साइनपोस्ट इंडिया लिमिटेड (Signpost India Limited) ने अपनी Nomination and Remuneration Committee में बदलाव किया है।
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Vikas Saxena
साइनपोस्ट इंडिया लिमिटेड (Signpost India Limited) ने अपनी Nomination and Remuneration Committee में बदलाव किया है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 4 सितंबर 2026 को सर्कुलर रेजॉल्यूशन के जरिए मेघना राजध्यक्ष (Meghna Rajadhyaksha) को इस कमेटी की चेयरपर्सन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 1 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि मेघना राजध्यक्ष कंपनी की एजिशनल डायरेक्टर हैं और नॉन-एग्जिक्यूटिव और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें Companies Act, 2013 की Section 178 और SEBI Listing Regulations के Regulation 19 के तहत Nomination and Remuneration Committee की चेयरपर्सन बनाया गया है।
इस बदलाव के बाद Signpost India की Nomination and Remuneration Committee में अब तीन सदस्य होंगे। मेघना राजध्यक्ष इसकी चेयरपर्सन होंगी, जबकि गिरीश कुलकर्णी और प्रशांत सांघवी, दोनों इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और कमेटी के मेंबर होंगे।
कंपनी ने इसके साथ ही Physical Securities के Transfer और Dematerialisation को लेकर शेयर होल्डर्स के लिए स्पेशल विंडो की जानकारी भी दी है। Signpost India ने बताया कि SEBI के 30 जनवरी 2026 के Circular के तहत 5 फरवरी 2026 से 4 फरवरी 2027 तक एक साल की स्पेशल विंडो खोली गई है।
यह स्पेशल विंडो उन Physical Securities के Transfer और Dematerialisation के लिए है, जिन्हें 1 अप्रैल 2019 से पहले खरीदा या बेचा गया था। इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जहां पहले किए गए Transfer Requests को किसी कमी के कारण Reject कर दिया गया था, वापस कर दिया गया था या उन पर कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
कंपनी ने योग्य शेयर होल्डर्स से कहा है कि वे इस स्पेशल विंडो के दौरान अपने Share Transfer Deeds को Lodge या Re-lodge कर सकते हैं और शेयरों को Dematerialise यानी Demat कराने का अनुरोध कर सकते हैं।
कंपनी के मुताबिक, Transfer के लिए जमा किए गए या दोबारा जमा किए गए Physical Shares को जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद केवल Dematerialised Form में ही Transfer किया जाएगा। साथ ही, Dematerialisation की तारीख से इन शेयरों पर एक साल का Lock-in Period रहेगा।
Eligible शेयर होल्डर्स अपने Transfer और Demat Requests के साथ जरूरी Documents कंपनी के Registrar and Share Transfer Agent (RTA) KFIN Technologies Limited को भेज सकते हैं। कंपनी ने इसके लिए Hyderabad स्थित KFIN Technologies के पते और ई-मेल के जरिए आवेदन की सुविधा दी है।
Signpost India ने शेयर होल्डर्स से अपील की है कि वे इस स्पेशल विंडो के दौरान जल्द से जल्द जरूरी प्रक्रिया पूरी करें, ताकि उनके शेयरों से जुड़े अधिकार सुरक्षित रह सकें। कंपनी ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations के Regulation 30 के तहत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी है।
ख्याति मल्टीमीडिया एंटरटेनमेंट (Khyati Multimedia Entertainment) के प्रमोटर यश कार्तिकभाई पटेल ने कंपनी के 18,000 इक्विटी शेयर ओपन मार्केट में बेच दिए हैं।
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Vikas Saxena
ख्याति मल्टीमीडिया एंटरटेनमेंट (Khyati Multimedia Entertainment) के प्रमोटर यश कार्तिकभाई पटेल ने कंपनी के 18,000 इक्विटी शेयर ओपन मार्केट में बेच दिए हैं। यह बिक्री 2 सितंबर 2026 को की गई। कंपनी के मुताबिक, यह सौदा ₹3.01 प्रति शेयर के भाव पर हुआ और इसकी कुल कीमत ₹54,180 रही।
इस बिक्री से पहले यश कार्तिकभाई पटेल के पास कंपनी के 18,000 शेयर थे, जो कंपनी की कुल मतदान पूंजी का 0.17% हिस्सा था। 18,000 शेयर बेचने के बाद अब कंपनी में उनकी हिस्सेदारी शून्य हो गई है।
कंपनी ने इस लेनदेन की जानकारी 3 सितंबर 2026 को BSE Limited को दी। यह जानकारी संबंधित नियामकीय नियमों के तहत साझा की गई है।
SEBI के नियमों के तहत दी जानकारी
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 के Regulation 29(2) और SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के Regulation 7 और Regulation 6 के तहत जारी की गई है।
यश कार्तिकभाई पटेल को कंपनी के प्रमोटर समूह के साथ मिलकर काम करने वाले व्यक्ति (Person Acting in Concert यानी PAC) के तौर पर माना जाता है। वह कंपनी के प्रमोटर और चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Kartik J Patel के बेटे हैं।
₹54,180 में हुई शेयरों की बिक्री
2 सितंबर को हुए इस लेनदेन में यश कार्तिकभाई पटेल ने कुल 18,000 इक्विटी शेयर बेचे। इन शेयरों की बिक्री ₹3.01 प्रति शेयर के भाव पर हुई। इस तरह लेनदेन की कुल कीमत ₹54,180 रही। शेयर बेचने के बाद अब कंपनी में यश कार्तिकभाई पटेल की कोई हिस्सेदारी नहीं बची है।
कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Kartik J Patel हैं। प्रमोटर समूह के साथ मिलकर काम करने वाले अन्य लोगों में जिग्नाबेन के. पटेल और जसुभाई एम. पटेल शामिल हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन के संबंध में शेयर बेचने वाले व्यक्ति की ओर से डेरिवेटिव कारोबार नहीं किया गया।
फिल्मसिटी मीडिया (Filmcity Media Limited) को वित्त वर्ष 2025-26 में ₹26.64 लाख का शुद्ध घाटा हुआ है। कंपनी का घाटा पिछले वित्त वर्ष के ₹15.27 लाख के मुकाबले बढ़ गया है।
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Vikas Saxena
फिल्मसिटी मीडिया (Filmcity Media Limited) को वित्त वर्ष 2025-26 में ₹26.64 लाख का शुद्ध घाटा हुआ है। कंपनी का घाटा पिछले वित्त वर्ष के ₹15.27 लाख के मुकाबले बढ़ गया है। कंपनी ने बताया है कि इस वित्त वर्ष के दौरान उसके कारोबार से कोई आय नहीं हुई। इसका मुख्य कारण पूंजी की कमी और पारंपरिक मीडिया क्षेत्र में बनी चुनौतियां रही हैं।
