यूपी के मुख्यमंत्री के नाम वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी का खुला खत...

योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से सूबे के 20 फीसदी अल्पसंख्यकों के माथे पर चिंता की लकीरे आ गई हैं। मुस्लिम समाज में हलचल है। सभी के दिमाग में यह सवाल कौंध रहा है कि कट्टर हिंदुत्ववादी छवि वाले योगी आखिर किस एजेंडे पर काम करेंगे। इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने मुख्यमंत्री योगी

Last Modified:
Tuesday, 21 March, 2017
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योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से सूबे के 20 फीसदी अल्पसंख्यकों के माथे पर चिंता की लकीरे आ गई हैं। मुस्लिम समाज में हलचल है। सभी के दिमाग में यह सवाल कौंध रहा है कि कट्टर हिंदुत्ववादी छवि वाले योगी आखिर किस एजेंडे पर काम करेंगे। इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने मुख्यमंत्री योगी के नाम एक खुला खत लिखा है, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं...

प्रिय आदित्यनाथ योगी जी ,

मेरा नाम विनोद कापड़ी है। अच्छा लगता है, इसलिए थोड़ी बहुत पत्रकारिता करता हूं और छोटी मोटी फिल्में बनाता हूं।आपकी तरह एक हिंदू परिवार में मेरा जन्म हुआ है। आप ही की तरह उत्तराखंड का रहने वाला हूं और आप ही तरह जाति से एक पहाड़ी राजपूत भी हूं (वैसे मैं ये सब बिलकुल बताना नहीं चाहता था) लेकिन पता है क्या? जब से आप उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, मैं डरा हुआ हूं। मैं जानता हूं कि अगर क्षेत्र, धर्म और जाति की बात करें तो बतौर हिंदू उत्तराखंडी राजपूत मुझे तो आपके मुख्यमंत्री बनने पर बहुत खुशी होनी चाहिए और डरना तो बिलकुल नहीं चाहिए लेकिन मैं डरा हुआ हूं आदित्यनाथ जी।

मैं और मेरा परिवार पिछले 32 साल से उत्तर प्रदेश के ही बरेली और नोएडा में रह रहा है। हमारा वोट नोएडा में है और आपको पता नहीं होगा कि इस बार के विधानसभा चुनावों में मैंने और मेरे पूरे परिवार (मेरी पत्नी के सिवाय) ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिया था। इसलिए नहीं कि हम बीजेपी या मोदी समर्थक हैं बल्कि इसलिए कि पिछली दो सरकारों ने जिस तरह से राज्य को लूटा है, उसके बाद लगा कि उन लोगों को अब और लूट का मौक़ा नहीं मिलना चाहिए। कम से कम जो विकास की बात कर रहा है, उसे भी राज्य में एक मौक़ा दिया जा सकता है। लेकिन 18 मार्च को जैसे ही आपके नाम की घोषणा हुई,  हमें लगा कि हमारे साथ बड़ा विश्वासघात हुआ है।

मेरी और आपकी उम्र तकरीबन बराबर ही है। जितने साल आपने राजनीति की है,  उतने ही बरस मैंने पत्रकारिता भी की है। आपके चयन के बाद एक के बाद एक करके कई सारी घटनाएं सामने आने लगी। चाहे वो ओमप्रकाश पासवान की हत्या हो या शारदा प्रसाद रावत और बाक़ियों की। मैं जानता हूं कि आरोप अब तक सिद्ध नहीं हुए हैं पर उसके बाद की जो आपकी राजनीति रही है, उसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है। वो तो आप खुलेआम करते हैं और डंके की चोट पर कहते हैं कि अगर मुसलमान एक हिंदू को मारेगा तो आपकी सेना सौ मुसलमान मारेगी। मुसलमान एक हिंदू बालिका को लेकर जाएगा तो आपकी सेना सौ मुस्लिम बालिकाओं को उठा ले जाएगी। और आपके भड़काए हुए समर्थक तो आपसे भी चार क़दम आगे निकल जाते हैं, जब वो ये कहते हैं कि क़ब्र खोद कर मृत मुस्लिम औरतों का बलात्कार किया जाएगा और यह सब होगा हिंदू और हिंदुत्व को बचाने के लिए।

