जानिए, कैसे राजेंद्र माथुर बने देश की बड़ी शख्सियत...

राजेंद्र माथुर की पूरी जीवन यात्रा एक साधारण आम आदमी की कथा है। वे इतने साधारण हैं कि असाधारण...

Last Modified:
Friday, 07 August, 2020
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संजय द्विवेदी ।।

राजेंद्र माथुर की पूरी जीवन यात्रा एक साधारण आम आदमी की कथा है। वे इतने साधारण हैं कि असाधारण लगने लगते हैं। उन्होंने जो कुछ पाया एकाएक नहीं पाया। संघर्ष से पाया, नियमित लेखन से पाया, अपनी रचनाशीलता से पाया। इसी संघर्ष की वृत्ति ने उन्हें असाधारण पत्रकार और संपादक बना दिया।

राजेंद्र माथुर का पत्रकारीय व्यक्तित्व इस बात से तय होता है कि आखिर उनके लेखन में विचारों की गहराई कितनी है। अपने अखबार को ऊंचाइयों पर ले जाने का उनका संकल्प कितना गहरा है। हमारे समय के प्रश्नों के जबाव तलाशने और नए सवाल खड़े की कितनी प्रश्नाकुलता संबंधित व्यक्ति में है। राजेंद्र माथुर का संपादकीय और पत्रकारीय व्यक्तित्व इस बात की गवाही है वे असहज प्रश्नों से मुंह नहीं चुराते बल्कि उनसे दो-दो हाथ करते हैं। वे सवालों से जूझते हैं और उनके सही एवं प्रासंगिक उत्तर तलाशने की कोशिश करते हैं। वे सही मायने में पत्रकारिता में विचारों के एक ऐसे प्रतीक पुरुष बनकर सामने आते है जिसने अपने लेखन के माध्यम से एक बौद्धिक उत्तेजना का सृजन किया। हिंदी को एक ऐसी भाषा और विराट अनुभव संसार दिया जिसकी प्रतीक्षा में वह सालों से खड़ी थी। इस मायने में राजेंद्र माथुर की उपस्थिति अपने समय में एक कद्दावर पत्रकार-संपादक की मौजूदगी है।

श्री सूर्यकांत बाली के मुताबिक- ‘माथुर साहब जैसा बोलते थे वैसा ही लिखते थे। वे धाराप्रवाह, विचार-परिपूर्ण और रूपक-अलंकृत बोलते थे, तो धाराप्रवाह विचार-परिपूर्ण और रूपक-अलंकृत लिखते भी थे।’

श्री बाली लिखते हैं कि ‘वह एक ऐसा संपादक है जिसके मन-समुद्र में विचारों की लहरें एक के बाद एक लगातार, अनवरत उठती हैं, कोई लहर किसी दूसरी लहर को नष्टकर आगे बढ़ने के अहंकार का शिकार नहीं है। और पूनम की कोई ऐसी भली रात हर महीने आती है जब ये लहरें किसी विराट-सर्वोच्च को छू लेने को बेताब हो उठती हैं।’ ऐसे में कहा जा सकता है कि राजेंद्र माथुर के पत्रकारीय एवं संपादकीय व्यक्तित्व में एक बौद्धिक आर्कषण दिखता है। उनके लेखन में भारत-जिज्ञासा, भारत-अनुराग और भारत-स्वप्न पूरी समग्रता में प्रकट होता है।

वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र ने लिखा है कि –  ‘राजेंद्र माथुर हिंदी पत्रकारिता के उस संधिकाल में संपादक के रूप में सामने आए थे, जब हिंदी अखबार अपने पुरखों के पुण्य के संचित कोष को बढ़ा नहीं पा रहे थे। यह जमा पूंजी इतनी नहीं थी कि हिंदी की पत्र-पत्रिकाएं व्यावसायिकता की बढ़ती हुयी चुनौती को स्वीकार करते हुए इसे बाजार के दबाव से बचा सकें। राजेंद्र माथुर में बौद्धिकता और सच्चरित्रता का असाधारण संगम था, इसीलिए वे हिंदी पत्रकारिता में शिखर स्थान बना सके। वे असाधारण शैलीकार थे। अंग्रेजी साहित्य से प्रकाशित उनकी हिंदी लेखन शैली बिंब प्रधान थी। उनके मुहावरे अपने होते थे। उनमें अभिव्यंजना की अद्भुत शक्ति थी। हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में वे शैलीकार के रूप में याद किए जाएंगें।’

