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जयंती विशेष: पत्रकारिता में अतुलनीय रहेगा अतुल माहेश्वरी का योगदान

देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ के प्रबंध निदेशक और संपादक रहे अतुल माहेश्वरी की जयंती पर आज ‘समाचार4मीडिया’ ने उन्हें याद कर अपनी श्रद्धांजलि दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

यूं तो दुनिया में तमाम लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ विरले लोग ही ऐसे होते हैं, जो अपने जीते जी समाज के हित में ऐसे कार्य कर जाते हैं और समाज को ऐसी दिशा दिखा जाते हैं कि वे इस दुनिया में न रहते हुए भी तमाम लोगों की यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं और उन्हें प्रेरित करते रहते हैं। कुछ ऐसा ही नाम है अमर उजाला के नवोन्मेषक स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी का। देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ के प्रबंध निदेशक और संपादक रहे अतुल माहेश्वरी की जयंती पर आज ‘समाचार4मीडिया’ ने उन्हें याद कर अपनी श्रद्धांजलि दी है।

पत्रकारिता जगत में अतुल माहेश्वरी के अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अतुल माहेश्वरी करीब 37 वर्षों तक मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहे और ‘अमर उजाला’ पत्र समूह को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में उनका अहम योगदान रहा। उन्होंने ’अमर उजाला’ ग्रुप के संस्थापक और अपने पिता मुरारीलाल माहेश्वरी के मार्गदर्शन में इस क्षेत्र में कदम रखा और लगातार कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए।

अतुल महेश्वरी आज यदि जीवित होते तो 67 साल के होते, लेकिन तीन जनवरी 2011 का वह मनहूस दिन था, जब काल के क्रूर हाथों ने उन्हें हमसे छीन लिया। अतुल माहेश्वरी को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि इतने बड़े पद पर होने के बावजूद वह काफी सहज रहते थे। वह अपने आसपास मौजूद लोगों को अहसास ही नहीं होने देते थे कि वह इतने प्रतिष्ठित पत्र समूह के शीर्षस्थ लोगों में से हैं।

अतुल माहेश्वरी सामाजिक सरोकारों से जुड़े अत्यंत प्रखर व कर्मठ पत्रकार थे, जिनके लिए पत्रकारिता एक व्यवसाय नहीं बल्कि एक मिशन थी और इसमें वह आजीवन पूर्ण समर्पण के साथ जुटे रहे। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का काम किया और पत्रकारिता जगत में आदर्शों व मूल्यों की स्थापना के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। पत्रकारिता के क्षेत्र में स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी के अविस्मरणीय योगदान को मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। यही नहीं, स्व. अतुल माहेश्वरी की याद में मेरठ को दिल्ली से जोड़ने वाले एक सेतु का निर्माण भी कराया गया है। देहरादून के आराघर चौक का नाम भी उनके नाम पर अतुल माहेश्वरी चौक रखा गया है।

अतुल जी के नेतृत्व में हमेशा अमर उजाला ने जनहित के मुद्दों को जोर शोर से उठाया और समाज तथा राजनीति को भी आईना दिखाने का काम किया। यह सिलसिला आज भी उन्हीं की प्रेरणा से जारी है। आज मीडिया के बदलते दौर में भी अमर उजाला सशक्त रूप से जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए है। यह अतुल जी द्वारा दी गई दिशा का ही परिणाम है। यह कहना गलत नहीं होगा कि उनके असमायिक निधन से सचमुच पत्रकारिता को बहुत बड़ा धक्का लगा था, जिसकी क्षतिपूर्ति शायद ही हो सके।

माहेश्वरी ने नब्बे के दशक में हिंदी के पहले संपूर्ण आर्थिक दैनिक समाचार पत्र ‘कारोबार’ का प्रकाशन शुरू किया। उन्होंने सफल दैनिक टैब्लायड ‘अमर उजाला कॉम्पैक्ट’ का प्रकाशन शुरू करके नया पाठक वर्ग भी विकसित किया। वह मीडिया क्षेत्र से जुड़े कई संगठनों से संबद्ध थे और दुनियाभर में इस क्षेत्र में हो रहे बदलाव पर पैनी नजर रखते थे।

तीन मई 1956 को दिल्ली में जन्मे श्री माहेश्वरी की आरंभिक शिक्षा-दीक्षा मथुरा में हुई थी। उन्होंने बरेली से राजनीति विज्ञान में एमए किया था। पढ़ाई केसाथ-साथ पिता मुरारीलाल माहेश्वरी के कामकाज में हाथ बंटाते हुए उन्होंने पत्रकारिता के गुर सीखे। इसके बाद अमर उजाला के विस्तार की कल्पना को साकार करने वे 1986 में मेरठ चले गए। उन्होंने अमर उजाला के मेरठ संस्करण को संपूर्ण और आधुनिक अखबार बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया और अखबार को नई पहचान देने के साथ-साथ अपनी उद्यमशीलता का भी सिक्का मनवाया। न सिर्फ अखबार के प्रबंधन बल्कि संपादकीय की भी उन्हें गहरी समझ थी। मृदुभाषी और सौम्य स्वभाव के कारण वह मीडिया जगत में लोकप्रिय थे। अमर उजाला के हर कर्मचारी के लिए वे अभिभावक की तरह थे। कर्मचारियों के प्रति उनका व्यवहार आत्मीयता से भरा होता था। उनकी उदारता और सहृदयता का ही नतीजा था कि हर व्यक्ति सहजता से उनसे अपनी बात कह सकता था।

अतुल माहेश्वरी 2001 में अमर उजाला के प्रबंध निदेशक बने। उन्हें, अखबारी बिजनेस की समझ और प्रबंध कुशलता अपने पिता से ही हासिल हुई थी। यही वजह थी कि 1979 में पोस्ट ग्रेजुएट पूरा करने के बाद ही वे पूरी तरह से अखबार को समर्पित हो गए। मैनेजिंग डायरेक्टर चुने जाने के पहले वे सर्कुलेशन, मार्केटिंग और प्रॉडक्शन जैसे विभागों का भी नेतृत्व कर चुके थे। वह अमर उजाला के प्रबंध निदेशक होने के साथ-साथ इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी में उप्र. शाखा के चेयरमैन होने और आईआरएस, सीआईआई जैसी संस्थाओं के सदस्य भी रहे थे। एक मीडिया विशेषज्ञ के तौर पर अतुल माहेश्वरी जर्मनी, ब्रिटेन और रूस सहित कई देशों में मीडिया सेमिनार में भाग ले चुके थे।

सही मायनों में अतुल माहेश्वरी अखबार के मालिक नहीं, पत्रकार थे। उन्हें, खबरों की जो समझ थी या कहें खबरों की जो पकड़ थी वह शायद ही किसी मीडिया घराने के मालिक को हो। वे ‘अमर उजाला’ परिवार के सभी सदस्यों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। उनका व्यवहार एक एमडी की तरह नही, बल्कि एक पत्रकार की तरह था।


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