आपके नाम की घोषणा के वक्त ये सब कुछ मेरी आंखो के सामने घूमने लगा आदित्यनाथ जी। मुझे लगा कि ये तो बड़ी ग़लती हो गई है। लगा कि क़त्लेआम और मृत महिलाओं से रेप की बात करने वालों से तो वो लुटेरे ही ठीक थे।

अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि टीवी पर आपके एक समर्थक को लखनऊ से सुना- यूपी में रहना है तो योगी योगी कहना होगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है? क्यों कहना होगा भाई? कोई ज़बरदस्ती है क्या? ये मेरी आस्था और निजता का सवाल है। मेरा जब मन होगा, मैं कहूंगा। और नहीं कहूंगा तो यूपी में नहीं रह पाऊंगा क्या?

मेरे साथ मेरी पत्नी भी बैठी हुई थी। हम चर्चा कर रहे थे कि सोचो जब हम इतने सक्षम होते हुए, हिंदू होते हुए इतने परेशान हैं तो इस वक्त बाकी लोगो का क्या हाल होगा?

बचपन से हमने तो यही सुना था कि हिंदू कोई धर्म नहीं, जीवन पद्दति है ..way of life है। इंसान को इंसान से प्यार करना है। सुख दुख में हाथ बंटाना है। पर जब आपके सारे पुराने बयान याद आने लगे तो मुझे समझ नहीं आया कि ये कौन सी जीवन पद्धति है, जिसमें हम एक के बदले सौ मारेंगे? ये कौन सी जीवन पद्धति है जिसमें हम मृत महिलाओं के शव क़ब्र से निकालकर उनके साथ बलात्कार करेंगे? मुझे आज भी अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है कि बोलने की बात तो दूर कोई मृत या जीवित से बलात्कार जैसी घृणित बात सोच भी कैसे सकता है?

मैं जानता हूं कि ये आपने नहीं कहा था पर आपकी मौजूदगी में तो कहा गया था। धीरे धीरे मेरा डर बढ़ने लगा। यही सोचकर कि जिन लोगों ने कभी क़त्लेआम की बात कही, आज उन्हीं बातों को कहने वाला मेरे राज्य का सबसे बड़ा रक्षक है। मुझसे कोई भी कह सकता है कि जब मेरे या मेरे परिवार के क़त्लेआम की बात ही नहीं हुई है तो मैं क्यों डर रहा हूं? पर मेरे ख़्याल से मुद्दा ये नहीं है। मेरे लिए मुद्दा ये है कि क़त्लेआम और बलात्कार की बात आखिर हुई ही क्यों? किसी भी सभ्य समाज में चाहे वो एक क़त्ल हो या सौ क़त्ल हों- उसकी बात ही क्यों होती है? और किसी ने एक क़त्ल कर भी दिया तो क़ानून है ना हमारे पास। क़ानून भी तो अपना काम कर सकता है। हम कौन होते हैं ये कहने वाले कि हम सौ मार डालेंगे? हम मृत के साथ रेप करेंगे। और आप तो वैसे भी संन्यासी हैं, गुरु हैं, आपने दीक्षा हासिल की है, दुनिया को रास्ता दिखाते हैं। इतना तो आप भी समझते हैं कि नफ़रत का इलाज नफ़रत तो बिलकुल नहीं है।

मैं तो जिस परिवेश में पला बढ़ा, वहां तो राम मेरा दोस्त है तो रहीम मेरा भाई है। राम का क़त्ल होने पर कोई मेरे भाई रहीम और बाकी सौ रहीम को मारेगा तो मुझे डर तो लगेगा ही आदित्यनाथ जी। मैं तो कह रहा हूं कि जिसने या जिस भीड़ ने राम को मारा, उसे क़ानून से सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन बिना असली क़ातिल जाने हम खुद ही क़ानून हाथ में लेकर एक राम के बदले सौ बेक़सूर रहीम को मारने की बात करेंगे तो मुझे डर लगेगा आदित्यनाथ जी।

सीमा को कोई एक भगा कर ले गया और उसके बदले में कोई सौ सबीना को भगाने की बात करेगा तो मुझे भी डर लगेगा आदित्यनाथ जी क्योंकि मैं, राम-रहीम, सीमा-सबीना उसी समाज, उसी शहर, उसी क़स्बे और उसी गाँव का हिस्सा हैं, जहां हम दशकों से साथ रहते आ रहे हैं। मेरे मोहल्ले का एक भी घर जलेगा, मेरे मोहल्ले से एक भी कोई मरेगा तो मुझे भी डर लगेगा आदित्यनाथ जी।

