बिहार में 'दैनिक जागरण' में टॉप लेवल पर हुआ ये उलटफेर

करीब छह महीने पहले अखबार में बड़े पैमाने पर हुए थे संपादकों के तबादले

पंकज शर्मा by
Published - Tuesday, 09 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 09 July, 2019
Dainik Jagran

हिन्दी के प्रमुख अखबार ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) अखबार से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, प्रबंधन ने बिहार में तीन संपादकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत मुजफ्फरपुर के समाचार संपादक देवेंद्र राय को अब यहां से स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्हें गया यूनिट का समाचार संपादक बनाया गया है।

भागलपुर में समाचार संपादक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे संयम कुमार को अब मुजफ्फरपुर के समाचार संपादक का प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा गया के समाचार संपादक अश्विनी कुमार सिंह का तबादला इसी पद पर भागलपुर कर दिया गया है। गौरतलब है कि दैनिक जागरण में करीब छह महीने पहले बड़े पैमाने पर संपादकों के तबादले हुए थे।

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जानें, क्यों मीडिया पर भड़के कपिल सिब्बल, फिर दी चेतावनी

‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
Kapil Sibal

‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हिंसा फैलाने के लिए पीपुल फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा फंडिंग की गई थी। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और वकील इंदिरा जयसिंह को भी बड़ा भुगतान किया गया। हालांकि, दोनों ही इसे अपने खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं।

पैसे लेने के आरोपों का खंडन करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोपों में सच्चाई नहीं है और यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। इस मामले में कपिल सिब्बल ने मीडिया को भी आड़े हाथ लिया है। उन्होंने मीडिया को अच्छे से होमवर्क करने की नसीहत दी है। सिब्बल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन समाचार माध्यमों ने इस बारे में उनका नाम लेते हुए स्टोरी की है, अगर उन समाचार माध्यमों ने स्टोरी को नहीं हटाया गया तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 73 बैंक खातों में 120 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा की गई थी, जिनका इस्तेमाल सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन में हुआ था। अपनी सफाई में कपिल सिब्बल का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हदिया केस लड़ा था, लेकिन उसके लिए उन्हें मार्च 2018 में ही भुगतान किया जा चुका था। सिब्बल के अनुसार, उन्हें पीएफआई से मार्च 2018 में पैसे मिले थे, तब सीएए आया ही नहीं था।

इसके अलावा इंदिरा जयसिंह ने भी इनकार किया है कि उन्हें एंटी-सीएए विरोध या किसी अन्य कारण से पीएफआई से पैसा मिला था। वहीं पीएफआई का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में उसका एक भी विंग नहीं है। पीएफआई के महासचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने ईडी की जांच को पूरी तरह से आधारहीन बताया है।

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इस खास रिपोर्टिंग के लिए एक साथ आए दो न्यूज चैनल्स के संपादक

संभवतः यह पहली बार है, जब दो न्यूज चैनलों ने टीआरपी में एक-दूसरे को पछाड़ने की दौड़ से अलग हटकर संयुक्त रूप से किसी मुद्दे पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
Reporting

शाहीनबाग पर जहां नेताओं में ‘जुबानी जंग’ चल रही है, वहीं मीडिया के लिए भी यह ‘हॉट’ मुद्दा बन गया है। खासकर वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद से यह इलाका मीडिया सेंटर में तब्दील हो चुका है। तमाम पत्रकार यहां डेरा डाले हुए हैं। इस बीच, ‘जी न्यूज़’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने दीपक चौरसिया के साथ मिलकर जिस तरह से शाहीनबाग में चल रहे विरोध-प्रदर्शन का ‘सच’ तलाशने का प्रयास किया है, उससे यह मुद्दा और भी ज्यादा बड़ा हो गया है।

संभवतः यह पहली बार है, जब दो न्यूज चैनलों ने टीआरपी में एक-दूसरे को पछाड़ने की दौड़ से अलग हटकर संयुक्त रूप से किसी मुद्दे पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इस संयुक्त मिशन की घोषणा के बाद से काफी समय तक सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते रहे। सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से मिलकर बात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। जितनी देर दोनों पत्रकार वहां रहे, उतनी देर तक गो-बैक, गो-बैक के नारे लगते रहे। दोनों ने बार-बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, मगर सफल नहीं हुए।

