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इंडिया टुडे वूमेन सम्मिट एंड अवार्डस: प्रतिभा की भिन्नता के लिए प्रयत्न कीजिए, लिंग की भिन्नता का नहीं
<div>13 फरवरी, 2010</div> <div>मुंबई ब्यूरो, समाचार4मीडिया.कॉम</div> <div> </div> <div>कामगर लो
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
13 फरवरी, 2010
मुंबई ब्यूरो, समाचार4मीडिया.कॉम
कामगर लोगों में भारतीय नारी के योगदान को मान्यता देने के लिए मुंबई में 12 फरवरी की शाम को इंडिया टुडे वूमेन सम्मिट एंड अवार्ड 2010 का आयोजन किया गया। पुरस्कारों के इस दूसरे वर्ष में लगभल हर व्यवसाय की महिलाओं ने शिरकत की, चाहे वह कॉरपोरेट भारत हो, उद्यम का क्षेत्र हो, एनजीओ हों या कुछ और। एमवे इस कार्यक्रम के प्रयोजक थे जबकि लक्सर इसके राइटिंग इंस्ट्रूमेंट पार्टनर बनें।
इंडिया टुडे के मुख्य संपादक अरुण पुरी ने अपने भाषण में कहा, “भारतीय नारियों ने एक लंबा रास्ता तय किया है। आज एक महिला देश के सबसे बड़े बैंक की मुखिया है, देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रदेश की मुख्यमंत्री एक महिला है, लोकसभा की अध्यक्ष एक महिला है, जो अपने निर्णय में कठोर और नरम दोनों की झलक देती हैं। इस वर्ष आई सेक्टर में महिलाओं के रोजगार में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अभी सर्वोच्च प्रबंधन में महिलाओं की संख्या नग्णय है, परंतु विश्व भर में यह स्थिति एक समान है। वस्तुत: अमेरिका में भी संचालन बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी 13 प्रतिशत है। तो बी आज की महिलाओं को जिन दबावों से गुजरना पड़ता है, उसके बावजूद उन्होंने नेतृत्व संभाला है।”
आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड के चेयरमैन केवी कामथ ने अपने उद्घाटन भाषण में महिलाओं को रोजगार देने का इससे हमारा प्रतिभा बैंक दोगुना हो जाता है। कामथ ने यह भी कहा कि इस समय नॉलेज सर्विस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत है और अगले दो- तीन सालों में ही यह बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगी। कामथ ने जोर देकर कहा, “महिलाओं को ताकत का जुनून नहीं होता। वे ज्यादा कल्पनाशील होती हैं और अपने निर्णय में ज्यादा तर्कसंगत होती हैं। हालांकि, महिलाओं को रोजगार देने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उससे आपका प्रतिभा बैंक दोगुना हो जाता है। मैं यह कहूंगा कि आप प्रतिभा वैभिन्य का प्रयास करें, लिंग वैभिन्य का नहीं। आज ज्यादा से ज्यादा संस्थाएं प्रतिबा को सम्म्न देती हैं और इस प्रकार वे ज्यादा आगे बढ़ रही हैं। यह परंपरा और मजबूत होगी और हमारा प्रयत्न यह होना चाहिए कि प्रतिभाशाली महिलाओं को किसी भी योग्य अवसर से वंचित न किया जाए।”
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