वो लोग नासमझ हैं जो ये समझते है कि दूसरे का घर जल रहा है और हमारा घर कभी नहीं जलेगा। हमारे घर, हमारी दीवारें दशकों से, सदियों से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। एक भी दीवार जलती है तो आग मेरे घर में भी आएगी। इसलिए मेरे डर को समझिए आदित्यनाथ जी। कर्फ़्यू लगेगा तो खाने पीने की दिक़्क़त मुझे भी होगी, हिंसा होगी तो मेरे बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाएंगे, मुज़फ़्फ़रनगर जलेगा तो आंच नोएडा में भी आएगी। मैं इसीलिए डरा हुआ हूं आदित्यनाथ जी।

मैं ये भी जानता हूं कि पिछले कुछ दशकों में बहुत खतरनाक तुष्टिकरण हुआ है। और इसी तुष्टिकरण ने समाज और देश को इतना बांट दिया है। आप भी जानते हैं कि ये किन लोगों ने किया है और किस मक़सद से किया है। लेकिन आप ये भी जानते होंगे कि इसके लिए मैं या मेरे जैसे आम नागरिक रहीम या सबीना तो क़तई ज़िम्मेदार नहीं हैं। हम सब तो ना तीन में हैं और ना तेरह में लेकिन जब मारने और काटने की बात आती है तो हम ही सबसे पहले निशाने पर आते है। जो गुनाह राजनैतिक दलों ने किए, उसकी सज़ा एक आम शहरी क्यों भुगते?

आदित्यनाथ जी , आपको पता नहीं होगा पर आपके नाम पर यकायक समाज के हर हिस्से में झुंड के झुंड पैदा हो गए हैं जो ये कहने लगे हैं कि अब पता चलेगा उन्हें भी। ये उन्हें कौन हैं आदित्यनाथ जी? ये उन्हें भी तो मेरे समाज, मेरे गाँव और मौहल्ले का हिस्सा ही हैं। फिर इस तरह से डराने और धमकाने वाले ये झुंड क्यों अचानक ऐसा बर्ताव कर रहे हैं ? मैं इस बर्ताव से भी डरा हुआ हूं।

हो सकता है कि मेरी सारी आशंकाएं बिलकुल निराधार साबित हों। हो सकता है कि मेरे सारे डर बेकार साबित हों। ये भी हो सकता है कि एक ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री के तौर पर राजधर्म का पालन करते हुए आप मेरे जैसे तमाम डरे हुए लोगों को ग़लत साबित कर दें। यकीन मानिए मैं खुद प्रार्थना करुंगा कि आप मेरे डर को ग़लत साबित करें, मुझे ग़लत साबित करें और जिस दिन ये होगा, उस दिन मुझ से अधिक खुश और कोई नहीं होगा आदित्यनाथ जी।

उस दिन बिना किसी दबाव के मैं भी जय श्रीराम कहूंगा और मेरा भाई रहीम भी और मेरी बहन सबीना भी !!!

नई भूमिका के लिए मेरी तरफ से शुभकामनाएं स्वीकार करें।

आपका विनोद कापड़ी

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मराठी अखबार के एडिटर के खिलाफ FIR पर कोर्ट नाराज, उठाए ये सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठी अखबार सकोती (Sachoti) के एडिटर राजकुमार छाजेड़ के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर सवाल उठाए हैं

Last Modified:
Friday, 22 January, 2021
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठी अखबार Sachoti के एडिटर राजकुमार छाजेड़ के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस ने छाजेड़ द्वारा सर्कुलेट किए गए एक वॉट्सऐप मैसेज के आधार पर उन पर दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया है।

जस्टिस एसएस शिंदे और मनीष पिटाले की खंडपीठ ने वॉट्सऐप मैसेज को लेकर महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या आपको लगता है कि यह संदेश वास्तव में दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करने के लिए है? साथ ही कहा कि यदि आप हर चीज को लेकर अतिसंवेदनशील हो जाएंगे, तो ये मुश्किल हो जाएगा।

