टिप्स म्यूजिक लिमिटेड (Tips Music Limited) ने शेयर बायबैक के तहत 28 सितंबर 2026 को 63,000 इक्विटी शेयर वापस खरीदे हैं।
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Vikas Saxena
टिप्स म्यूजिक लिमिटेड (Tips Music Limited) ने शेयर बायबैक के तहत 28 सितंबर 2026 को 63,000 इक्विटी शेयर वापस खरीदे हैं। कंपनी ने यह बायबैक खुले बाजार में स्टॉक एक्सचेंज के जरिए किया है। यह प्रक्रिया SEBI के Buyback Regulations, 2018 के तहत की जा रही है।
कंपनी की ओर से जारी दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, ITI Securities Broking Limited के जरिए BSE पर 2,000 शेयर और NSE पर 61,000 शेयर खरीदे गए। MSEI पर कोई शेयर नहीं खरीदा गया। इस तरह 28 सितंबर को कुल 63,000 शेयर खरीदे गए। इन शेयरों की औसत खरीद कीमत ₹665.9121 प्रति शेयर रही। यह कीमत लेनदेन खर्च को छोड़कर है।
अब तक 5.73 लाख शेयरों का बायबैक
Tips Music ने बताया कि 27 सितंबर तक 5,09,832 शेयर पहले ही वापस खरीदे जा चुके थे। 28 सितंबर को खरीदे गए 63,000 शेयरों को जोड़ने के बाद कंपनी के कुल बायबैक किए गए शेयरों की संख्या 5,72,832 हो गई है।
कंपनी के मुताबिक, 28 सितंबर को कोई शेयर Closed Out नहीं हुआ। पिछले दिन तक भी Closed Out शेयरों की संख्या शून्य थी। इस तरह 28 सितंबर 2026 तक कंपनी ने कुल 5,72,832 इक्विटी शेयर वापस खरीदे हैं।
बायबैक खुले बाजार से किया जा रहा है
Tips Music का यह बायबैक कंपनी के ₹1 अंकित मूल्य वाले पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयरों का है। कंपनी स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खुले बाजार से शेयर खरीद रही है।
कंपनी ने कहा है कि बायबैक से जुड़ी जानकारी उसकी वेबसाइट और BSE तथा NSE की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
वह फिलहाल NBT में स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी यह नियुक्ति सुधीर मिश्रा के रेजिडेंट एडिटर पद से इस्तीफा देने के बाद हुई है।
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Samachar4media Bureau
जाने-माने पत्रकार मनीष श्रीवास्तव को हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स (NBT) के लखनऊ संस्करण का रेजिडेंट एडिटर नियुक्त किया गया है। वह फिलहाल NBT में स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी यह नियुक्ति सुधीर मिश्रा के रेजिडेंट एडिटर पद से इस्तीफा देने के बाद हुई है। सुधीर मिश्रा ने मंगलवार को करीब 14 वर्षों तक टाइम्स ग्रुप के साथ रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया।
मनीष श्रीवास्तव वर्ष 2013 से NBT के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले उन्होंने अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिंदुस्तान जैसे प्रमुख हिंदी अखबारों में काम किया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक मामलों पर उनकी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें जाना जाता है।
मनीष श्रीवास्तव के करियर में 2012 में उत्तर प्रदेश के नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (NRHM) घोटाले की रिपोर्टिंग एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। उस समय वह अमर उजाला के साथ काम कर रहे थे। उनकी खोजी पत्रकारिता के जरिए उत्तर प्रदेश में सामने आए इस बड़े भ्रष्टाचार मामले की जानकारी सामने आई थी।
NRHM घोटाले में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार की योजना से जुड़े करीब 10,000 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया था। इस मामले में कई मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या, जांच, कई नौकरशाहों और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा बाद में एक मंत्री के इस्तीफे जैसी घटनाएं सामने आईं। यह मामला उत्तर प्रदेश से सामने आए बड़े घोटालों में शामिल रहा।
NBT के साथ 13 वर्षों से अधिक समय के दौरान मनीष श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश के बाजार में रिपोर्टिंग और संपादकीय जिम्मेदारियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अब उन्हें लखनऊ संस्करण के रेजिडेंट एडिटर की जिम्मेदारी दी गई है।
समाचार4मीडिया की ओर से मनीष श्रीवास्तव को ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
सुधीर मिश्रा के अनुसार, उन्होंने करीब एक महीने पहले इस्तीफा दिया था। वह फिलहाल नवंबर के पहले हफ्ते तक नोटिस पीरियड पर काम करते रहेंगे।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र ने ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) के लखनऊ संस्करण के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की है। सुधीर मिश्रा के अनुसार, उन्होंने करीब एक महीने पहले इस्तीफा दिया था। वह फिलहाल नवंबर के पहले हफ्ते तक नोटिस पीरियड पर काम करते रहेंगे।
सुधीर मिश्र का ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ करीब 14 साल का सफर रहा है। 1 अप्रैल 2013 को लखनऊ-कानपुर संस्करण के दोबारा शुरू होने के दौरान स्थानीय संपादक के तौर पर उन्होंने NBT जॉइन किया था। जून 2017 तक उन्होंने लखनऊ संस्करण की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2017 से 2022 तक लखनऊ और एनसीआर संस्करण तथा 2022 से मार्च 2024 तक दिल्ली संस्करण के संपादक रहे। मार्च 2024 में उनकी लखनऊ वापसी हुई और तब से वह दोबारा लखनऊ संस्करण के स्थानीय संपादक के तौर पर काम कर रहे थे।