राजेंद्र माथुर एक श्रेष्ठ संपादक थे। उनकी उपस्थित ही 'नईदुनिया' और 'नवभारत टाइम्स' को एक ऐसा समाचार पत्र बनाने में सफल हुयी जिस पर हिंदी पत्रकारिता को नाज है। नवभारत टाइम्स में श्री माथुर के सहयोगी रहे श्री विष्णु खरे ने लिखा है कि- ‘राजेंद्र माथुर महान संपादक होने का अभिनय करने की कोई जरूरत महसूस नहीं करते थे। दरअसल, लिबास से लेकर बोलचाल तक उनकी कोई शैली या लहजा नहीं था वे अपने मामूलीकरण में विश्वास करते थे वैशिष्ट्य में नहीं। उनकी संपादकी आदेशों या हुकमों से नहीं, एक गुणात्मक तथा नैतिक विकिरण से चलती थी। वे एक आणविक ताप या विद्युत संयत्र की तरह बेहद चुपचाप काम करते थे, जो अपने प्रभाव से लगभग उदासीन रहता है। लेकिन वे बेहद परिश्रमी संपादक थे और शायद एक या दो उपसंपादकों की मदद से एक दस पेज का अखबार रोज निकाल सकते थे। वे अजातशत्रु और धर्मराज युधिष्ठिर जैसे थे लेकिन जरूरत पड़ने पर वज्र की तरह कठोर भी हो सकते थे।’

राजेंद्र माथुर का पत्रकारीय व्यक्तित्व बेहद प्रेरक था। आज की पत्रकारिता और मीडिया संस्थानों में घुस आई तमाम बुराईयों से उनका व्यक्तित्व बेहद अलग था। संपादक की जैसी शास्त्रीय परिभाषाएं बताई गयी हैं श्री माथुर उसमें फिट बैठते हैं। उनका व्यक्तित्व बौद्धिक ऊचाइयां लिए हुए था। अपनी पत्रकारिता को कुछ पाने और लाभ लेने की सीढ़ी बनाना उन्हें नहीं आता था। उनके समकक्ष पत्रकारों की राय में वे जिस समय दिल्ली में नवभारत टाइम्स जैसे बड़े अखबार के संपादक थे तो वे सत्ता के लाभ उठा सकते थे। आज की पत्रकारिता में जिस तरह पत्रकार एवं संपादक सत्ता से लाभ लेकर मंत्री से लेकर राज्यसभा की सीटें ले रहे हैं, श्री माथुर भी ऐसे प्रलोभनों के पास जा सकते थे। किंतु उन्होंने तमाम चर्चाओं के बीच इससे खुद को बचाया। पत्रकार विष्णु खरे अपने लेख में इस बात की पुष्टि भी करते हैं।

सही मायने में राजेंद्र माथुर एक ऐसे संपादक के रूप में सामने आते हैं जिसने अपने पत्रकारीय व्यक्तित्व को वह उंचाई दी जिसके लिए पीढ़ियां उन्हें याद कर रही हैं।

विष्णु खरे उनके इन्हीं व्यक्तित्व की खूबियों को रेखांकित करते हुए कहते हैं- ‘राजेंद्र माथुर का जीवन और उनके कार्य एक खुली पुस्तक की तरह थे। कानाफूसी, चुगलखोरी, षडयंत्र, झूठ-फरेब, मक्कारी, उनके स्वभाव में थे ही नहीं। वे किसी चीज को गोपनीय रखना ही नहीं चाहते थे और अक्सर कई ऐसी सूचनाएं निहायत मामूली ढंग से देते थे, जिनपर दूसरे लोग कारोबार कर लेते हैं। इसलिए उनसे बातें करना बेहद असुविधाजनक स्थितियां पैदा कर देता, क्योंकि वे कभी भी किसी के द्वारा कही गयी बात को जगजाहिर कर देते थे और वह व्यक्ति अपना मुंह छिपाता फिरता था। उनकी स्मरण शक्ति अद्वितीय थी और भारतीय तथा विश्व राजनीति में सतही और चालू दिलचस्पी न रखने के बावजूद राष्ट्रीय व विदेशी घटनाक्रम तथा इतिहास में उनकी पैठ आश्चर्यजनक थी। एक सच्चे पत्रकार की तरह उनमें जमाने भर के विषयों के बारे में जानकारी थी और वे घंटों अपने प्रबुद्ध श्रोताओं को मंत्रमुग्ध रख सकते थे। नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक बन जाने के बाद वे भविष्य में क्या बनेंगें इसको लेकर उनके मित्रों में दिलचस्प अटकलबाजियां होती थीं और बात राष्ट्रसंघ और मंत्रिमंडल तक पहुंचती थी। लेकिन अपने अंतिम दिनों में तक राजेंद्र माथुर एटीटर्स गिल्ड आफ इंडिया जैसी पेशेवर संस्था के काम में ही स्वयं को होमते रहे।’