57 वर्षीय छाजेड़ महाराष्ट्र के जलगांव जिले के निवासी हैं। वह रत्नागिरी जिले के चिपलून में एक गौशाला भी चलाते हैं। उनके मुताबिक, पैसों को लेकर हुए विवाद की वजह से कुछ लोगों ने उनकी गौशाला में तोड़फोड़ की और वहां बंधी गायों की पिटाई की।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि अगले दिन छाजेड़ ने दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने के इरादे से एक वॉट्सऐप मैसेज सर्कुलेट किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उन्हें स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई। लेकिन उन्होंने अब अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने और नुकसान की हुई भरपाई के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

छाजेड़ ने कहा कि उन्होंने पुलिस से हमलावरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अनुरोध किया था, लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। पुलिस को ये लगता है कि कुछ गौशाला संरक्षकों को किया उनका वॉट्सऐप मैसेज उनके लिए परेशानी का सबब बन गया।

पीठ ने सरकारी वकील डॉ. एफआर शेख से पूछा, ‘क्या आपने मैसेज देखा है और यह किस अपराध का खुलासा करता है?’

इस पर शेख ने कहा, 'छाजेड़ के खिलाफ 14 अन्य मामले दर्ज हैं और इस विशेष मामले में उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए (जानबूझकर कृत्यों से धार्मिक भावनाओं को अपमानित करना) लागू होती है।

जस्टिस शिंदे ने फिर से मैसेज को देखा और कहा, ‘उन्होंने मैसेज में किसी भी धर्म का उल्लेख नहीं किया है। इसके बाद जस्टिस ने फिर पूछा कि क्या उन्होंने किसी जाति का या फिर किसी विशेष वर्ग के लोगों का उल्लेख किया है? जस्टिस ने कहा कि मैसेज में उनकी मुख्य पीड़ा का पता चलता है कि सरकार गौशाला को अनुदान नहीं दे रही है।

फिर शेख ने कहा कि मैसेज में एक समुदाय के खिलाफ विशिष्ट आरोप है। इस पर, पीठ ने कहा, ‘यदि तथ्यों पर जाएं, तो ये एक समुदाय के खिलाफ आरोप नहीं हैं। ये ऐसी चीजें हैं जो हुई हैं। यह उनकी पीड़ा है, जो बताती है कि उनके शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जांच अधिकारी से इस मामले में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए वकील ने पीठ के समझ थोड़ा और समय मांगा। अदालत ने फिलहाल सुनवाई 8 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।

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वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा के खिलाफ अरेस्ट वारंट पर एडिटर्स गिल्ड नाराज, कही ये बात

एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में अडानी ग्रुप से ठाकुरता के खिलाफ मुकदमे को वापस लेने की मांग की।

Last Modified:
Friday, 22 January, 2021
thakurta5454

पिछले दिनों वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता के खिलाफ गुजरात के कच्छ जिला अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। मामला अडानी समूह द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे से संबंधित है, जो 2017 में दायर किया गया था।

इस मामले में गुरुवार को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने बयान जारी कर इसकी निंदा की है। एडिटर्स गिल्ड ने बयान जारी कर कहा, ‘परांजय ठाकुरता के खिलाफ निचली अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करना इस बात का एक और उदाहरण है कि बिजनेस हाउस किसी भी तरह की होनी वाली आलोचनाओं के प्रति कितने असहिष्णु हो गए हैं कि इसकी वजह से लगातार इनकी ओर से स्वतंत्र और निडर पत्रकारों को टारगेट किया जा रहा है।’

गिल्ड ने ठाकुरता के खिलाफ कार्रवाई को ‘प्रेस को बोलने की आजादी’ पर कुठाराघात के रूप में वर्णित किया है और कहा है कि ये स्वीकार करना बहुत मुश्किल हो गया है कि न्यायपालिका भी अब इसका हिस्सा बन गई है।

एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में अडानी ग्रुप से ठाकुरता के खिलाफ मुकदमे को वापस लेने की मांग की और कहा कि एडिटर्स गिल्ड ये देखकर बहुत निराश है कि कैसे इन मामलों में प्रेस को दबाने के लिए न्यायतंत्र का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह के कानूनों का इस्तेमाल सत्ता में बैठे लोग मीडिया के किए गए खुलासे को दबाने के लिए करते हैं।

दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार परांजय ठाकुराता ने 2017 में अडानी समूह को सरकार की ओर से ‘500 करोड़ रुपए का उपहार’ मिलने की खबर प्रकाशित की थी, इसी को लेकर समूह ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया गया था कि केंद्र ने अडानी पावर लिमिटेड को कच्चे माल के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र नियमों में संशोधन किया था, जिससे 500 करोड़ रुपए का लाभ हुआ।

पत्रकार ठाकुरता के वकील आनंद याग्निक के मुताबिक अडानी समूह को लेकर जिस वेबसाइट पर लेख प्रकाशित किया था, उसमें सभी के खिलाफ शिकायतें वापस ले ली गई हैं, लेकिन ठाकुरता के खिलाफ मामला वापस नहीं लिया गया है। वकील के मुताबिक, जब लेख प्रकाशित करने वाली पत्रिका आपराधिक मानहानि के लिए जिम्मेदार नहीं है, सह-लेखक के खिलाफ भी मामला वापस ले लिया गया है, तो आप लेखक के खिलाफ शिकायत वापस क्यों नहीं ले रहे हैं। वकील ने कहा, ‘हमने अदालत में मुकदमा खरिज करने की अर्जी दी है।’

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अब India TV में बड़ी भूमिका निभाएंगे सिद्धार्थ बिस्वास

बिस्वास इससे पहले पीटीसी नेटवर्क में हेड (ब्रैंड मार्केटिंग और डिजिटल) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 21 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 21 January, 2021
Siddharth Biswas

हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ (India TV) में सिद्धार्थ बिश्वास ने बतौर AVP (Strategy and Special Project) जॉइन किया है। बिस्वास इससे पहले पीटीसी नेटवर्क से जुड़े हुए थे और हेड (ब्रैंड मार्केटिंग और डिजिटल) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से उन्होंने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था।  

पूर्व में बिश्वास ‘जी’ (Zee), ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) और ‘जागरण प्रकाशन’ (Jagran Prakashan) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संसथानों में ब्रैंड मार्केटिंग का काम संभाल चुके हैं।

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TRP Case: BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता की जमानत अर्जी फिर खारिज

यह दूसरी बार है जब टीआरपी घोटाले में गिरफ्तार दासगुप्ता की जमानत याचिका खारिज की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
Partho Dasgupta

मुंबई की सेशन कोर्ट ने टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने इस बारे में 20 जनवरी 2021 को आदेश जारी किए।

बता दें कि टीआरपी घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में मुंबई पुलिस ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में पार्थो दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। वे 31 दिसंबर, 2020 तक पुलिस हिरासत में थे, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

न्यायिक हिरासत में ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कम होने के बाद दासगुप्ता को 15 जनवरी को मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह दूसरी बार है जब दासगुप्ता की जमानत याचिका खारिज की गई है। इससे पहले मुंबई की मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने चार जनवरी को दासगुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर  दी थी।

गौरतलब है कि टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला अक्टूबर में तब सामने आया था, जब ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए घरेलू पैनल के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ‘हंसा रिसर्च’ (Hansa Research) के अधिकारी नितिन देवकर ने एक शिकायत दर्ज की, जिसमें कहा गया था जिन घरों में बार-ओ-मीटर लगे हैं, उन घरों को भुगतान करके कुछ टीवी चैनल्स दर्शकों की संख्या में हेरफेर कर रहे हैं।

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मानहानि के मामले में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता की बढ़ीं मुश्किलें

अडानी समूह द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
Thakurta6465

अडानी समूह द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में गुजरात के कच्छ जिले में मुंद्रा की एक अदालत ने मंगलवार को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली की निजामुद्दीन थाना पुलिस को निर्देश जारी करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप सोनी की अदालत ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 500 के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय किया जाता है। आपको उक्त आरोपी को गिरफ्तार करने और मेरे समक्ष पेश करने का निर्देश दिया जाता है।’

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार परांजय ठाकुरता ने 2017 में अडानी समूह को सरकार की ओर से ‘500 करोड़ रुपए का उपहार’ मिलने की खबर प्रकाशित की थी, इसी को लेकर समूह ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

