भविष्य की योजनाओं पर डॉ. सुभाष चंद्रा ने खोला दिल का पिटारा

दो दिन पहले ही ‘ZEE’ समूह से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 16 November, 2018
Last Modified:
Friday, 16 November, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

दो दिन पहले ही ‘ZEE’ समूह से एक बड़ी खबर सामने आई थी। दरअसल, मीडिया मुगल डॉ. सुभाष चंद्रा के स्वामित्व वाले एस्सेल ग्रुप (Essel Group) ने घोषणा की थी कि वह 'जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) में अपनी आधी हिस्सेदारी किसी स्ट्रेटजिक पार्टनर को बेचने की तैयारी कर रहा है। इस घोषणा के बाद से ‘ZEE’ के भविष्य की प्लानिंग को लेकर मार्केट में तमाम तरह की चर्चाएं हैं।

हाल ही में कंपनी ने दूसरी तिमाही (FY18 Q2) के वित्तीय नतीजे घोषित किए थे, इस तिमाही में कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 24.9 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। यही नहीं, माना जा रहा है कि इस साल के शुरू में लॉन्च हुआ इसका ‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म भी काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

ऐसे में ‘ZEE’ की आगे की योजनाओं के बारे में‘बिजनेसवर्ल्ड’ व ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने ‘ZEE’ और ‘एस्सेल ग्रुप’ के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

आप इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हैं और कई लोगों के लिए रोल मॉडल हैं। माना जाता है कि आप उन चीजों को भी पहले देख-समझ लेते हैं, जो आमतौर पर लोग नहीं देख पाते हैं। ऐसे में जब आप जैसी शख्सियत भविष्य को देखते हुए अपनी कंपनी का हिस्सा बेचने का निर्णय करती है तो यह मीडिया में हेडलाइंस बन जाती है। जरा खुलकर बताएं कि आप भविष्य को लेकर ऐसी क्या चीज देख रहे हैं. जो अन्य लोग नहीं देख पा रहे हैं?

बिल्कुल, मेरा मानना है कि दूसरे लोग अभी वो चीज नहीं देख पा रहे हैं. जो मैं देख सकता हूं। लेकिन, मुझे ये भी पता है कि धीरे-धीरे उन्हें भी ये चीजें दिखाई देने लगेंगी। आजकल टेक्नोलॉजी काफी बदल रही है, ऐसे में टेक्नोलॉजी को देखते हुए सिर्फ इस मीडियम में नहीं, बल्कि सभी बिजनेस में बदलाव होने जा रहा है। यहां तक कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को भी टेक्नोलॉजी के कारण अपने पूरे ऑर्गनाइजेशन और कार्य संरचना को फिर से तैयार करना होगा।


उदाहरण के लिए- कॉल सेंटर का बहुत ही आसान काम है, लेकिन मेरा मानना है कि आज से पांच साल बाद कोई भी कॉल सेंटर पर काम नहीं करेगा। वहां पर रोबोट और मशीनें आ जाएंगी, जो लोगों के सवालों का जवाब देंगी। मेरी भविष्यवाणी है कि आने वाले पांच से आठ सालों में वैश्विक स्तर पर एक बिलियन लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए सभी को अभी से इसके लिए तैयारी करनी होगी। यहां तक कि एजुकेशन सिस्टम को भी नई अप्रोच के साथ फिर से शुरू करना चाहिए। राज्यसभा सदस्य के रूप में मैं यह मामला उठाने जा रहा हूं। भविष्य को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव होने चाहिए।

मीडिया कंटेट के बारे में जरा विस्तार से बताएं?

मीडिया की बात करें तो आने वाले समय में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य बड़ी स्क्रीन में भी काफी बदलाव होगा। यह सिर्फ ऑडियो और विडियो मीडियम नहीं रह जाएगा, बल्कि यह एक पूरा मार्केट बन जाएगा, जहां पर आप अपनी जरूरत का सभी सामान खरीद सकेंगे।

आपके कहने का मतलब है कि कंटेंट इसमें अहम भूमिका निभाएगा और मोबाइल का इस्तेमाल कर लोग विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे?   

बिल्कुल ऐसा ही होगा।

हमें Zee5 के बारे में बताएं। पिछले 12 महीनों की बात करें तो 50 मिलियन से ज्यादा सबस्क्राइबर इससे जुड़ चुके हैं। आपका कहना है कि समूह की हिस्सेदारी बेचने (stake sale) का एक कारण ग्लोबल स्तर पर टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ काम करना और इसके ‘Average revenue per user’ (ARPU) को बढ़ाना है। यदि यह सौदा छह-सात महीने मे होता है तो नया ‘ZEE’ कैसा होगा और यह अब से किस तरह अलग होगा?