लखनऊ से ही अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले सुधीर मिश्र करीब 15 साल तक वहां रिपोर्टर भी रहे हैं। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ में करीब पांच साल और ‘हिन्दुस्तान’ में करीब दस साल बतौर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा वह ‘दैनिक भास्कर’ राजस्थान में करीब तीन साल तक संपादक रहे हैं। वह दो किताबें ‘मुसाफिर हूं यारो’ और ‘हाइब्रिड नेता’ लिख चुके हैं। उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म ‘गूलर का फूल’ भी बनाई है, जिसे बार्सिलोना में बेस्ट शॉर्ट फिल्म का अवॉर्ड मिल चुका है।
अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सुधीर मिश्र ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह रिटायरमेंट मोड में नहीं जाना चाहते और आगे भी काम करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, NBT लखनऊ में उनके रिटायरमेंट तक के करीब दो साल बाकी थे और उन्हें लगा कि इन वर्षों को किसी नए प्रोजेक्ट में लगाकर अधिक प्रोडक्टिव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फैसला कठिन था, लेकिन आगे की मंजिल साफ दिख रही हो तो फिर मुश्किल नहीं होती।
सुधीर मिश्र ने NBT में अपने 14 साल के सफर को याद करते हुए टीम और संस्थान से मिले अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान नई तकनीक, कोविड, डिजिटल का बढ़ता दबाव, पाठकों की बदलती आदतों और काम की बढ़ती चुनौतियों के बीच टीम ने मिलकर काम किया। उन्होंने अपनी लखनऊ टीम के गठन और उसके साथ लंबे जुड़ाव को भी विस्तार से याद किया।
उन्होंने संकेत दिया कि आगे वह किसी नए प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं और कहा कि वह पत्रकारिता से जुड़े रहेंगे। उनके शब्दों में, ‘पत्रकारिता मेरा पैशन है और उसी को आगे भी जीना है।’
सचिन भटनागर को लक्सर ग्रुप में प्रेसिडेंट- इंटरनेशनल बिजनेस नियुक्त किया गया है। नोएडा स्थित हेड ऑफिस से वह बिजनेस ग्रोथ, मार्केट विस्तार और नए इंटरनेशनल अवसरों पर काम करेंगे।
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सचिन भटनागर (Sachin Bhatnagar) को लक्सर ग्रुप (Luxor Group) में प्रेसिडेंट- इंटरनेशनल बिजनेस (President - International Business) नियुक्त किया गया है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए उनकी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की है। वह नोएडा स्थित कंपनी के हेड ऑफिस (Head Office) से काम करेंगे।
नई भूमिका में सचिन भटनागर बिजनेस ग्रोथ (Business Growth) बढ़ाने, मार्केट प्रेजेंस (Market Presence) मजबूत करने और नए इंटरनेशनल अवसर (International Opportunities) तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। लक्सर ग्रुप अपने इंटरनेशनल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है।
कंपनी ने अपनी लिंक्डइन पोस्ट में कहा, “हमें सचिन भटनागर का लक्सर ग्रुप के प्रेसिडेंट के तौर पर स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। हम उनके नेतृत्व, विशेषज्ञता और लक्सर की निरंतर ग्रोथ और सफलता में योगदान की उम्मीद करते हैं।”
सचिन भटनागर के पास 30 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें मल्टीनेशनल कॉरपोरेशंस (Multinational Corporations), यूरोपियन मार्केट लीडर्स (European Market Leaders) और भारतीय लिस्टेड कंपनियों में इंटरनेशनल बिजनेस (International Business) तैयार करने और उसे बड़े स्तर पर विस्तार देने का अनुभव है।
उनका अनुभव कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products), एफएमसीजी (FMCG), स्टेशनरी (Stationery), पैकेजिंग और प्रिंटिंग (Packaging & Printing), स्पेशलिटी केमिकल्स (Specialty Chemicals), प्रिसीजन इंजीनियरिंग (Precision Engineering) और फार्मा (Pharma) जैसे क्षेत्रों में रहा है।
ग्लोबल इवेंट मार्केटिंग एजेंसी ओपस एजेंसी (Opus Agency) ने एशिया पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ASEAN और ANZ के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है।
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Samachar4media Bureau
ग्लोबल इवेंट मार्केटिंग एजेंसी ओपस एजेंसी (Opus Agency) ने एशिया पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ASEAN और ANZ के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है।
एरिका सियो (Erica Seo) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ASEAN और चार्ल्स टर्नर (Charles Turner) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ANZ नियुक्त किया गया है। दोनों सीधे ओपस एजेंसी की प्रेसिडेंट डेना लोवरी (Dena Lowery) को रिपोर्ट करेंगे।
एरिका सियो इससे पहले स्पाल्बा (Spalba) में एपीएसी की बिजनेस हेड थीं। इससे पहले उन्होंने जॉर्ज पी. जॉनसन एक्सपीरियंस मार्केटिंग (George P Johnson Experience Marketing) में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया है। वह जीपीजे कोरिया (GPJ Korea) की मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुकी हैं।
वहीं, चार्ल्स टर्नर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ओपस एजेंसी के कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके काम में कारोबारी प्रदर्शन, क्लाइंट ग्रोथ, रोजमर्रा के कामकाज और क्षेत्रीय क्षमताओं को बढ़ाना शामिल होगा।
टर्नर के पास जॉर्ज पी. जॉनसन ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड में 12 साल काम करने का अनुभव है। इसके बाद उन्होंने द कंपनी वी कीप (The Company We Keep) में दो साल काम किया। ओपस एजेंसी ने 2025 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था।
इन नियुक्तियों के साथ ओपस एजेंसी APAC क्षेत्र में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। एजेंसी सेल्सफोर्स, एमेज़ॉन वेब सर्विसेज (AWS), यूबीएस और रेड हैट जैसे क्लाइंट्स के साथ काम करती है। हाल की परियोजनाओं में एडब्ल्यूएस समिट एएनसीईएएन (AWS Summit ASEAN) भी शामिल है, जिसका आयोजन सिंगापुर, बैंकॉक और जकार्ता में किया गया था। इस कार्यक्रम में 16,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था।