उनके पत्रकारीय व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी हिंदी पत्रकारिता को लेकर उनकी चिंताएं हैं। वे हिंदी पत्रकारिता के एक ऐसे संपादक थे जो लगातार यह सोचता रहा कि हिंदी पत्रकारिता का विचार दारिद्रय कैसे दूर किया जाए। कैसे हिंदी में एक संपूर्ण अखबार निकले और उसे व्यापक लोकस्वीकृति भी मिल सके।

नवभारत टाइम्स के कार्यकारी संपादक रहे स्व.सुरेंद्र प्रताप सिंह ने उनकी इन चिंताओं को निकटता से देखा था और वे लिखते हैं-  ‘माथुर साहब का गहन इतिहासबोध, शुद्ध श्रध्दा और उससे उत्पन्न गरिमामय अतीत की मरीचिका पर आधारित हिंदी पत्रकारिता की कमजोर आधारभूमि के बारे में उन्हें बार-बार सचेत करता रहता था। वे भूतकाल के वायवी स्वर्णिम अतीत में जीने वाले नहीं थे। वे स्वप्नदर्शी थे और अपने सपनों की उदात्तता के साथ उन्होंने कभी किसी प्रकार का समझौता नहीं किया। हिंदी पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य उन्हें बार-बार विचलित तो कर देता था लेकिन एक कुशल अभियात्री की तरह उन्होंने अपने जहाज की दिशा को क्षणिक प्रलोभनों के लिए किसी अन्य रास्ते पर डालने के बारे में क्षणिक विचार भी नहीं किया।’

उनके पत्रकारीय व्यक्तित्व की विशिष्टता यह भी है कि वे अंग्रेजी प्राध्यापक और विद्वान होने के बावजूद अपने लेखन की भाषा के नाते हिंदी को चुनते हैं। हिंदी उनकी सांसों में बसती है। हिंदी पत्रकारिता को नई जमीन तोड़ने के लिए प्रेरित करने और हिंदी लेखकों एवं पत्रकारों की एक पूरी पीढ़ी का निर्माण करने का काम श्री माथुर जीवन भर करते रहे।

इंदौर से लेकर दिल्ली तक उनकी पूरी यात्रा में एक भारत प्रेम, भारत बोध और हिंदी प्रेम साफ नजर आता है। शायद इसी के चलते वे देश की पत्रकारिता को एक नई और सही दिशा देने में सफल रहे।

श्री मधुसूदन आनंद लिखते हैं- ‘माथुर साहब ने अंग्रेजी में एमए किया था और अंग्रेजी भाषा पर उनकी पकड़ अंग्रेजी पत्रकारों को भी विस्मय में डालती थी। लेकिन उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को चुना तो शायद इसलिए कि वे अपनी बात अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहते थे। अगर यह कहा जाए कि हिंदी पत्रकारों की एक पीढ़ी माथुर साहब को पढ़कर पली और बढ़ी है तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। उनके असामयिक निधन के बाद नवभारत टाइम्स को देश के दूर-दूर के इलाकों से हजारों पत्र प्राप्त हुए थे। ये वे पाठक थे जो उनके उत्कट राष्ट्र-प्रेम, समाज के प्रति उनके सरोकारों, इतिहास की अतल गहराइयों से अनमोल तथ्य ढूंढ कर लाने के उनके सार्मथ्य और शालीन भाषा में राजनेताओं की खिंचाई करने के उनके साहस पर मुग्ध थे। शब्दों का कारोबार करने वाले हमारे जैसे अनपढ़ों और बौद्धिक संस्कारहीनों के साथ तो नियति ने सचमुच अन्याय किया है। उनके लेखन से हम जैसे लोगों को एक दृष्टि तो मिलती ही थी, ज्ञान का वह विपुल भंडार भी कभी बातचीत से तो कभी उनके लेखन से टुकड़ों-टुकड़ों में मिल जाता था, जो प्रायः अंग्रेजी में ही उपलब्ध है और जिसे पढ़कर पचा लेना प्रायः कठिन होता है।’