शाहीनबाग में जहां महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं, वहां से कुछ पहले ही बैरिकेड लगा दिए गए, ताकि सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया धरना स्थल तक न पहुंच सकें। दोनों को दूर से ही अपनी बात महिलाओं तक पहुंचानी पड़ी, लेकिन कोई उन्हें सुनने को तैयार नहीं था। चौधरी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके इस मसले पर अपना गुस्सा बयां किया है।

उन्होंने लिखा है, ‘आज जब मैं और दीपक शाहीनबाग पहुंचे तो कश्मीर की तर्ज पर Go Back के नारे लगने लगे। पल भर को लगा जैसे हम किसी दूसरे देश में आ गए हैं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि हमें वहां घुसने की इजाजत नहीं है। शाहीन बाग में जाने के लिए अब अलग वीजा लेना होगा? क्या शाहीन बाग में खत्म हो जाती है भारत की सीमा? कश्मीर की तरह यहां Go Back के नारे लग रहे हैं। इतनी असहनशीलता’?

वहीं, दीपक चौरसिया ने लिखा है, ‘टेलिविजन इतिहास में पहली बार दो बड़े टेलिविजन चैनल शाहीन बाग में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चल रहे आंदोलन को देखने गए! लेकिन वहां का नजारा न तो लोकतांत्रिक था और न ही संवैधानिक’!

सुधीर चौधरी ने जहां अपने शो ‘DNA’ में संयुक्त मिशन के जरिये शाहीनबाग के हाल को दर्शकों के समक्ष रखा। वहीं, ‘न्यूज़ नेशन’ ने स्पेशल शो में यह मुद्दा उठाया। इस शो में दीपक चौरसिया के साथ सुधीर चौधरी भी उपस्थित रहे। दोनों पत्रकारों के इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है।

उधर, इस महाकवरेज के बीच दीपक चौरसिया अपने विरोधियों पर निशाना भी साध रहे हैं। दरअसल, शाहीनबाग में हुए हमले के बाद से कुछ पत्रकार दीपक चौरसिया की पत्रकारिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर पत्रकार भी एक तरह से दो खेमों में विभाजित हैं। एक खेमा दीपक के समर्थन में है और दूसरा विरोध में। इसी क्रम में पत्रकार श्रीनिवास जैन के एक ट्वीट पर सहमति जताते हुए रोहिणी सिंह ने चौरसिया पर तंज कसा था। उन्होंने लिखा था, ‘बेशक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर हमले को सही करार नहीं दिया जा सकता। और चूंकि उन पर हमला हुआ है, इसलिए वह पत्रकार नहीं हो जाते। शिष्टाचार का दायित्व चौरसिया और उनके हमलावर दोनों को उठाना होगा।’

अब दीपक ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है, ‘रोहिणी मैं एक गरीब पृष्ठभूमि से आकर अपने दम पर पत्रकारिता की। मेरा कसूर सिर्फ इतना है कि मैं आप की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हूं! मेरा वित्त मंत्रालय में परिचय नीरा राडिया ने नहीं कराया! न ही मैंने आजतक किसी सरकार से 3BHK फ़्लैट लेकर खबरें लिखी है’! 

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दोस्त के कुत्ते ने दिखाई 'वफादारी', संपादक के घर हुए हमले को यूं किया नाकाम

चेन्नई की तमिल मैगजीन ‘तुगलक’ के संपादक एस. गुरुमूर्ति के घर रविवार को बाइक सवार 8 लोगों ने पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश की गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
gurumurthi

चेन्नई की तमिल मैगजीन ‘तुगलक’ (Tughlaq) के संपादक एस. गुरुमूर्ति के घर रविवार को बाइक सवार 8 लोगों ने पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश की गई। हालांकि, कुत्ते के भौंकने और सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता की वजह से हमलावर अपनी मंशा में सफल नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने अब थंथई पेरियार द्रविड़ कषगम (टीपीडीके) के आठ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