GTPL Hathway के शेयरधारकों ने कंपनी की 20वीं सालाना आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी पांच प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
GTPL Hathway के शेयरधारकों ने कंपनी की 20वीं सालाना आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी पांच प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कंपनी की AGM 28 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। कंपनी ने इसके बाद AGM के वोटिंग नतीजे जारी किए हैं।
कंपनी के मुताबिक, 21 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कुल 28,968 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 6 तथा पब्लिक कैटेगरी के 66 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
AGM में पहला प्रस्ताव वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी देने से जुड़ा था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 9,20,09,637 वोट पड़े, जबकि 787 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव के पक्ष में 99.9991% वोट पड़े और इसे मंजूरी मिल गई।
दूसरा प्रस्ताव वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इक्विटी शेयरों पर डिविडेंड घोषित करने से जुड़ा था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 9,20,09,821 वोट और खिलाफ 603 वोट पड़े। यानी 99.9993% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे और इसे भी मंजूरी मिल गई।
तीसरा प्रस्ताव अजय सिंह को रोटेशन के आधार पर दोबारा डायरेक्टर नियुक्त करने का था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 9,20,08,784 वोट पड़े, जबकि 1,640 वोट खिलाफ रहे। प्रस्ताव को 99.9982% वोट के साथ मंजूरी मिली।
चौथा प्रस्ताव वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने से संबंधित था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 9,20,08,832 वोट और खिलाफ 1,592 वोट पड़े। प्रस्ताव को 99.9983% वोट मिले और इसे मंजूर कर लिया गया।
पांचवां और आखिरी प्रस्ताव राजेंद्र द्वारकादास हिंगवाला को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने से जुड़ा था। यह स्पेशल रिजॉल्यूशन था। इसके पक्ष में 9,20,08,832 वोट और खिलाफ 1,592 वोट पड़े। प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई।
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले प्रस्ताव पर 250 शेयरों के वोट अब्सटेन किए गए। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें प्रस्ताव पर भी एक-एक शेयरधारक ने 250 शेयरों के वोट नहीं डाले।
कंपनी ने बताया कि सभी पांचों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हुए हैं। वोटिंग के लिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा 24 सितंबर 2026 से 27 सितंबर 2026 तक खुली थी। 28 सितंबर को वोटों की गिनती की गई।
AGM में पास हुए इन प्रस्तावों के साथ वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी, डिविडेंड की घोषणा, अजय सिंह की डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति, कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक की मंजूरी और राजेंद्र द्वारकादास हिंगवाला की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्ति को शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है।
हिंदी पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित न्यूज एंकर राणा यशवंत आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
हिंदी पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित न्यूज एंकर राणा यशवंत आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। करीब तीन दशक के पत्रकारिता अनुभव में राणा यशवंत ने रिपोर्टिंग, एंकरिंग, संपादन और न्यूजरूम नेतृत्व की अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। अपनी स्पष्ट सोच, बेबाक अंदाज और सवाल पूछने की खास शैली के लिए पहचाने जाने वाले राणा यशवंत ने समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य में खुद को भी लगातार नए तरीके से पेश किया है।
टेलीविजन पत्रकारिता से लेकर डिजिटल मीडिया तक का उनका सफर काफी लंबा और विविध रहा है। उन्होंने आजतक, जी न्यूज, महुआ टीवी और आईटीवी नेटवर्क जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम किया है। आईटीवी नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल इंडिया न्यूज में वह एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। नवंबर 2023 में उन्हें इस पद पर प्रमोट किया गया था। इससे पहले वह नेटवर्क में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर काम कर रहे थे।
आईटीवी नेटवर्क में अपनी लंबी पारी के दौरान राणा यशवंत ने न सिर्फ चैनल के संपादकीय नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि ‘अर्धसत्य’ जैसे चर्चित कार्यक्रम की मेजबानी भी की। उनके इस शो को रेड इंक और ईएनबीए जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
2025 में बदली दिशा, डिजिटल पर बढ़ा फोकस
मार्च 2025 में राणा यशवंत ने आईटीवी नेटवर्क से अपनी पारी को विराम दिया और इसके बाद लाइव टाइम्स से जुड़े। यहां उन्होंने साप्ताहिक शो ‘फैक्ट्स एंड फिगर्स’ शुरू किया। इस दौरान उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी कई रिपोर्ट्स और विश्लेषण भी चर्चा में रहे।
इसके बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने ‘न्यूज इंडिया’ में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली। इस नई भूमिका के साथ उन्होंने टीवी और डिजिटल, दोनों माध्यमों में अपनी सक्रियता जारी रखी।