पत्रकारीय सहयोगियों और मित्रों की नजर से देखें तो राजेंद्र माथुर के पत्रकारीय व्यक्तित्व की कुछ खूबियां साफ नजर आती हैं। जैसे वे बेहद अध्ययनशील संपादक एवं पत्रकार हैं। उनका अध्ययन और विषयों के प्रति उनके ज्ञान की गहराई उन्हें अपने सहयोगियों के बीच अलग ही व्यक्तित्व दे देती है। दूसरे उनका लेखन भारतीयता और उसके मूल्यों को समर्पित है। तीसरा है उनके मन में किसी प्रकार की पदलाभ की कामना नहीं है। वे अपने काम के प्रति समर्पित हैं और किसी राजनीति का हिस्सा नहीं हैं। चौथा उनमें मानवीय गुण भरे हुए हैं जिसके चलते वे मानवीय कमजोरियों और पद के अहंकार के शिकार नहीं होते। इसके चलते एक बड़े अखबार के संपादक का पद, रूतबा और अहं उन्हें छू नहीं पाता।

यह उनके व्यक्तित्व की एक बड़ी विशेषता है जिसे उनके सहयोगी रहे सूर्यकांत बाली कहते हैं- ‘हमारे प्रधान संपादक को को पांचवा कोई काम आता है, इसमें तो मुझे पूरा शक हैः बस सोचना, पढ़ना, बतियाना और लिखना, उनकी सारी दुनिया इन चार कामों में सिमट चुकी थी।’

श्री माथुर के व्यक्तित्व पर यह एक मुकम्मल टिप्पणी है जो बताती है कि वे किस तरह के पत्रकार संपादक थे। उनका पत्रकारीय व्यक्तित्व इसीलिए एक अलग किस्म की आभा के साथ समाने आता है। जिसमें एक बौद्धिक तेज और आर्कषण निरंतर दिखता है। जाहिर तौर पर ऐसे उदाहरण आने वाली पत्रकार पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं कि किस तरह उन्होंने अपने को तैयार किया। असहज और वैश्विक सवालों पर इतनी कम आयु में लेखन शुरू कर अपनी देशव्यापी पहचान बनाई। शायद इसीलिए देश के दो महत्वपूर्ण अखबारों नई दुनिया और नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक पद तक वे पहुंच पाए। यह यात्रा एक ऐसा सफर है जिसमें श्री माथुर ने जो रचा और लिखा वह आज भी पत्रकारिता की पूंजी और धरोहर है। पत्रकारिता का लेखन सामयिक होता है उसकी तात्कालिक पहचान होती है।

श्री माथुर के पत्रकारीय लेखन के बहाने हम लगभग चार दशक की राजनीति, उसकी समस्याओं और चिंताओं से रूबरू होते हैं। यह एक दैनिक इतिहास की तरह का लेखन है जिससे हम अपने विगत में झांक सकते हैं और गलतियों से सबक लेकर नए रास्ते तलाश सकते हैं। उनके पत्रकारीय व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे एक ऐसे लेखक संपादक के तौर पर सामने आते हैं जो पूर्णकालिक पत्रकार हैं। वे किसी साहित्य की परंपरा से आने वाले संपादक नहीं थे। सो उन्होंने हिंदी पत्रकारिता पर साहित्यकार संपादकों द्वारा दी गयी भाषा और उसके मुहावरों से अलग एक अलग पत्रकारीय भाषा का अनुभव हमें दिया। हिंदी को, संवाद को, संचार की, सूचना की भाषा बनाने में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। सही मायने में वे एक ऐसे संपादक और लेखक के रूप में सामने आते हैं जिसने बहुत से अनछुए विषयों को हिंदी के अनुभव के विषय बनाया जिनपर पहले अंग्रेजी के पत्रकारों का एकाधिकार माना जाता था।

उन्होंने भावना से ऊपर विचार और बौद्धिकता को महत्व दिया। जिसके चलते हिंदी को एक नई भाषा, एक नया अनुभव और अभिव्यक्ति का एक नया संबल मिला। उनकी बौद्धिकता ने हिंदी पत्रकारिता को अंग्रेजी अखबारों के सामने सम्मान से खड़े होने लायक बनाया। इससे हिंदी पत्रकारिता एक आत्मविश्वास हासिल हुआ। उसे एक नई ऊर्जा मिली। आज हिंदी पत्रकारिता में जिस तरह बाजारवादी ताकतों का दबाव गहरा रहा है ऐसे समय में राजेंद्र माथुर के बहाने हिंदी पत्रकारिता की पड़ताल एक आवश्यक विमर्श बन गयी है। शायद उनकी स्मृति के बहाने हम कुछ रास्ते निकाल पाएं जो हमें इस कठिन समय में लड़ने और मूल्यों के साथ काम करने का हौसला दे सके।

