मीडिया में बहुत तेजी से फैल रहा है ये ‘वायरस’: मनोज मनु, ग्रुप एडिटर, सहारा टीवी नेटवर्क

प्रतिष्ठित ‘एक्सफचेंज4मीडिया न्यूसज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 February, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 February, 2019
Manoj Manu

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

प्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में किया गया। इस मौके पर देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को ‘इनबा अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मीडिया क्षेत्र की हस्तियों ने विभिन्न पैनल डिस्कशन के जरिये अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर एक पैनल डिस्कशन को मॉडरेट किया।

‘रीजनल मीडिया:खतरा, खबरें और कमाई’ विषय पर हुए इस पैनल डिस्कशन में ‘सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री और ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वाशिंद मिश्र, ‘इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर- प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा ने ‘सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु से जानना चाहा कि अक्सर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से पत्रकारों की मौत की खबरें आती हैं। इन क्षेत्रों में खनन माफिया काफी सक्रिय हैं, जिनके ऊपर आरोप लगते रहते हैं कि उन्होंने पत्रकारों पर हमला कराया है। उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिले होने के मामले भी सामने आते हैं। ऐसे में खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिखते समय किस तरह की चुनौतियां रहती हैं?

इस बारे में मनोज मनु का कहना था, ‘यह बात सही है कि इन क्षेत्रों में खनन माफिया काफी सक्रिय हैं और आए दिन खनन माफिया द्वारा पत्रकारों पर हमले की खबरें भी आती हैं। पहले भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। लेकिन पहले इस तरह की खबरें नहीं आती थीं, यदि आती भी थीं तो अखबारों और टीवी चैनलों में उन्हें इतने दमदार तरीके से नहीं उठाया जाता था। अब चूंकि मीडिया काफी मजबूत हो चुका है तो ऐसे में रीजनल मीडिया के कारण अब कस्बा, ब्लॉक और तहसील स्तर पर इस तरह की खबरों को प्रमुखता मिलती है। हालांकि शुरुआती स्तर पर माफिया को लगता है कि उनके खिलाफ कुछ नहीं होने वाला। यदि किसी घटना को अंजाम दे भी दिया जाए तो चीजें दब जाएंगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है। रीजनल मीडिया के प्रभाव के कारण इस तरह की घटनाओं में अब कमी आई है।’

उन्होंने कहा, ‘जहां तक छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों की बात है तो वहां कुछ इस तरह की घटनाएं हुई हैं, जिनकी दस्तक वहां से निकलकर राजधानी दिल्ली तक देखी गई है। लेकिन अब वहां भी इस तरह की घटनाओं में कमी आई है। सरकार ने भी इस तरह के मामलों पर गौर करना शुरू किया है। जहां तक खतरे की बात है तो चाहे राष्ट्रीय मीडिया हो अथवा प्रादेशिक, आजकल सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि पत्रकारिता में विचारधारा का ‘वायरस’ बहुत तेजी से फैल रहा है। ऐसे में मुझे तो समझ में नहीं आता है कि इस वायरस को किस तरह की वैक्सीन से समाप्त किया जाए।’

यह पूछे जाने पर कि रीजनल मीडिया का इंपैक्ट क्या पड़ रहा है। जिस तरह से खबरों को लेकर नेशनल मीडिया इंपैक्ट डालता है और उसके आधार पर कार्रवाई भी होती है, लेकिन रीजनल मीडिया में छोटे-छोटे कस्बों और शहरों समेत दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक से खबरें आती हैं। ऐसे में रीजनल मीडिया के पास खबरों की भरमार होती है, तो कैसे इसकी खबरों का इंपैक्ट पड़ता है? खबर लाने वाले स्ट्रिंगर्स की क्रेडिबिलिटी सवालों के घेर में रहती है, क्यों? 

