चुनाव आयोग के कहने के बाद भी यू-ट्यूब ने नहीं किया ये काम, अब हो रही चर्चा

देश में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए इन दिनों मतदान प्रक्रिया चल रही है

Last Modified:
Friday, 26 April, 2019
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देश में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए इन दिनों मतदान प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल तीन चरणों का मतदान हो चुका है, जबकि अन्य चरणों में होना बाकी है। इस बीच नेताओं के विवादित बोल भी लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि इस तरह के विवादित बयानों पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया हुआ है और कई नेताओं पर प्रचार के लिए प्रतिबंध तक लगा चुका है।

इसके बावजूद इस तरह के मामले रुक नहीं रहे हैं। खास बात यह है कि चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह के बयानों के अपने प्लेटफॉर्म से नहीं हटा रहे हैं। यहां बता दें कि चुनाव आयोग के आदेश के बावजूद ‘यू-ट्यूब’ ने अपने प्लेटफॉर्म से बिहार के अररिया से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व सांसद प्रदीप कुमार सिंह के बयान की ऑडियो क्लिप को अब तक नहीं हटाया है।

दरसअल, चुनाव आयोग ने गूगल को पत्र लिखकर कहा था कि प्रदीप कुमार सिंह का बयान दो संप्रदायों के बीच तनाव पैदा करने वाला है, इसलिए इस बयान को यू-ट्यूब से हटाया जाए। इस ऑडियो क्लिप में प्रदीप कुमार सिंह को एक कार्यकर्ता को ‘15 से 20 मोटरसाइकिल लेने’  का निर्देश देते हुए सुना गया है। फिर उन्हें यह कहते हुए सुना जाता है कि हिंदू धर्म को बचाना है और वे अररिया को दूसरा पाकिस्तान नहीं बनने दे सकते।

प्रदीप सिंह के ऑडियो को आप यहां पर सुन सकते हैं-

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इस विवाद में पत्रकार पर चढ़ा दी गाड़ी, मुश्किल से बची जान

घटना के दौरान अपने घर से कहीं जा रहे थे पीड़ित पत्रकार, आरोपित की तलाश में पुलिस कर रही छापेमारी

Last Modified:
Saturday, 12 October, 2019
Attack on Journalist

पत्रकारों पर आए दिन हो रहे हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे ही एक मामले में बिहार के बेगूसराय में कुछ बदमाशों ने एक पत्रकार को गाड़ी से कुचलकर उसकी जान लेने का प्रयास किया।

बताया जाता है कि एक दैनिक अखबार के पत्रकार अजय शास्त्री गुरुवार को अपने घर नीमा चांदपुरा से बेगूसराय आ रहे थे। इसी दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नीमा चांदपुरा रोड पर सामने से आ रही बोलेरो गाड़ी ने जानबूझकर उन्हें टक्कर मार दी।

गाड़ी की टक्कर लगने से अजय शास्त्री बुरी तरह से घायल हो गए और उनका एक पैर टूट गया। स्थानीय लोगों द्वारा आनन-फानन में अजय शास्त्री को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, पुलिस इस घटना को जमीन के विवाद से जुड़ा बता रही है।

पुलिस के अनुसार, अजय शास्त्री और उन्हीं के रिश्ते में लगने वाले चाचा मुसुक सिंह के बीच वर्षों से जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। इसे लेकर दोनों के बीच कई बार हाथापाई और तू तू, मैं मैं भी हो चुकी है।

गुरुवार को जब अजय शास्त्री अपने घर से आ रहे थे तो मुसुक सिंह ने उन्हें जान से मारने का प्रयास किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपित मुसुक सिंह की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। बता दें कि आरोपित द्वारा अजय शास्त्री पर पूर्व में भी जानलेवा हमला किया गया था।

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इस वजह से की गई थी पत्रकार की हत्या, जांच में हुआ खुलासा

वारदात के दौरान मोटरसाइकिल से रोजाना की तरह एक विद्यालय में पढ़ाने जा रहे थे पत्रकार, पुलिस ने एक आरोपित को किया गिरफ्तार