(लेखक वर्तमान में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं।)

(साभार: sanjayubach.blogspot.in)

 

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अब इस ग्रुप से जुड़े PTI के पूर्व CEO एम.के.राजदान

गौरतलब है कि एम.के. राजदान की बेटी निधि राजदान भी पत्रकारिता जगत से जुड़ी हुई हैं और इस समय एनडीटीवी 24X7 में वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2020
MK Razdan

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व सीईओ व एडिटर-इन-चीफ एम.के.राजदान अब वेदांता ग्रुप में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन टीम के वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर शामिल होंगे। वे दिल्ली से अपना कार्यभार संभालेंगे।

वेदांता में कम्युनिकेशंस एंड ब्रैंड के डायरेक्टर रोमा बलवानी ने ट्वीट कर राजदान का 'टीम वेदांत' में स्वागत किया।

वरिष्ठ पत्रकार राजदान पीटीआई के एक सदस्यीय ब्यूरो में ब्यूरो चीफ के पद पर काम करने के बाद 1995 में संस्थान के जनरल मैनेजर बनें। एक युवा पत्रकार के रूप में राजदान नवंबर, 1965 में पीटीआई के साथ जुड़े थे और तब से लेकर सितंबर, 2016 तक यानी करीब 51 वर्षों तक उन्होंने यहां विभिन्न पदों पर अपना योगदान दिया। 21 वर्षों तक वे पीटीआई के एडिटर-इन-चीफ के पद पर बने रहे। सितंबर, 2016 में उनका यहां से रिटायरमेंट हुआ।

गौरतलब है कि एम.के. राजदान की बेटी निधि राजदान भी पत्रकारिता जगत से जुड़ी हुई हैं और इस समय एनडीटीवी 24X7 में वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।

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वायकॉम18 से जुड़ीं मंजीत सचदेव, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

वायकॉम18 को जॉइन करने से पहले मंजीत सचदेव मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कई ब्रैंड्स की कंटेंट स्ट्रैटेजी संभाल चुकी हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2020
Manjit Sachdev

अपनी क्रिएटिव टीम को मजबूती देने और बेहतरीन कंटेंट स्ट्रैटेजी बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 'वायकॉम18' (Viacom18) ने मंजीत सचदेव को अपने प्रमुख वीडियो ऑन डिमांड ब्रैंड्स ‘वूट’ (Voot) और ‘वूट सेलेक्ट’ (Voot Select) का हेड (कंटेंट) नियुक्त किया है।

बता दें कि मंजीत सचदेव को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। 'वायकॉम18' को जॉइन करने से पहले वह मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ‘AltBalaji’ और ‘Sony Entertainment’ जैसे कई बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुकी हैं। अपनी नई भूमिका में वह 'वायकॉम18' के सीओओ (डिजिटल वेंचर) गौरव रक्षित के साथ मिलकर काम करेंगी।  

मंजीत सचदेव की नियुक्ति के बारे में गौरव रक्षित का कहना है, ‘इस प्लेटफॉर्म पर मंजीत के आने से मैं बहुत खुश हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि संस्थान को उनके अनुभव का काफी लाभ मिलेगा।’

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Linkedin को अलविदा कहने के बाद पुनीत नागपाल ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) के पूर्व हेड (Sales & Marketing Solutions–India) पुनीत नागपाल ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2020
Puneet Nagpal

‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) के पूर्व हेड (Sales & Marketing Solutions– India) ने ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘कोर्सेरा’ (Coursera) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। यहां उन्होंने बतौर कस्टमर मार्केटिंग लीड- APAC जॉइन किया है।

बता दें कि नागपाल ने मई 2017 में लिंक्डइन को जॉइन किया था और भारत में इसकी सेल्स और मार्केटिंग सॉल्यूशंस की कमान संभालते थे। लिंक्डइन में अपनी पारी के दौरान उन्होंने भारत में सेल्स सॉल्यूशंस बिजनेस को लॉन्च किया था। इसके अलावा विभिन्न कैंपेन के जरिये इसके मीडिया बिजनेस को नई ऊंचाई पर पहुचाया था।

नागपाल को मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘लिंक्डइन’ से पहले वह छह साल से ज्यादा समय तक ‘SHRM–APAC’ में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लिंक्डइन को जॉइन करने से पहले वह SHRM में हेड- Marketing (India/APAC) - Brand, Digital and Product के पद पर कार्य कर रहे थे। पूर्व में नागपाल IMS Learning Resources के साथ ब्रैंड/कम्युनिटी मार्केटिंग में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।    