‘द फ्रंट’ के साथ नई डिजिटल पारी
साल 2026 में राणा यशवंत ने अपने नए डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म ‘द फ्रंट’ (The Front) को लेकर भी जानकारी साझा की। सितंबर 2026 में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि ‘द फ्रंट’ अपनी टीम और नए तेवर के साथ दर्शकों से जुड़ने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ‘द फ्रंट’ अपने न्यूजरूम और स्टूडियो के साथ दर्शकों तक पहुंचेगा। राणा यशवंत के मुताबिक, आखिरकार मसला खबर का ही है और खबर को किस तरह देखा और प्रस्तुत किया जाता है, यह भी काफी कुछ तय करता है।
उनकी यह नई पारी ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यूज देखने और समझने का तरीका तेजी से बदल रहा है। टेलीविजन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म, यूट्यूब और सोशल मीडिया भी पत्रकारिता का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में राणा यशवंत का डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म की दिशा में बढ़ना उनके लंबे पत्रकारिता अनुभव को नए माध्यम के साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
पत्रकारिता में मिले कई सम्मान
राणा यशवंत को हिंदी पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। इनमें भारत गौरव सम्मान, रेक्स कर्मवीर ग्लोबल फेलोशिप एंड अवॉर्ड और राजीव गांधी ग्लोबल एक्सिलेंस अवॉर्ड शामिल हैं।
लंबे समय से न्यूज रूम, स्टूडियो और मैदान में पत्रकारिता करने वाले राणा यशवंत की पहचान सिर्फ एक एंकर के तौर पर नहीं, बल्कि एक संपादक और पत्रकार के रूप में भी बनी है। अब ‘द फ्रंट’ के जरिए वह डिजिटल न्यूज की दुनिया में अपनी अगली पारी को आकार दे रहे हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
Basilic Fly Studio Limited की 10वीं सालाना आम बैठक (AGM) 28 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए हुई।
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Vikas Saxena
Basilic Fly Studio Limited की 10वीं सालाना आम बैठक (AGM) 28 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए हुई। बैठक दोपहर 3 बजे शुरू हुई। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी है।
कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी ने बताया कि AGM का आयोजन कंपनी कानून, 2013, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से जारी सामान्य सर्कुलर और सेबी के सर्कुलर के तहत किया गया। कंपनी ने सदस्यों के लिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा देने के लिए नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की सेवाएं ली थीं।
बैठक में कुल 31 सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया। जरूरी कोरम पूरा होने के बाद चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बालाकृष्णन ने बैठक शुरू की और सभी सदस्यों का स्वागत किया।
इसके बाद चेयरमैन ने बोर्ड के सदस्यों, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर गौरव मेहरा और बैठक में मौजूद ऑडिटर्स का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के कई डायरेक्टर और प्रमुख अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
बैठक में स्वतंत्र निदेशक नंधागोपाल दामोदरन, स्वतंत्र निदेशक वेंगारई शेषाद्रि सौरीराजन, होल-टाइम डायरेक्टर सुंदरम योगलक्ष्मी, नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजारथिनम थिरिपुरासुंदरी और स्वतंत्र निदेशक रविचंद्रन चित्रा शामिल हुए। इनके अलावा सीएफओ गौरव मेहरा और कंपनी सेक्रेटरी व कंप्लायंस ऑफिसर इक्कुरथी चंद्रमोहन भी बैठक में मौजूद रहे।
कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 के स्टैच्यूटरी ऑडिटर पीके मनोज और सेक्रेटेरियल ऑडिटर राम्या देवी भी बैठक में शामिल हुईं। 10वीं AGM के स्क्रूटिनाइजर के तौर पर डी. सरवनन भी मौजूद रहे।
कंपनी के प्रदर्शन पर हुई चर्चा
चेयरमैन ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कंपनी के प्रदर्शन और उससे जुड़े मामलों की जानकारी दी। कंपनी के सीएफओ गौरव मेहरा ने भी 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी के प्रदर्शन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।
जिन शेयरधारकों ने स्पीकर शेयरधारक के तौर पर अपना नाम दर्ज कराया था, उन्हें बैठक के दौरान सवाल पूछने का मौका दिया गया। चेयरमैन और मैनेजमेंट ने शेयरधारकों की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब दिया। इसके बाद AGM के नोटिस में शामिल प्रस्तावों को चर्चा और विचार के लिए रखा गया।
AGM में रखे गए 3 प्रस्ताव
पहला प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूरी देना। इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी शामिल थी। यह ऑर्डिनरी रिजॉल्यूशन था।
दूसरा प्रस्ताव: राजारथिनम थिरिपुरासुंदरी को रोटेशन के आधार पर दोबारा कंपनी का डायरेक्टर नियुक्त करना। यह भी ऑर्डिनरी रिजॉल्यूशन था।
तीसरा प्रस्ताव: बेंगलुरु में नया स्टूडियो खोलने के लिए कंपनी के शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल के उद्देश्यों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया था। यह स्पेशल रिजॉल्यूशन था।
कंपनी ने बताया कि बोर्ड ने ई-वोटिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए अलगर एंड एसोसिएट्स एलएलपी के नामित पार्टनर एम. अलगर और उनके उपलब्ध न होने पर डी. सरवनन को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था। इसमें रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग, दोनों शामिल थे।
चेयरमैन ने कंपनी सेक्रेटरी को वोटिंग के नतीजे घोषित करने, स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी देने और AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर कंपनी की वेबसाइट पर नतीजे डालने के लिए अधिकृत किया।
कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए सभी प्रस्ताव 28 सितंबर 2026 को पास माने जाएंगे, लेकिन यह सदस्यों की ओर से रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान की गई ई-वोटिंग में जरूरी बहुमत मिलने पर निर्भर है।
ई-वोटिंग की सुविधा 15 मिनट के लिए खुली रही। ई-वोटिंग पूरी होने के बाद AGM शाम 3:53 बजे समाप्त हुई। अंत में चेयरमैन ने AGM में शामिल होने और बैठक को सुचारू रूप से पूरा कराने में सहयोग देने के लिए सभी सदस्यों, डायरेक्टर्स और अन्य संबंधित पक्षों का धन्यवाद किया।
मुंबई में इनकम टैक्स विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई ठिकानों पर सर्च की कार्रवाई शुरू की है।
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Vikas Saxena
मुंबई में इनकम टैक्स विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई ठिकानों पर सर्च की कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह, फिल्म प्रोड्यूसर वाशु भगनानी और पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर की जा रही है। इनकम टैक्स विभाग की यह कार्रवाई फिल्म से जुड़े लेनदेन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और विदेश में फंड ट्रांसफर किए जाने की जांच से जुड़ी बताई जा रही है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई इनकम टैक्स विभाग की टीमें करीब 12 ठिकानों पर सर्च कर रही हैं। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरे जरूरी कागजात देखे जा रहे हैं। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि फिल्म प्रोजेक्ट्स की फंडिंग से जुड़े पैसों का इस्तेमाल और लेनदेन किस तरह हुआ।
Panorama Studios के दफ्तर भी पहुंची टीम
पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल लिमिटेड ने भी स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया है कि इनकम टैक्स विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के अधिकारियों की एक टीम कंपनी के परिसर में मौजूद है। कंपनी के मुताबिक, अधिकारी 28 सितंबर 2026 की सुबह उसके दफ्तर पहुंचे।
कंपनी ने बताया कि फिलहाल वह यह पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है कि इनकम टैक्स विभाग की टीम किस मामले की जांच के लिए कंपनी के परिसर में पहुंची है या जांच की स्थिति क्या है।
कंपनी के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों के दौरे के दौरान बाहर किसी तरह की जानकारी देने की अनुमति नहीं है। कंपनी के डायरेक्टर्स और सीनियर मैनेजमेंट के अधिकारी जांच टीम के साथ मौजूद हैं।
पैनोरमा स्टूडियोज ने कहा कि जांच की कार्रवाई पूरी होने के बाद या इससे जुड़ी कोई और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने पर, जो भी पहले होगा, कंपनी स्टॉक एक्सचेंज को विस्तृत स्पष्टीकरण या जानकारी देगी। कंपनी ने यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत दी है।
विदेश में लेनदेन की भी जांच
रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकम टैक्स विभाग की जांच में फिल्म प्रोजेक्ट्स से जुड़े कुछ विदेश लेनदेन भी शामिल हैं। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि किन भुगतानों या लेनदेन में कथित गड़बड़ी की आशंका है। अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही इन लेनदेन की प्रकृति और उद्देश्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
गौरतलब है कि इनकम टैक्स विभाग की ओर से किसी परिसर पर सर्च की कार्रवाई होना अपने आप में किसी व्यक्ति या कंपनी के गलत काम करने का सबूत नहीं है। मौजूदा मामले में जांच अभी जारी है और आगे की जानकारी का इंतजार है।
वाशु भगनानी और पूजा फिल्म्स से जुड़ा मामला
वाशु भगनानी लंबे समय से फिल्म निर्माण से जुड़े रहे हैं। उनकी प्रोडक्शन कंपनी पूजा फिल्म्स अब उनके बेटे जैकी भगनानी के नेतृत्व में काम करती है। प्रोडक्शन बैनर ने थिएटर के साथ-साथ डिजिटल प्रोजेक्ट्स और मनोरंजन से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी काम किया है।
रकुल प्रीत सिंह के आने वाले प्रोजेक्ट्स
वर्कफ्रंट की बात करें तो रकुल प्रीत सिंह नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में शूर्पणखा के किरदार में नजर आएंगी। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में हैं। रकुल ने फिल्म के लिए डबिंग भी शुरू कर दी है और इसका रिलीज डायवाली 2026 के आसपास बताया गया है।
रकुल के परिवार से जुड़ा एक अलग मामला भी दिसंबर 2025 में सामने आया था, जब उनके भाई अमन प्रीत सिंह का नाम एक ड्रग से जुड़े मामले की जांच में सामने आया था। हालांकि, वह मामला मौजूदा इनकम टैक्स जांच से अलग है। फिलहाल इनकम टैक्स विभाग की ओर से की जा रही सर्च और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी है। मामले में आगे क्या जानकारी सामने आती है, इस पर नजर बनी हुई है।
भारत में खबरें पाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। किसी रिपोर्टर के फोन से कोई खबर कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों की स्क्रीन तक पहुंच सकती है।
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Samachar4media Bureau
राहुल महाजन, हेड ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’।।
भारत में खबरें पाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। किसी रिपोर्टर के फोन से कोई खबर कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों की स्क्रीन तक पहुंच सकती है। वहीं, कोई दर्शक टीवी की बहस देखने के बाद उसी मुद्दे पर किसी स्वतंत्र पत्रकार की यूट्यूब पर जानकारी भी देख सकता है। लेकिन खबरों की इतनी ज्यादा उपलब्धता का मतलब यह नहीं है कि लोगों को हर बात आसानी से समझ भी आ रही है।