Last Modified:
Thursday, 10 October, 2019
Radhey Shyam Sharma

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बदमाशों द्वारा एक पत्रकार की गला रेतकर हत्या के मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नामजद दो आरोपितों में से एक को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दूसरे आरोपित की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है।  

बताया जाता है कि 55 वर्षीय राधे श्याम शर्मा गोरखपुर से पब्लिश होने वाले एक हिंदी अखबार में काम करते थे। राधे श्याम शर्मा हाटा क्षेत्र में गांव सिकटिया के टोला बनटोलवा के रहने वाले थे। वह अपने गांव के पास सोहसा पट्टी गौसी स्थित अंजुमन बालिका इंटर कालेज में पढ़ाते भी थे। गुरुवार की सुबह रोजाना की तरह करीब आठ बजे वह अपनी मोटरसाइकिल से पढ़ाने ही जा रहे थे।

इसी बीच दुबोली गांव के पास रास्ते में कुछ अज्ञात बदमाशों ने राधे श्याम शर्मा को रोक लिया और गला रेत दिया। शोर सुनकर अगल-बगल के खेतों में काम करने वाले लोग मौके पर पहुंचे, मगर तब तक बदमाश फरार हो गए।

पुलिस ने राधे श्याम शर्मा के बेटे अजय शर्मा की तहरीर पर गांव के ही तेज प्रताप सिंह और रामगोपाल सिंह के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में रामगोपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे आरोपित के घर से डाग स्क्वॉड की निशानदेही पर खून से सने कपड़े बरामद हुए हैं। जांच में हत्या की वजह राधेश्याम का अपने पड़ोसियों से लंबे समय से पारिवारिक एवं जमीनी रंजिश होना सामने आया है।

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पत्रकारिता में आ रहे बदलावों और नये माध्यमों की चुनौती पर इस कार्यक्रम में होगी चर्चा

स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में अगले महीने होगा तीन दिवसीय आयोजन, मुख्य सचिव ने किया कार्यक्रम के लोगो का विमोचन

Last Modified:
Thursday, 10 October, 2019
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स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में नवंबर में होने वाले ’भारतीय पत्रकारिता महोत्सव’ के लोगो का विमोचन ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने किया। 15, 16 एवं 17 नवंबर को होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देश भर के 150 से अधिक प्रख्यात पत्रकार और संपादक सम्मिलित होंगे।

इस वर्ष यह आयोजन पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहे बड़े बदलावों और नये माध्यमों की चुनौती पर केंद्रित होकर मुख्यरूप से ‘पारंपरिक मीडिया बनाम नया मीडिया‘ की थीम पर आधारित रहेगा। इस दौरान विचार-विमर्श के सत्रों के साथ कई विशिष्ट आयोजन भी होंगे।

इस अवसर पर स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, मनोज सिंह राजपूत, राजेश ज्वेल, राजेश राठौड़, गणेश एस.चौधरी, संजय रोकड़े, कमल कस्तूरी, आकाश चौकसे, रवि चावला, डॉ.अर्पण जैन, केके झा, नीलेश जैन, अंकित धुलधुए, अनिल चौधरी, गोपाल कोडवानी आदि उपस्थित थे।

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लेडी जर्नलिस्ट का पर्स छोड़ फोन ही क्यों हुआ चोरी

महिला प्रेस क्लब के अलावा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली पत्रकार ने सोशल मीडिया पर बयां की सारी घटना, दर्ज कराई ई-एफआईआर

Last Modified:
Thursday, 10 October, 2019
Journalist

मॉर्निंग वॉक के लिए निकली महिला पत्रकार की गाड़ी का शीशा तोड़कर मोबाइल फोन चुराने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि चोरों ने सिर्फ मोबाइल पर हाथ साफ किया, जबकि कार में बैग और अन्य सामान ज्यों का त्यों रखा था। 