हमें ये अच्छी तरह पता है सही कीमत पर बेहतर कंटेंट कैसे तैयार करते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि ये मान लिया जाए कि कंटेंट पर ‘Zee’ कम खर्च करता है। यह बात सही नहीं है। हमें खर्चों के बारे में, उपकरणों की खरीद और कलाकारों-स्टूडियो के खर्च के बारे में अच्छी तरह से पता है। हमारी मानसिकता कंटेंट मेकर की है। जबकि नेटफ्लिक्स और खासकर अमेजॉन की बात करें तो उसकी व्यापारिक मानसिकता है।

हमारी टीम ने नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि इन कलाकारों के साथ इसी तरह का शो हम 40 प्रतिशत सस्ते में तैयार कर सकते हैं। फिर भी हमारे प्रॅड्यूसर को 15 से 20 प्रतिशत की ग्रोथ मिलेगी और इंटरनेशनल मार्केट में ऐसा करने में हम कामयाब रहे हैं। इन दिनों, इंटरनेशनल मार्केट में हम 12 विदेशी भाषाओं में सर्विस दे रहे हैं। जर्मनी में, जहां का मार्केट काफी विकसित है, वहां कंटेट के मामले में हमारा मार्केट शेयर 1.5 प्रतिशत है। इसके अलावा हमने आधा घंटे का ऑरिजनल रसियन कंटेंट भी तैयार करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में हम अरबी भाषा में एक हफ्ते में दो घंटे का कंटेंट तैयार कर रहे हैं। ‘Zee’ किसी ऐसी टेक्नो मीडिया कंपनी के साथ पार्टनरशिप करेगा, जिसकी ग्लोबल स्तर पर मौजूदगी होगी और जो ओटीटी प्लेटफॉर्म समेत अमेरिका, स्पेन, ब्राजील और अन्य विदेशी भाषाओं में सर्विस दे रही होगी।  

भारत की बात करें तो यहां ‘Zee5’ के 500 मिलियन से ज्यादा सबस्क्राइबर्स हैं और हमें लगता है कि अपने पार्टनर के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने ही और लोगों को अपने साथ जोड़ सकते हैं। मेरा कहना है कि हम साउथ एशिया में 100 मिलियन से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ेंगे और अगले सात-आठ सालों में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अन्य 400 मिलियन लोग विडियो देखने लगेंगे। ऐसे में यह विदेश में प्रमुख मीडिया कंपनी होगी, यह स्थिति हम भारत में कभी हासिल नहीं कर सकते हैं।       


तो क्या आप ये कहना चाहते हैं कि आने वाले समय में आप विदेश में सूचीबद्ध (listed) कंपनी में शामिल हो जाएंगे?

बिल्कुल, ऐसा हो सकता है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि सात से 10 साल के भीतर यह अलग ही तरह की कंपनी होगी।

आपका पार्टनर कौन होगा, इसे लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। कई नामों पर लोग चर्चा कर रहे हैं। क्या आप इस बारे में कुछ बता सकते हैं और आप कैसा पार्टनर तलाश रहे हैं?

इस बारे में तो मैं यही कह सकता हूं कि यह एक ऐसी दुल्हन की तरह है, जिससे शादी करने के लिए कई लड़के कतार में खड़े हैं। हमें पता है कि हमें क्या चाहिए। दरअसल, हम एक ऐसा टेक्नोलॉजी पार्टनर चाहते हैं, जिसे टेक्नोलॉजी में महारत हासिल हो और जो हमें एक ग्लोबल मीडिया कंपनी बनने में मदद कर सके।  

बिजनेस के लिए दोनों पक्षों के बीच अच्छा तालमेल होना बहुत जरूरी है, क्या आपने इसकी तैयारी पहले से कर ली है?

हमारे पास बैंकर्स हैं। इनमें से एक इंटरनेशनल बैंकर ‘Goldman Sachs Securities (India) Ltd’ और दूसरा अमेरिकन बैंकिंग एडवाइजर ‘LionTree’ है। हम इस बारे में पहले ही चर्चा कर चुके हैं। यदि हमारा पार्टनर कोई अमेरिकन को-ऑपरेशन होगा तो हम इस आधार पर ऐसे बिजनेस मॉडल पर काम करने के लिए तैयार होंगे कि दोनों को पांच से दस साल के भीतर क्या उम्मीदें हैं। यदि आप हमारा पिछला रिकॉर्ड देखें तो हमारी पार्टनरशिप काफी अच्छी रही हैं।

अभी आपने अमेरिकन का जिक्र किया तो क्या यह अमेजॉन या गूगल है?