भारतीय पत्रकारिता के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दर्शक और विज्ञापन दोनों तेजी से ऑनलाइन जा रहे हैं, तब पत्रकारिता अपनी स्वतंत्रता, भरोसे और सही तरीके से खबर करने की क्षमता को कैसे बनाए रखेगी।
डिजिटल विज्ञापन की ओर बढ़ रहा पैसा
पैसों के मामले में मीडिया इंडस्ट्री में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। एफआईसीसीआई-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री 2025 में बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपये का हो गया। हालांकि, इस बढ़त का फायदा मीडिया के हर हिस्से को बराबर नहीं मिला।
डिजिटल विज्ञापन 26 फीसदी बढ़कर 94,700 करोड़ रुपये हो गया और कुल विज्ञापन आय में इसकी हिस्सेदारी 63 फीसदी रही। इसके मुकाबले लीनियर टेलीविजन विज्ञापन में 10 फीसदी की गिरावट आई। प्रीमियम फॉर्मेट में प्रिंट विज्ञापन 2 फीसदी बढ़ा, जबकि प्रिंट सब्सक्रिप्शन में 1 फीसदी की कमी आई।
ये आंकड़े सिर्फ समाचार कारोबार के नहीं, बल्कि पूरे मीडिया बाजार के हैं। फिर भी इनसे यह पता चलता है कि विज्ञापनदाता अपना पैसा किस दिशा में ले जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं को सही ऑडियंस तक पहुंचने और उसके रिस्पॉन्स को तुरंत मापने की सुविधा मिलती है। ऐसे में न्यूजरूम के सामने उस विज्ञापन खर्च में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की चुनौती है।
विज्ञापन खत्म नहीं हुआ, उसका रास्ता बदल गया
न्यूज ऑर्गनाइजेशंस की समस्या सिर्फ यह नहीं है कि विज्ञापन कम हो रहा है। असली बदलाव यह है कि विज्ञापन का पैसा अब ऐसे सिस्टम के जरिए जा रहा है, जिसे पब्लिशर्स खुद नियंत्रित नहीं करते। कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी न्यूज क्लिप के साथ टारगेटेड विज्ञापन दिखा सकता है, लेकिन उस खबर को तैयार करने वाली पत्रकारिता के लिए सीधे भुगतान जरूरी नहीं है। पब्लिशर्स बड़ी ऑनलाइन ऑडियंस तो बना सकते हैं, लेकिन उन व्यूज को भरोसेमंद कमाई में बदलना अब भी मुश्किल है।
सब्सक्रिप्शन, डोनेशन, इवेंट्स और ब्रैंडेड कंटेंट से कुछ मदद मिल रही है, लेकिन ज्यादातर मीडिया संस्थानों के लिए इनमें से कोई भी मॉडल अभी पुराने विज्ञापन मॉडल जितनी कमाई नहीं दे पाया है।
टीवी न्यूज में बढ़ी ध्यान खींचने की होड़
टेलीविजन न्यूज भी इस दबाव को रोजाना महसूस कर रहा है। दर्शकों का ध्यान खींचने की होड़ में तेज बहस और नाटकीय टकराव कई बार शांत तरीके से की गई रिपोर्टिंग से ज्यादा आसानी से बिकते हैं। कई कार्यक्रमों में नेताओं को एक-दूसरे पर आरोप लगाने का काफी समय मिलता है, जबकि रिपोर्टरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में हुआ क्या और उसका महत्व क्या है।
यह सिर्फ प्रस्तुति की शैली का मामला नहीं है। जब खबर की जांच-पड़ताल से ज्यादा जोर प्रदर्शन पर होने लगे, तो दर्शक के लिए खबर की उपयोगिता कम हो सकती है। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट ने 2025 में भारत के टेलीविजन न्यूज क्षेत्र को काफी ध्रुवीकृत बताया था। इसी साल के इंडस्ट्री आंकड़ों में लीनियर टीवी विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली आय में गिरावट भी दिखाई गई।
न्यूज पर भरोसे की तस्वीर एक जैसी नहीं
इसका असर दर्शकों और न्यूज ब्रैंड्स के बीच रिश्ते पर भी दिखाई देता है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर जगह न्यूज पर भरोसा कम हो रहा है।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के 2025 के सर्वे में भारत के 43 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ज्यादातर समय ज्यादातर खबरों पर भरोसा करते हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 2 फीसदी ज्यादा था। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि बहुमत ने यह नहीं कहा कि उन्हें ज्यादातर खबरों पर भरोसा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग न्यूज ब्रैंड्स को लेकर भरोसे का स्तर अलग रहा।
पुराने प्रिंट ब्रैंड्स और सार्वजनिक प्रसारकों को आम तौर पर बेहतर भरोसा मिला, जबकि कुछ ऐसे मीडिया संस्थानों पर भरोसा कम रहा जिन्हें दर्शक राजनीति के किसी एक पक्ष के साथ ज्यादा जुड़ा हुआ मानते हैं। इसलिए मुद्दा पूरे भारतीय मीडिया को लेकर एक ही फैसला देने का नहीं है। असल स्थिति यह है कि ऑडियंस बंटी हुई है और कई बार उसे लगता है कि कोई चैनल या प्रकाशन तथ्य देखने से पहले ही अपना पक्ष चुन चुका है।
सर्वे के आंकड़ों को समझना भी जरूरी
इन आंकड़ों को संदर्भ के साथ देखना जरूरी है। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट का सर्वे मुख्य रूप से अंग्रेजी बोलने वाले ऑनलाइन न्यूज यूजर्स के बीच किया गया था। भारत की कुल आबादी और न्यूज ऑडियंस की तुलना में यह एक छोटा हिस्सा है।
इंस्टीट्यूट खुद कहता है कि इसके नतीजे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते और इनमें टेलीविजन व प्रिंट की लगातार बनी हुई अहमियत कम दिखाई दे सकती है। यह सर्वे हर भाषा, राज्य या आय वर्ग की स्थिति नहीं बताता। फिर भी यह इस बात को समझने में मदद करता है कि इंटरनेट से जुड़े लोग अपनी न्यूज की आदतें कैसे बदल रहे हैं और उन्हें मिलने वाली खबरों को किस तरह देखते हैं।
लोग अब सीधे न्यूज चैनल नहीं, प्लेटफॉर्म के जरिए खबर देखते हैं
अब लोग हमेशा सीधे किसी अखबार या न्यूज चैनल की वेबसाइट या ऐप पर जाकर खबर नहीं देखते। वे अक्सर किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खबर तक पहुंचते हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के 2025 के भारत से जुड़े सैंपल में 55 फीसदी लोगों ने खबरों के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल किया। 46 फीसदी ने व्हाट्सऐप, 37 फीसदी ने इंस्टाग्राम और 36 फीसदी ने फेसबुक का इस्तेमाल किया।