पुलिस आयुक्त ए.के. विश्वनाथन ने सोमवार को बताया कि हमले की कोशिश रविवार की सुबह तीन बजे हुई। घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आईसीएफ के जर्नाधन और रॉयपेट्टा के शशिकुमार, बालू, तमीष, प्रशांत, शक्ति, दीपन और वासुदेवन को गिरफ्तार किया गया है। शशिकुमार पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर वूडलैंड्स होटल और सत्यम थिएटर पर पेट्रोल बम फेंकने के भी आरोप हैं।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस रविवार को ही जांच शुरू कर दी थी लेकिन गणतंत्र दिवस की वजह से मीडिया में इसके बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया गया। तमिल पत्रिका ‘तुगलक’ ने तर्कवादी नेता ईवी रामास्वामी पेरियार (EV Ramaswami Periyar) के नेतृत्व वाली 1971 की रैली से जुड़ी कुछ तस्वीरें दोबारा प्रकाशित की थी., जिसके कुछ दिनों बाद चार मोटरसाइकिलों पर सवार आठ लोग रविवार को तड़के तीन बजे गुरुमूर्ति के घर के बाहर पहुंचे और उनके घर पर पेट्रोल बम से हमला करने की कोशिश की। 

जांच के तहत जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाला तो देखा कि आठ लोग चार बाइक पर सवार होकर गुरुमूर्ति के आवास के पास आए। उनमें से एक के पास संदिग्ध बैग भी था। उसके बाद आरोपी गुरुमूर्ति के घर के परिसर में बॉटल फेकने की कोशिश की। इसी दौरान गुरुमूर्ति के घर पर मौजूद कुत्ता भौंकने लगा। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने जब उनका पीछा किया तो हमलावर वहां से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस आयुक्त समेत अन्य उच्च पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया और सीसीटीवी के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई है।

वहीं, गुरुमूर्ति ने हमले के बारे में जानकारी साझा करते हुए ट्वीट किया, 'मेरे परिवार की जीवनशैली कुत्ता रखने की अनुमति नहीं देती, लेकिन मेरे पुराने दोस्त अपने एक कुत्ते को रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक मेरे घर पर पहरेदारी के लिए भेज देते हैं। यह सिलसिला पिछले पांच वर्षो से चल रहा है।'

गुरुमूर्ति ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी उन्हें सलाह दे चुके हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। खुफिया विभाग के एक अधिकारी अकसर उनके घर आते हैं और सतर्क करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मारने की यह पहली कोशिश नहीं है, बल्कि यह सिलसिला तो 30 वर्षो से चल रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में भी गुरुमूर्ति के आवास पर ऐसी ही घटना हुई थी।

 

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विवादित ट्वीट के बाद बड़े अखबार ने महिला पत्रकार के खिलाफ लिया कड़ा एक्शन

विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
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बास्केटबॉल स्टार अमेरिका के कोबे ब्रायंट की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में रविवार को मौत हो गई, जिसके बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है। लेकिन इस बीच उनके निधन पर विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।   

दरअसल, अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) ने अपनी पत्रकार फेलिसिया सोमेज (Felicia Sonmez) के खिलाफ यह फैसला लिया है। कोबे ब्रायंट के निधन के बाद विवादित ट्वीट पर संस्थान ने पत्रकार को निलंबित कर दिया है।

फेलिसिया सोमेज ने 2016 की ‘डेली बीस्ट’ (Daily Beast) की एक रिपोर्ट के शीर्षक (Kobe Bryant's Disturbing Rape Case: The DNA Evidence, the Accuser's Story, and the Half-Confession) को अपनी पोस्ट में डालते हुए विवादित टिप्पणी की। दरअसल 2016 में एक दुष्कर्म मामले में कोबे का नाम आया था।

हालांकि आलोचनाओं के बाद पत्रकार फेलिसिया सोमेज को यह ट्वीट हटाना पड़ा। उन्होंने एक मीडिया वेबसाइट को बताया कि 10 हजार से ज्यादा लोगों ने उनकी पोस्ट पर आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्हें गलियों भरे मेल भेजे गए और जान मारने की धमकी भी दी गई।