एक दौर में ‘आजतक’ की स्क्रीन पर छाई रहने वालीं पत्रकार रविन्दर बावा दशहरे के दिन दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में मॉर्निंग वॉक के लिए गई थीं। गेट के पास अपनी कार पार्क करके वो अपना फोन और पर्स डैशबोर्ड पर छोड़ गई थीं। जब वो लौटीं तो उनकी कार का साइड विंडो ग्लास टूटा मिला और फोन गायब था, लेकिन पर्स और बाकी की चीजें वहीं रखी थीं। इसके बाद उन्होंने ई-एफआईआर की और इंदरपुरी थाने में भी गईं।

महिला प्रेस क्लब के अलावा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रविन्दर बावा ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया और उसमें दिल्ली पुलिस को भी टैग करते हुआ लिखा, ‘बुराई पर अच्छाई की जीत वाले दिन की यह कैसी शुरुआत है, जिसमें मॉर्निंग वॉक पर जाने के दौरान आपका मोबाइल चोरी हो जाता है। आसपास के लोगों ने बताया कि पूसा गेट के पास मॉर्निंग वॉक के लिए आने वालों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या दिल्ली में कोई सुरक्षित है?’

इस ट्वीट के बाद लोगों को लगा कि उनका फोन छीन लिया गया है तो उन्होंने दूसरा ट्वीट करके लोगों की गलतफहमी दूर की, 'मेरा फोन छीना नहीं गया है, बल्कि कार का शीशा तोड़कर डैशबोर्ड से चुराया गया है। नंबर अभी एक्टिवेट है, लेकिन फोन नहीं मिला है।‘

सवाल ये उठता है कि आखिर किसी को पैसे से ज्यादा फोन की जरूरत क्या थी, आमतौर पर जर्नलिस्ट के फोन में काफी बड़े-बड़े लोगों को कॉन्टेक्ट नंबर होते हैं, ये भी हो सकता है कि चोर को पर्स दिखा ही न हो और जल्दी में वो फोन उठाकर चल दिया हो।

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इंडियन एक्सप्रेस की 100 प्रभावशाली शख्सियतों की लिस्ट में शामिल हुए ये पूर्व संपादक

अखबार द्वार हर साल ऐसी सूची तैयार की जाती है, जिसमें विभिन्न मानदंडों के आधार पर देश की ताकतवर शख्सियतों को शामिल किया जाता है

Last Modified:
Thursday, 10 October, 2019
Indian Express

पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश नारायण सिंह को इंडियन एक्सप्रेस ने देश के 100 असरदार लोगों की सूची में शामिल किया है। अखबार द्वारा हर साल ऐसी सूची तैयार की जाती है, जिसमें विभिन्न मानदंडों के आधार पर देश की ताकतवर शख्सियतों को शामिल किया जाता है। पत्रकारिता में अपना लोहा मनवाने के बाद हरिवंश नारायण सिंह राजनीति में भी सफलता के नए आयाम स्थापित कर चुके हैं। वह जदयू सांसद हैं और फिलहाल राज्यसभा में उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सभापति की गैरमौजूदगी में जिस तरह वह सदन का कामकाज संभालते हैं, वह काबिले तारीफ है। इंडियन एक्सप्रेस ने भी उनकी इसी काबिलियत को प्रमुख आधार मानते हुए उन्हें 100 असरदार भारतीयों की सूची में शामिल किया है। इसके साथ ही अखबार ने चौथी दक्षिण एशिया स्पीकर समिट में हरिवंश नारायण सिंह के भाषण को उनका ‘पावर पंच’ बताया है। मालदीव में हुई इस समिट में हरिवंश नारायण ने पाकिस्तान के उपसभापति कासिम सूरी के कश्मीर को मुद्दा बनाने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस की सूची में हरिवंश नारायण सिंह 60वें स्थान पर हैं, जबकि पहले पर प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। हरिवंश नारायण को पहली बार इस सूची में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 1956 में जन्मे हरिवंश नारायण ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1977 में टाइम्स ऑफ इंडिया से की। अक्टूबर 1989 तक उन्होंने ‘रविवार’ पत्रिका में सहायक संपादक की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने फिर से टाइम्स ऑफ इंडिया का रुख किया और समूह की सबसे लोकप्रिय साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के साथ जुड़े। वह मुंबई से पत्रिका का कामकाज देखते थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया को अलविदा कहने के साथ ही हरिवंश नारायण ने कोलकता के आनंद बाजार पत्रिका समूह के साप्ताहिक ‘रविवार’ में नई पारी शुरू की। इसके अलावा 1990 से जनवरी 2017 तक वह प्रभात खबर के प्रधान संपादक भी रहे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल के दौरान हरिवंश नारायण सिंह ने 1990-91 में प्रधानमंत्री कार्यालय में सहायक सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के पद पर भी अपनी सेवाएं दी थीं।