नहीं, मैं ये कह रहा हूं कि यदि यह अमेरिकन होगा तो हमें इस दिशा में सारी कवायद दोबारा से करनी होगी। भविष्य को लेकर अमेरिकन को-ऑपरेशन की कुछ अलग अपेक्षाएं होंगी, जबकि रसियन कंपनी अलग तरह से सोचेगी। हमें पार्टनरशिप करनी है। एक बार यह हो जाए तो फिर कोई दिक्कत नहीं है।

जब भी कभी आपसे बात हुई है, आप हमेशा दो कंपनियों डिज्नी और डिस्कवरी की बात करते हैं?

डिस्कवरी एक ट्रेडिशनल मीडिया कंपनी है और ग्लोबल लेवल पर इसका डिस्ट्रीब्यूशन काफी ज्यादा है। इस वजह से मुझे यह कंपनी काफी पसंद है। यदि हम ग्लोबल लेवल की बात करें तो व्युअरशिप के मामले में हम इससे एक कदम ही पीछे हैं। जहां इसे देखने वालों की संख्या 1.5 बिलियन है, हमारी व्युअरशिप 1.3 बिलियन है। रही बात डिज्नी की उसके पास इतनी चीजें हैं, जो भारत में किसी के पास नहीं हैं। उनके पास एम्यूजमेंट पार्क हैं, क्रूज शिप हैं, बच्चों के लिए काफी प्रोग्रामिंग हैं। इसके अलावा भी बहुत कुछ है।


 डिज्नी के साथ पार्टनरशिप करने वाले रूपर्ट मर्डोक के बारे में आप क्या सोचते हैं?

उनका मानना था कि वे ऐसी बड़ी टेक्नो मीडिया कंपनी से मुकाबला नहीं कर सकते हैं, जो प्रोग्रामिंग पर बिलियंस में खर्च करती हो। लेकिन मेरी सोच अलग है। डिज्नी में वे सबसे बड़े शेयरधारक हैं और वे बॉब आइजर (Bob Iger) की जगह भी ले सकते हैं। वह काफी स्मार्ट बिजनेसमैन हैं और मेरी नजर से देखें तो उन्होंने डिज्नी को बेचने के बजाय इसे खरीदा है।    

जियो और सभी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को खरीदने की इसकी स्ट्रेटजी के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

टेलिकॉम कंपनी के तौर पर उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। यहां तक कि उनके प्रतिद्वंद्वी भी कहते हैं कि जिस तरह से जियो सोचता है, वैसा हमने कभी नहीं सोचा। वे भी जियो की तारीफ करते हैं।

क्या अंबानी और सुभाष चंद्रा साथ आएंगे?

कोई नहीं जानता कि भविष्य में क्या होगा। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

भविष्य के बारे में कुछ कहना चाहेंगे? 

टेक्नोलॉजी बिजनेस को बदल देगी। 2055 तक भारत की अर्थव्यवस्था 100 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी और यह वैश्विक स्तर पर नंबर वन हो जाएगा, क्योंकि जनसंख्या इसके पक्ष में है। यह चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और यह सभी तरह के बिजनेस के लिए काफी नकारात्मक होगा। 

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वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने बताया, पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
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देश के विख्यात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से साढ़े 12 बजे के बीच उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा, ‘आज भी पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धातों में कोई अंतर नहीं आया है। अंतर सिर्फ तकनीकी और माध्यम में आया है। उन्होंने कहा कि न्यू मीडिया और डिजिटल मीडिया ने सूचना और समाचारों का लोकतांत्रिकरण एवं विकेंद्रीकरण किया है। प्रो. सुरेश ने कहा कि पत्रकार न विपक्ष का होता है और न ही सत्ता पक्ष का। उसका मात्र एक ही पक्ष होता है और वह है, जनपक्ष।’

वहीं, कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से अलंकृत व वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि यह कहना सही नहीं कि आज पत्रकारिता के सामने अधिक कठिनाई है। वास्तविकता यह है कि पत्रकारिता में हर युग में चुनौतियां रही हैं। यदि लक्ष्मणरेखा को ध्यान में रखें तभी हम पत्रकारिता में खतरे उठा सकते हैं। आज पत्रकारिता इसलिए सुरक्षित है क्योंकि हमारे प्रारंभिक पत्रकारों एवं संपादकों ने लक्ष्मणरेखा नहीं लांघी।

