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बड़ा सवाल: क्या सुधीर चौधरी 'डीडी न्यूज' के लिए साबित होंगे गेमचेंजर?
जब प्रसार भारती ने मशहूर टीवी एंकर सुधीर चौधरी के नए शो के लिए 18 करोड़ रुपये सालाना (टैक्स सहित) खर्च करने की मंजूरी दी, तो इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
जब प्रसार भारती ने मशहूर टीवी एंकर सुधीर चौधरी के नए शो के लिए 18 करोड़ रुपये सालाना (टैक्स सहित) खर्च करने की मंजूरी दी, तो इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। यह शो, जिसे सुधीर चौधरी की कंपनी Essprit Productions Pvt Ltd तैयार करेगी, हफ्ते में पांच दिन 'डीडी न्यूज' पर प्रसारित होगा और साल भर में 260 एपिसोड दिखाए जाएंगे।
फैसले पर बंटी राय
इस फैसले के समर्थकों का कहना है कि यह 'डीडी न्यूज' की गिरती हुई दर्शक संख्या और विज्ञापन से होने वाली कमाई को बढ़ाने के लिए जरूरी कदम है। वहीं, कई विश्लेषकों और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों ने इस डील की भारी रकम, इसे दिए जाने की नॉमिनेशन-आधारित प्रक्रिया और एक बड़े पत्रकार के साथ इस स्तर की साझेदारी के संपादकीय असर पर सवाल उठाए हैं।
डील के पीछे की सोच
यह करार कई दौर की बातचीत के बाद हुआ और इसे सामान्य वित्तीय नियम (General Financial Rules) के नियम 194 के तहत मंजूरी दी गई, जो विशेष परिस्थितियों में सीधे अनुबंध की अनुमति देता है। अधिकारियों के मुताबिक, इसकी लागत केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा इसी तरह के कार्यक्रमों के लिए तय की गई सीमा के भीतर है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस शो की बौद्धिक संपदा (IPR) यानी अधिकार प्रसार भारती के पास ही रहेंगे।
लेकिन यह फैसला सिर्फ एक एंकर को लाने के लिए नहीं किया गया, बल्कि यह एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। सरकार का इरादा है कि 'डीडी न्यूज' को नए जमाने के मीडिया ट्रेंड्स के हिसाब से तैयार किया जाए। हालांकि, यह कितना कारगर होगा और इसे संपादकीय स्वतंत्रता व वित्तीय संतुलन के साथ कैसे लागू किया जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
सुधीर चौधरी की पॉपुलैरिटी का फायदा?
मीडिया इंडस्ट्री के कुछ जानकारों का कहना है कि सुधीर चौधरी के पिछले शो— Zee News पर "DNA" और Aaj Tak पर "Black & White"— काफी लोकप्रिय रहे और इन्होंने चैनलों को अच्छी TRP और विज्ञापन दिलाए। जो लोग इन चैनलों के अंदरूनी आंकड़ों को जानते हैं, उनके मुताबिक, इन शो को हमेशा बढ़िया व्यूअरशिप मिली और विज्ञापनदाताओं से प्रीमियम रेट हासिल हुए।
अगर इसे सही तरीके से हैंडल किया जाए, तो ''डीडी न्यूज'' पर भी इस तरह की सफलता दोहराई जा सकती है।
'डीडी न्यूज' को बदलाव की सख्त जरूरत
'डीडी न्यूज' और उसकी मूल संस्था प्रसार भारती लंबे समय से नए जमाने के मीडिया के साथ कदम मिलाने में पिछड़ती जा रही है। आज लोग स्मार्टफोन, यूट्यूब और सोशल मीडिया पर न्यूज देखते हैं, लेकिन 'डीडी न्यूज' अब भी पुरानी शैली में काम कर रहा है।
हालांकि, 'डीडी न्यूज' के पास ग्रामीण और क्षेत्रीय इलाकों में काफी ज्यादा पहुंच और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन इनोवेशन, प्रोडक्शन क्वॉलिटी और ब्रैंड वैल्यू में प्राइवेट चैनलों से पिछड़ गया है।