इन प्लेटफॉर्म्स को लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के साथ आसानी से जोड़ लेते हैं। सफर के दौरान छोटा वीडियो देखना, परिवार के ग्रुप में कोई लिंक मिलना या दोस्त का कोई वीडियो भेजना अब आम बात है। इसका एक फायदा यह है कि दर्शक अपनी पसंद के ऐसे प्रेजेंटर को चुन सकते हैं जो उनकी भाषा में बात करता हो, किसी मुद्दे पर ज्यादा समय देता हो या ऐसे सवाल पूछता हो जिन्हें वे पारंपरिक मीडिया में कम देखते हैं।
स्वतंत्र न्यूज क्रिएटर्स का बढ़ता असर
यही वजह है कि स्वतंत्र न्यूज क्रिएटर्स तेजी से सामने आ रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं जो उन मुद्दों पर रिपोर्टिंग और संदर्भ देते हैं जिन्हें दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा जगह नहीं मिलती। हालांकि, कुछ लोग रिपोर्टर के बजाय कमेंटेटर होते हैं और दर्शकों के लिए दोनों के बीच अंतर हमेशा साफ नहीं होता।
किसी व्यक्ति के बहुत ज्यादा फॉलोअर्स होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी हर बात की जांच भी की गई है। स्वतंत्र क्रिएटर्स को न्यूजरूम की तुलना में ज्यादा आजादी मिल सकती है, लेकिन उनके पास संपादकों की टीम, सुधार की तय प्रक्रिया या हर जानकारी की जांच करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन हमेशा नहीं होते।
इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म उन वीडियो को ज्यादा आगे बढ़ाते हैं जो लोगों का ध्यान बनाए रखते हैं। ऐसे में गुस्सा और पूरी तरह निश्चित अंदाज में कही गई बातें कई बार सावधानी से रखी गई जानकारी से ज्यादा तेजी से फैल सकती हैं।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 38 फीसदी लोगों ने सोशल और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज के लिए क्रिएटर्स या इन्फ्लुएंसर्स पर नियमित रूप से ध्यान देने की बात कही। वहीं 34 फीसदी लोग वहां नियमित रूप से न्यूज ब्रैंड्स या पत्रकारों को फॉलो करते थे। यह आंकड़ा लोगों के ध्यान में बदलाव दिखाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि क्रिएटर्स ने रिपोर्टरों की जगह ले ली है या लोग उनकी हर बात पर भरोसा करते हैं।
यहां एक मौका भी है। पत्रकार सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं और किसी ब्रॉडकास्टर के तय शेड्यूल से बाहर भी जांच-पड़ताल कर सकते हैं। लेकिन खतरा यह है कि किसी व्यक्ति पर आधारित न्यूज फीड में रिपोर्टिंग, राय और प्रमोशन के बीच अंतर धुंधला हो सकता है।
अखबारों के सामने भी चुनौती
अखबार भी मुश्किल बाजार के हिसाब से खुद को बदल रहे हैं। हालांकि, उनके जल्द खत्म हो जाने की बातें उपलब्ध आंकड़ों से पूरी तरह साबित नहीं होतीं।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस के जनवरी से जून 2022 के ऑडिट में रिपोर्ट की गई सर्कुलेशन संख्या पिछले ऑडिट के मुकाबले 20 से 30 फीसदी कम थी। लेकिन इस तुलना को सावधानी से देखना जरूरी है। महामारी के बाद कुछ पब्लिशर्स ने अपनी कुछ एडिशन की जानकारी जमा नहीं की थी। इसलिए इस गिरावट को पूरे भारत में पाठकों की संख्या में सीधी गिरावट नहीं माना जा सकता।
2025 की पहली छमाही के लिए एबीसी की रिपोर्ट में हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं समेत कई क्षेत्रीय एडिशन की सर्कुलेशन में गिरावट दिखाई दी। हालांकि, कुछ अखबार और बाजार बेहतर स्थिति में भी रहे हैं। प्रिंट अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका भविष्य पहले की तरह तय नहीं माना जा सकता।
प्रेस रजिस्ट्रार जनरल की सालाना 'प्रेस इन इंडिया' रिपोर्ट भी सर्कुलेशन से जुड़ा आंकड़ा देती है। हालांकि, इसके आंकड़े काफी हद तक पब्लिशर्स की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित होते हैं। इनमें से सिर्फ कुछ आंकड़ों की प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा पुष्टि की जाती है।
इस सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है, खासकर तब जब अलग-अलग वर्षों या पाठकों की संख्या की व्यापक तुलना की जा रही हो।
डिजिटल पाठकों के बावजूद कमाई की चुनौती
कुछ खास एडिशन की बिक्री में गिरावट और लोगों का डिजिटल पढ़ने की ओर बढ़ना पब्लिशर्स के लिए वास्तविक चिंता है। अखबारों ने वेबसाइट, ऐप, वीडियो, इवेंट्स और पेड एक्सेस जैसे कई रास्ते अपनाए हैं। लेकिन ऑनलाइन पाठकों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि प्रिंट से होने वाली कमाई भी उसी तरह वापस आ जाएगी।
इसकी एक वजह यह भी है कि डिजिटल विज्ञापन का बड़ा हिस्सा ऐसे प्लेटफॉर्म्स के पास जा रहा है, जिन्हें न्यूज पब्लिशर्स नियंत्रित नहीं करते।
मालिकाना हक और राजनीतिक प्रभाव का सवाल
कमाई का दबाव मीडिया के मालिकाना हक और राजनीतिक प्रभाव के सवाल को भी महत्वपूर्ण बनाता है। मीडिया मालिकों के कारोबारी हित, सरकारी रिश्ते और राजनीतिक विचार हो सकते हैं। ये चीजें बिना किसी सीधे निर्देश के भी न्यूजरूम के काम को प्रभावित कर सकती हैं। कोई खबर देर से प्रकाशित हो सकती है, उसे कम जगह मिल सकती है या उस पर काम करने के लिए कम संसाधन लगाए जा सकते हैं।
सरकारें भी नियमों और सरकारी विज्ञापन के जरिए प्रभाव डाल सकती हैं। छोटे मीडिया संस्थान कई बार सरकारी विज्ञापन पर ज्यादा निर्भर होते हैं।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने चिंता जताई है कि सरकारी विज्ञापन न्यूज ऑर्गनाइजेशंस को दबाव के प्रति संवेदनशील बना सकता है। यह एक प्रेस-फ्रीडम संगठन का आकलन है। लेकिन इससे एक सीधा सवाल जरूर उठता है- अगर कोई ताकतवर विज्ञापनदाता या मालिक किसी खबर से असहमत हो, तो क्या मीडिया संस्थान उस पर खुलकर रिपोर्टिंग कर पाएगा?
कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में मीडिया का नियंत्रण
मीडिया के मालिकाना हक का एक और मुद्दा इसका बढ़ता केंद्रीकरण है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मीडिया का नियंत्रण कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में ज्यादा केंद्रित हो रहा है और संगठन ने इसे राजनीतिक प्रभाव से भी जोड़ा है।
यह उस संगठन का आकलन है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी बड़े कारोबारी समूह के स्वामित्व वाले हर मीडिया संस्थान की संपादकीय लाइन एक जैसी है। व्यापक चिंता यह है कि जब मालिकाना हक, वितरण और विज्ञापन कुछ ही हाथों में ज्यादा केंद्रित हो जाएं, तो स्वतंत्र आवाजों के लिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना और ताकतवर हितों को चुनौती देना मुश्किल हो सकता है।
भारत में न्यूज का भविष्य एक ही माध्यम का नहीं होगा
भारत में न्यूज का भविष्य किसी एक फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहेगा। टेलीविजन लाखों लोगों तक पहुंचता रहेगा। प्रिंट कई पाठकों के लिए भरोसेमंद रिपोर्टिंग का माध्यम बना रहेगा। वहीं डिजिटल क्रिएटर्स उन लोगों को आकर्षित करते रहेंगे जो अलग आवाज या किसी प्रेजेंटर से ज्यादा सीधा जुड़ाव चाहते हैं।
असल चुनौती यह है कि ये सभी माध्यम ऐसी पत्रकारिता को बनाए रख पाएं जो दावों की जांच करे, गलतियों को सुधारे और सिर्फ उन खबरों पर ध्यान न दे जो सबसे ज्यादा क्लिक ला सकती हैं। इसके लिए मजबूत संपादकीय मानकों और कमाई के कई स्रोतों की जरूरत होगी। इसमें सब्सक्रिप्शन, मेंबरशिप, डोनेशन और ऐसा विज्ञापन शामिल हो सकता है जो किसी एक ताकतवर स्रोत पर निर्भर न हो।
मीडिया संस्थानों के लिए मालिकाना हक और गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी होगी। दर्शकों की भी इसमें भूमिका है। उन्हें यह देखना चाहिए कि खबर किसने तैयार की है, उसके पीछे क्या सबूत हैं और सामने रखी गई बात न्यूज है या राय।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने खबर प्रकाशित करना आसान और उसे लोगों तक पहुंचाना तेज जरूर कर दिया है। लेकिन इससे सावधानी से की जाने वाली पत्रकारिता की जरूरत कम नहीं हुई है। बल्कि खबरों की बढ़ती संख्या के बीच सही जानकारी की जरूरत पहले की तरह महत्वपूर्ण बनी हुई है।
प्रोग्रामेटिक विज्ञापन के बढ़ते चलन से आउट-ऑफ-होम (OOH) सेक्टर के लिए नए मौके खुल रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
प्रोग्रामेटिक विज्ञापन के बढ़ते चलन से आउट-ऑफ-होम (OOH) सेक्टर के लिए नए मौके खुल रहे हैं। इसमें डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) विज्ञापनदाताओं और ब्रैंड्स के लिए खास दिलचस्पी वाला क्षेत्र बनकर सामने आ रहा है। इसी विषय पर चर्चा के लिए इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स 30 सितंबर को e4m Real Time Programmatic Conference के पांचवें एडिशन में एक साथ आएंगे और कई अहम मुद्दों पर अपनी राय साझा करेंगे।
इस कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख आकर्षण ‘Programmatic DOOH: Bridging Digital & Physical’ विषय पर होने वाला पैनल डिस्कशन होगा। इसमें पैनलिस्ट चर्चा करेंगे कि प्रोग्रामेटिक टेक्नोलॉजी किस तरह OOH विज्ञापन खरीदने के तरीके को बदल रही है। इससे विज्ञापनदाताओं को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और ऑडियंस को ज्यादा सटीक तरीके से टारगेट करने की सुविधा मिल रही है।
चर्चा में यह भी देखा जाएगा कि रियल-टाइम टारगेटिंग और डायनेमिक क्रिएटिव्स किस तरह DOOH कैंपेन को ज्यादा प्रासंगिक और जरूरत के हिसाब से तुरंत बदलाव करने वाला बना रहे हैं।
पैनल में सुमन पाल, हेड ऑफ मीडिया, एनालिटिक्स एंड पार्टनरशिप्स, विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटनिंग; डॉली दावड़ा, हेड-मार्केटिंग, बुकमायशो; मिखिल राज, सीपीओ, ब्लूस्टोन; रवींद्र शर्मा, ईवीपी और चीफ ऑफ ब्रैंड, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस एंड सीएसआर, एसबीआई लाइफ और प्रियंका बिसेन शाह, हेड ऑफ डिजिटल मार्केटिंग, बजाज ऑटो लिमिटेड शामिल हैं।
इस पैनल का संचालन हरेश नायक, फाउंडर एंड सीईओ, कनेक्ट नेटवर्क इंक. करेंगे।
DOOH कैंपेन की प्रभावशीलता मापना अहम
DOOH का इकोसिस्टम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मेजरमेंट और एट्रिब्यूशन भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पैनलिस्ट इस बात पर चर्चा करेंगे कि ब्रैंड्स और एजेंसियां अपने कैंपेन की प्रभावशीलता को किस तरह माप सकती हैं, सही एट्रिब्यूशन फ्रेमवर्क कैसे तैयार किया जा सकता है और OOH एक्सपोजर को कंज्यूमर के एक्शन से किस तरह जोड़ा जा सकता है।
इस चर्चा में मोबाइल और लोकेशन डेटा का इस्तेमाल भी एक अहम मुद्दा होगा। इससे ऑडियंस की आवाजाही को समझने, बेहतर टारगेटिंग करने और DOOH व डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच ज्यादा जुड़ा हुआ एक्सपीरियंस तैयार करने में मदद मिल सकती है।
पैनल में अलग-अलग सेक्टर्स में DOOH के नए इस्तेमाल के तरीकों पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही यह देखा जाएगा कि भारत में कैंपेन को बड़े स्तर पर चलाने में प्रोग्रामेटिक टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका हो सकती है।
चर्चा में यह भी समझने की कोशिश की जाएगी कि प्रोग्रामेटिक OOH इकोसिस्टम को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए किन चीजों की जरूरत है और विज्ञापनदाता जब ज्यादा एफिशिएंसी, फ्लेक्सिबिलिटी और मापने योग्य नतीजे चाहते हैं, तो आने वाले समय में यह माध्यम किस तरह बदल सकता है।