तक कोई नया वीडियो अपलोड नहीं किया जा सकेगा। साथ ही अपलोड किए गये उनके नए वीडियो को भी हटा दिया है।

'भड़काने वाले बयान बर्दाश्त नहीं' यू-ट्यूब ने अपने बयान में कहा है कि यू-ट्यूब हिंसा भड़काने या लोगों को उकसाने वाले कंटेट को लेकर संवेदनशील है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया वीडियो यू-ट्यूब की नीतियों का उल्लंघन करता है, लिहाजा राष्ट्रपति ट्रंप का नया वीडियो यू-ट्यूब से हटा दिया गया है। इसके साथ ही यू-ट्यूब ने राष्ट्रपति ट्रंप के चैनल पर स्ट्राइक भी किया है, जिसका मतलब ये है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप अगले एक हफ्ते तक अपने यू-ट्यूब चैनल पर ना तो नया वीडियो अपलोड कर सकते हैं और ना ही लाइव स्ट्रीमिंग ही कर सकते हैं।

'ट्रंप के चैनल पर भड़काने वाले कंटेंट' यू-ट्यूब ने अपने बयान में कहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चैनल पर जो वीडियो पोस्ट किया गया था उसकी सावधानीपूर्वक समीक्षा की गई है, जिसके बाद वीडियो के कंटेट में हमने हिंसा भड़काने वाले कंटेंट को पाया है, जो हमारी नीतियों का उल्लंघन करता है, लिहाजा ट्रंप के चैनल से नए वीडियो को हटाते हुए उनके चैनल को एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया गया है।'

इससे पहले भी यू-ट्यूब ट्रंप के चैनल पर आने वाले कॉमेंट पर हिंसा भड़काने का हवाला देते हुए पाबंदी लगा चुका है। 6 जनवरी को कैपिटल हिल दंगे के बाद पूरी दुनिया में राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना हो रही है। हेट स्पीच, दंगा भड़काने और समर्थको को उकसाने के आरोप में ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट को स्थायी तौर पर बंद कर दिया था। वहीं अमेरिकी सिविल राइट ग्रुप ने यू-ट्यूब से ट्रंप के चैनल को बंद करने की मांग करते हुए कहा था कि यदि गूगल यू-ट्यूब से डोनाल्ड ट्रंप के चैनल को नहीं हटाता है, तो फिर यू-ट्यूब पर आने वाले विज्ञापनों का बहिष्कार किया जाएगा।  

मंगलवार को दिए गये इस बयान के बाद बुधवार को ही यू-ट्यूब ने ट्रंप के चैनल को एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया है। ट्रंप पर 'सोशल' पाबंदियां यू-ट्यूब से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ट्विटर, फेसबुक और स्नैप इंक स्थायी तौर पर बैन कर चुका है। डोनाल्ड ट्रंप के यू-ट्यूब चैनल को 2.76 मीलियन लोगों ने सब्सक्राइब किया हुआ है। आरोप था कि अभी भी डोनाल्ड ट्रंप अपने यू-ट्यूब चैनल के जरिए लोगों को हिंसा के लिए भड़का रहे हैं।

 

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TRP Case: BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता ने मांगी जमानत, कोर्ट में रखे ये तर्क

पार्थो दासगुप्ता को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने मामले को 15 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 January, 2021
Partho Dasgupta

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता ने सोमवार को मुंबई की सेशंस कोर्ट से जमानत मांगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिवक्ता शार्दुल सिंह ने दासगुप्ता की जमानत के लिए कोर्ट के समक्ष तमाम तर्क दिए। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई पुलिस के उन आरोपों का खंडन किया कि टीआरपी में हेरफेर के लिए दासगुप्ता ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। शार्दुल सिंह ने तर्क दिया कि डाटा को हंसा रिसर्च कंपनी द्वारा एकत्रित व आपूर्ति किया गया और दासगुप्ता का इस पर बहुत कम नियंत्रण था।   

शार्दुल सिंह का कहना था कि ऐसे कोई भी सबूत नहीं है कि दासगुप्ता की ओर से बेईमानी की गई। धोखाधड़ी अथवा भरोसे को तोड़े जाने के मामले में कोई शिकायतकर्ता होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है।

शार्दुल सिंह ने तर्क दिया कि कथित टीआरपी घोटाले से प्रभावित लोग मीडिया संस्थान और विज्ञापनदाता हैं, जो शिकायतकर्ता के रूप में आगे नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने ऐसा नहीं किया है, क्योंकि कोई भी विज्ञापनकर्ता धोखा नहीं दे रहा है।