‘पत्रकारिता की लक्ष्मणरेखा’ पर अपने विचार रखते हुए आलोक मेहता ने कहा कि सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारों को विश्वसनीयता बचाए रखने के प्रयास करने चाहिए। उसे किसी का पक्षकार बनने से बचना चाहिए। जब कोई भरोसा करके आपको सूचना या समाचार देता है, तब उसे लीक नहीं करना चाहिए, उसकी जांच करके प्रकाशित करना चाहिए। पत्रकारों को अपनी पाचनशक्ति को मजबूत रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भ्रम फैलाने वाली खबरों के प्रसारण से बचना चाहिए।

बढ़ गई है डिजिटल मीडिया की खपत :

‘न्यू मीडिया : अवसर और चुनौतियां’ विषय पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मीडिया निदेशक एवं अध्यक्ष उमेश उपाध्याय ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता सामने आई और उसका दायरा भी बढ़ा। इस दौरान न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण भारत में भी डिजिटल कंटेंट देखे जाने की प्रवृत्ति बहुत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत में चीन के मुकाबले प्रति व्यक्ति डेटा की खपत अधिक है। भारत में प्रति व्यक्ति 12 जीबी डेटा की खपत है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डेटा और उसके विश्लेषण की विधि को समझना चाहिए। आज समाचारों की दुनिया मोबाइल फोन में सिमट गई है। दुनिया में 91 प्रतिशत डेटा मोबाइल के माध्यम से उपयोग हो रहा है।

प्रयोगों में कंटेंट नहीं दबना चाहिए :

‘टेलीविजन समाचारों के बदलते प्रतिमान’ विषय पर डीडी न्यूज के सलाहकार संपादक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि तीन दशक में टेलीविजन पत्रकारिता और उसके समाचारों के प्रस्तुतिकरण में व्यापक बदलाव आया है। हर दौर में टेलीविजन में बदलाव आया है और उन बदलावों का विरोध हुआ है। समाचार प्रस्तुतिकरण में होने वाले प्रयोगों से दिक्कत नहीं होनी चाहिए, तकलीफ इस बात की होती है कि इन प्रयोगों में कई बार कंटेंट दब जाता है। उन्होंने कहा कि टीआरपी की व्यवस्था न्यूज चैनल्स के लिए ठीक नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए।

संचार के तरीकों को सरल बनाना है जनसंपर्क :

‘कोविड उपरांत व्यवसाय के लिए जनसंपर्क वैक्सीन’ पर अपनी बात रखते हुए ग्रे मैटर्स कम्युनिकेशन्स के संस्थापक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जनसंपर्क विधा में हम ब्रांड की छवि और उसके प्रति बनी अवधारणा का प्रबंधन करते हैं। अच्छे जनसंपर्क अधिकारी की विशेषता होती है कि वे संचार के तरीकों को सरल बनाते हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में हम संकट के समय में लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं, उनको प्रेरित करते हैं। कोरोना के कारण व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक प्रकार के संकट आए हैं, जिनसे बाहर निकलने में पीआर बहुत उपयोगी साबित होगा।

वहीं कार्यक्रम के तीसरे दिन 28 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे ‘मीडिया मैनेजमेंट’ विषय पर बिजनेस वर्ल्ड  व एक्सचेंज4मीडिया के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, सुबह 11:30 बजे ‘कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में संभावनाएं’ विषय पर स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस यूपीएस, देहरादून के डीन डॉ. मनीष प्रतीक और दोपहर 2:00 बजे ‘ब्रॉडकास्ट का भविष्य’ विषय पर प्रख्यात आरजे सिमरन कोहली विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी। समापन सत्र में अपराह्न 3:30 बजे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी (बिहार) के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता उपस्थित रहेंगे। समापन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश करेंगे।

सभी व्याख्यान का प्रसारण विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर होगा-

https://www.facebook.com/mcnujc91

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राष्ट्रपति का ये इंटरव्यू बना चर्चा का विषय, सवालों से परेशान होकर बीच में छोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है। CBS न्यूज के साथ चल रहे इंटरव्यू को बीच में छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है।

दरअसल, कुछ दिनों पहले '60 मिनट' के कार्यक्रम के लिए उन्हें पत्रकार लेस्ली स्टाल के साथ इंटरव्यू करना था। व्हाइट हाउस में नेटवर्क के क्रू ने कैमरा के साथ पूरी तैयारी कर ली थी। डोनाल्ड ट्रंप ने भी सभी सवालों के जवाब देने का संकेत दिया था।

इंटरव्यू शुरू हुआ तो मेजबान लेस्ली स्टाल के साथ ट्रंप करीब 45 मिनट बैठे। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप एंकर के एक सवाल पर नाराज हो गए।

पत्रकार लेस्ली ने राष्ट्रपति से पूछा- 'क्या आपके ट्वीट्स और नाम लेकर बात कहने से लोगों का मोह भंग हो रहा है?'