इस पर मनोज मनु का कहना था, ‘स्ट्रिंगर्स से जब आप बिजनेस भी मंगाएंगे तो कहीं न कहीं गड़बड़ होनी ही है, इसलिए मैंने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि स्ट्रिंगर्स सिर्फ खबरें करेंगे, बिजनेस के लिए अलग से व्यवस्था होगी। दूसरी बात ये कि हमें यह सोचना होगा कि जो नेशनल हिंदी चैनल होने का दावा कर रहे हैं, क्या वे वास्तव में नेशनल चैनल हैं। आज के समय में हिंदी भाषी रीजनल चैनल के लिए नेशनल चैनल सबसे ज्यादा परेशानी बन रहे हैं, क्योंकि मार्केट बहुत छोटी है और उसी से उनको भी शेयर जा रहा है, ऐसे में रीजनल चैनलों का शेयर कम हो जाता है।’

उन्होंने कहा, ‘नेशनल से अलग हटकर इसलिए रीजनल न्यूज चैनल खुले, क्योंकि उन्हें पलामू की खबर दिखानी है, बस्तर की भी खबर दिखानी है और तमाम छोटे-छोटे इलाकों की खबर भी दिखानी है। कम महत्वपूर्ण खबरों को फास्ट न्यूज में दिखा देते हैं। कहने का मतलब है कि वह जिस राज्य का रीजनल चैनल है, वहां की खबरों को उसमें पूरा महत्व मिलता है। रही बात रेवेन्यू की तो रीजनल में आज भी रेवेन्यू का सबसे बड़ा माध्यम सरकार ही है। यदि सरकार का विज्ञापन नहीं मिलेगा तो रीजनल चैनल को परेशानी होगी। पहले गिने-चुने रीजनल चैनल होते थे, लेकिन अब उनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में सरकार के सामने भी संकट है, लेकिन सरकार यह नहीं कहती है कि आप उसके आगे घुटने टेको। अगर आप खबर दिखा रहे हैं और उसकी सत्यता को सरकार को बता रहे हो तो वो ये कभी नहीं कहती है। इसमें आपको देखना होगा कि आपने अपना आकलन कहां किया है। घुटने टेकने पर या खबर दिखाने पर।’

इसके साथ ही एक सवाल के जवाब में मनोज मनु का यह भी कहना था, ‘देश में बहुत सारी चीजें बंट रही हैं, इसलिए हमें इस सच्चाई को स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है कि मीडिया भी बंट रहा है। पहले यदि पत्रकार का किसी राजनीतिक दल के नेता से संबंध हुआ करता था तो यह जरूरी नहीं था कि यह संबंध खबरों में भी दिखे, लेकिन पिछले कुछ समय से ऑनस्क्रीन भी ऐसी चीजें दिखाई दे रही हैं। मेरा कहना है कि इस तरह की चीजें ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाली हैं, क्योंकि दर्शक बहुत समझदार हैं और यही कारण है कि कुछ समय पूर्व जब तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आए तो मुझे लगता है कि कई टीवी एंकर्स के चेहरे पर दर्शकों ने यह भाव पढ़ लिए थे। कहने का मतलब है कि आप लंबे समय तक किसी की विचारधारा को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अब सोचना यह है कि विचारधारा का यह ‘वायरस’ कब तक काम करेगा, कभी न कभी तो कोई ‘वैक्सीन’ आएगा, जो इस पर काम करेगा।’

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं...

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सोनिया गांधी के इस सुझाव पर NBA ने जताई नाराजगी, रखी ये बात

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों के बारे में दिए गए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का विरोध किया है

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस सुझाव को पुरजोर तरीके से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने की बात कही है।

इस बारे में ‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का कहना है, ’ऐसे समय में जब मीडियाकर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए महामारी के बीच न्यूज कवर कर अपनी राष्ट्रीय ड्यूटी निभा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का बयान काफी हतोत्साहित करने वाला है।’  