कंपनी के वित्तीय नतीजों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कारोबारी गतिविधियों से आय शून्य रही, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹124.80 लाख थी। वहीं, अन्य आय ₹0.26 लाख रही, जो पिछले साल के ₹0.30 लाख से कम है। इस तरह कंपनी की कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में सिर्फ ₹0.26 लाख रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹125.10 लाख थी।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल खर्च ₹26.90 लाख रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹140.37 लाख था। खर्च में कर्मचारियों से जुड़े लाभ पर ₹7.16 लाख और अन्य परिचालन खर्च पर करीब ₹19.55 लाख खर्च हुए। कारोबार से आय पूरी तरह खत्म होने के कारण कंपनी के तय खर्चों की भरपाई नहीं हो सकी और इसी वजह से शुद्ध घाटा बढ़कर ₹26.64 लाख हो गया।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो 31 मार्च 2026 तक उसके पास कुल ₹360.55 लाख की संपत्ति थी। इसमें ₹287.79 लाख की माल-सूची शामिल थी, जिसमें मुख्य रूप से मीडिया सामग्री से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। वहीं, कंपनी के पास नकद और नकद के बराबर रकम सिर्फ ₹0.71 लाख थी।
कंपनी का नाम बदलने का प्रस्ताव
फिल्मसिटी मीडिया की 32वीं वार्षिक आम बैठक यानी AGM में कंपनी का नाम बदलने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसके तहत कंपनी का नाम “Filmcity Media Limited” से बदलकर “Filmcity Media and Consultancy Limited” करने के लिए विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, नाम में बदलाव का मकसद उसके कारोबार को आगे परामर्श सेवाओं, खासकर निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों तक बढ़ाने की योजना को दिखाना है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में कंपनी ने डाक मतपत्र यानी Postal Ballot के जरिए अपने Memorandum of Association (MOA) के मुख्य उद्देश्य वाले प्रावधान में बदलाव किया था। इसमें रियल एस्टेट विकास, निर्माण और वित्तीय उत्पादों के वितरण जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया था। ऐसे में प्रस्तावित नया नाम कंपनी के विस्तारित कारोबारी उद्देश्यों के अनुरूप रखने की कोशिश है।
दो नए स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति का प्रस्ताव
AGM में शेयरधारकों से दो नए स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति को भी मंजूरी देने के लिए कहा जाएगा। इनमें शिवि जिंदल और इति गोयल शामिल हैं। शिवि जिंदल के पास मानव संसाधन, कारोबार प्रबंधन और अनुपालन से जुड़े क्षेत्रों का अनुभव है। वहीं, इति गोयल को लेखा, वित्त और बीमा के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। दोनों स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति 12 अगस्त 2026 से पांच साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है।
इसके अलावा, कंपनी की कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कीर्ति विष्णु तिवारी बारी-बारी से सेवानिवृत्ति के लिए निर्धारित हैं और उन्होंने दोबारा नियुक्ति के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की है। Mohit Jain के मार्च 2026 में मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी CFO पद से इस्तीफा देने के बाद कीर्ति विष्णु तिवारी कंपनी में CFO की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं।
29 सितंबर को होगी 32वीं AGM
Filmcity Media Limited की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे मुंबई स्थित कंपनी के पंजीकृत कार्यालय में आयोजित की जाएगी। AGM में कंपनी के नाम में बदलाव, नए स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और अन्य कॉरपोरेट मामलों पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।
कंपनी ने बताया है कि सदस्यों का रजिस्टर और शेयर हस्तांतरण पुस्तिकाएं 23 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक बंद रहेंगी। वहीं, ई-वोटिंग के लिए कट-ऑफ तारीख मंगलवार, 22 सितंबर 2026 तय की गई है। 22 सितंबर 2026 को कंपनी के इक्विटी शेयर रखने वाले शेयरधारक रिमोट ई-वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। इसके लिए NSDL की ई-वोटिंग सुविधा का इस्तेमाल किया जाएगा।
टाइम्स ग्रुप (Times Group) की मीडिया सॉल्यूशन यूनिट ऑप्टिमल मीडिया सॉल्यूशंस (OMS) में इस हफ्ते रीस्ट्रक्चरिंग एक्साइज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
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Samachar4media Bureau
टाइम्स ग्रुप (Times Group) की मीडिया सॉल्यूशन यूनिट ऑप्टिमल मीडिया सॉल्यूशंस (OMS) में इस हफ्ते रीस्ट्रक्चरिंग एक्साइज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस दौरान बड़ी संख्या में एम्प्लॉयीज के प्रभावित होने की चर्चा है।
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, करीब 40 एम्प्लॉयीज को इसी हफ्ते नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया है। हालांकि, कितने पद वास्तव में प्रभावित हुए हैं और इस रीस्ट्रक्चरिंग के पीछे कंपनी का सटीक कारण क्या है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि खबर लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के साथ-साथ पूरी विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री में पुनर्गठन का दौर देखने को मिल रहा है। कंपनियां अपने संगठनात्मक ढांचे, खर्च और कारोबारी प्राथमिकताओं की दोबारा समीक्षा कर रही हैं।
ऑप्टिमल मीडिया सॉल्यूशंस (OMS) टाइम्स ग्रुप की मीडिया समाधान इकाई है। कंपनी मीडिया प्लानिंग, मीडिया खरीदारी और इससे जुड़ी अन्य सेवाएं उपलब्ध कराती है और टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा है।