शार्दुल सिंह का कहना था कि दासगुप्ता को जेल में रखे जाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि BARC के सीईओ के पद पर रहते हुए दासगुप्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स पुलिस द्वारा जब्त किए जा चुके हैं।  

शार्दुल सिंह ने BARC इंडिया के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) रोमिल रामगढ़िया का उदाहरण भी दिया, जिन्हें इस मामले में जमानत पर छोड़ दिया गया था। इसके साथ ही शार्दुल सिंह ने जोर देकर कहा कि दासगुप्ता डायबिटीज के मरीज हैं।   

तमाम तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने दासगुप्ता को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए मामले को 15 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया और कहा कि इसके बाद कोई और स्थगन नहीं दिया जाएगा।

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TRP से छेड़छाड़ के मामले में इन तीनों के खिलाफ पुलिस ने दायर की सप्लीमेंट्री चार्जशीट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोमवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट में 3600 पेज की यह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है।

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
TRP

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता, BARC इंडिया के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) रोमिल रामगढ़िया और ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के सीईओ विकास खनचंदानी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने सोमवार को मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट में 3600 पेज की यह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में दासगुप्ता और रामगढ़िया फिलहाल जेल में हैं, जबकि खनचंदानी जमानत पर बाहर हैं।  

बता दें कि मुंबई पुलिस ने 13 दिसंबर को विकास खनचंदानी को गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में 16 दिसंबर को कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। वहीं, पार्थो दासगुप्ता को पुलिस ने 24 दिसंबर को गिरफ्तार किया था, जबकि इससे पहले 17 दिसंबर को रोमिल रामगढ़िया को गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला अक्टूबर में तब सामने आया था, जब ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए घरेलू पैनल के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ‘हंसा रिसर्च’ (Hansa Research) के अधिकारी नितिन देवकर ने एक शिकायत दर्ज की, जिसमें कहा गया था जिन घरों में बार-ओ-मीटर लगे हैं, उन घरों को भुगतान करके कुछ टीवी चैनल्स दर्शकों की संख्या में हेरफेर कर रहे हैं।

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इंडिया टुडे की एडिटर का आरोप, किसान आंदोलन में हुई महिला रिपोर्टर्स से छेड़छाड़

इंडिया टुडे की एडिटर प्रीति चौधरी ने दावा किया है कि प्रदर्शनस्थल पर मौजूद ‘कुछ प्रदर्शनकारी’ महिला रिपोर्टर्स का यौन उत्पीड़न भी करने लगे हैं

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
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कृषि कानून के मसले पर दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसानों के आंदोलन को लगभग 50 दिन के पूरे होने को हैं। लेकिन आंदोलन के दौरान कई बार पत्रकारों के साथ मारपीट या उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोकने की खबरें भी सामने आईं। लेकिन इस बार जो खबर सामने आई वो हैरान करने वाली है। दरअसल इंडिया टुडे की एडिटर प्रीति चौधरी ने दावा किया है कि प्रदर्शनस्थल पर मौजूद ‘कुछ प्रदर्शनकारी’ महिला रिपोर्टर्स का यौन उत्पीड़न भी करने लगे हैं, वहीं वहां मौजूद अन्य लोग ये सब होने दे रहे हैं।

प्रीति चौधरी ने दावा किया कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए उनकी खुद की टीम के पास कई ऐसे वाक्ये हैं, जब रिपोर्टर को यौन उत्पीड़न झेलना पड़ा।

उनके इस दावे के बाद भारत किसान यूनियन के सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और यौन उत्पीड़न को जस्टिफाई करने के लिए उन रिपोर्टर्स को खबरों का भूखा कहा है, जो ‘बलपूर्वक’ खबरों को लेने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे रिपोर्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

हालांकि उनका ये तर्क किसी के लिए भी समझ से परे है कि किसी रिपोर्टर के साथ हुए यौन उत्पीड़न को महज इस तर्क से कैसे सही ठहराया जा सकता है कि उसने ‘बल’ का इस्तेमाल किया। फिर भले ही रिपोर्टर ने किसी की बाइट लेने के लिए एक सीमा को भी पार क्यों न किया हो। प्रीति चौधरी उनके इस तर्क पर जवाब देती हैं, ‘यदि बाइट देना नहीं चाहते, तो मत दो, लेकिन कम से कम उसके पीछे चुटकी तो मत काटो।’

 

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