पत्रकार होने के नाते हरिवंश नारायण सिंह को लिखने और पढ़ने का काफी शौक है। वह अब तक कई पुस्तकें लिख और संपादित कर चुके हैं। उनमें से कुछ हैं: झारखंडः समय और सवाल, झारखंडः सपने और यथार्थ, झारखंडः अस्मिता के आयाम, झारखंडः सुशासन अब भी संभावना है, जोहार झारखंड, संताल हूल, झारखंडः दिसुम मुक्तिगाथा और सृजन के सपने, बिहारनामा, बिहारःरास्ते की तलाश, बिहारः अस्मिता के आयाम, जनसरोकार की पत्रकारिता, शब्द संसार,  दिल से मैंने दुनिया देखी, चंद्रशेखर के विचार, चंद्रशेखर संवाद एक-उथल-पुथल और ध्रुवीकरण, चंद्रशेखर संवाद दो-रचनात्मक बेचैनी में, चंद्रशेखर संवाद तीन-एक दूसरे शिखर से, चंद्रशेखर के बारे में और मेरी जेल डायरीः चंद्रशेखर, ‘चंद्रशेखर : द लास्ट आइकन ऑफ आइडियोलॉजिकल पॉलिटिक्स’। 

समाचार4मीडिया की ओर से हरिवंश नारायण सिंह को इस नई उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई।

इंडियन एक्सप्रेस की इस पूरी लिस्ट के लिए आप IE100: The list of most powerful Indians in 2019 पर क्लिक कर सकते हैं।

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क्या इन इंटरव्यूज के चलते हुई रवि प्रकाश की गिरफ्तारी?

हैदराबाद पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोपों में टीवी9 के पूर्व सीईओ रवि प्रकाश को पांच अक्टूबर को उनके घर से किया है गिरफ्तार

Last Modified:
Thursday, 10 October, 2019
Ravi Prakash Journalist

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘टीवी9’ (TV9) के पूर्व सीईओ रवि प्रकाश की गिरफ्तारी का ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने विरोध किया है। सीपीजे का कहना है कि तेलंगाना सरकार को तेलुगू न्यूज वेबसाइट ‘Tolivelugu’ के फाउंडर रवि प्रकाश को तुरंत रिहा करना चाहिए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रवि प्रकाश को उनके काम के कारण किसी तरह से परेशान न किया जाए।

बता दें कि हैदराबाद पुलिस ने पांच अक्टूबर को रवि प्रकाश को उनके घर से गिरफ्तार किया था। रवि प्रकाश पर टीवी9 के सीईओ पद पर रहते हुए फ्रॉड करने का आरोप है। सीपीजे की वेबसाइट के अनुसार, ‘रवि प्रकाश के दो सहयोगियों का कहना है कि रवि प्रकाश की गिरफ्तारी इसलिए हुई है, क्योंकि उन्होंने अपने न्यूज पोर्टल से ऐसे दो इंटरव्यू को हटाने से इनकार कर दिया था, जिनमें तेलंगाना के चीफ मिनिस्टर और एक बड़े उद्योगपति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं।      

वॉशिंगटन डीसी में सीपीजे के एशिया प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर स्टीवन बटलर (Steven Butler) का कहना है, ‘रवि प्रकाश को अपने न्यूज पोर्टल पर की गई महत्वपूर्ण कवरेज के कारण बदले की कार्रवाई के तहत परेशान किया जा रहा है। तेलंगाना के अधिकारियों को रवि प्रकाश को तुरंत रिहा करना चाहिए।’