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‘बांग्ला भारत’ के CEO उमेश कुमार ने अब इस चैनल की भी संभाली कमान

बीते कई हफ्तों से मीडिया गलियारों में इस बात की चर्चा हो रही थी कि आखिर टीवी मीडिया का कौन सा चेहरा बीते साल लॉन्च होने वाले न्यूज चैनल R9 की कमान संभालेगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
UmeshKumar

बीते कई हफ्तों से मीडिया गलियारों में इस बात की चर्चा हो रही थी कि आखिर टीवी मीडिया का कौन सा चेहरा बीते साल लॉन्च होने वाले न्यूज चैनल R9 की कमान संभालेगा, पर अब इस बात पर मुहर लग गई है कि चैनल का नया डायरेक्टर (न्यूज) कौन होगा। आपको बता दें कि इस पद की कमान ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ रह चुके वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार को दी गई है। इसके अतिरिक्त उमेश कुमार को चैनल के सीईओ पद की जिम्मेदारी दी गई है। समाचार4मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि खुद वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार ने की है।

'समाचार प्लस' चैनल बंद होने के बाद उमेश कुमार ने घोषणा की थी कि वह गैर हिंदी भाषी राज्य में फुल एचडी न्यूज चैनल लॉन्च करने जा रहे हैं, जिसके बाद पिछले साल दिसंबर में उन्होंने गैर हिंदी प्रदेश में अपने कदम बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल के पहले फुल एचडी न्यूज चैनल ‘बांग्ला भारत’ (Bangla Bharat) को लॉन्च कराया। वे इस चैनल में सीईओ व एडिटर-इन-चीफ के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे उत्तराखंड के मीडिया प्लेटफॉर्म्स ‘पहाड़ टीवी’ (PAHAD TV) और ‘दिल्ली चिली’ (Delhi Chilli) के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ हैं।

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RSTV के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में मिली बड़ी जिम्मेदारी

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharti) ने ‘राज्यसभा टीवी’ (RSTV) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में बतौर हेड (कंटेंट ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Impact

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharti) ने ‘राज्यसभा टीवी’ (RSTV) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में बतौर हेड (कंटेंट ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया है। बता दें कि राहुल महाजन ने करीब एक माह पूर्व राज्यसभा टीवी (RSTV) के एडिटर-इन-चीफ पद से इस्तीफा दे दिया था।    

राहुल महाजन को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 28 साल का अनुभव है। इनमें से 25 साल उन्होंने अलग-अलग मीडिया संस्थानों में काम किया है। वह प्रसार भारती में कंसल्टिंग एडिटर भी रह चुके हैं। करीब 48 वर्षीय राहुल महाजन लगभग12 साल तक संसद को कवर कर चुके हैं।     

शिमला के रहने वाले राहुल महाजन ने हिमाचल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘जी न्यूज’, ‘आजतक’, ‘स्टार न्यूज’, व ‘न्यूज24’ जैसे बड़े चैनलों में रहे। 

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NBA ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया एफिडेविट, उठाई ये मांग

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि उनके संगठन को आधिकारिक तौर पर कुछ खास अधिकार दिए जाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
NBA

टेलिविजन प्रसारण कंपनियों के संगठन ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (एनबीए) ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि उनके संगठन को आधिकारिक तौर पर एक अलग मान्यता दी जाए, ताकि सभी न्यूज चैनल्स (चाहे वह इसके सदस्य हों अथवा नहीं) इसके दिशा-निर्देशों का पालन करने और न मानने पर पेनाल्टी का सामना करने के लिए बाध्य हों।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा किसी भी न्यूज चैनल को ब्रॉडकास्टिंग की अनुमति देते समय उसके स्व-नियामक तंत्र (self-regulatory mechanism) के लिए उत्तरदायी होने की शर्त भी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में अपना एफिडेविट जमा करते हुए एनबीए ने उन तरीकों की सिफारिश की है, जिससे ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड एसोसिएशन (एनबीएसए)’ के स्व-नियामक तंत्र को मजबूत किया जा सकता है।