इसका जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता तो मैं यहां नहीं होता। ट्रंप ने कहा कि वे सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वे इसे नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया फेक है। मैं खुलकर कहूं तो अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता, तो मैं लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाता।'

इंटरव्यू के दौरान लेस्ली ने डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट पर सवाल खड़े किये, साथ ही कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनके ट्वीट सही नहीं हैं। जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वो इसे नहीं बदलेंगे,जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकार को टोका और कहा कि आप जो बिडेन से भी इतने सख्त सवाल क्यों नहीं पूछतीं और वे शो से उठकर चले गये।

इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस भी हो गई। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ये भी आरोप लगाया कि जो बाइडेन से इतने सख्त सवाल नहीं पूछे जाते जितने सख्त सवाल उनसे पूछे जाते हैं। पत्रकार लेजले ने शुरू में ही उनसे पूछा था कि क्या वे सख्त सवालों के लिए तैयार हैं इस पर ट्रंप ने कहा कि 'ये बात करने का तरीका नहीं है।'

जब पत्रकार ने ट्रंप को ये याद दिलाया कि बाइडेन राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि ट्रंप खुद राष्ट्रपति थे। इस बात पर ट्रंप सेट से उठकर चले गए और फिर टीवी शो की दोबारा शूटिंग के लिए नहीं लौटे। 

बाद में ट्रंप ने ट्विटर पर पत्रकार का एक क्लिप शेयर किया, जिसमें ट्रंप को मास्क पहने देखा गया। हालांकि, पत्रकार व्हाइट हाउस में मास्क नहीं लगाए हुई थीं। ट्रंप वीडियो में पत्रकार पर मास्क नहीं पहनने का आरोप लगा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा, ‘मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि रिपोर्टिंग में सत्यता की खातिर मैं लेस्ली स्टाल के साथ अपने इंटरव्यू को प्रसारण से पहले पोस्ट करने की सोच रहा हूं।’ उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हर शख्स को एक झलक मिल सके कि कैसा फर्जी और पक्षपातपूर्ण इंटरव्यू है।

 

इस बीच टीवी इंटरव्यू (TV Interview) को बीच में ही छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया (Social Media) पर इस इंटरव्यू का क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। साथ ही बराक ओबामा (Barak Obama) सहित विपक्षी नेता भी ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं।  

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, ‘वह पगला गये और 60 मिनट के साक्षात्कार से उठकर चले गये। उन्होंने सोचा कि सवाल बड़े कठिन हैं। यदि वह ‘आप दूसरे कार्यकाल में क्या करना पसंद करेंगे' जैसे कठिन सवाल का जवाब नहीं दे सकते तो हम उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दे सकते।

 

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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के CEO एनपी सिंह ने कुछ यूं समझाया बेहतर कंटेंट का महत्व

विजिनरी टॉक सीरीज के तहत ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के एमडी और सीईओ एनपी सिंह ने अच्छे कंटेंट समेत तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
Visionary Talk

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ (Sony Pictures Networks) इंडिया के ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म ‘सोनी लिव’ (SonyLIV) पर नई वेब सीरीज ‘Scam 1992: The Harshad Mehta Story’ की सफलता से उत्साहित सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के एमडी और सीईओ एनपी सिंह का कहना है कि आज के समय में स्क्रिप्ट नया हीरो है।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में एनपी सिंह ने वेब सीरीज की सफलता का श्रेय इसके कंटेंट को देते हुए कहा कि इसमें नए एक्टर्स होने के बावजूद सोनी लिव का सबस्क्राइबर बेस काफी बढ़ा है और लोगों का फोकस अब दमदार स्टोरीटैलिंग की ओर हो गया है।  

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान एनपी सिंह ने अन्य सफल वेब सीरीज जैसे- ‘अनदेखी’, ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘पाताल लोक’ का उदाहरण भी दिया, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया है और कहा कि नए चेहरों और कंटेंट की ओर लोगों का रुझान बढ़ना शुरू हो गया है।  

एनपी सिंह के अनुसार, ‘अब फोकस स्टोरीटैलिंग की ओर शिफ्ट हो चुका है। मेरे लिए स्क्रिप्ट हीरो है। हम हमेशा अच्छी क्वालिटी के कंटेंट को बेहतर स्टोरीटैलिंग के साथ पेश करेंगे, जो हमारे व्युअर्स को पसंद आएगी। यदि आपके पास अच्छी क्वालिटी का कंटेंट है और आप सच्चे व मूल विचारों के साथ रहते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।’

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ट्रेडमार्क-टैगलाइन के इस्तेमाल को लेकर Times Network की याचिका पर HC ने दिया ये आदेश

वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप में एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Times Network

दिल्ली हाई कोर्ट ने अरनब गोस्वामी की कंपनी ‘एआरजी आउटलेयर मीडिया’ (ARG Outlier Media Private Limited) द्वारा ‘NEWS HOUR’ अथवा इसके नाम से मिलते-जुलते किसी भी ट्रेड मार्क का इस्तेमाल किए जाने पर अंतरिम तौर पर रोक लगा दी है।   

बता दें कि वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन/टाइम्स नेटवर्क ने अपने ट्रेडमार्क ‘न्यूज आवर’ (News Hour) और ‘नेशन वॉन्ट्स टू नो’ (Nation Wants to Know) के संरक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अरनब गोस्वामी की कंपनी एआरजी आउटलेयर मीडिया के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का एक मुकदमा दायर किया था।

वहीं, ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के बारे में न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने कहा कि सभी सबूतों का विस्तृत परीक्षण किए जाने की जरूरत है, इसलिए तब तक एआरजी आउटलियर को किसी भी न्यूज चैनल पर अपने भाषण/प्रजेंटेशन आदि के हिस्से के रूप में इसके इस्तेमाल की अनुमति है।

हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड किसी भी संबंध में ट्रेडमार्क के समान इसका इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे इस तरह के इस्तेमाल का हिसाब रखने की जरूरत होगी। इस तरह के हिसाब अथवा खातों को हर छह महीने में एक बार एआरजी के निदेशकों में से एक के हलफनामे पर नियमित रूप से अदालत में दायर किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के मालिकाना हक के मामले में किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दी और इसे सबूतों के आधार पर निर्णय के लिए छोड़ दिया। इसी तरह वर्ष 2017 में ‘टाइम्स नेटवर्क’  ने दिल्ली हाई कोर्ट में एआरजी आउटलियर के खिलाफ गोपनीयता भंग के लिए एक मुकदमा दायर किया था। इसमें एआरजी ने कोर्ट में यह वचन दिया था कि वह अपने चैनल पर टाइम्स नाउ की प्रोग्रामिंग सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेंगे और इसके आधार पर उसे राहत प्रदान की गई थी।

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इस वजह से पहले पत्रकार के बेटे का किया अपहरण, फिर कर दी हत्या

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Crime

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है। फिरौती के लिये अपहर्ताओं ने 45 लाख रुपए देने की मांग की थी। पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, बच्चे के पिता को जानने वाले 23 वर्षीय मैकेनिक ने बच्चे का 18 अक्टूबर को अपहरण किया था और उसी दिन ही गला दबाकर हत्या करने के बाद बच्चे के शव को पहाड़ी पर जला दिया गया था। पुलिस ने बताया कि अपहर्ताओं को भय था कि बच्चे को छोड़ने पर वह उसकी पहचान उजागर कर देगा, लिहाजा आरोपी ने उसकी हत्या कर दी थी।

बता दें कि महबूबाबाद शहर के कृष्णा कॉलोनी निवासी में रंजीत कुमार का परिवार रहता है। रंजीत कुमार पेशे से पत्रकार हैं। उनका 9 वर्षीय बड़ा बेटा दीक्षित रेड्डी का रविवार शाम 6.30 बजे के आसपास बाइक सवार अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया था, जब वह महबूबाबाद शहर में स्थित अपने घर के बाहर खेल रहा था। अपहर्ता मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये थे और बच्चे को उठा ले गए। पुलिस को शक था कि बच्चा संभवत: उनको जानता था। बाद में अपहर्ताओं ने इंटरनेट के माध्यम से फोन पर बच्चे की मां से संपर्क किया और उसकी रिहाई के लिये  45 लाख रुपए देने की मांग की थी।

पुलिस ने बताया कि बच्चे के पिता द्वारा हाल में संपत्ति खरीदे जाने की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने जल्द से जल्द पैसे कमाने के लिए अपहरण की योजना बनाई, जिसके बाद इस अपराध को अंजाम दिया, ताकि वह अमीरों की तरह जिंदगी जी सके। महबूबाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक कोटी रेड्डी ने बताया कि योजना के तहत आरोपी 18 अक्टूबर को पीड़ित के घर गया और बच्चे को बुलाया। चूंकि अरोपी बच्चे के पिता का जानता था इसलिए बच्चा उसके साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर चला गया। आगे ले जाने के बाद उसे एहसास हुआ कि अकेले बच्चे को संभालना बहुत मुश्किल है। आरोपी सीसीटीवी कैमरे से बचने के लिए बच्चे को अलग रास्ते से शहर से बाहर किसी सूनसान जगह पर ले गया। वहां उसने बच्चे को बंधक बनाकर रखा। वह डर गया था कि बच्चा अपने माता-पिता को सब बता देगा, इसलिए उसने बच्चे की हत्या कर दी।