सीपीजे की वेबसाइट के अनुसार, ‘Tolivelugu’ के रिपोर्टर रघु गांजी (Raghu Ganji) ने बताया कि 30 सितंबर को इस न्यूज वेबसाइट ने अपने यूट्यूब चैनल पर दो इंटरव्यू चलाए थे। इनमें राज्य सरकार द्वारा संचालित ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के 50 हजार कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा उठाया गया था, जो वेतन वृद्धि की मांग करने के साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे।

इनमें से एक इंटरव्यू में ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता ई. अश्वथामा रेड्डी (E. Aswathama Reddy) ने मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उद्योगपति पीवी कृष्णा रेड्डी पर तमाम आरोप लगाए थे। वहीं, दूसरे इंटरव्यू में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लू भाटी विक्रमार्का ने भी एक प्रोजेक्ट में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उद्योगपति पीवी कृष्णा रेड्डी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों इंटरव्यू को वेबसाइट से हटाने के लिए दबाव डाला जा रहा था, लेकिन रवि प्रकाश ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसी का बदला लेने के लिए रवि प्रकाश के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

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जानें, इस पत्रकार की 'माचिस' किस तरह लगा रही नेताओं के मन में आग

करीब दो दशक तक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सेवाएं दे चुके ये पत्रकार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने तीखे कटाक्ष के लिए प्रसिद्ध हैं

Last Modified:
Wednesday, 09 October, 2019
Reporter

तेलंगाना की सियासत में आजकल एक पत्रकार का नाम काफी चर्चा में है। हालांकि, इसकी वजह पत्रकारिता नहीं, बल्कि सियासत ही है। दरअसल, 36 वर्षीय नवीन कुमार जिन्हें अब तीनमार मल्लाना (Teenmar Mallanna) के नाम से जाना जाता है हुजूरनगर के उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां उनका सामना सत्तारूढ़ टीआरएस के साथ-साथ विपक्षी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से हैं।

मल्लाना का चुनाव चिन्ह ‘माचिस’ है और इस माचिस ने फिलहाल नेताओं के मन में आग लगा रखी है। उन्हें कहीं न कहीं यह डर सता रहा है कि मल्लाना की लोकप्रियता उन्हें जीत का स्वाद चखा सकती है। करीब दो दशक तक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सेवाएं दे चुके नवीन कुमार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने तीखे कटाक्ष के लिए प्रसिद्ध हैं। 

मल्लाना ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से एमए (पॉलिटिकल साइंस) और मास्टर्स ऑफ कम्युनिकेशंस एंड जर्नलिज्म (MCJ) किया है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (JNTU) से एमबीए की पढ़ाई की है।

पत्रकारिता से राजनीति में आने के बारे में वह कहते हैं, ‘पिछले कुछ महीनों से मैंने अपने यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राज्य में अवैध रूप से भूमि हड़पने के कई मामलों को उजागर किया है। एक पत्रकार के रूप में यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं सत्ता के काले चेहरों को जनता के समक्ष प्रस्तुत करूं, उसके बाद आगे क्या करना है, यह सिविल सोसायटी और विपक्षी नेताओं पर निर्भर करता है। लेकिन दुर्भाग्यवश विपक्षी दल मुख्यरूप से कांग्रेस ने इसमें रुचि नहीं दिखाई और सिविल सोसायटी की भी अपनी कमजोरियां हैं। यह सब देखकर मुझे लगा कि मेरे लिए राजनीतिक संग्राम में कूदने का यह बिलकुल सही समय है।‘

मल्लान्ना ने कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये हैं। उनका कहना है, ‘मेरे पास कई दस्तावेज़ हैं, जिनसे पता चलता है कि सरकार के 76 विधायकों के साथ-साथ कुछ रसूखदार भ्रष्ट हैं। मैंने जनता के सामने अपनी बात रख दी है, अब वो क्या फैसला लेती है ये देखना है।’