रजत शर्मा की ओर से कहा गया है, ‘एक तरफ तो आर्थिक मंदी की वजह से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में काफी गिरावट आई है, दूसरी तरफ लॉकडाउन में सभी इंडस्ट्री और बिजनेस बंद होने के कारण भी यह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसके अलावा न्यूज चैनल्स अपने रिपोर्टर्स और प्रॉडक्शन स्टाफ की सुरक्षा पर काफी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगाने का सुझाव न केवल मीडिया को बीमार करने वाला है, बल्कि यह पूरी तरह से मनमाना है ’

रजत शर्मा की ओर से यह भी कहा गया है, ‘स्वस्थ और फ्री मीडिया के हित में ‘एनबीए’ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री को सरकार द्वारा मीडिया को दिए जाने वाले एडवर्टाइजमेंट पर दो साल के लिए रोक लगाने के सुझाव को वापस लेने की मांग करता है।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी को दिए अपने पत्र में सोनिया गांधी ने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाकर यह पैसा कोरोनावायरस से पैदा हुए संकट से निपटने में लगाने को कहा है।

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इस ग्रुप से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं। बता दें कि अब इस खबर पर मुहर लग गई है। वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर ने तक चैनल्स (Tak Channels) के मैनेजिंग एडिटर के रूप में ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप जॉइन कर लिया है। वे वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे।

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खांडेकर के कंधों पर न्यूज और रीजनल के सभी तक चैनल्स की जिम्मेदारी होगी। वे नोएडा के फिल्म सिटी स्थित आईटीजी मीडियाप्लेक्स से ही अपना योगदान देंगे।

खांडेकर इसके पहले  ‘बीबीसी (इंडिया)’ में बतौर डिजिटल एडिटर कार्यरत थे। 13 मार्च को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से बीबीसी से अलग होने की जानकारी साझा की थी। इस ट्वीट में खांडेकर ने कहा था, ‘बीबीसी इंडिया के साथ मेरा सफर काफी बेहतर रहा। इस दौरान कई नई चीजें सीखने का मौका भी मिला। भारत में बीबीसी ने काफी विस्तार किया है और मैं काफी सौभाग्यशाली हूं जो इसका हिस्सा रहा। मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। अपने अगले कदम के बारे में मैं जरूर जानकारी दूंगा।’

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गौरतलब है कि मिलिंद खांडेकर बीबीसी से पहले एबीपी न्यूज के साथ जुड़े हुए थे। अगस्त, 2018 की शुरुआत में एबीपी न्यूज में अपनी 14 साल की लंबी पारी को विराम दिया था। वे यहां मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत थे।  2016 में उनका कद बढ़ाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। एबीपी न्यूज नेटवर्क में उनका योगदान हिंदी चैनल के साथ शुरू हुआ और धीरे-धीरे एबीपी न्यूज नेटवर्क के डिजिटल और क्षेत्रीय (बंगाली, मराठी और गुजराती) चैनलों की ओर भी बढ़ा।

2016 में ही मिलिंद खांडेकर को टीवी न्यूज इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित अवॉर्ड एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) के तहत बेस्ट एडिटर कैटेगरी के लिए भी चुना गया था।

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया। मिलिंद ने पत्रकारिता में अपनी शुरुआत 1992 से ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ की। नवभारत में उन्होंने सब-एडिटर और रिपोर्टर के रूप में काम किया। 1995 तक वे यहां रहे। तीन साल काम करने के बाद वे ‘आजतक’ के साथ जुड़ गए। आजतक में उन्होंने कुछ समय तक रिपोर्टर की भूमिका निभाई, जिसके बाद कई विभिन्न पदों पर काम करते हुए वे यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर बन गए और बाद में उन्होंने वेस्टर्न ब्यूरो ऑपरेशन की भी कमान संभाली। 2004 में मिलिंद ने 'आजतक' को अलविदा कह दिया और तब स्टार न्यूज यानी आज के 'एबीपी न्यूज' के साथ जुड़ गए थे। तब से वे एमसीसीएस (एबीपी चैनल का संचालन करने वाली कंपनी) में बतौर मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

