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OTT प्लेटफार्म्स नियंत्रित करने वाली याचिका पर SC का केन्द्र को नोटिस, मांगा जवाब
नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिये सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका पर गुरुवार को कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
नेटफ्लिक्स (Netflix) और एमेजॉन प्राइम (Amazon Prime) जैसे ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित करने के लिये दायर की गई जनहित याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और इस मामले में केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा यह नोटिस सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इंटरनेट व मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
इस याचिका में इन प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए एक स्वायत्त संस्था का अनुरोध किया गया है, लिहाजा इसी जवाब के लिए प्रधान न्यायाधीश एस.ए.बोबडे, न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने ये नोटिस जारी किया है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आज के समय में डिजिटल कंटेंट की निगरानी और इन पर कंट्रोल करने वाला कोई कानून नहीं है, जिसके चलते धूम्रपान, हिंसा, यौन दृश्य, अश्लील भाषा के कंटेंट बिना किसी रोक टोक दिखाया जा रहा है।
बता दें कि यह जनहित याचिका अधिवक्ता शशांक शेखर झा और अपूर्व अर्हटिया दायर की है। याचिका में धूम्रपान, हिंसा, यौन दृश्य, अश्लील भाषा को बिना किसी रोक-टोक के दिखाने को लेकर आपत्ति जाहिर की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ओटीटी प्लेटफार्म्स पर स्मोकिंग सींस में कोई वार्निंग भी नहीं दी जा रही है जो अनिवार्य है। ऐसे कंटेट दिखाए जा रहे है जो सामाजिक और नैतिक मानदंडों के मुताबिक नहीं है। लिहाजा याचिका में विभिन्न ओटीटी-स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स की सामग्री की निगरानी और प्रबंधन के लिए सुव्यवस्थित बोर्ड या एसोसिएशन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से अभी देश में सिनेमाघर जल्दी खुलने की उम्मीद नहीं है और ओटीटी-स्ट्रीमिंग और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को किसी प्रकार की मंजूरी के बगैर ही इसे प्रदर्शित करने का रास्ता दे दिया है।
याचिका के अनुसार, इस समय डिजिटल सामग्री की निगरानी या प्रबंधन के लिये कोई कानून या स्वायत्त संस्था नहीं है और यह बगैर किसी जांच परख के जनता के लिये उपलब्ध है।
ओटीटी-स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिये कोई कानून नही होने की वजह से हर दिन इसी आधार पर कोई न कोई मामला दायर हो रहा है। कानून में इस तरह की खामियों की वजह से सरकार को रोजाना जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारियों ने इसे नियंत्रित करने के लिये कुछ खास नहीं किया है।
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