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हिंदी पत्रकारिता ने भी बदलाव को स्वीकारा है
<p><strong>उर्मिलेश, कार्यकारी संपादक, राज्य सभा टीवी</strong></p> <div>आज हिन्दी पत्रकरिता दिवस के
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
उर्मिलेश, कार्यकारी संपादक, राज्य सभा टीवी
आज हिन्दी पत्रकरिता दिवस के दिन अगर हिन्दी पत्रकारिता और बाजार पर विचार करें तो एक बात तो साफ है कि बाजार कोई बुरी चीज नही है। उससे घबराने की बात नही है। पूंजी और व्यवसाय का रिश्ता तो काफी पुराना है पत्रकारिता अब एक व्यवसाय बन चुकी है। लेकिन पत्रकारिता पहले भी मिशन थी और आज भी है। पत्रकारिता को बाजार से कोई परेशानी नहीं है, बाजार चलाने वालों से है। जो भी चिंताएं हैं और मुश्किलें हैं वह बाजार के चलते ही नहीं है। हां यह कह सकते हैं कि बाजार उसमें शामिल रहा है यह भी सच है।
मुझे लगता है जो पत्रकारिता के पुराने घराने हैं जिनमें पत्रकारिता की जड़ है उन्हें भी अब समझना होगा कि पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है इसलिए समाजिक परिवर्तन को स्वीकारते हुए बदलाव की जरूरत है।
लेकिन यह भी ध्यान रहे कि बदलाव में इस बात का ख्याल रखा जाए कि पत्रकारिता का इस्तेमाल धंधे की तरह न हो। यह विचार औऱ सूचना का ज्ञान देने का काम करता है। यह लाभ भी देता है, घाटा भी देता है।
पत्रकारिता सूचनाओं से जुड़ा हुआ व्यवसाय है इसमें रियल स्टेट की तरह अगर 200-300 करोड़ का लाभ हासिल हरने की मंशा लग जाएगी तो यह पत्रकारिता गलत दिशा में ही जायेगी।
जो नये लोग पत्रकारिता में आ रहे हैं, मुझे उनसे बड़ी उम्मीद है । वे बहुत कुछ करना चाहते हैं। बशर्ते पुराने लोग संपादक उन्हें मौका दे।
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