एक्सचेंज4मीडिया ने एम्प्लॉयीज की छंटनी और पुनर्गठन को लेकर ऑप्टिमल मीडिया सॉल्यूशंस के प्रेसिडेंट समीर सैनानी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की है। इसके अलावा BCCL ग्रुप के सीईओ (पब्लिशिंग) शिवकुमार सुंदरम से भी यह स्पष्ट करने के लिए सवाल भेजे गए हैं कि क्या यह कदम किसी बड़े संगठनात्मक या कारोबारी बदलाव का हिस्सा है। फिलहाल, खबर प्रकाशित किए जाने तक दोनों की ओर से जवाब का इंतजार है।
मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Prime Focus Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के लिए ₹3,000 करोड़ तक की रकम जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Prime Focus Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के लिए ₹3,000 करोड़ तक की रकम जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बोर्ड की यह बैठक 4 सितंबर 2026 को हुई। कंपनी यह फंड Qualified Institutions Placement (QIP) या अन्य अनुमति प्राप्त माध्यमों के जरिए जुटा सकती है।
कंपनी के मुताबिक, फंड जुटाने के लिए Equity Shares या Debt Securities जारी करने के विकल्पों पर विचार किया गया है। इसके अलावा बोर्ड ने Preferential Issue, Rights Issue और ADR (American Depository Receipts) तथा GDR (Global Depository Receipts) जैसे Depository Receipts जारी करने के विकल्पों का भी मूल्यांकन किया है।
हालांकि, इन सभी विकल्पों को लागू करने के लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी के साथ-साथ जरूरी Regulatory और Statutory Approvals लेना होगा। यानी बोर्ड की मंजूरी के बाद भी फंड जुटाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित मंजूरियां जरूरी रहेंगी।
Authorized Share Capital बढ़ाने पर भी विचार
फंड जुटाने की योजना के साथ कंपनी के बोर्ड ने Authorized Share Capital बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया है। इसके लिए कंपनी के Memorandum of Association (MOA) में मौजूद Capital Clause में जरूरी बदलाव करना होगा। यह प्रक्रिया भी संबंधित Regulatory Approvals मिलने के बाद आगे बढ़ेगी।
ट्रेडिंग विंडो बंद
इस बीच, SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के नियमों के तहत कंपनी के Securities में ट्रेडिंग के लिए विंडो फिलहाल बंद है। कंपनी की ओर से बताया गया है कि बैठक के नतीजे घोषित होने के 48 घंटे बाद ट्रेडिंग विंडो फिर से खुलेगी।
Prime Focus ने यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 29 के तहत दी है। कंपनी की ओर से जारी यह सूचना National Stock Exchange (NSE), BSE Limited और कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
भारत की मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में CCI की जांच के बीच TAI और तीन Debenture Trustees पर आए ताजा Cartel Order से Media Agencies की चिंता बढ़ गई है।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर ।।
भारत की मीडिया व ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI की चल रही जांच के बीच Trustees’ Association of India (TAI) और तीन Debenture Trustees के खिलाफ आया ताजा Cartel Order अब मीडिया एजेंसीज के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इस मामले में CCI ने TAI, IDBI Trusteeship Services, Axis Trustee Services और SBI CAP Trustee Company को सेवाओं की फीस तय करने और उस तय व्यवस्था को लागू कराने के मामले में दोषी पाया है।
हालांकि, CCI ने इस मामले में कोई Monetary Penalty यानी आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया है। रेगुलेटर ने संबंधित पक्षों की परिस्थितियों और कुछ Mitigating Circumstances को देखते हुए उन्हें ऐसा आचरण बंद करने का आदेश दिया है। लेकिन इस आदेश का असर सिर्फ Financial Sector तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि CCI ने साफ कर दिया है कि किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच कीमतों को लेकर सामूहिक फैसला लेने के लिए किया जाता है, तो वह Competition Law से बचने की ढाल नहीं बन सकता।
यही बात भारत की मीडिया एजेंसीज के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में Commission, Rebate, Discount और दूसरे Commercial Terms को लेकर पहले से CCI की जांच चल रही है। ऐसे में TAI मामले का फैसला यह संकेत देता है कि रेगुलेटर किसी Industry Practice को Cartel का सबूत मानने के लिए किन चीजों पर ध्यान दे सकता है।
सिर्फ बातचीत नहीं, उसके बाद क्या हुआ यह भी अहम
2 सितंबर को जारी CCI के आदेश में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। रेगुलेटर ने सिर्फ यह नहीं देखा कि अलग-अलग कंपनियों ने Pricing को लेकर आपस में बातचीत की थी या नहीं। उसने यह भी देखा कि बातचीत के बाद उस व्यवस्था को लागू कैसे किया गया।
CCI के मुताबिक, मार्च 2021 में TAI के सदस्यों ने Listed Debt Securities से जुड़ी सेवाओं के लिए एक Benchmark Pricing Structure पर सहमति बनाई थी। जांच में पाया गया कि यह Benchmark असल में एक तरह का Minimum Price या Floor बन गया था। Association की तरफ से यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी की गई कि कोई सदस्य इससे कम कीमत पर अपनी सेवा न दे।
मामला तब और गंभीर हो गया जब CCI को ऐसे सबूत मिले कि TAI ने केवल Benchmark तय करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके पालन को लेकर भी हस्तक्षेप किया।
एक मामले में MITCON ने HUDCO के एक Mandate के लिए कम फीस का Quote दिया था। आरोप के मुताबिक, TAI ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और Trustee ने अपनी कम बोली वापस लेकर उससे ज्यादा कीमत का नया Quote दिया। CCI ने इसे इस बात के सबूत के तौर पर देखा कि Benchmark सिर्फ एक Recommendation नहीं था, बल्कि उसे लागू भी कराया जा रहा था।
यही फर्क मीडिया Industry की जांच में भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
मीडिया एजेंसीज की जांच में क्यों महत्वपूर्ण है TAI का मामला?
ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में CCI पहले से ही बड़ी मीडिया एजेंसीज के बीच कथित Coordination की जांच कर रहा है। मार्च 2025 में CCI ने कई Agency Offices और Industry Bodies पर कार्रवाई की थी। इनमें Advertising एजेंसीज Association of India यानी AAAI, Indian Society of Advertisers यानी ISA और Indian Broadcasting and Digital Foundation यानी IBDF भी शामिल थे।
यह जांच CCI के Leniency Framework के तहत मिली जानकारियों के बाद शुरू हुई थी। इस मामले में Dentsu की ओर से भी disclosures किए जाने की बात सामने आई थी।
जांच के दौरान CCI ने Senior Agency Executives के बीच हुई WhatsApp बातचीत और Meetings की भी पड़ताल की। शुरुआती जांच में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रतिस्पर्धी एजेंसीज ने Clients को दिए जाने वाले जवाब, Pitches और Pricing को लेकर आपस में Coordination किया और एक-दूसरे से कम कीमत पर Quote नहीं करने जैसी व्यवस्था पर सहमति बनाई।
जांच में Rebates और ऐसे Commercial Arrangements को लेकर भी बातचीत का जिक्र किया गया, जिनका पालन नहीं करने वाली एजेंसीज पर दबाव डालने की बात सामने आई थी।
ऐसे में TAI का फैसला मीडिया एजेंसीज के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CCI अब यह देखने पर ज्यादा ध्यान दे सकता है कि एजेंसीज ने सिर्फ आपस में बातचीत की थी या उस बातचीत के बाद वास्तव में अपने Commercial Decisions को एक-दूसरे के हिसाब से बदल दिया था।
WhatsApp Messages बन सकते हैं बड़ा सबूत
मीडिया Cartel Investigation में Digital Communication भी एक अहम मुद्दा है। CCI की शुरुआती सामग्री में प्रतिस्पर्धी एजेंसीज के Senior Executives के बीच WhatsApp Group में हुई बातचीत की जांच का भी जिक्र है।
बताया गया कि इन बातचीत में Pitches, Client Responses और Commercial Terms जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। CCI ने शुरुआती तौर पर इसे Competing Advertising एजेंसीज के बीच संभावित "Alignment" से जोड़कर देखा।
Cartel की जांच में यह अंतर काफी महत्वपूर्ण है। किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन की तरफ से जारी कोई सामान्य Guideline यह कहकर बचाई जा सकती है कि वह सिर्फ Industry Recommendation थी। लेकिन अगर WhatsApp बातचीत में प्रतिस्पर्धी कंपनियां यह तय करती दिखाई दें कि वे कितना Charge करेंगी, कितना Discount देंगी या किसी खास Client के सामने किस तरह का Commercial Proposal रखेंगी, तो इसे Coordination के सबूत के तौर पर देखा जा सकता है।
एक Competition Lawyer के मुताबिक, अब असली सवाल यह होगा कि बातचीत में सिर्फ अलग-अलग Businesses ने अपनी राय साझा की थी या बातचीत के बाद कोई Agreement हुआ और फिर उसके मुताबिक व्यवहार भी किया गया।
अगर Agreement और उसके बाद उसी के अनुरूप Conduct साबित हो जाता है, तो "यह तो Industry Practice थी" वाला बचाव कमजोर पड़ सकता है।
‘Industry Practice’ का बचाव भी मुश्किल हो सकता है
TAI मामले से मीडिया Industry के लिए सबसे बड़ा सबक यही निकलता है। Trustees ने अपने Pricing Structure को बढ़ी हुई रेगुलेटरy Responsibilities और SEBI के साथ उनकी भूमिका से जोड़कर देखा था। लेकिन CCI ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया कि रेगुलेटरy Oversight की वजह से प्रतिस्पर्धी Trustees को मिलकर अपनी कीमत तय करने की अनुमति मिल जाती है।
इसका असर ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में भी पड़ सकता है। मीडिया एजेंसीज यह तर्क दे सकती हैं कि कुछ Common Commercial Practices एजेंसीज, Advertisers, Broadcasters और इंडस्ट्री एसोसिएशनs के बीच चर्चा से विकसित हुई थीं।
लेकिन CCI के सामने असली सवाल इससे अलग हो सकता है।
क्या Industry Body ने एजेंसीज को आपस में Coordination करने के लिए कहा था, या एजेंसीज ने खुद यह तय किया था कि वे एक-दूसरे के साथ Coordination करेंगी?
