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न्यूज छोड़ कर न्यूज में मजे तलाशने की प्रवृत्ति घातक है
<div><span style=color: #800000><strong>बृजेश मिश्रा, एडिटर, ई टीवी उत्तर प्रदेश </strong></sp
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
बृजेश मिश्रा, एडिटर, ई टीवी उत्तर प्रदेश
भारत में प्रेस की स्वतंत्रता दूसरे लोकतांत्रिक देशों के लिए मिसाल है लेकिन मूलत: यह देखा जा रहा है की मीडिया अपनी लश्रमण रेखा हर क्षण लांघ रहा है किसी भी मसले पर मीडिया ट्रायल से पत्रकारों को बचना चाहिये। मीडिया को मिली स्वतंत्रता हमारा सबसे बड़ा गहना है, इसे हमें सजाकर, संजोकर रखना चाहिये। खास कर नेशनल न्यूज चैनलों में जो भी हो रहा है, वह ठीक नही, उदाहरण के तौर पर न्यूज के नाम पर सनसनी, न्यूज के नाम पर कामेडी शो आदि। पत्रकारिता के इस दौर में न्यूज छोड़ कर न्यूज में मजे तलाशने की यह प्रवृत्ति बहुत घातक है। यह टेलीविजन पत्रकारिता के लिए आत्मघाती कदम है। अब वक्त आ गया है कि एक निर्णायक पहल करनी होगी।
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