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ब्रॉडकास्ट पॉलिसी पर जल्द ही कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा TRAI: अनिल कुमार लाहोटी
‘फिक्की फ्रेम्स’ के 24वें एडिशन में ‘ट्राई चेयरमैन‘ का कहना था कि नियामक ने फोकस एरिया की पहचान करने के लिए पूर्व बातचीत की प्रक्रिया पूरी कर ली है और इस पर विस्तृत परामर्श पत्र तैयार है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी का कहना है कि प्रसारण नीति (Broadcast Policy) पर जल्द ही परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी किया जाएगा। ‘फिक्की फ्रेम्स’ के 24वें एडिशन में ‘टाटा प्ले’ के सीईओ हरित नागपाल के साथ बातचीत में ‘ट्राई‘ चेयरमैन का कहना था कि नियामक ने फोकस एरिया की पहचान करने के लिए पूर्व बातचीत की प्रक्रिया पूरी कर ली है और एक विस्तृत परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) लगभग तैयार है, जिसे कुछ दिनों में जारी कर दिया जाएगा।
प्रसारण नीति के बारे में लाहोटी का कहना था कि पहला फोकस स्थानीय कंटेंट के प्रॉडक्शन को प्रोत्साहित करना है। ब्रॉडकास्ट पॉलिसी में एक अन्य फोकस एरिया स्थलीय प्रसारण के दायरे का विस्तार और दर्शकों को मापने की प्रणाली के नमूना आकार (सैंपल साइज) को बढ़ाना होगा। इस सिस्टम को बहुत समय पहले तैयार किया गया था और वर्तमान में यह अपेक्षाकृत छोटे सैंपल साइज का इस्तेमाल करती है।
टेक्नोलॉजी की प्रगति के साथ अब हमारे पास अधिक वैज्ञानिक डेटा प्राप्त करने के लिए निकाय और ऑडियंस मेट्रिक्स की समीक्षा करने का विकल्प है। एडवर्टाइजर्स और ब्रॉडकास्टर्स इसका इस्तेमाल अपने द्वारा तैयार और दिखाए जाने वाले कंटेंट से उचित रूप से मुद्रीकरण करने के लिए कर सकते हैं। वर्तमान दौर में हम सतत विकास पर भी चर्चा करेंगे। ये हमारे प्राथमिक जोर वाले क्षेत्र हैं और हम जल्द ही उन पर गहन परामर्श करेंगे।
लाहोटी के अनुसार, ‘ट्राई की योजना देश को कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट पब्लिशिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र (global hub) बनाने की है। हमें पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग को और मजबूत करने की भी आवश्यकता है। भारत जैसे देश के लिए सूचना, ज्ञान, शिक्षा और मनोरंजन के प्रसार के लिए एक बहुत मजबूत पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का होना बहुत महत्वपूर्ण है।’
इस मौके पर लाहोटी का यह भी कहना था कि ट्राई इस बात पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है कि मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर के सभी क्षेत्रों में कैसे विकास किया जाए। नियामक विनियामक माहौल और नीतिगत माहौल को और अधिक व्यापार अनुकूल बनाने व व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने पर भी काम करेगा, ताकि इस सेक्टर का और विकास किया जा सके।
लाहोटी के अनुसार, ‘इसके अलावा एक अन्य मुद्दा पायरेसी से निपटना है। पायरेसी बड़ी चिंता का विषय है और कॉपीराइट की रक्षा की जानी चाहिए।’ एक अन्य सवाल के जवाब में लाहोटी का कहना था कि हितधारकों (stakeholders) के पास अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्ट्रैटेजी होती हैं, जो विवादों और अंततः मुकदमेबाजी को जन्म देती हैं।
नियामक के रूप में हमारा काम इन विवादों और मुकदमों को कम करना है और हम हमेशा हितधारकों से बात करने और उन्हें एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने में मदद करने का प्रयास करते हैं। हम किसी एक हितधारक के हित के बजाय पूरी इंडस्ट्री के हित के लिए काम करते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री को यह समझना चाहिए कि अब ओटीटी जैसी प्रतिस्पर्धी टेक्नोलॉजी मौजूद हैं। एक-दूसरे से लड़ने के बजाय इंडस्ट्री को इस बात पर विचार करना चाहिए कि अन्य टेक्नोलॉजी के साथ प्रतिस्पर्धा कैसे की जाए। ट्राई चेयरमैन का यह भी कहना था, 'मेरा मानना है कि इंडस्ट्री को आपस में संवाद करने, सहयोग करने और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने की जरूरत है। ऐसे में वे निश्चित रूप से अन्य टेक्नोलॉजी के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतर तालमेल बना सकते हैं।'
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