अगर दूसरी स्थिति साबित होती है, तो किसी Industry Body या रेगुलेटरy Environment की मौजूदगी उन्हें Competition Law से सुरक्षा नहीं दे सकती।
Price Fixing से ज्यादा गंभीर हो सकता है Enforcement
TAI Order का शायद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ Benchmark Pricing नहीं, बल्कि उसके पालन को लेकर हुई Monitoring और Enforcement है।
CCI ने पाया कि TAI ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उसके Members Benchmark का पालन करें। जब किसी Member ने तय सीमा से कम Quote किया, तो हस्तक्षेप भी किया गया।
मीडिया Industry की जांच में भी ऐसी ही बातें सामने आने का दावा किया गया है। CCI के दस्तावेजों में कथित तौर पर ऐसे प्रयासों का जिक्र है, जिनके तहत तय Commercial Positions का पालन नहीं करने वाली एजेंसीज को Business से दूर रखने या उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
अगर CCI इस तरह के Conduct को साबित कर देता है, तो TAI मामले और मीडिया Cartel Investigation के बीच समानता और मजबूत हो सकती है।
Experts के मुताबिक, सिर्फ Price Fixing का आरोप एक बात है, लेकिन अगर यह भी साबित हो जाए कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने मिलकर उस कंपनी को रोकने की कोशिश की जो तय व्यवस्था से हट रही थी, तो मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है।
इससे यह संकेत मिल सकता है कि मकसद सिर्फ Industry Consensus बनाना नहीं था, बल्कि पूरे Market के व्यवहार को बदलना था।
Smaller मीडिया एजेंसीज पर भी पड़ सकता है असर
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू Smaller और Independent मीडिया एजेंसीज से जुड़ा है।
मीडिया Cartel Investigation में बड़ी एजेंसीज के अलावा ऐसी एजेंसीज से जुड़े कथित Conduct पर भी ध्यान दिया गया है जो सबसे बड़े Networks का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में TAI-HUDCO मामले की तरह यह भी देखा जा सकता है कि क्या बड़ी एजेंसीज ने छोटी या Independent एजेंसीज को कम कीमत पर Commercial Offer देने से रोकने की कोशिश की।
अगर कोई छोटी Agency किसी Client को ज्यादा Aggressive Commercial Proposal देती है और बड़ी एजेंसीज मिलकर उसे मीडिया Inventory या Clients तक पहुंचने से रोकने की कोशिश करती हैं, तो CCI इसे Competition को Restrict करने के प्रयास के रूप में देख सकता है।
इस स्थिति में मामला सिर्फ Price Coordination तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Market Competition को प्रभावित करने का सवाल भी उठ सकता है।
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, Executives पर भी नजर
मीडिया एजेंसीज के लिए TAI Order का एक और महत्वपूर्ण पहलू Individual Executives की जिम्मेदारी से जुड़ा है।
CCI ने इस मामले में कुछ Individuals को Competition Act की Section 48 के तहत जिम्मेदार माना है, जहां उनके Anti-Competitive Conduct में शामिल होने और उनकी भूमिका स्थापित हुई।
इसका मतलब यह है कि अगर मीडिया Cartel Investigation में भी Cartel Conduct साबित होता है, तो जांच सिर्फ Agency की Corporate Entity तक सीमित नहीं रह सकती।
Investigators यह भी देख सकते हैं कि बातचीत किसने शुरू की, Commercial Position को किसने मंजूरी दी, Competitors के साथ किसने बातचीत की और किसी Agreement को लागू कराने में किसकी भूमिका रही।
इस वजह से Senior Agency Executives के लिए अनौपचारिक बातचीत भी भविष्य में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
CCI ने जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन मीडिया एजेंसीज को राहत मानना ठीक नहीं
TAI मामले में CCI ने Monetary Penalty नहीं लगाई है। पहली नजर में यह मीडिया एजेंसीज के लिए राहत जैसी बात लग सकती है, लेकिन इसे भविष्य के मामले का संकेत मानना सही नहीं होगा।
CCI ने TAI मामले में Penalty नहीं लगाने के पीछे कई Mitigating Circumstances का उल्लेख किया। इनमें संबंधित अवधि में Association की Income नहीं होना, कुछ Trustees की ओर से Benchmark से कम Fees लेना और जांच में Cooperation करना शामिल था।
किसी बड़े Advertising Network का मामला इससे काफी अलग हो सकता है। अगर CCI भविष्य में किसी मीडिया Cartel को लंबे समय तक चलने वाला और बड़ी Revenue से जुड़ा Coordination साबित करता है, तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
इसके अलावा Financial Penalty ही एकमात्र जोखिम नहीं है। Cartel साबित होने पर एजेंसीज को Reputational Damage, प्रभावित Clients की तरफ से Litigation, Commercial Contracts की जांच और Commission, Rebates तथा मीडिया Buying Arrangements के तरीके में बड़े बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।
CCI का संदेश मीडिया Industry के लिए भी साफ
TAI का यह आदेश भारत की Advertising और मीडिया Industry के लिए एक बड़ा संकेत माना जा सकता है। किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन का Meeting Room कंपनियों को Competition Law से Immunity नहीं दे सकता।