मिलिंद ने किताब 'दलित करोड़पति-15 प्रेरणादायक कहानियां' भी लिखी । इसमें 15 कहानियां है, जिनमें 15 दलित उद्योगपतियों के संघर्ष को शॉर्ट स्टोरीज की शक्ल में प्रस्तुत किया गया है। ये कहानियां दलित करोड़पतियों की है,जिन्होंने शून्य से शुरू कर कामयाबी के नए आयाम रचे, जिनके पास पेन की निब बदलने के लिए पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन उन्होंने ये कामयाबी कैसे हासिल की, क्या मुश्किलें आई और उन्होंने इन मुश्किलों पर कैसे फतह हासिल की।  

पत्रकारिता जगत में उन्हें दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रतिष्ठित टाइम्स सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज से की है। 1991 में हिंदी में बेस्ट ट्रेनी के लिए उन्हें ‘राजेन्द्र माथुर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया था।

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मीडिया के खिलाफ जमीयत ने उठाया ये कदम, लगाया नफरत फैलाने का आरोप

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
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मीडिया जिस तरह से तब्लीगी जमात मामले को लेकर रिपोर्टिंग कर रहा है, उसे लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया है। उसने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराने पर मीडिया के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के इस संगठन ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। इस संगठन ने कहा कि इस मुद्दे को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मुसलमान कोरोना फैलाने की मुहिम चला रहे हैं। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मीडिया और सोशल मीडिया में झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील भी की है।

जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने दायर की गई याचिका में कहा कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं, जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।

संगठन ने याचिका में यह भी कहा है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में देश के एक बड़े समुदाय को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उसके आर्थिक बहिष्कार की बातें कही जा रही हैं। इससे न सिर्फ समाज में नफरत फैलेगी बल्कि कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई भी कमजोर पड़ेगी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देते हुए तुरंत सुनवाई करे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसमें तब्लीगी जमात में शामिल लोगों और मौलाना साद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में मौलाना साद के समर्थन में मौलाना अली कादरी सामने आए और उन्होंने न्यूज चैनल्स और उससे जुड़े पत्रकारों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी पत्रकार जमात के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे ऐसा करना बंद कर दे नहीं तो उनके रिपोर्टर्स का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने इस धमकी को संजीदगी से लिया और उनकी ओर से एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि  न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा  की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है।’  

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है।  

बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है।  इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन 5 गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। मालूम हो कि देशभर में अभी तक 4067 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।

   

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इस खुलासे के बाद न्यूज एंकर्स व रिपोर्टर्स को मिल रहीं धमकियां, NBA ने जताया विरोध

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने विभिन्न न्यूज चैनल्स में काम कर रहे एंकर्स और पत्रकारों के खिलाफ समाज के एक खास वर्ग के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका को उजागर किया गया है, तब से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

रजत शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

रजत शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने काफी उल्लेखनीय काम किया है और हमेशा सही, निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग की है। कोरोनावायरस जैसी महामारी को लेकर टीवी पर होने वाली डिबेट्स में भी समाज को सभी वर्गों को उचित व बराबर का प्रतिनिधित्व दिया गया है।’   

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है। पत्र में एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसे नेता सामने आएं और कोरोनावायरस को फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर अपना रुख साफ करें।

 

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार ने दी कोरोना को मात

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
kk-saxena

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। दूसरी बार किए गए कोरोना वायरस के टेस्ट में दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। दोनों ही भोपाल के एम्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां शुक्रवार रात उन्हें घर भेज दिया गया है।

बता दें कि पत्रकार की बेटी जब ब्रिटेन से लौटी थीं, तो वे संक्रमित थीं। 21 मार्च को किए गए टेस्ट में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और उन्हीं से यह वायरस उनके पत्रकार पिता में भी आया था। चार दिन बाद उनके 62 वर्षीय पिता भी कोरोना पॉजिटिव निकले थे।

