मीडिया के विरोध में सांसद ने लांघी शब्दों की मर्यादा, मचा हंगामा तो मांगी माफी

पत्रकारों को अपने काम के लिए क्या-क्या नहीं सहना पड़ता, इसके बावजूद कभी उन्हें किसी का समर्थक करार दिया जाता है तो किसी का विरोधी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 February, 2020
dmk

पत्रकारों को अपने काम के लिए क्या-क्या नहीं सहना पड़ता, इसके बावजूद कभी उन्हें किसी का समर्थक करार दिया जाता है तो किसी का विरोधी। कुछ लोग तो पत्रकारों की बुराई में शब्दों की मर्यादा को भी ताक पर रखने से पीछे नहीं हटते। डीएमके सांसद आरएस भारती भी उन्हीं लोगों में से एक हैं। भारती ने मीडिया हाउस और पत्रकारों की तुलना मुंबई के रेड लाइट एरिया से की है। हालांकि, मीडिया संगठनों के तीखे ऐतराज के बाद उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन उनके शब्दों में मीडिया के प्रति उनकी सोच झलकती है और उसे माफी से बदला नहीं जा सकता।

दरअसल, सांसद महोदय को लग रहा है कि तमिलनाडु मीडिया उनकी पार्टी के खिलाफ अभियान चला रहा है, ताकि विधानसभा चुनाव में उसे नुकसान पहुंचाया जा सके, इसलिए वह मीडिया से खासे नाराज चल रहे हैं। जब एक पार्टी कार्यक्रम में उन्हें बोलने का मौका मिला, तो मीडिया के खिलाफ मन की भड़ास को उन्होंने झट से निकाल दिया, लेकिन इस फेर में वह इतना ज्यादा बोल गए कि बाद में अपने शब्दों पर खेद जाताना पड़ा।

आरएस भारती ने आरोप लगाया कि पत्रकार तमिलनाडु में डीएमके के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। पार्टी पर मीडिया का हमला तब से तेज हो गया है, जबसे पार्टी ने अपने चुनावी अभियान के लिए प्रशांत किशोर को राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। अपनी बात को आगे ले जाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया हाउस का उद्देश्य सिर्फ पैसा है और वह मुंबई के रेड लाइट एरिया की तरह चल रहे हैं।

मीडिया पर अपनी इस टिप्पणी के बाद सांसद महोदय को चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जहां पत्रकारों ने उन्हें घेरा, वहीं चेन्नई प्रेस क्लब ने भी कड़ा विरोध दर्ज किया।

‘द न्यूज मिनट’ की पत्रकार मेघा कावेरी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘मुझे लगता है पत्रकार वोट बैंक नहीं होते, इसलिए उनके खिलाफी टिप्पणी के लिए कोई पछतावा न माफी नहीं।’

मामला बढ़ता देख डीएमके चीफ एम.के. स्टालिन मैदान में उतरे और उनके कहने पर आरएस भारती ने मीडिया से माफी मांग ली। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के संदर्भ में उनका बयान उचित था।

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मीडिया के खिलाफ जमीयत ने उठाया ये कदम, लगाया नफरत फैलाने का आरोप

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
sc

मीडिया जिस तरह से तब्लीगी जमात मामले को लेकर रिपोर्टिंग कर रहा है, उसे लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया है। उसने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराने पर मीडिया के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के इस संगठन ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। इस संगठन ने कहा कि इस मुद्दे को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मुसलमान कोरोना फैलाने की मुहिम चला रहे हैं। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मीडिया और सोशल मीडिया में झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील भी की है।

जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने दायर की गई याचिका में कहा कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं, जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।

संगठन ने याचिका में यह भी कहा है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में देश के एक बड़े समुदाय को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उसके आर्थिक बहिष्कार की बातें कही जा रही हैं। इससे न सिर्फ समाज में नफरत फैलेगी बल्कि कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई भी कमजोर पड़ेगी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देते हुए तुरंत सुनवाई करे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसमें तब्लीगी जमात में शामिल लोगों और मौलाना साद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में मौलाना साद के समर्थन में मौलाना अली कादरी सामने आए और उन्होंने न्यूज चैनल्स और उससे जुड़े पत्रकारों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी पत्रकार जमात के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे ऐसा करना बंद कर दे नहीं तो उनके रिपोर्टर्स का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने इस धमकी को संजीदगी से लिया और उनकी ओर से एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि  न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा  की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है।’  

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है।  

बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है।  इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन 5 गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। मालूम हो कि देशभर में अभी तक 4067 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।

   

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इस खुलासे के बाद न्यूज एंकर्स व रिपोर्टर्स को मिल रहीं धमकियां, NBA ने जताया विरोध