रिपोर्ट्स मुताबिक, उनके वकील आनंद याग्निक ने कहा, ‘हमें अभी तक (अदालत से) सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हमारे पास यह सूचना (गिरफ्तारी वारंट की) मीडिया के माध्यम से पहुंची है।’ उन्होंने कहा कि अडानी समूह ने पत्रिका के संपादक सहित सभी के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले ली है, सिर्फ पत्रकार के खिलाफ शिकायत कायम है। वकील ने कहा कि ‘लेख प्रकाशित करने वाली पत्रिका आपराधिक मानहानि के लिए जिम्मेदार नहीं है, सह-लेखक के खिलाफ भी मामला वापस ले लिया गया है लेकिन आप लेखक के खिलाफ शिकायत वापस नहीं ले रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमने अदालत में मुकदमा खरिज करने की अर्जी दी है।’

वकील ने बताया कि महामारी के कारण अदालत में सुनवाई बाधित होने की वजह से अडानी समूह द्वारा दायर मुकदमे पर सोमवार को सुनवाई हुई और अदालत ने कहा कि वह समुचित आदेश देगी। उन्होंने कहा, ‘आज उन्होंने समुचित आदेश दिया है।’

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BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

बार्क (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Partho Dasgupta

बार्क (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दास गुप्ता की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। बता दें कि उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कम हो गया था, जिसके बाद तंजोला जेल प्रशासन ने उन्हें शुक्रवार दोपहर एक बजे अस्पताल में शिफ्ट किया था।

उनकी पत्नी सम्राज्नी दासगुप्ता (Samrajni Dasgupta) के मुताबिक, डॉक्टर्स की देखरेख में आज सुबह उन्हें आईसीयू (Intensive Care Unit) में शिफ्ट किया गया। उन्होंने बताया, ‘पार्थो किसी भी वॉयस कमांड का जवाब नहीं दे पा रहे हैं और न ही कुछ बोल पा रहे हैं। वह ब्लड शुगर के मरीज हैं और उनका ब्लड प्रेशर भी घट-बढ़ रहा है। हमें आज सुबह ही उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी गई थी। उनकी हालत नाजुक है।’

बता दें कि टीआरपी घोटाले मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में मुंबई पुलिस ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में उन्हें गिरफ्तार किया था। वे 31 दिसंबर, 2020 तक पुलिस हिरासत में थे, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

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प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने पत्रकारिता से बनाई दूरी, इस कंपनी में बने COO

प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने फिलहाल पत्रकारिता से दूरी बना ली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
KaranJohar5454

प्रख्यात फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने फिलहाल पत्रकारिता से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब उन्होंने बतौर चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर यानी COO टैलेंट मैनेजमेंट फर्म धर्मा कॉर्नरस्टोन एजेंसी (DCA) जॉइन कर लिया है। कंपनी में चलने वाले ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी अब राजीव मसंद के कंधो पर होगी।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में फिल्म निर्माता करण जौहर ने बंटी सजदेह के साथ अपनी इस टैलेंट मैनेजमेंट फर्म की घोषणा की थी। सजदेह की कंपनी कॉर्नरस्टोन की स्थापना 2008 में हुई थी। कंपनी विराट कोहली, विनेश फोगाट, के एल राहुल, सानिया मिर्जा और युवराज सिंह जैसे खिलाड़ियों का कामकाज देखती है।

बता दें कि 41 वर्षीय मसंद दो दशक से अधिक समय तक पत्रकार और मनोरंजन उद्योग के समीक्षक के तौर पर काम कर चुके हैं। राजीव मसंद ने 16 साल की उम्र में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा था, उसके बाद वे कई मीडिया ग्रुप्स के साथ काम कर चुके हैं। वो हमेशा के लिए पत्रकारिता छोड़ चुके हैं या नहीं, इस पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

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रिपोर्टिंग के दौरान इस तकलीफ को बर्दाश्त नहीं कर पाई रिपोर्टर, फूट-फूटकर रोई

सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस तरह लोगों के मौत से होने वाली तकलीफ को बयां कर रहा है।