पत्रकार की बेटी पोस्ट-ग्रेजुएट कानून की छात्रा हैं जो 18 मार्च को लंदन से भोपाल लौटी थीं। उन्हें होम-क्‍वारंटाइन रहने का आदेश दिया गया था, लेकिन उनके घर आने के दो दिन बाद ही पत्रकार कमलनाथ की अंतिम प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए चले गए। इसी के चलते प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के शामिल सभी पत्रकारों में दहशत फैल गई और सभी को क्‍वारंटाइन किया गया।

पत्रकार पर कोरोना वायरस महामारी से संबंधित सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के लिए मामला भी दर्ज किया गया है। श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में पत्रकार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो), धारा 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इस मामले में NDTV को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
NDTV

टैक्स से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है। इस मामले में एनडीटीवी पर वर्ष 2007में  अपने नॉन न्यूज बिजनेस के लिए विदेशी निवेश जुटाने के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने असेसमेंट को फिर से खोलने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह इजाजात देने से इनकार कर दिया है। वर्ष 2015 में  टैक्स अधिकारियों ने एनडीटीवी पर तथ्य छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था।

इसे लेकर एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद इस केस को लेकर सुनवाई चल रही थी। केस को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनडीटीवी के पक्ष में फैसला सुनाया और रेवेन्यू डिपार्टमेंट को केस दोबारा से खोलने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। 

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प्रसार भारती ने जारी की डीडी फ्रीडिश पर मौजूद चैनल्स की लिस्ट, लिया ये फैसला

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्ले‘टफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्‍लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के अनुसार, इस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुल 88 चैनल्स हैं। इनमें पब्लिक और प्राइवेट चैनल्स शामिल हैं।  

प्रसार भारती ने 28 फरवरी को हुई 44वीं ई-नीलामी के दौरान डीडी फ्रीडिश के MPEG-2 स्लॉट की बिक्री से 53 चैनलों के लिए 594.25 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

बता दें कि इस पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में एहतियाती कदम उठाए हुए हाल ही में MPEG-2 की ई-नीलामी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रसार भारती ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के लिए डीडी फ्रीडिश डीटीएच प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स को भरने के लिए निजी टीवी चैनल्स से आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 मार्च अपराह्न तीन बजे तक रखी गई थी।

इस बारे में प्रसार भारती के डायरेक्टर (डीटीएच) इंद्रजीत ग्रेवाल का कहना है, ‘कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए गए कई एहतियाती कदमों को ध्यान में रखते हुए टीवी चैनल्स से आवेदन पाने और आवंटन की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।’

 

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एडिटर्स गिल्ड ने सरकार की इस बात पर जताई हैरानी, यूं की मीडिया की वकालत

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयान पर काफी हैरानी जताई है

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था  ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) सरकार के उस बयान पर काफी क्षुब्ध है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले प्रवासी कामगारों के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया को भी दोषी ठहराया था।

इस बारे में अब गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कही गईं इस तरह की बातों से उसे व्याकुलता और हैरानी हुई है। इसके साथ ही गिल्ड का यह भी कहना है कि वर्तमान हालातों में अपने काम में मुस्तैदी से जुटी मीडिया को दोषी ठहराना केवल उसे कमजोर करना है। अभूतपूर्व संकट के दौरान मीडिया पर लगे इस तरह के आरोप देश के सामने खबरों के प्रसार की प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकते हैं। दुनिया में किसी भी देश में कोई भी लोकतंत्र अपने मीडिया का मुंह बंद करके इस महामारी के खिलाफ नहीं लड़ रहा है।

गिल्ड ने वेबसाइट ‘द वायर’ (The Wire) के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी संज्ञान में लिया है। गिल्ड का मानना ​​है कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस तरह के हस्तक्षेप मीडिया को उसके उद्देश्य को हासिल करने में बाधा पैदा करेंगे। गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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