बच्चे की हत्या करने के बाद भी, उसने घटना के दिन रात नौ बजे उसकी मां वसंता को फोन किया और 45 लाख रुपए की राशि मांगी। अपहर्ता रोज इंटरनेट से बच्चे के परिवार को फोन कर पैसा मांगता था। बुधवार को उसने परिवार से पैसे को मोडू कोटला इलाके में लाने के लिए कहा। एक न्यूज चैनल में काम करने वाले बच्चे के पिता रंजीत रेड्डी पैसों का बैग लेकर पहुंच भी गए, लेकिन अपहरर्ता वहां से बाहर नहीं आया। उन्होंने वहां बुधवार रात तक इंतजार किया।

बाद में परिवार की शिकायत पर अपहरर्ता को पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाया। एसपी ने कहा कि उन्होंने कई संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन जांच से पता चला कि मंदा सागर ने इस घटना को अकेले अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए इलाके के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और आरोपी को बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाने की तस्वीर दिखी, जिसके आधार पर मैकेनिक को गिरफ्तार किया गया। 

पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस अपराध में और लोग तो शामिल नहीं है।

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मीटिंग के समय वीडियो कॉल पर रिपोर्टर ने किया कुछ ऐसा, मांगनी पड़ी माफी

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को देखते हुए देश-दुनिया में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने का चलन बढ़ा है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Meeting

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को देखते हुए देश-दुनिया में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने का चलन बढ़ा है।  तमाम कंपनियां घरों से काम कराने को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में तमाम लोगों के लिए उनका लिविंग रूम दफ्तर और वीडियो कॉल उनके नए कॉन्फ्रेंस रूम में तब्दील हो गया है। ऐसा भी देखने में आया है कि वीडियो कॉल के दौरान कुछ लोग भूल जाते हैं कि वह सार्वजनिक मंच पर हैं और कोई न कोई ऐसी ‘हरकत’ कर देते हैं, जिससे उन्हें बाद में शर्मिंदा होना पड़ता है।

ऐसा ही एक मामला अमेरिका से सामने आया है, जहां पर पिछले हफ्ते वर्चुअल मीटिंग के दौरान अमेरिकी मैगजीन ‘न्यू यॉर्कर’ (New Yorker) का एक रिपोर्टर हस्तमैथुन (masturbating) करने लगा। इस दौरान जेफरी टोबिन (jeffrey toobin) नामक इस रिपोर्टर को अहसास ही नहीं हुआ कि तमाम लोग उसे देख रहे हैं। रिपोर्टर की इस हरकत पर उसे निलंबित कर दिया गया है।

म़ीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते ‘न्यू यॉर्कर’ और ‘डब्ल्यूएनवाईसी रेडियो’ (WNYC radio) के सदस्यों के बीच जूम वीडियो कॉल हो रही थी। इस कॉल के दौरान थोड़ी देर के लिए ब्रेक हुआ तो टोबिन दूसरी कॉल पर व्यस्त हो गए। ब्रेक के बाद जब अन्य लोग वीडियो कॉल पर वापस आए तो उन्हें जेफरी टोबिन हस्तमैथुन करते हुए दिखाई दिए।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस बारे में टोबिन का कहना है, ‘मैंने एक शर्मनाक मूर्खतापूर्ण गलती की। मुझे लगा कि कैमरा बंद है। इस शर्मनाक गलती के लिए मैं अपनी पत्नी, परिवार, दोस्तों और सहयोगियों से माफी मांगता हूं।’ ‘न्यू यॉर्कर’ की प्रवक्ता नताली रेबे (Natalie Raabe) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि टोबिन को निलंबित कर दिया गया है और मामले में जांच का आदेश दिया गया है।

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बिहार में इस पॉलिटिकल पार्टी के प्रवक्ता बने पत्रकार असित नाथ

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Asit Nath

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें बिहार कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इस बात की जानकारी असित नाथ ने खुद अपने फेसबुक पेज पर दी है।

बिहार के बेतिया के रहने वाले असित नाथ तिवारी ने पश्चिम चंपारण में पढ़ाई की है और पत्रकारिता की शुरुआत भी वहीं से की। उन्होंने दैनिक जागरण की मुजफ्फरपुर यूनिट से सम्बद्ध होकर रिपोर्टिंग की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टीवी पत्रकारिता में असिता नाथ ने महुआ टीवी से बतौर एंकर शुरुआत की और यह सफर मौर्या टीवी, जी न्यूज हिंदी, के न्यूज इंडिया और समाचार प्लस आदि  तक जारी रहा। असित इन चैनल्स में आउटपुट हेड समेत कई वरिष्ठ पदों पर रहे। पत्रकारिता के साथ साथ कविता और सार्थक लेखन में भी असित की विशेष रुचि है। उन्होंने ‘नदी लौटती भी है’ नाम से कहानी संग्रह भी लिखा है।