वहीं दूसरी तरफ, वॉशिंगटन पोस्ट को भी पत्रकार फेलिसिया सोमेज को निलंबित करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वॉशिंगटन पोस्ट की मैनेजिंग एडिटर ट्रेसी ग्रांट को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि फेलिसिया सोमेज को जांच हो पूरी हो जाने तक फिलहाल छुट्टी पर भेजा गया है और ये पता लगाया जा रहा है कि क्या उनके ट्वीट ‘न्यूजरूम की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन’ तो नहीं है।

फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स दो ग्रुप्स में बंटे नजर आ रहे हैं। एक ग्रुप का मानना है कि फेलिसिया सोमेज न केवल निलंबित किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्थान से निकाल दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोग वॉशिंगटन पोस्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना ​​है कि यह कदम एक खतरनाक नज़ीर पेश करता है।

गौरतलब है कि रविवार को हेलिकॉप्टर हादसे में कोबे ब्रायंट और उनकी बेटी गियाना मारिया (13) समेत कुल नौ लोगों की मौत हो गई थी। कोबे अपने निजी हेलिकॉप्टर में थे। इस दुखद घटना के कुछ घंटों बाद ही फेलिसिया ने यह ट्वीट किया था।

 

 

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जानिए, क्यों दीपक चौरसिया को लेकर दो खेमों में बंटे पत्रकार

आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
deepak

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर दिल्ली के शाहीनबाग में हुए हमले को भले ही दो दिन गुजर चुके हों, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अभी भी गर्माया हुआ है। कुछ पत्रकारों ने जहां इस घटना की निंदा की है, वहीं कुछ इसके लिए दीपक चौरसिया को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं। दरअसल, चौरसिया को ऐसे पत्रकार के रूप में देखा जाता है जो मोदी सरकार की नीतियों पर प्रहार नहीं करते, इसलिए जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में उन्हें निशाना बनाया गया, तो कई लोगों ने इसे साजिश की तरह से देखा, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर पत्रकार भी पक्ष-विपक्ष की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

‘इंडिया टुडे’ समूह के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने दीपक चौरसिया पर सवाल खड़े करने के लिए ‘द वायर’ की आरफा खानम शेरवानी को आड़े हाथों लिया है। आरफा ने शाहीनबाग की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा था, ‘दीपक चौरसिया के साथ जो कुछ हुआ वह निंदनीय है, लेकिन यह पत्रकार या पत्रकारिता पर हमला नहीं है। सरकार के समक्ष नतमस्तक हो जाना पत्रकारिता नहीं होती। उत्पीड़ित समुदायों का गलत चित्रण पत्रकारिता नहीं कहलाती। एक पत्रकार के विशेषाधिकारों का दावा न करें, क्योंकि आप पत्रकार नहीं हैं’।

इसके जवाब में राहुल ने कहा, ‘बकवास तर्क। दीपक चौरसिया जैसी चाहें, वैसी पत्रकारिता रखने का अधिकार रखते हैं। यदि आपको पसंद नहीं तो न देखें। लेकिन एक पत्रकार पर सिर्फ इसलिए हमला करना क्योंकि आप उसकी बात को पसंद नहीं करते, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की असहिष्णुता को दर्शाता है’।    

     

इसी तरह महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले ने जहां घटना के लिए चौरसिया को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं ‘डीडी न्यूज’ के एंकर अशोक श्रीवास्तव उनके पक्ष में उतर आये हैं। उन्होंने वाघले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है ‘दीपक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि वह शाहीनबाग किसी खास मिशन पर गए थे या नहीं’।

अशोक श्रीवास्तव ने इसे लेकर वाघले पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है ‘ये आदमी खुद को पत्रकार कहता है। आजकल सर्टिफिकेट बांट रहा है कि कौन पत्रकार है, कौन नहीं। मुझे इसने ब्लॉक कर दिया है, आप लोग पूछ लें कि कब सड़क पर नंगे होकर दौड़ लगाएंगे ये। 2019 के चुनावों से पहले इसने ट्वीट किया था कि मोदी जीते तो नंगा होकर सड़क पर दौडूंगा’।