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने विभिन्न न्यूज चैनल्स में काम कर रहे एंकर्स और पत्रकारों के खिलाफ समाज के एक खास वर्ग के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका को उजागर किया गया है, तब से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

रजत शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

रजत शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने काफी उल्लेखनीय काम किया है और हमेशा सही, निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग की है। कोरोनावायरस जैसी महामारी को लेकर टीवी पर होने वाली डिबेट्स में भी समाज को सभी वर्गों को उचित व बराबर का प्रतिनिधित्व दिया गया है।’   

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है। पत्र में एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसे नेता सामने आएं और कोरोनावायरस को फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर अपना रुख साफ करें।

 

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार ने दी कोरोना को मात

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
kk-saxena

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। दूसरी बार किए गए कोरोना वायरस के टेस्ट में दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। दोनों ही भोपाल के एम्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां शुक्रवार रात उन्हें घर भेज दिया गया है।

बता दें कि पत्रकार की बेटी जब ब्रिटेन से लौटी थीं, तो वे संक्रमित थीं। 21 मार्च को किए गए टेस्ट में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और उन्हीं से यह वायरस उनके पत्रकार पिता में भी आया था। चार दिन बाद उनके 62 वर्षीय पिता भी कोरोना पॉजिटिव निकले थे।

पत्रकार की बेटी पोस्ट-ग्रेजुएट कानून की छात्रा हैं जो 18 मार्च को लंदन से भोपाल लौटी थीं। उन्हें होम-क्‍वारंटाइन रहने का आदेश दिया गया था, लेकिन उनके घर आने के दो दिन बाद ही पत्रकार कमलनाथ की अंतिम प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए चले गए। इसी के चलते प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के शामिल सभी पत्रकारों में दहशत फैल गई और सभी को क्‍वारंटाइन किया गया।

पत्रकार पर कोरोना वायरस महामारी से संबंधित सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के लिए मामला भी दर्ज किया गया है। श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में पत्रकार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो), धारा 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इस मामले में NDTV को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
NDTV

टैक्स से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है। इस मामले में एनडीटीवी पर वर्ष 2007में  अपने नॉन न्यूज बिजनेस के लिए विदेशी निवेश जुटाने के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने असेसमेंट को फिर से खोलने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह इजाजात देने से इनकार कर दिया है। वर्ष 2015 में  टैक्स अधिकारियों ने एनडीटीवी पर तथ्य छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था।

इसे लेकर एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद इस केस को लेकर सुनवाई चल रही थी। केस को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनडीटीवी के पक्ष में फैसला सुनाया और रेवेन्यू डिपार्टमेंट को केस दोबारा से खोलने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। 

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प्रसार भारती ने जारी की डीडी फ्रीडिश पर मौजूद चैनल्स की लिस्ट, लिया ये फैसला

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्ले‘टफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्‍लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के अनुसार, इस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुल 88 चैनल्स हैं। इनमें पब्लिक और प्राइवेट चैनल्स शामिल हैं।  

प्रसार भारती ने 28 फरवरी को हुई 44वीं ई-नीलामी के दौरान डीडी फ्रीडिश के MPEG-2 स्लॉट की बिक्री से 53 चैनलों के लिए 594.25 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

बता दें कि इस पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में एहतियाती कदम उठाए हुए हाल ही में MPEG-2 की ई-नीलामी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रसार भारती ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के लिए डीडी फ्रीडिश डीटीएच प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स को भरने के लिए निजी टीवी चैनल्स से आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 मार्च अपराह्न तीन बजे तक रखी गई थी।

इस बारे में प्रसार भारती के डायरेक्टर (डीटीएच) इंद्रजीत ग्रेवाल का कहना है, ‘कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए गए कई एहतियाती कदमों को ध्यान में रखते हुए टीवी चैनल्स से आवेदन पाने और आवंटन की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।’

 

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एडिटर्स गिल्ड ने सरकार की इस बात पर जताई हैरानी, यूं की मीडिया की वकालत

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयान पर काफी हैरानी जताई है

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था  ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) सरकार के उस बयान पर काफी क्षुब्ध है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले प्रवासी कामगारों के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया को भी दोषी ठहराया था।

इस बारे में अब गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कही गईं इस तरह की बातों से उसे व्याकुलता और हैरानी हुई है। इसके साथ ही गिल्ड का यह भी कहना है कि वर्तमान हालातों में अपने काम में मुस्तैदी से जुटी मीडिया को दोषी ठहराना केवल उसे कमजोर करना है। अभूतपूर्व संकट के दौरान मीडिया पर लगे इस तरह के आरोप देश के सामने खबरों के प्रसार की प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकते हैं। दुनिया में किसी भी देश में कोई भी लोकतंत्र अपने मीडिया का मुंह बंद करके इस महामारी के खिलाफ नहीं लड़ रहा है।