अगर एजेंसीज अपने Prices, Discounts और Commercial Strategies स्वतंत्र रूप से तय करती हैं, तो Competition बनी रहती है। लेकिन अगर प्रतिस्पर्धी एजेंसीज मिलकर इन Terms को तय करती हैं और फिर किसी Association, WhatsApp Group, Broadcaster Relationship या किसी दूसरे माध्यम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं कि सभी उसी व्यवस्था का पालन करें, तो Conduct की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।
इसलिए मीडिया एजेंसीज के लिए CCI की मौजूदा जांच का अगला चरण काफी अहम होने वाला है। रेगुलेटर के लिए सिर्फ यह साबित करना काफी नहीं होगा कि एजेंसीज के बीच बातचीत हुई थी। उसे यह भी स्थापित करना होगा कि कोई Agreement हुआ था या नहीं, उसमें कौन-कौन शामिल थे, उसे किस तरह लागू किया गया और उसका Competition पर क्या असर पड़ा।
अब मीडिया Industry के सामने असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एजेंसीज ने Pricing पर चर्चा की थी या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा सबूत है जिससे यह साबित हो सके कि एजेंसीज ने कीमत पर आपस में सहमति बनाई और फिर यह भी सुनिश्चित किया कि बाकी खिलाड़ी उसी नियम के मुताबिक काम करें।
अगर ऐसा साबित होता है, तो TAI मामले में CCI की ओर से अपनाया गया दृष्टिकोण मीडिया Cartel Investigation के लिए बेहद महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
अगर आप चाहें, तो इसी खबर के लिए मैं और ज्यादा दमदार, एक्सक्लूसिव और न्यूज़ पोर्टल वाली 8-10 हेडलाइन भी बना सकता हूं।
एडोब ने अनिल चक्रवर्ती को अगला सीईओ नियुक्त किया है। वह 1 दिसंबर 2026 से पद संभालेंगे, जबकि वर्तमान सीईओ शांतनु नारायण कार्यकारी चेयर की भूमिका में जाएंगे।
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Samachar4media Bureau
एडोब (Adobe) के निदेशक मंडल ने अनिल चक्रवर्ती (Anil Chakravarthy) को कंपनी का अगला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की घोषणा की है। चक्रवर्ती 1 दिसंबर 2026 से सीईओ का पद संभालेंगे और इसी तारीख से कंपनी के निदेशक मंडल में भी शामिल होंगे।
मौजूदा सीईओ शांतनु नारायण (Shantanu Narayen) इसके बाद कार्यकारी चेयर की भूमिका में चले जाएंगे। वह नेतृत्व परिवर्तन को सुचारु बनाने और कंपनी के मौजूदा बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए चक्रवर्ती के साथ मिलकर काम करेंगे।
शांतनु नारायण ने अनिल चक्रवर्ती को परिवर्तनकारी नेतृत्व का अनुभवी अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके पास कंपनी के कारोबार की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि अनिल चक्रवर्ती ने अलग-अलग ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण उत्पाद तैयार करने और उन्हें बाजार में सफलतापूर्वक पहुंचाने की क्षमता साबित की है।
अनिल चक्रवर्ती जनवरी 2020 में एडोबी से जुड़े थे। उस समय उन्हें Executive Vice President और General Manager की जिम्मेदारी दी गई थी और वह डिजिटल एक्सपीरियंस कारोबार का नेतृत्व कर रहे थे।
सितंबर 2020 में उनकी जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ाया गया। उन्हें कंपनी के वैश्विक फील्ड ऑपरेशंस की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई, जिसके तहत वह उद्यम ग्राहकों के लिए एडोबी के क्रिएटिविटी, प्रोडक्टिविटी और अन्य उत्पादों के पूरे पोर्टफोलियो से जुड़े कारोबार को देख रहे थे।
दिसंबर 2021 में उन्हें Digital Experience और Worldwide Field Operations के President पद पर पदोन्नत किया गया। एडोब में अनिल चक्रवर्ती की नई जिम्मेदारी ऐसे समय में शुरू होगी, जब कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के तेजी से बदलते दौर से गुजर रही है।
केबल और ब्रॉडबैंड कंपनी DEN Networks Limited की 19वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी से पास हो गए हैं।
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Vikas Saxena
केबल और ब्रॉडबैंड कंपनी DEN Networks Limited की 19वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी से पास हो गए हैं। कंपनी ने 3 सितंबर को स्टॉक एक्सचेंजों को AGM के Voting Results और Consolidated Scrutinizer’s Report की जानकारी दी।
कंपनी की 19वीं AGM 2 सितंबर 2026 को Video Conferencing (VC) और Other Audio-Visual Means (OAVM) के जरिए हुई थी। इस बैठक में शेयरधारकों के सामने कुल चार प्रस्ताव रखे गए थे। Scrutinizer’s Report के मुताबिक, सभी चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हुए।
Financial Statements को मिली मंजूरी
पहले प्रस्ताव के तहत कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के Audited Standalone Financial Statements के साथ Board of डायरेक्टरs और Auditors की रिपोर्ट को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 35.86 करोड़ से ज्यादा वोट पड़े, जबकि केवल 8,584 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वैध वोटों में करीब 99.9976% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
पहले प्रस्ताव के दूसरे हिस्से में कंपनी के Audited Consolidated Financial Statements और Auditors की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.9772% वोट पड़े, जबकि 0.0228% वोट विरोध में रहे। यह प्रस्ताव भी पास हो गया।