पहले मल्लान्ना खबरों की तलाश में निकला करते थे और अब मतदाताओं से मिलने के लिए उनके बीच पहुंच रहे हैं। हुजूरनगर सीट पर उनका मुकाबला टीआरएस की सईदी रेड्डी और कांग्रेस की पद्मावती रेड्डी से है। चुनावी नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन फिलहाल तो सभी पार्टियों के नेताओं की बेचैनी की वजह सिर्फ और सिर्फ मल्लाना हैं।

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24 साल तक TV Today से जुड़े डॉ. पुनीत जैन ने अब लिया 'बड़ा' फैसला

करीब 24 साल पहले इंडिया टुडे समूह के साथ मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी शुरुआत, कुछ समय पूर्व ही समूह को अपने फैसले से करा दिया था अवगत

Last Modified:
Wednesday, 09 October, 2019
TV-Today-Network

टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) के ग्रुप चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर और ग्रुप चीफ लॉ एंड कंप्लायंस आफिसर डॉ. पुनीत जैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में ग्रुप की ओर से दी गई सूचना में बताया गया है, ‘डॉ.पुनीत जैन ने इंडिया टुडे ग्रुप को करीब 24 साल पहले मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में जॉइन किया था। ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ में अपनी दो दशक से ज्यादा की पारी के दौरान उन्होंने बैंकिंग, फाइनेंस, स्ट्रैटेजी और लीगल समेत कई विभागों में अपनी जिम्मेदारी को काफी बेहतर ढंग से निभाया। हमें यह कहते हुए गर्व है कि पुनीत हमारे टॉप लीडर्स में शामिल रहे और हम उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

ग्रुप की ओर से यह भी कहा गया है, ‘पुनीत जैन ने कुछ समय पूर्व ग्रुप को अपनी योजनाओं के बारे में बता दिया था, जिससे हमें उनके उत्तराधिकारी की तलाश करने का समय मिल गया।’ इसके साथ ही इंडिया टुडे ग्रुप में एमएन नसीर कबीर को ग्रुप जनरल काउंसल (Group General Counsel) के पद पर नियुक्त किया गया है। नसीर गुरुग्राम की लॉ फर्म (InCounsel Advocates) के फाउंडर भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने विभिन्न मामलों में अपने मुवक्किलों को सलाह देने वाली अधिवक्ताओं की टीम का नेतृत्व किया है।

इससे पहले नसीर ‘रिन्यू पावर वेंचर्स’ (Renew Power Ventures) में जनरल काउंसल, ‘Strides Arcolab’ में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (लीगल) और ‘एचटी मीडिया’ में डीजीएम (लीगल) के पद पर भी काम कर चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद उन्होंने अपना करियर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ बतौर जूनियर वकील शुरू किया था।

उन्होंने गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है। अपनी नई भूमिका में वह ग्रुप सीएफओ दिनेश भाटिया को रिपोर्ट करेंगे। ग्रुप की ओर से यह भी बताया गया है कि नसीर को सभी मामलों से अवगत कराने के लिए कुछ महीनों बाद पुनीत इंडिया टुडे ग्रुप को लीगल एडवाइजर के तौर पर सपोर्ट करेंगे।

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HT Media में हुई नए CEO (प्रिंट) की नियुक्ति

ब्रैंड सॉल्यूशंस और कैटेगरी टीम के साथ ही प्रिंट बिजनेस को सपोर्ट करने वाली फाइनेंस, एचआर और सप्लाई चेन से जुड़ी टीमें उन्हें रिपोर्ट करेंगी

Last Modified:
Wednesday, 09 October, 2019
HT Media

‘एचटी मीडिया’ (HT Media) ने समुद्र भट्टाचार्य (Samudra Bhattacharya) को चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (प्रिंट) के पद पर नियुक्त किया है। भट्टाचार्य प्रॉडक्ट/जियोग्राफी इनोवेशन (product/geography innovation) आदि पर काम करेंगे। वह एचटी मीडिया के एमडी और सीईओ प्रवीण सोमेश्वर को रिपोर्ट करेंगे।