इसके साथ ही श्रीवास्तव ने ‘द प्रिंट’ की पत्रकार जानिब सिकंदर को भी निशाना बनाते हुए लिखा है ‘ये @print से जुड़ीं पत्रकार हैं, जिसके आका @ShekharGupta हैं। इन्हें लगता है कि #ShaheenBagh में पत्रकारों की जो पिटाई "polite" तरीके से हुई। ये वो जमात है जो चाहती है कि इनके पक्ष में जो न बोले उसे लिंच कर दो, मार दो। ये बाबरी मानसिकता वाले पत्रकार हैं’। कई अन्य पत्रकार भी इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच प्रदर्शित करते सोशल मीडिया पर नजर आ रहे हैं।

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पद्म पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट में इन वरिष्ठ पत्रकारों ने भी बनाई अपनी जगह

हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की घोषणा

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Padma awards

पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है। देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ के लिए चुने गए दिग्गजों की लिस्ट में तीन पत्रकारों का नाम भी शामिल है। इसके तहत कर्नाटक में मैसूर से निकलने वाले संस्कृत के एकमात्र अखबार ‘सुधर्मा’ (Sudharma) के संपादक-प्रकाशक केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी के अलावा मिजोरम के वरिष्ठ पत्रकार लालबियाक्थंगा पचुआऊ को इस सम्मान के लिए चुना गया है। केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी को संयुक्त रूप से इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 

संस्कृत के विद्वान पंडित वरदराज आयंगर (Pandit Varadaraja Iyengar) ने संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए 15 जुलाई 1970 को सुधर्मा की शुरुआत की थी। अब उनके पुत्र केवी संपत कुमार और उनकी पत्नी जयलक्ष्मी इस अखबार को बचाए रखने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। A-3 आकार में छपने वाले इस अखबार के करीब 3000 सबस्क्राइबर्स हैं, जिनमें से अधिकांशतः विभिन्न संस्थान अथवा लाइब्रेरी हैं, जिन्हें यह अखबार डाक के द्वारा भेजा जाता है। इस अखबार के ई-वर्जन के करीब एक लाख पाठक हैं।

इन दोनों के अलावा, मिजोरम के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने गणतंत्र दिवस पर रविवार को अपने भाषण में कहा कि केंद्र द्वारा पद्मश्री पुरस्कार के लिए शनिवार को घोषित लोगों में पचुआऊ का नाम भी शामिल है। 94 वर्षीय पचुयाऊ ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1953 में छोटे से अखबार जोराम थुपुआन से की थी। वह 1970 से स्थानीय दैनिक अखबार ‘जोराम त्लांगाऊ’ के संपादक हैं। मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) में पचुआऊ तीन बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बता दें कि मिजोरम सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग तथा मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) ने अक्टूबर 2016 में पचुआऊ को ‘देश में सबसे उम्रदराज श्रमजीवी पत्रकार’ घोषित किया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पचुआऊ 1945 में सेना में शामिल होकर कई सैन्य पुरस्कार भी जीत चुके हैं। यही नहीं, 1980 के दशक में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और केंद्र के बीच शांति वार्ता में पचुआऊ अहम प्रतिनिधि थे।

बता दें कि इस साल सात प्रमुख हस्तियों को पद्म विभूषण, 16 शख्सियतों को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म अवॉर्ड के विजेताओं की लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं। 

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मंत्री ने सरकारी कार्यक्रम से काटा वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा का नाम, फिर बोले ये बात

गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Faye D'souza

शॉर्ट विडियो सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ हाल ही में अपनी नई पारी शुरू करने वाली वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है। खबरों की मानें तो पत्रकार का प्रोफाइल और स्टैंड देखकर उनका नाम स्पीकर की सूची से हटाया गया है, क्योंकि वे  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करती रही हैं।