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अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने PM मोदी को लिखा लेटर, उठाया ये बड़ा मुद्दा

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
PM MODI

दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के उत्पीड़न का मामला उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को लिखे गए इस पत्र में इन दोनों प्रेस संस्थाओं ने पीएम से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने का आग्रह किया है, जिससे पत्रकारों का उत्पीड़न न हो और वे प्रतिशोध के डर के बिना काम कर सकें।

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ऑस्ट्रिया-मुख्यालय स्थित ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और बेल्जियम स्थित ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं। इन दोनों संस्थाओं ने मोदी से राज्य सरकारों को पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह समेत सभी आरोपों को वापस लेने का निर्देश देने के लिए कहा है, जो कर्तव्य पालन के दौरान उन पर लगाए गए हैं।

इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पत्र के अनुसार, ‘स्वास्थ्य संकट का उपयोग उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार की कमी को उजागर किया है। एक सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के लिए एक स्वतंत्र मीडिया आवश्यक है।’

उन्होंने लिखा है, ‘स्वतंत्र, महत्वपूर्ण पत्रकारों को परेशान करने के लिए राजद्रोह के कानूनों का उपयोग न केवल देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन है। यह सरकार द्वारा किसी आलोचना को चुप कराने का भी प्रयास है।’

रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों एसोसिशंस का कहना है, ’भारत में 25 मार्च को जब पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था, तब से 31 मई के बीच महामारी को कवर करने के लिए 55 पत्रकारों को निशाना बनाया गया। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई।’

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पत्रकार की पिटाई के खिलाफ आगे आया एडिटर्स गिल्ड, उठाई ये मांग

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने दिल्ली में ‘कारवां’ मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है। इस बारे में गिल्ड की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है। गिल्ड ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की मांग की है।  

गिल्ड का कहना है कि पेनकर पर पुलिस ने उस समय हमला किया, जब वह बतौर पत्रकार अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। दिल्ली में पिछले दो महीनों के दौरान कारवां मैगजीन का यह चौथा पत्रकार है, जिस पर हमला किया गया है।

यह भी पढ़ें: पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, कमिश्नर को दी शिकायत

गिल्ड की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, ‘पिछले दिनों उत्तरी दिल्ली में नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना के मामले में कुछ छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मॉडल टाउन इलाक़े के पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पेनकर इसी मामले की कवरेज कर रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान पेनकर ने अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन पुलिस नहीं मानी। पुलिस ने उनका फोन जब्त कर लिया और खींचे गए फोटोग्राफ डिलीट कर दिए।’

इस स्टेटमेंट भी यह भी कहा गया है, ‘कारवां के रिपोर्टर पर हुआ यह हमला संवैधानिक सिद्धांतों और मीडिया के स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के अधिकार का उल्लंघन है। गिल्ड हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही पत्रकार के खिलाफ किसी भी मामले को रोकने का निर्देश देना चाहिए।’

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ZEE में हुए बड़े बदलाव, राहुल जौहरी को मिली ये जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Zee

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की।

इस पुनर्गठन के तहत पुनीत मिश्रा कंटेंट व इंटरनेशनल मार्केट्स के प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं अमित गोयनका डिजिटल बिजनेस एंड प्लेटफॉर्म्स के प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। तरुण कात्याल जो ZEE5 इंडिया के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अमित गोयनका को रिपोर्ट करते रहेंगे।

शरीक पटेल इंटीग्रेटेड मूवीज बिजनेस का काम देखेंगे और अनुराग बेदी म्यूजिक बिजनेस संभालते रहेंगे।

इसके अलावा राहुल जौहरी को प्रेजिडेंट (बिजनेस- साउथ एशिया) के तौर पर नियुक्त किया गया है और वे इंटीग्रेटेड रेवेन्यू और मोनेटाइजिंग टीम का नेतृत्व करेंगे। जौहरी इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पहले सीईओ थे और करीब चार साल तक उन्होंने इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। बीसीसीआई से पहले वे करीब 15 साल तक डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

पुनीत मिश्रा, अमित गोयनका, शरीक पटेल, अनुराग बेदी और राहुल जौहरी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे। कंपनी में किए गए ये बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

 

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