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
reporter5454

कोरोना महामारी ने अपनों को खोने का बहुत से लोगों को दर्द दिया है और वो सारे रस्म और दस्तूर बदल डाले जो हमारे जीवन का हिस्सा थे। इस महामारी के सामने हमारी सारी परम्पराओं ने एक पल में घुटने टेंक दिए। कोरोना से हुई मौतों से उबर पाना हरगिज आसान नहीं है। इस महामारी से दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश अमेरिका में अब लोगों का धैर्य टूटने लगा है। सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जो इस तरह लोगों के मौत से होने वाली तकलीफ को बयां कर रहा है।

दरअसल, पिछले सप्ताह सीएनएन की एक रिपोर्टर सारा सिडनर लॉस एंजिलिस से लाइव रिपोर्टिंग के दौरान इस कदर भावुक हुईं कि फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनका वीडियो पूरी दुनिया में तेजी से वायरल हो गया। वह कोरोना के कारण 12 जनवरी को अपने माता और सौतेले पिता दोनों को खो चुकीं एक महिला की व्यथा कवर रही थीं। सारा ने इस लाइव रिपोर्टिंग के दौरान कहा कि वह रिपोर्टिंग के लिए लगातार 10 अस्पतालों में गईं, जहां उन्होंने कोरोना से पीड़ित मरीजों व उनके परिवार के लोगों को जिस तरह से अस्पताल में रहते हुए देखा, इससे उन्हें बेहद दु:ख हुआ। 

लाइव रिपोर्टिंग के दौरान सिडनर ने रोते हुए कहा कि कोरोना वायरस सभी समुदायों के लोगों को ‘असम्मानजनक’ रूप से मार रहा है। वे इसका खामियाजा उठा रहे हैं। उन लोगों में से कई ऐसे लोग हैं, जिन पर हम अपना दैनिक जीवन जीने के लिए भरोसा करते हैं। 

सारा ने कहा कि यह सब होने के बाद इन परिवारों के लिए जीवन जीना कितना कठिन है और इनके दिल में कितना दर्द है, इस बात को समझ पाना वास्तव में काफी कठिन है।

सिडनर के कहा कि मुझे गुस्से में रोना आया। गुस्सा उन लोगों पर, जिन्होंने बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया और सच्चाई के खिलाफ लड़ते रहे। ऐसे लोगों ने अन्य लोगों की जान जोखिम में डाली। सिडनर ने इस दौरान आंसुओं से सराबोर रहीं।

यही नहीं कार्यक्रम में दौरान भावुक होने के बाद रिपोर्टर ने एंकर से माफी भी मांगी। इसके बाद एंकर ने अपनी सहकर्मी को बार-बार आश्वासन देते हुए कहा कि कोई माफी की जरूरत नहीं है। साथ ही एंकर ने कहा कि उसके सहयोगियों और दर्शकों ने आपके दिल से किए गए इस उत्कृष्ट रिपोर्टिंग की सराहना की है।

इस वीडियो को साझा करते हुए सारा ने लिखा कि रिपोर्टर के तौर पर मैं अपने काम को भले ही अच्छे से नहीं कर पाई लेकिन अब वापस उस समय को नहीं लाया जा सकता है।

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इस मीडिया वर्कशॉप में मिलेंगे बेहतरीन नौकरी के अलावा उद्यमी बनने के टिप्स

दि ग्रोथ स्कूल के एसोसिएट पार्टनर के रूप में समाचार4मीडिया पत्रकारिता के क्षेत्र में आने के इच्छुक लोगों के लिए कार्यशाला शुरू करने जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 19 January, 2021
Media Workshop

इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना ने सारे संसार को घुटनों पर ला दिया। कई व्यवसाय बंद हो गए, नौकरियां खत्म हुईं और वेतन घट गए। इस महामारी से मीडिया उद्योग भी अछूता नहीं रहा और बहुत से मीडिया घरानों के शटर गिर गए। कई अखबारों के अलाभप्रद संस्करण बंद हो गए। पत्रकारों और मीडिया उद्योग से जुड़े बहुत से कर्मियों का बड़ा वर्ग सड़क पर आ गया। जब तक लोग नौकरी में थे, सुखी थे, कंफर्ट जोन में थे, कुछ और सोचने की जरूरत ही नहीं थी। बेरोजगार हुए तो बहुत से लोगों ने विकल्पों के बारे में सोचना शुरू किया और कुछ लोगों ने अलग-अलग छोटी-मोटी नौकरियां पकड़ लीं, पर कुछ लोगों ने उद्यम की राह पकड़ी। इतिहास गवाह है कि जब-जब भी मंदी आती है या नौकरियों का अकाल पड़ता है तो उद्यम सबसे ज्यादा अच्छा विकल्प बनकर उभरता है और ज्यादा से ज्यादा लोग उद्यमी बनने के रास्ते तलाशते हैं।

