फोटो जर्नलिस्ट के काम को कुछ यूं बयां करती है ये कविता...

हरी गहलौत, वरिष्ठ छायाकार ।। फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है... वो मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी, फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है।   वो सुख - दुख, हंसी-उदासी हर तरह की यादें बनाता है, फोटो जर्नलिस्ट का हर इमोशन से नाता

Last Modified:
Monday, 20 March, 2017
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हरी गहलौत, वरिष्ठ छायाकार ।। फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है... वो मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी, फोटो जर्नलिस्ट का हर मज...
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