इस मामले में गोवा के कला और संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने सफाई भी दी है। उन्होंने कहा, ‘यह सरकार का कार्यक्रम है और आयोजक इसमें किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहते थे इसीलिए यह फैसला लिया गया है।’

बता दें कि 27 से 30 जनवरी को पणजी की कला अकादमी में आयोजित किए गए गोवा सरकार के प्रोग्राम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में उन्हें बतौर वक्ता बुलाया गया था। डिसूजा को इस कार्यक्रम में 29 जनवरी को भाषण देना था। यह प्रोग्राम कला और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित किया गया है।

संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने कहा कि उनका (फाये डिसूजा) का नाम शॉर्टलिस्ट था, लेकिन पता चला कि वह संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ बोलने वाली हैं। उन्होंने आगे कहा कि समझने की कोशिश कीजिए। यह कोई छोटा या निजी इवेंट नहीं है। यह सरकारी कार्यक्रम है और हम नहीं चाहते कि इसमें कोई विवाद हो, इसीलिए स्पीकर के तौर पर उनका नाम हटाने का फैसला किया गया।

वहीं समारोह से डिसूजा का नाम हटाने के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिलने की बात का उन्होंने खंडन किया है। गावडे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हमेशा कहा है कि वे सीएए पर किसी भी तरह की बहस करने को तैयार हैं। इसलिए उनकी तरफ से कोई निर्देश आने का सवाल ही नहीं उठता।

दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां सरकार के इस कदम की आलोचना कर रही है और इसे असंवैधानिक बता रही हैं।

 

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स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर TRAI ने फिर बढ़ाई यह तारीख

ट्राई द्वारा 27 नवंबर को Transparency in Publishing of Tariff Offers पर कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने ‘Transparency in Publishing of Tariff Offers’ पर कंसल्टेशन पेपर (परामर्श पत्र) के लिए लिखित रूप से अपने कमेंट्स जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर सात फरवरी 2020 कर दी है।

दरअसल, स्टेकहोल्डर्स ने कंसल्टेशन पेपर पर अपने कमेंट्स भेजने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी,जिस पर ट्राई ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर सात फरवरी करने का निर्णय लिया है। वहीं, इन कमेंट्स पर जवाबी कमेंट्स जमा करने की तारीख 21 फरवरी 2020 रखी गई है।

बता दें कि ट्राई द्वारा 27 नवंबर को कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी, जबकि 9 जनवरी 2020 तक इनके जवाबी कमेंट्स दाखिल किए जा सकते थे।  

बाद में स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर कमेंट्स जमा करने के लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 23 जनवरी 2020 और इन कमेंट्स के जवाबी कमेंट्स के लिए यह तारीख छह फरवरी कर दी गई थी।

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दीपक चौरसिया के समर्थन में उतरे वरिष्ठ पत्रकार, यूं साधा हमलावरों पर ‘निशाना’

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरना प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया व उनकी टीम के साथ की गई थी बदसलूकी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 25 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 25 January, 2020
Deepak Chaurasia

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसे लेकर हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। यहां तक कि मीडिया को भी प्रदर्शनकारी अपना निशाना बना रहे हैं। शाहीन बाग में करीब एक महीने से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी भी शुक्रवार को हिंसा पर उतर आए और वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने गए वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी कर दी। यही नहीं उन्होंने न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा भी तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया से मारपीट और कैमरे छीनने के मामले में कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा 394 (लूट के दौरान चोट पहुंचाने) के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कवरेज के दौरान मीडिया पर इस तरह के हमले काफी चिंता का विषय हैं।

दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दीपक चौरसिया के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और इस घटना का विरोध किया है।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने शाहीन बाग में दीपक चौरसिया पर हुए हमले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है, 'यह असहिष्णुता अस्वीकार्य है। शाहीनबाग उनका (हमलावरों का) नहीं है। यह अभी भी लोकतांत्रिक भारत का एक हिस्सा है। मैं सभी संपादकों और प्राइम टाइम एंकरों से आग्रह करता हूं कि वे शाहीन बाग से अपने न्यूज शो करें।'