गिल्ड ने वेबसाइट ‘द वायर’ (The Wire) के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी संज्ञान में लिया है। गिल्ड का मानना ​​है कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस तरह के हस्तक्षेप मीडिया को उसके उद्देश्य को हासिल करने में बाधा पैदा करेंगे। गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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कोरोना संकट के बीच कई मैगजींस हुईं बंद, वहीं अरुण पुरी ने दिलाया ये भरोसा

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Aroon Purie

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना को लेकर फैली अफवाहों के चलते लोगों के दिलोदिमाग में यह बात घर कर गई है कि अखबार भी वायरस फैला सकता है। इस वजह से अखबारों के सर्कुलेशन में तो कमी आई ही है, साथ ही उन्हें मिलने वाले विज्ञापन भी घटे हैं।

अकेले मध्य प्रदेश में 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार मालिकों ने अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद कर दिया है। वहीं, मैगज़ीन भी इससे अछूती नहीं हैं। न्यूज़ीलैंड के विख्यात मैगज़ीन प्रकाशन ‘बाऊर मीडिया’ ने इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बाऊर मीडिया ‘द लिसनर, वुमन डे, न्यूजीलैंड वुमन वीकली, नॉर्थ एंड साउथ और नेक्स्ट’ नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। इस संबंध में कंपनी के मुख्य कार्यकारी ब्रेंडन हिल का कहना है कि COVID-19 से मुकाबले के लिए चल रहे लॉकडाउन से मैगजींस के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है और इससे व्यवसाय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गया है। लिहाजा, हमें मज़बूरी में प्रकाशन बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रिकाएं विज्ञापन पर निर्भर करती हैं और मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कब तक सब कुछ ठीक हो पाएगा।

बाऊर मीडिया ने अपनी मैगजींस के खरीदारों की तलाश करने के लिए व्यावसायिक सलाहकार फर्म EY को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस फैसले के बारे में कर्मचारियों को आज सुबह ही जानकारी दी है। हालांकि, ब्रेंडन हिल का कहना है कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिया जाएगा। बाऊर मीडिया के इस फैसले ने जहां मीडिया जगत को हिला दिया है, वहीं ‘इंडिया टुडे’ समूह के चेयरमैन अरुण पुरी की तरफ से मीडियाकर्मियों के लिए एक राहत देने वाला समाचार आया है। अरुण पुरी ने साफ किया है कि 'इंडिया टुडे' मैगजीन पहले की तरह ही प्रकाशित होती रहेगी और हम कोरोना वायरस को जीतने नहीं देंगे।

उन्होंने ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, ‘पिछले 44 सालों से 'इंडिया टुडे' का हर अंक समय पर आया है और हम COVID-19 को अपना रिकॉर्ड खराब करने नहीं देंगे। हम हर हफ्ते बेहतरीन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे।’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘इस हफ्ते की शुरुआत से हमने मैगजीन के ऑनलाइन और प्रिंट दोनों संस्करण प्रकाशित करने का फैसला लिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन पर हमारी विशेष कवरेज पढ़ने के लिए तैयार रहें। साथ ही हम कोरोना वायरस संकट पर रोजाना एक न्यूजलेटर भी प्रकाशित कर रहे हैं।’ 

 

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ABP न्यूज नेटवर्क ने जुल्फिया वारिस को अपनी इस नई इकाई का बनाया बिजनेस हेड

एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
zulfia

'एबीपी न्यूज नेटवर्क' (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क कंटेंट स्टूडियो’ (ABP News Network Content Studio) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। जुल्फिया की जिम्मेदारी कंपनी की नई सहायक इकाई  ‘एएनएन कंटेंट स्टूडियो’ (ANN Content Studio) के साथ-साथ सभी प्लेटफार्म्स के लिए कंटेंट प्रड्यूस करने की होगी।

जुल्फिया को मीडिया इंडस्ट्री में 20 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है। इससे पहले वे डिस्कवरी इंडिया (Discovery India) में प्रीमियम हेड और डिजिटल नेटवर्क की वीपी-प्रॉडक्ट हेड थीं। अपनी इस भूमिका में जुल्फिया डिस्कवरी इंडिया चैनल्स के लिए फैक्चुअल और लाइफ स्टाइल कैटेगरी में अपना योगदान देती थीं। उन्होंने इसके अलावा ‘टीवी18 इंडिया’ (TV18 India Ltd), ‘एमटीवी इंडिया’ (M.T.V India), ‘चैनल वी इंडिया’ (Channel V India), ‘स्टार टीवी नेटवर्क’ (Star TV Network) और जी एंटरटेनमेंट (Star TV Network) जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

जुल्फिया ने 1998 में सोफिया कॉलेज मुंबई से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद 1999 में सोफिया पॉलिटेक्निक मुंबई से सोशल कम्युनिकेशंस एंड मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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