अनुज जैन फिर बने डायरेक्टर
दूसरे प्रस्ताव में अनुज जैन (DIN: 08351295) की डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्ति को मंजूरी दी गई। अनुज जैन रोटेशन आधार पर रिटायर हो रहे थे और AGM में उनकी दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया था। वोटिंग रिजल्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव के पक्ष में 35.83 करोड़ से ज्यादा वोट पड़े, जबकि 3.81 लाख से ज्यादा वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वोटों में 99.8937% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
कॉस्ट ऑडिटर्स की फीस को भी मंजूरी
तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के remuneration यानी पारिश्रमिक को ratify करने की मंजूरी मांगी गई थी। इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों का भारी समर्थन मिला। करीब 99.9976% वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़े, जबकि सिर्फ 0.0024% वोट इसके खिलाफ रहे।
Related Party Transactions को भी मिली मंजूरी
चौथा प्रस्ताव कंपनी के Material Related Party Transactions से जुड़ा था। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 6,41,584 वोट पड़े, जबकि 8,636 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी कुल वोटों में करीब 98.67% वोट प्रस्ताव के समर्थन में रहे।
सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास
Scrutinizer की रिपोर्ट में बताया गया है कि AGM में रखे गए Resolution 1 से 4 तक सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत (Requisite Majority) के साथ पास हो गए। इन प्रस्तावों पर Remote e-Voting और AGM के दौरान e-Voting, दोनों के जरिए वोटिंग कराई गई थी।
कंपनी के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की Cut-off Date तक कुल 1,49,649 शेयरधारक रिकॉर्ड में दर्ज थे। AGM में Video Conferencing के जरिए 10 Promoter/Promoter Group shareholders और 198 Public shareholders ने हिस्सा लिया।
GTPL Hathway Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी की है। यह रिपोर्ट कंपनी की Annual Report 2025-26 का हिस्सा है।
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Vikas Saxena
GTPL Hathway Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी की है। यह रिपोर्ट कंपनी की Annual Report 2025-26 का हिस्सा है। रिपोर्ट में कंपनी ने पर्यावरण, एम्प्लॉयीज, ग्राहकों, डेटा सुरक्षा, कॉरपोरेट गवर्नेंस और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े अपने काम और आगे के लक्ष्यों की जानकारी दी है।
2027 तक ESG के लिए कई लक्ष्य
GTPL Hathway ने वित्त वर्ष 2027 तक कई ESG (Environmental, Social and Governance) लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य है कि उसके 80 फीसदी ऑफिस ISO 45001 सर्टिफाइड हों और सभी सुविधाओं में 100 फीसदी Occupational Health and Safety Management System (OHSMS) लागू किया जाए।
इसके अलावा कंपनी तीसरे पक्ष के 50 फीसदी कॉन्ट्रैक्टर्स और पार्टनर्स की ड्यू डिलिजेंस करने, स्थायी एम्प्लॉयीज को 100 फीसदी Health & Safety Training देने और पैरेंटल लीव के बाद एम्प्लॉयीज की 100 फीसदी वापसी और रिटेंशन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।
कंपनी ने अपनी महिला एम्प्लॉयीज की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 10 फीसदी करने और स्थायी एम्प्लॉयीज में मानवाधिकारों को लेकर 100 फीसदी जागरूकता का लक्ष्य भी रखा है।
अभी कहां तक पहुंची कंपनी?
रिपोर्ट के मुताबिक, FY 2025-26 में GTPL Hathway के 51 फीसदी स्थायी एम्प्लॉयीज को Health & Safety Training दी गई। पैरेंटल लीव लेने वाले एम्प्लॉयीज का 100 फीसदी Return to Work Rate रहा। वहीं कंपनी में महिला एम्प्लॉयीज की हिस्सेदारी 5 फीसदी रही।
मानवाधिकारों को लेकर 94 फीसदी स्थायी एम्प्लॉयीज को जागरूक किया जा चुका है। कंपनी ने कहा है कि बाकी लक्ष्य अभी जारी प्रक्रिया में हैं और आने वाले वर्षों में उनकी प्रगति की जानकारी दी जाएगी।
2,114 एम्प्लॉयीज, 26 राज्यों में कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास कुल 2,114 एम्प्लॉयीज थे। इनमें 631 स्थायी और 1,483 अन्य एम्प्लॉयीज शामिल हैं। कंपनी की महिला एम्प्लॉयीज की संख्या 102 है।
GTPL Hathway डिजिटल टीवी और वायर ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी के मुताबिक उसकी सेवाएं देश के 26 राज्यों में उपलब्ध हैं और उसका कारोबार Digital TV तथा Wired Broadband Services पर केंद्रित है।
डेटा सुरक्षा पर भी जोर
कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी को अहम जोखिमों में शामिल किया है। GTPL के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में डेटा और ट्रांजैक्शन होने की वजह से साइबर और सूचना सुरक्षा से जुड़े जोखिम महत्वपूर्ण हैं।
कंपनी ने बताया कि उसके पास साइबर रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क है और एम्प्लॉयीज, ग्राहकों तथा अन्य स्टेकहोल्डर्स के बीच साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी को लेकर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं। कंपनी ISO 27001 से भी प्रमाणित है।