एक अन्य ट्वीट में उनका यह भी कहना है, 'शाहीन बाग किसी के बाप का नहीं।एक पत्रकार के साथ ऐसी गुंडागर्दी करके प्रदर्शनकारियों ने बता दिया कि वो कितने असहनशील हैं और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ उनके लिए है। पूरे देश को इस घटना का विरोध करना चाहिए।'

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने भी एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘शाहीन बाग में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ हुई बदसलूकी की घटना काफी निंदाजनक है। यदि आपको (प्रदर्शनकारियों को) मीडिया से कोई दिक्कत है तो वह अपना चैनल बंद कर दें। कैमरों को तोड़ना और पत्रकारों के साथ मारपीट करना गुंडागर्दी है। दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’

'आजतक' के संपादक  सुप्रिय प्रसाद ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा है, 'आप किसी पत्रकार को अपना काम करने से इस तरह नहीं रोक सकते हैं। मैं इस तरह की घटना की घोर भर्त्सना करता हूं।'

‘न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी दीपक चौरसिया पर हुए हमले को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस घटना को शर्मनाक बताया है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने भी दीपक चौरसिया पर हमला करने वालों को आड़े हाथ लिया है।

बता दें कि पिछले दिनों इस कानून के विरोध में जेएनयू में गुस्साए छात्रों ने भी मीडिया पर हमला कर दिया था। छात्रों के हमले में कई मीडियाकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया था। इसके अलावा हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी प्रदर्शन को कवर करने पहुंचीं ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम पर प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था और 7 रिपोर्टर्स के साथ धक्का मुक्की की थी। इतना ही नहीं, हमलावरों ने ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम का कैमरा छीनने और जबरदस्ती फुटेज डिलीट करने की भी कोशिश की थी।

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#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल के संपादक ने लिया बड़ा फैसला

वरिष्ठ पत्रकार और ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Journalist

#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के वरिष्ठ संपादक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर संस्थान की ही दो महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही ट्वीट के जरिये #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था। हालांकि, अपने ट्वीट में उन्होंने किसी चैनल का नाम नहीं लिया था।

यह भी पढ़ें: मीडिया में #MeToo ने फिर दी दस्तक, अजीत अंजुम ने किया ये सनसनीखेज खुलासा

अब मामला तूल पकड़ने और चैनल का नाम सामने आने के बाद ‘टीवी9 भारतवर्ष’ ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं। इन ट्वीट में चैनल ने इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में बताया है।

अपने इन ट्वीट्स में चैनल का कहना है, ‘टीवी9 भारतवर्ष की दो पत्रकारों ने एक वरिष्‍ठ संपादक के खिलाफ यौन शोषण की अलग-अलग शिकायत की है। कार्यस्‍थल पर महिलाओं के यौन अपराध (रोकथाम,  प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार, मामले को तुरंत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया। शिकायतों और गवाहों को सुनने के बाद मैनेजमेंट ने संपादक को नोटिस भेजा। इसके फौरन बाद ही ICC ने पूरी जांच शुरू कर दी। प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक संपादक को छुट्टी पर भेज दिया, जिसके बाद संपादक ने इस्तीफ़ा दे दिया है। प्रबन्धन ने इस्तीफ़ा तुरन्त प्रभाव से मंज़ूर कर लिया।‘

एक अन्य ट्वीट में चैनल का कहना है, ‘कार्यस्‍थल पर यौन शोषण के प्रति टीवी9 नेटवर्क जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। संस्‍थान कार्य स्थल पर महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और बराबरी का माहौल मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, #MeToo का मामला सामने आने के बाद ‘समाचार प्लस चैनल’ के पूर्व आउटपुट हेड असित नाथ तिवारी ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखी है। इस मामले में फंसे ‘टीवी9 भारत वर्ष’ के आउटपुट हेड अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र में असित नाथ तिवारी ने इन आरोपों को मीडियाकर्मियों के लिए काफी चिंता का विषय बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अजय आजाद से उन लड़कियों से निजी तौर पर मिलकर माफी मांगने के लिए भी कहा है।

असित नाथ तिवारी द्वारा अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

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