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नए साल में डिजिटल मीडिया में संभावनाएं
<p>शिशिर शुक्ला</p> <div>समाचार4मीडिया.कॉम</div> <div>सन् 2010 की शुरुआत हो चुकी है। पूरा विश्व मंदी
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
शिशिर शुक्ला
समाचार4मीडिया.कॉम
सन् 2010 की शुरुआत हो चुकी है। पूरा विश्व मंदी से उबरने के लिए छटापटा रहा है। मार्केटिंग क्षेत्र के लोग अपने-अपने ढंग से प्रयास कर रहे हैं। सरकारों की अपनी कोशिशें जारी हैं। वैश्विक मंदी के समाप्त होने के आसार कम हैं फिर भी भारतवर्ष में आर्थिक मंदी की मार उतनी गहरी नहीं है और हालात सुधरने के आसार कहीं ज़्यादा हैं।
मंदी के असर को कम करने के लिए विश्व भर में विभिन्न कंपनियां डिजिटल मीडिया में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए कमर कस रही हैं। बहुत सी कंपनियों ने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पेशेवर एजेंसियों की सेवाएं लेना आरंभ कर दिया है। यह डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का द्योतक है।
दरअसल अभी तक डिजिटल मीडिया को मुख्यत: विज्ञापन का एक और ज़रिया मात्र माना जाता था, जिसे अब ग्राहकों से दोतरफा संवाद बनाने के लिए भी प्रयोग किया जाने लगा है। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का परिणाम यह होगा कि मीडिया-मिक्स में डिजिटल मीडिया का हिस्सा बढ़ेगा। इससे डिजिटल मीडिया माध्यम के प्रति मार्केटिंग क्षेत्र के लोगों का नजरिया भी बदलेगा।
नए साल के कुछ और रुझानों की बात करें तो 3जी, वाईमैक्स और नंबर पोर्टेबिलिटी आने से विज्ञापन के अवसरों और सामग्री में क्रांतिकारी बदलाव आने के आसार हैं। डिजिटल सामुदायिकता (कम्युनिटी), विशेषज्ञों और तकनीक के मिलन से सर्च के विकल्प और दूसरों के बारे में गहराई से जानने के साधनों में विस्तार होगा। डिजिटल कम्युनिटी में आपसी संवाद बढ़ा है। इसी प्रकार मोबाइल पर इंटरनेट के प्रयोग को भी बढ़ावा मिला है। मार्केटिंग के लोग इस टार्गेट आडिएंस को अपने साथ जोड़ने के लिए क्या अभिनव प्रयास करते हैं, यह देखना होगा।
सबसे बड़ा बदलाव तब आयेगा जब आपकी ईमेल-आईडी की पोर्टेबिलिटी संभव हो जाएगी, यानी, आपकी ईमेल आईडी के प्रथमाक्षर वही रहेंगे और आप उसे जीमेल, याहू, रिडिफमेल, हॉटमेल आदि में से किसी पर प्रयोग कर पायेंगे, जो कि शायद सन् 2010 में अथवा 2011 ही संभव हो जाए। इंटरनेट के प्रयोग में यह बड़ी क्रांति आने को है। ओपन ईमेल-आईडी की अवधारणा पर काम चल रहा है। गूगल इस दिशा में गंभीर प्रयत्न कर रहा है और बहुत संभव है कि माइक्रोसाफ्ट, गूगल, याहू और फेसबुक मिलकर इस सपने को साकार कर दें।
आम आदमी की आदतों पर गूगल की निगरानी बढ़ी है। इंटरनेट के प्रयोग की हमारी आदतों को बारीकी से देखा जा रहा है और उसी के मुताबिक हमें विज्ञापन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इससे हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सुविधा तो हो रही है पर यह निश्र्चित है कि आने वाले सालों में हमारे पास निजता या प्राइवेसी नाम की कोई चीज़ बाकी नहीं रहने वाली है।
इंटरनेट के उपयोग से ग्राहकों तक पहुंचने के लिए मार्केटिंग क्षेत्र के लोगों के सामने अभी भी सब से बड़ी चुनौती तो यह है कि इंटरनेट का प्रसार आम तौर पर शहरों तक ही सीमित है और मार्केटिंग क्षेत्र के लोगों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका संदेश न केवल उनके लक्षित लोगों (टार्गट आडिएंस) तक तुरन्त पहुचे बल्कि वह सदैव प्रासंगिक भी हो। डिजिटल मीडिया अभी भी शहरी लोगों
तक सीमित है। मोबाइल फोन पर इंटरनेट के प्रयोग से इसमें कुछ बदलाव आने तो संभव हैं पर अभी ग्रामीण क्षेत्र में ऐसा नहीं हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट के प्रयोग के रुझानों में कोई बड़ा बदलाव आते-आते आयेगा लेकिन शहरों में मोबाइल पर वीडियो सामग्री के उपयोग का प्रसार भी बढ़ेगा और इससे मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र में कई नए परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
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