ब्रैंड सॉल्यूशंस और कैटेगरी टीम के साथ ही प्रिंट बिजनेस को सपोर्ट करने वाली फाइनेंस, एचआर और सप्लाई चेन से जुड़ी टीमें भट्टाचार्य को रिपोर्ट करेंगी। हालांकि प्रिंट की मार्केटिंग टीम एचटी मीडिया के ग्रुप सीएमओ राजन भल्ला को रिपोर्ट करना जारी रखेगी।

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Food ब्लॉगर्स पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई!

यदि आप फ़ूड ब्लॉगर हैं, तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया ऐसे ब्लॉगर को चिन्हित करने जा रही है...

Last Modified:
Monday, 07 October, 2019
Food Blogger

यदि आप फ़ूड ब्लॉगर हैं, तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया ऐसे ब्लॉगर को चिन्हित करने जा रही है जो बिना सर्टिफिकेशन के रेस्टोरेंट आदि के बारे में अपने विचारों को शब्दों का रूप देते हैं। इंडस्ट्री का मानना है कि बिना पर्याप्त जानकारी के लिखने वाले नकारात्मक रूप से रेस्टोरेंट, इटिंग जॉइंट्स को प्रभावित करते हैं, इससे लोगों के बीच उनकी गलत छवि प्रस्तुत होती है, जिसका किसी न किसी रूप में उन्हें खामियाजा उठाना पड़ता है।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन साने अव्सर्म्मेल (sanee awsarmmel) के मुताबिक अकेले पुणे में ही 500 फ़ूड ब्लॉगर हैं, जिनमें से केवल 25 प्रतिशत ही वास्तविक रूप से काम करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि कोई इंजीनियर या आईटी प्रोफेशनल भोजन का आकलन कैसे कर सकता है? ये कुछ ऐसा हुआ जैसे मरीज का इलाज डॉक्टर के बजाये इंजीनियर से कराना। उन्होंने साफ़ किया कि इंडस्ट्री ब्लॉगरों के खिलाफ नहीं हैं बल्कि हमारी लड़ाई ऐसे लोगों के विरुद्ध जो अपने कौशल का दुरुपयोग करते हैं।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया ने ऐसे ब्लॉगरों की पहचान शुरू कर दी है, जो रेस्टोरेंट आदि के बारे में नकारात्मक समीक्षाएं लिख रहे हैं। यदि उनके द्वारा कहीं गईं बातें गलत साबित होती हैं तो फिर उनके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस बारे में उन्होंने कहा, “ऐसे ब्लॉगरों पर नज़र रखी जा रही है, जो रेस्टोरेंट जाते हैं और उसके बारे में रिव्यु लिखते हैं। जो ब्लॉगर रेस्टोरेंट्स को बदनाम करने का प्रयास करेंगे, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होगी।” उन्होंने बताया कि ‘असली ब्लॉगरों’ को आधिकारिक रूप से पहचानने के लिए उन्हें सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया ने एक अन्य सदस्य ने कहा कि ब्लॉगर अक्सर फ़ूड डिलीवरी प्लेटफार्म के बारे मं  सोशल मीडिया पर उल्टा-सीधा लिखते रहते हैं। इनमें से अधिकांश बातें सही नहीं होती, लेकिन लोग उन्हें सच समझ लेते हैं, जिसका खामियाजा संबंधित रेस्टोरेंट को उठाना पड़ता है। उनके मुताबिक, किसी भी डिश को तैयार करने में 2 से 3 घंटे लगते हैं, मगर एक गलत रिव्यु सबकुछ ख़राब कर देता है। फ़ूड रिव्यु लिखने के लिए भोजन से जुड़ी सामग्री का सामान्य ज्ञान ज़रूरी है। महज प्रेजेंटेशन के आधार पर यह नहीं बताया जा सकता कि खाना अच्छा है या बुरा। अब देखना यह है कि इंडस्ट्री के इस कदम पर ब्लॉगर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।

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