बता दें कि एनबीएसए स्वत्रंत निकाय है, जिसका गठन ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने प्रसारण के खिलाफ आई शिकायत पर विचार करने और फैसला लेने के लिए किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके सीकरी के पास फिलहाल इसकी कमान है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एनबीए ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा ‘सुदर्शन न्यूज’ द्वारा सिविल सेवाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रवेश से जुड़े एक शो को लेकर हुए विवाद बाद दिया है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस निकाय को ‘टूथलेस’ कहते हुए शुक्रवार को एनबीए को कुछ अधिकार देने के लिए सुझाव मांगे थे, ताकि यह कार्यक्रम कोड का उल्लंघन करने अथवा कुछ गलत प्रसारित करने पर टीवी चैनल्स के खिलाफ कार्रवाई कर सके।

एनबीए ने अपने हलफनामे में मांग की है कि उसकी आचार संहिता को केबल टीवी रूल्स के तहत प्रोग्राम कोड का हिस्सा बनाकर वैधानिक मान्यता प्रदान की जाए, ताकि ये नियम सभी न्यूज चैनल्स पर लागू हो सकें।

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Paytm की गूगल प्ले स्टोर पर हुई वापसी, 4 घंटे बाद लिया गया फैसला

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Paytm-Google

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं। इसकी जानकारी पेटीएम ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी। बीते शुक्रवार को गूगल ने यह ऐप प्ले स्टोर से हटा दिया था, हालांकि इसकी वजह तब सामने नहीं आई थी। कंपनी ने गूगल पर कॉम्पिटिशन रूल तोड़ने का आरोप लगाया।

शुक्रवार दोपहर गूगल ने प्ले स्टोर से पेटीएम ऐप को हटाने की जानकारी दी थी। इसके बाद पेटीएम ने ट्वीट किया था कि उसका एंड्रॉयड ऐप नए डाउनलोड या अपडेट के लिए गूगल प्ले स्टोर पर अस्थायी तौर पर उपलब्ध नहीं है। हम जल्द ही वापसी करेंगे। कंपनी ने यूजर्स से कहा था कि आपकी राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। आप पेटीएम ऐप को सामान्य तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, गूगल प्ले स्टोर से बैन होने के महज चार घंटे बाद ही पेटीएम की प्ले स्टोर पर दोबारा वापसी हो गई।

बता दें कि पेमेंट ऐप पेटीए की ओर से ऑफर किए जा रहे ‘पेटीएम गेमिंग’ (Paytm Gaming) ऐप को भी प्ले स्टोर से हटा दिया गया था, जिसके बाद कंपनी ने ट्वीट कर यूजर्स को भरोसा दिलाया कि उनके पैसे पूरी तरह सेफ हैं और जल्द ही ऐप प्ले स्टोर पर लौट आएगा।

भारत में लोकप्रिय क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही ढेरों ऐसे ऐप्स खूब डाउनलोड होने लगते हैं, जिनपर गेसवर्क करके और तुक्का लगाकर यूजर्स पैसे जीत सकते हैं।

वैसे तो गूगल ने पेटीएम ऐप के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन कंपनी की ओर से हाल ही में सट्टेबाजी (गैंबलिंग) से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने से पर एक अपडेटेड ब्लॉग पोस्ट शेयर किया गया है। एंड्रॉयड सिक्योरिटी और प्राइवेसी, प्रॉडक्ट के वाइस प्रेजिडेंट सुजेन फ्रे ने इस बारे में लिखा  कि हम ऑनलाइन कसीनो की अनुमति नहीं देते या किसी भी ऐसे ऐप को सपोर्ट नहीं करते जो सट्टेबाजी से जुड़ा हो और स्पोर्ट्स पर तुक्का लगाने पर गेम्स ऑफर करता हो। इसमें वे ऐप्स भी शामिल हैं, जो पैसे या प्राइज जितवाने का लालच देकर यूजर्स को किसी सट्टेबाजी की वेबसाइट पर भेजते हैं। यानी गूगल ऐसे कोई भी ऐप्स प्ले स्टोर पर नहीं चाहता, जिनकी मदद से सट्टेबाजी की जा सके या जुआ खेला जा सके।

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गंभीर आरोपों में पत्रकार गिरफ्तार, मजिस्ट्रेट ने छह दिन की रिमांड पर भेजा

पीतमपुरा निवासी इस फ्रीलॉन्स पत्रकार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Arrest

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फ्रीलान्स पत्रकार राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया है। उन्हें ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें छह दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में पीतमपुरा निवासी राजीव शर्मा के पास से डिफेंस से जुड़े क्लासीफाइड डॉक्यूमेंट मिले हैं। राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बारे में न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’(ANI) ने एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।  