मीडिया उद्योग में पिछले कई सालों से यह हो रहा है कि रिटायर होने के बाद, नौकरी से इस्तीफा देने के बाद या नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद बहुत से पत्रकारों ने न्यूज पोर्टल बना लिए। पत्रकार रह चुकने के कारण उन्हें शायद यह सबसे आसान विकल्प लगा। दिक्कत यह है कि ऐसे बहुत से लोग बहुत छोटे से दायरे में सिमटकर रह गए और लॉकडाउन के समय उनकी दिक्कतें और बढ़ गईं,क्योंकि आय के साधन नहीं बचे। अब सवाल यह है कि जब नौकरियों का अकाल हो और व्यवसाय का आसान विकल्प भी न रह गया हो तो क्या किया जाए।

इस सारी स्थिति के मद्देनज़र दि ग्रोथ स्कूल के एसोसिएट पार्टनर के रूप में समाचार4मीडिया ने एक अनूठी पहल करते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में आने के इच्छुक लोगों के लिए वेबिनार शुरू किये हैं। इस विशिष्ट कार्यशाला में पत्रकारिता, खासकर हिंदी पत्रकारिता का ज्ञान रखने वाले लोगों को नौकरी के अलावा उद्यमी बनने के नए विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि पत्रकारिता का ज्ञान रखने वाले लोग सिर्फ नौकरी के ही मोहताज न रहें। मीडिया जगत इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है, इस दौर में आत्मनिर्भरता का यह प्रयास समय की आवश्यकता है।।

समाचार4मीडिया के पूर्व संपादक, प्रसिद्ध लेखक, स्तंभकार और मोटिवेशनल स्पीकर पी.के. खुराना इस ऑनलाइन शिविर का संचालन करेंगे, जो 30 और 31 जनवरी 2021 को दोनों दिन प्रात:10 बजे से दोपहर एक बजे तक और फिर अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक चलेगा।

पी.के खुराना ने दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी सहित कई मीडिया घरानों और प्रेस क्लबों के लिए पत्रकारिता कार्यशालाओं का सफल संचालन किया है। व्यावहारिक गतिविधियों से भरपूर उनकी कार्यशालाएं सदैव एक आनंददायक अनुभव होती हैं। अपने चुटीले अंदाज में वे प्रतिभागियों को सफलता की राह पर ले चलते हैं। यानी, वे सिर्फ पत्रकारिता के क्षेत्र में सफल होना ही नहीं सिखाते, बल्कि यह भी सिखाते हैं कि तनावरहित जीवन जीते हुए खुश कैसे रहा जाए।

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TV9 Network में जसविंदर सिंह को मिली इस बड़े पद की जिम्मेदारी

जसविंदर सिंह पूर्व में विजक्राफ्ट (Wizcraft) और जागरण सॉल्यूशंस (Jagran Solutions) आदि संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
TV9 Network

देश के बड़े मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘टीवी9 नेटवर्क’ (TV9 Network) ने जसविंदर सिंह (Jaswinder Singh) को वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स और इवेंट्स) के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में वह रेवेन्यू आधारित तमाम पहलों का नेतृत्व करेंगे।   

जसविंदर सिंह को इंडस्ट्री में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह विजक्राफ्ट (Wizcraft) और जागरण सॉल्यूशंस (Jagran Solutions) आदि संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। टीवी9 नेटवर्क’ को जॉइन करने से पहले वह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) की इनोवेशन सैल (Innovation cel) का हिस्सा थे।

इस बारे में टीवी9 स्टूडियो के सीओओ (डिजिटल और ब्रॉडकास्टिंग) रक्तिम दास ने कहा, ‘हम नेटवर्क में जसविंदर सिंह की नियुक्ति का स्वागत करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमें उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा और हम इंडस्ट्री में नए बेंचमार्क स्थापित करेंगे।’

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