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उमेश कुमार का झलका दर्द, पत्रकारों को सुनाई खरी-खरी
अगर आपके बारह साल के बेटे से स्कूल में उसके दोस्त पूछें कि क्या तुम्हारे पापा ब्लैकमेलिंग के लिए जेल में हैं?, तो क्या...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
उमेश कुमार
वरिष्ठ पत्रकार।।
अगर आपके बारह साल के बेटे से स्कूल में उसके दोस्त पूछें कि your father is behind bars for extortion (क्या तुम्हारे पापा ब्लैकमेलिंग के लिए जेल में हैं?) क्या करेंगे आप? या तो आत्महत्या करें और सारी ज़िंदगी का कलंक उनके माथे मढ़ा छोड़ दें कि ब्लैकमेलिंग के आरोप में इनके पिता ने आत्महत्या की थी, या फिर आप सड़क पर आने, नमक से रोटी ख़ाने, बस में चलने तक का साहस रखें और अपने को बेगुनाह साबित करें, ताकि आपके बच्चे सर उठाकर जिएं।
कई लोगों के पेट में दर्द हो रहा है कि मैं स्टिंग अपने चैनल पर नहीं दिखा रहा। एक सवाल सब भूल गए कि सरकार ने तो कहा था कि स्टिंग की साज़िश थी। स्टिंग तो हुआ ही नहीं। फिर किस बात के लिए पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया था? किस बात के लिए रेड की थी मेरे घर पर? किस बात का डर था सीएम को? आज दलाल पत्रकार मुझसे सवाल करते हैं, जो रोज़ एसएसपी, डीएम और तमाम अधिकारियों के सामने अपना ज़मीर चाय नाश्ते और सिम रीचार्ज के लिए बेचते हैं? कभी सपने में किसी डीएम-एसएसपी को चुनौती देने की सोची है? एक एफ़आईआर का सुनकर पैंट में पेशाब करने वाले मुझ पर उंगली उठाते है?
ये पहली सरकार नहीं है, तीसरी सरकार से लड़ रहा हूं। सफ़र करने के लिए सूचना विभाग की कारों का इस्तेमाल करने वाले मुझे ज्ञान न दें। रीढ़ की हड्डी में चोट होने और ख़ून की उल्टियां होने के बावजूद दो दिन और तीन रात का सफ़र लोकल ट्रेनों में बिना रिज़र्वेशन करके झारखंड जाकर दिखाएं। जेल में ज़मीन पर दो रात बिना कंबल ठंड में किसी के आगे हाथ फैलाए सोकर दिखाएं। जेल की 60x25 की बैरक में साठ लोगों के हॉल में रात बिताकर दिखाएं। पेशी पर 10x20 की हवालात में 70 लोगों के साथ पूरा दिन अपना नंबर आने का इंतज़ार करके दिखाए। ये सब तब करें कि जब आपको ज़हर देकर मारने का प्रयास भी चल रहा हो, तब जानूंगा कि कितना संघर्ष करने की हिम्मत है। एक FIR दर्ज होत्ते ही दरोग़ा के चरणो में पड़ने वाले ज्ञान ना बांचें।
‘मज़ार-ज़ार रोई आंखें ठहर गईं दिल की धड़कन,
मेरे अपनी आंखो ने तबाही का मंज़र देखा है’
कुछ पुलिस वाले मित्रों के लिए
‘दुनिया खरीद लेगी हर मोड़ पर तुझे
तूने जमीर बेचकर अच्छा नहीं किया’
कुछ चाटुकारों के लिए
‘तुम्हें मालूम हो जाएगा कि कैसे रंज सहते हैं,
मेरी इतनी दुआ है कि तुम फनकार हो जाओ’
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली,
तुम शतरंज का खेल कहते हो,
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली।
सबक़ तो वक़्त देगा
हमने ये राय क़ायम कर ली
कोर्ट, हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक अपने सम्मान और हक़ की लड़ाई लड़ने का दम हो, तब सलाह देना मुझे। दलाल ब्लैकमेलर की संज्ञा देने वाले बताएं कि किसको ब्लैकमेल किया? क्या श्री हरीश रावत को नहीं कर सकता था? क्या अन्य मुख्यमंत्रियों से समझौता नहीं कर सकता था? मुझे इतिहास में दर्ज होने का शौक नहीं है, लेकिन ये लड़ाई मेरे और मेरे परिवार के सम्मान की है और इसका फ़ैसला तो होकर रहेगा। इस ज़ीरो tolerance के जुमले वाली प्रदेश सरकार को बताना पड़ेगा कि वो ख़ुद और उनके क़रीबी निजी अधिकारी, पार्ट्नर और रिश्तेदार किस क़दर खनन, ट्रांसफर, पोस्टिंग व अन्य धंधो में उलझे थे। स्टिंग चैनल पर चलना दो मिनट का काम है, लेकिन मैं चाहता हूं कि पहले ये अपने जितने षड्यंत्र कर सकते हैं कर ले। जितने मुक़दमे करना चाहते हैं कर लें। जितने आरोप लगाना चाहते हैं, लगा लें ताकि उनके मन में मलाल मलाल न रहे कि ये नहीं किया वो नहीं किया। त्रिवेंद्र जी आपके पास सरकार है, ताक़त है, पैसा है, आईएएस-आइपीएस पुलिस है। मैं तो साधारण सा इंसान हूं। मेरे पास ये सब तो नहीं है .मेरे पास सिर्फ़ मेरा भगवान, मेरे दोस्त और मेरा साहस है। मुझे किसी पब्लिसिटी की ज़रूरत नहीं है और न स्टंट की। मेरी लड़ाई सम्मान की है। मुझसे पैसा छीन लोगे, काम छीन लोगे, घर छीन लोगे, लेकिन मेरा साहस और मेरा नाम यानी उमेश कुमार नहीं छीन पाओगे।
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