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भाषायी पत्रिकाओं में वनिथा नंबर एक पर काबिज, सात पत्रिकाओं की पाठक संख्या घटी
<p><strong>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</strong></p> <p>इंडियन रीडरशिप सर्व के 2010 के दूसरी तिमाही के आ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
इंडियन रीडरशिप सर्व के 2010 के दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर गौर करें तो भाषायी पत्रिकाओं के लिए अच्छी ख़बर नहीं है। मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल के ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 10 भाषायी मैगजीन में से 7 भाषायी मैगजीन के पाठकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
वनिथा भाषायी मैगजीन के बीच अग्रणी बना हुआ है लेकिन इसके पाठकों की संख्या में 2012 की पहली तिमाही के मुताबिक, 2012 की दूसरी तिमाही में कमी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 24 लाख 44 हजार के स्थान पर 23 लाख 53 हजार रह गई है।
मलयाला मनोरमा, कुमुदम मातृभूमि, आरोग्य मासिक, बलराम, साप्ताहिक बर्तमान और आनंद विकटन के पाठकों की संख्या में भी एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार दूसरी तिमाही में कमी आई है।
सिर्फ तीन भाषायी मैगजीन – कर्मक्षेत्र, मातृभूमि तोझिल वार्ता और कर्मसंगस्थान के पाठकों की संख्या में पहली तिमाही के मुताबिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कर्मक्षेत्र के पाठकों की संख्या पहली तिमाही में 11 लाख 42 हजार थी वहीं अब बढ़कर यह 11 लाख 68 हजार हो गई है। मलयाला मनोरमा के पाठकों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 11 लाख 63 हजार थी वहीं अब घटकर 11 लाख 13 हजार हो गई है।
वहीं दूसरी तरफ, कर्मसंगस्थान ने पहली तिमाही के एवरेज इश्यू आंकड़ों के मुताबिक 30 हजार नए पाठकों को जोड़ने में सफलता पाई है। पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 9 लाख 34 हजार थी वहीं अब यह दूसरी तिमाही में यह 9 लाख 64 हजार हो गई है।
कुमुदम के पाठकों की संख्या में इस तिमाही में कमी आई है। पहली तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 8 लाख 84 हजार थी वहीं अब यह संख्या 8 लाख 69 हजार रह गई है। मातृभूमि आरोग्य मासिका के पाठकों की संख्या में पहली तिमाही के मुताबिक कमी आई है। पहली तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 8 लाख 26 हजार थी वहीं अब घटकर 7 लाख 89 हजार रह गई है।
मातृभूमि तोझिल वार्ता के पाठकों की संख्या में दूसरी तिमाही में 47 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में जहां इसके पाठकों की संख्या 7 लाख 35 हजार थी वहीं अब यह 7 लाख 82 हजार हो गई है।
बलराम टॉप टेन भाषायी मैगजीन के बीच 8वें स्थान पर है और इसके पाठकों की संख्या पहली तिमाही में 7 लाख 87 हजार से घटकर 7 लाख 38 हजार रह गई है।
साप्ताहिक बर्तमान और आनंदा विकातन के पाठकों की संख्या में भी कमी आई है और इसकी एवरेज इश्यू रीडरशिप क्रमश: 7 लाख 20 हजार और 6 लाख 66 हजार है।
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