सरकारी चैनल होने के कारण इस पर दोहरी चुनौती है— एक तरफ इसे सरकारी फंड से चलना होता है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेट चैनलों से प्रतिस्पर्धा भी करनी पड़ती है। यही कारण है कि इसमें निजी टैलेंट को शामिल करने का फैसला किया गया है।
प्रसार भारती में नया नेतृत्व और बड़े फैसले
यह करार दिसंबर 2023 में नवनीत कुमार सहगल के प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद हुआ। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सहगल मीडिया और सांस्कृतिक प्रशासन का अनुभव रखते हैं और वह प्रसार भारती के कंटेंट और ऑपरेशन को मॉडर्न बनाने पर जोर देते रहे हैं।
उनके कार्यकाल में डिजिटल रणनीति मजबूत करने, कार्यक्रमों में नए प्रयोग करने और निजी-सरकारी भागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। सुधीर चौधरी के साथ हुआ करार इसी व्यापक सुधार का हिस्सा माना जा रहा है, न कि कोई अकेला संपादकीय फैसला।
'डीडी न्यूज' के अंदर भी मतभेद
'डीडी न्यूज' के अंदर से मिल रही खबरों के मुताबिक, इस फैसले को लेकर स्टाफ में भी बंटा हुआ माहौल है-
- कुछ एम्प्लॉयीज इस बदलाव को सकारात्मक मान रहे हैं और इसे चैनल को फिर से लोकप्रिय बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
- वहीं, कुछ एम्प्लॉयीज को इस बात की चिंता है कि कहीं चैनल सिर्फ एक एंकर पर ज्यादा निर्भर न हो जाए और सरकारी प्रसारक का पारंपरिक स्वरूप प्रभावित न हो।
ये मतभेद पूरी दुनिया में सार्वजनिक प्रसारकों के सामने मौजूद एक बड़ी बहस को दर्शाते हैं कि न्यूट्रैलिटी (तटस्थता) और इनोवेशन (नवाचार) के बीच संतुलन कैसे रखा जाए?
क्या टीवी न्यूज भी 'बॉलीवुड स्टाइल' में जा रही है?
सुधीर चौधरी को 18 करोड़ रुपये सालाना मिलने की खबर से एक नई बहस छिड़ गई है- क्या टीवी न्यूज अब "बॉलीवुड स्टार्स" जैसा बनने लगी है?
अब न्यूज एंकर सिर्फ पत्रकार नहीं रह गए, बल्कि उनकी डिजिटल फॉलोइंग और ब्रैंड वैल्यू भी देखी जाने लगी है। इसी वजह से सुधीर चौधरी की यह डील उन्हें मनोरंजन जगत के बड़े सितारों के आय वर्ग में खड़ा कर रही है।
मीडिया विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अब पूरी दुनिया में पत्रकारिता संस्थानों पर नहीं, बल्कि मशहूर व्यक्तियों पर ज्यादा निर्भर होती जा रही है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है- क्या यह ट्रेंड टिकेगा या फिर इससे खबरों और मनोरंजन के बीच की रेखा धुंधली हो जाएगी?
सरकारी प्रसारण बनाम बाजार की सच्चाई
दुनिया के बड़े सरकारी मीडिया संस्थान आज खुद को बनाए रखने के लिए नई रणनीतियां अपना रहे हैं-
- ब्रिटेन में बीबीसी (BBC) अब स्ट्रीमिंग और डिजिटल लाइसेंसिंग पर जोर दे रहा है।
- अमेरिका में पीबीएस (PBS) फंडिंग और सिंडिकेशन मॉडल पर निर्भर है।
लेकिन प्रसार भारती की स्थिति ज्यादा जटिल है, क्योंकि यह सरकारी नियंत्रण, नियामक नियमों और भारत की विशाल जनसंख्या व भाषाई विविधता से प्रभावित होता है।
क्या यह फैसला सही साबित होगा?
सुधीर चौधरी के साथ हुआ यह करार सिर्फ एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि यह संकेत भी देता है कि अब प्रसार भारती कॉम्पटीशन में आक्रामक तरीके से उतरना चाहता है। फिलहाल यह कदम सफल सुधार साबित होगा या फिर एक गलत फैसला, यह इस बात पर निर्भर करेगा-
- इसे कैसे लागू किया जाता है
- दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है
- और क्या प्रसार भारती सार्वजनिक प्रसारण के मूल्यों को बरकरार रख पाता है
फिलहाल फैसला अब दर्शकों के हाथ में है!
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