बताया जाता है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर पुलिस लंबे समय से राजीव शर्मा के फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जुटा रही थी। इसके बाद पुलिस ने 14 सितंबर को राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। 15 सितंबर को राजीव शर्मा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। राजीव की जमानत याचिका पर 22 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव शर्मा कथित रूप से अपने देश से जुड़ी कुछ संवेदनशील सूचनाएं चीन की खुफिया एजेंसी को सौंप रहे थे। पुलिस ने अब चीन की एक महिला व उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने शैल कंपनियों द्वारा उन्हें काफी पैसा दिया था। 

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मीडिया को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Manish Tewari

पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया सरकार के इशारे पर काम कर रही है। ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में न्यूज चैनल्स पर बरसते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि मीडिया अब लोक हितैषी नहीं रह गई है।

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान मनीष तिवारी का यह भी कहना था, ‘समय के साथ मीडिया सरकार के इशारे पर काम करने वाली बनती जा रही है और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एक मिथक है।’

कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि देश में लगभग 950 मिलियन लोगों के यहां घरों पर टीवी है। इनमें से लगभग 93 प्रतिशत न्यूज चैनल्स नहीं देखते हैं, केवल सात प्रतिशत ही न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल्स देखते हैं और मौजूदा करीब 391 न्यूज व करेंट अफेयर्स चैनल्स उसी सात प्रतिशत से पैसा कमाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके साथ ही मनीष तिवारी का यह भी कहना था कि मीडिया को अपने रेवेन्यू मॉडल्स को दोबारा से देखने की जरूरत है और यह पूरी तरह से विज्ञापन संचालित मॉडल नहीं हो सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या रेवेन्यू मॉडल को पॉलिसी से रेगुलेट किया जा सकता है, तिवारी ने कहा कि जब वे सूचना-प्रसारण मंत्री थे तो उन्होंने टीआरपी को लेकर पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिये साफ किया था कि टीआरपी बनाने वाली कंपनियों को किस तरह रेगुलेट किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘यदि आप अपना रेवेन्यू मॉडल सही करना चाहते हैं और चाहते हैं कि लोग अखबार व टीवी चैनल के सबस्क्रिप्शन के लिए ज्यादा पैसा दें तो आपको उन्हें बेहतर कंटेंट पेश करना होगा। आपको अपने प्रॉडक्ट का उचित मूल्य निर्धारण शुरू करना होगा और लोगों को भुगतान करने की आदत डालनी होगी, लेकिन जब आप विज्ञापन पर निर्भर रहते हैं, तब यह फेक करेंसी से मापा जाएगा, जिसे टीआरपी कहते हैं।’

पूर्व मंत्री का कहना था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी समान रूप से खराब है। उन्होंने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी पूरी तरह से विज्ञापन पर आधारित मॉडल है। विज्ञापन पर आधारित मॉडल की वजह से आमतौर पर क्वालिटी कंटेंट तैयार नहीं हो पाता है।

पेड न्यूज के मुद्दे पर पूर्व मंत्री ने कहा कि जब वह प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में संशोधन करने की कोशिश कर रहे थे और विशेष रूप से पेड न्यूज और दंड प्रावधानों को धाराओं के तहत लाने की कोशिश कर रहे थे, तब मीडिया इंडस्ट्री ने इसे इतना पीछे धकेल दिया कि यह बिल आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। उनका कहना था, ‘न्यूज और करेंट अफेयर्स मीडिया का काम लोगों को शिक्षित व जागरूक करना है। इसका काम तथ्यों को सही रूप मं पेश करना व जनहित को देखते हुए गंभीरता लाना है।’

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मुश्किल घड़ी में महिला पत्रकार को राज्य सरकार ने यूं दिया ‘सहारा’

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Soniya Devi

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में सरकार की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ‘Poknapham’ अखबार की रिपोर्टर‘एस.सोनिया देवी’(Sorensangbam Soniya Devi)को यह वित्तीय सहायता‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’(MSJWS)के तहत दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना और जनसंपर्क निदेशालय के उप निदेशक, एल अशोक कुमार ने गुरुवार को सोनिया देवी को एक लाख रुपये का चेक सौंप दिया है।

बता दें कि ‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’ मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 30 जून 2017 को शुरू की थी। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इस योजना के तहत किसी पत्रकार के निधन पर पीड़ित परिजनों को दो लाख रुपये तक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है।

स्थायी रूप से दिव्यांग होने के मामले में भी पत्रकार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए एक लाख रुपये और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने पर 50,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। बताया जाता है कि योजना शुरू होने के बाद से 17 पत्रकारों को इसके तहत आर्थिक मदद दी जा चुकी है।

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