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ये हैं गुमराह करते विज्ञापन – एएससीआई रिपोर्ट
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समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा हाल ही में शिक्षा जगत के लिए जारी दिशानिर्देशों के चलते शिक्षा क्षेत्र पर विज्ञापनों की शिकायत में काफी तेजी से वृद्धि आयी है। ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा जुलाई और अगस्त में दर्ज 12 शिकायतों में से अकेले 6 ‘शिक्षा क्षेत्र’ के खिलाफ दर्ज हुई हैं और बाकी ‘एफएमसीजी’, ‘ट्रैवल’, ‘रियलिटी’ और ‘अप्लायंस’ कंपनियों के खिलाफ शिकायत आई है।
‘कॅरियर लॉन्चर इंडिया लिमिटेड’ के तीन विज्ञापनों के खिलाफ, ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ को मिली शिकायत में ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ ने उनके दावे को प्रमाणिक नहीं पाया। ‘कॅरियर लॉन्चर इंडिया लिमिटेड’ के तीन विज्ञापनों में, उच्च सफलता दर टेस्ट देने वाले छात्रों की संख्या और मुंबई में सबसे सफल प्रशिक्षक का दावा किया गया था। कंपनी किसी भी दावे को ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ कोड के ‘चैप्टर वन’, ‘क्लॉज 1’ के अंतर्गत प्रमाणित नहीं कर सका। ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ ने विज्ञापन को हटाने को कहा और कंपनी ने विज्ञापन हटा लिया।
एक ऐसे ही मामले में, ‘टी.आई.एम.ई इंस्टीट्यूट’ भी ‘जीमैट’ के लिए ‘नंबर वन इंस्टीट्यूट’ के दावे को प्रमाणित नहीं कर सका और उसे विज्ञापन वापस लेना पड़ा। ‘एजुकेशन मैटर्स’ के वेबसाइट पर ‘ब्रिटिश डिप्यूटी हाई कमीशन’ के साथ सहयोग का दावा किया गया था जो निराधार था, उसे भी अपने वेबसाइट से इस दावे को वापस लेना पड़ा।
‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ के महासचिव, अनिल कोलैको ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में हाल ही में जारी दिशानिर्देश का प्रभाव दिखाई देने लगा है। दिशानिर्देशों पर काफी बहस की गई थी और इंडस्ट्री एवं नागरिकों के द्वारा इसका स्वागत किया गया है। इस समय शिक्षा जगत के खिलाफ 50 प्रतिशत से अधिक शिकायत आ रही है। बढ़ती जागरूकता और शिकायतों में वृद्धि ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा जारी दिशानिर्देशों के लिए अच्छा संकेत है।”
इसके अलावा, ‘कॉलगेट सेन्सिटिव टूथपेस्ट’ के टेलीविजन विज्ञापन में भी उपभोक्ताओं को गुमराह किया गया था। टेलीविजन विज्ञापन के अनुसार, अन्य टूथपेस्ट को ‘चार दंत-चिकित्सकों में से सिर्फ एक चिकित्सक’ सिफारिश करते हैं जबकि यह आंकड़ा वास्तव में अधिक है। कंपनी को अपने टेलीविजन विज्ञापन को संशोधित करने को कहा गया। हालांकि, कंपनी अपने दावे - ‘संवेदनशील दांत दर्द से राहत’ और ‘चार दंत-चिकित्सकों में से तीन के द्वारा कॉलगेट सेन्सिटिव की सिफारिश’ - को पुष्ट करने में सक्षम रहा, कॉलेगेट-पामोलिव ने उचित संशोधन का आश्वासन दिया है।
‘डाबर पुदीन हरा’ में कोई केमिकल नहीं है, के दावे को ‘एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डस काउंसिल ऑफ इंडिया’ के द्वारा उपभोक्तों को गुमराह करता पाया गया। ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ ने उचित संशोधन का निर्देश दिया है। दूसरी ओर कंपनी आंकड़ों के द्वारा - ‘दर्द और एसिडिटी से राहत’ - दावे की पुष्टि करने में सफल रहा है।
एक तुलनात्मक विज्ञापन में, ‘सुप्रीम फूड इंडस्ट्रीज’ का आइस क्रीम ब्रांड -‘मेरीब्यॉय आइस क्रीम’ - उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे थे। विज्ञापन में दावा किया गया था कि प्रतियोगियों के द्वारा कृत्रिम उत्पाद का प्रयोग किया जाता है। ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ ने ‘मेरीब्यॉय आइस क्रीम’ और ‘मीडियम फैट फ्रोज़न डिजर्ट’ के बीच तुलनात्मक विज्ञापन को गलत और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला पाया। ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ के कहने पर, दावों को बाजार से वापस ले लिया गया था और विज्ञापनदाता के द्वारा वेबसाइट कंटेंट को संशोधित किया गया।
‘निराली अप्लायंसेज’ के बिजली और बिजली संबंधी दावे को बगैर किसी उपयुक्त संस्था के प्रमाण के उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला पाया गया। ‘उपभोक्ता शिकायत परिषद’ को विज्ञापनदाता ने आश्वस्त किया कि इसे वेबसाइट पर नहीं दोहराया जायेगा।
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