कंपनी के पास ISO की तीन सर्टिफिकेशन
GTPL Hathway के पास ISO 9001:2015, ISO 20000-1:2018 और ISO 27001:2013 सर्टिफिकेशन हैं। कंपनी ने बताया कि उसकी सभी प्रमुख नीतियां NGRBC के नौों सिद्धांतों को कवर करती हैं और इन्हें बोर्ड की मंजूरी प्राप्त है।
सेट-टॉप बॉक्स को दोबारा इस्तेमाल करने पर जोर
कंपनी ने ई-वेस्ट कम करने के लिए इस्तेमाल किए गए सेट-टॉप बॉक्स को दोबारा इस्तेमाल करने और रिफर्बिश करने की व्यवस्था की है। लोकल केबल ऑपरेटर्स के जरिए पुराने सेट-टॉप बॉक्स वापस लिए जाते हैं और जहां संभव हो, उन्हें रिफर्बिश करके दोबारा ग्राहकों के इस्तेमाल में लाया जाता है।
जो उपकरण पुराने या खराब हो चुके हैं और दोबारा इस्तेमाल नहीं किए जा सकते, उन्हें अधिकृत और प्रमाणित ई-वेस्ट रिसाइक्लर्स के जरिए निपटाया जाता है।
118.58 टन कचरा हुआ जनरेट
FY 2025-26 में कंपनी ने कुल 118.58 मीट्रिक टन कचरा जनरेट होने की जानकारी दी है। इसमें 101.81 टन ई-वेस्ट, 14.81 टन बैटरी वेस्ट और 1.96 टन प्लास्टिक वेस्ट शामिल है। कंपनी के मुताबिक इस पूरे 118.58 टन कचरे को रिसाइक्लिंग के जरिए रिकवर किया गया। पिछले वित्त वर्ष में कुल कचरा 119.49 मीट्रिक टन था।
एनर्जी इस्तेमाल में भी सुधार
कंपनी की कुल ऊर्जा खपत FY 2025-26 में 26,086.11 GJ रही, जबकि FY 2024-25 में यह 26,134.19 GJ थी। वहीं ऊर्जा की तीव्रता 1.19 GJ प्रति मिलियन रुपये के मुकाबले घटकर 1.06 GJ प्रति मिलियन रुपये हो गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी की ऊर्जा खपत में रिन्यूएबल सोर्स से कोई खपत दर्ज नहीं की गई।
GHG Emissions में भी कमी
FY 2025-26 में कंपनी का Scope 1 GHG Emission 77.41 tCO2e रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 88.42 tCO2e था। Scope 2 emissions 4,928.99 tCO2e रहा, जो FY 2024-25 के 5,023.81 tCO2e से कम है।
कंपनी के Scope 1 और Scope 2 emissions की कुल intensity भी 0.23 से घटकर 0.20 tCO2e प्रति मिलियन रुपये हो गई। हालांकि कंपनी ने कहा है कि उसने GHG emissions को कम करने के लिए कोई अलग प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया है।
CSR के जरिए शिक्षा और बेटियों के सशक्तिकरण पर फोकस
GTPL Hathway की CSR गतिविधियों में शिक्षा, हेल्थकेयर, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके CSR प्रोजेक्ट्स से Education में 2,020 लोग, Daughter Empowerment प्रोजेक्ट से 61,500 लोग और Education and Promoting Healthcare से 290 लोग लाभान्वित हुए।
ग्राहकों की शिकायतों के लिए कई माध्यम
कंपनी के ग्राहक 24x7 टोल-फ्री नंबर, ईमेल, मोबाइल ऐप, WhatsApp, Self-Care Web Portal और लिखित आवेदन के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद ग्राहक को एक Docket Number या Complaint Reference Number दिया जाता है।
रिपोर्ट में Data Privacy, Advertising, Cyber Security, Restrictive Trade Practices और Unfair Trade Practices जैसी कैटेगरी में कोई शिकायत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई है।
एम्प्लॉयीज से जुड़ी शिकायतों पर भी रिपोर्ट
FY 2025-26 में कंपनी ने Sexual Harassment, Workplace Discrimination, Child Labour, Forced Labour, Wages और अन्य Human Rights से जुड़े मामलों में कोई शिकायत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। POSH के तहत भी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।
कुल मिलाकर, GTPL Hathway की BRSR रिपोर्ट में कंपनी ने ESG और Sustainability को लेकर अपने मौजूदा काम के साथ-साथ FY 2027 तक हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों की जानकारी दी है। कंपनी का फोकस खास तौर पर वर्कप्लेस सेफ्टी, महिला एम्प्लॉयीज की भागीदारी, मानवाधिकार जागरूकता, साइबर सिक्योरिटी, ई-वेस्ट मैनेजमेंट और CSR पर दिखाई देता है।
पनी के बोर्ड की बैठक 3 सितंबर 2026 को हुई, जिसमें श्वेता जौहरी और प्रकाश जौहरी को उनके मौजूदा पदों पर दोबारा नियुक्त करने का फैसला लिया गया।
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Vikas Saxena
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Maxposure Limited के बोर्ड ने मैनेजमेंट से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। कंपनी के बोर्ड की बैठक 3 सितंबर 2026 को हुई, जिसमें श्वेता जौहरी और प्रकाश जौहरी को उनके मौजूदा पदों पर दोबारा नियुक्त करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नए Secretarial Auditor की नियुक्ति को भी मंजूरी दी है।
श्वेता जौहरी फिर बनेंगी होल-टाइम डायरेक्टर
बोर्ड ने श्वेता जौरी को कंपनी के होल-टाइम डायरेक्टर के पद पर दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 15 नवंबर 2026 से 14 नवंबर 2029 तक तीन साल का होगा। हालांकि, यह पुनर्नियुक्ति अभी शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है। इसे कंपनी की आगामी 20वीं आम वर्षिक बैठक (AGM) में शेयरधारकों के सामने रखा जाएगा।
स्वेता जौहरी ने University of North Bengal से Bachelor’s degree in Commerce की है। वह 2017 से Maxposure से जुड़ी हैं। उन्होंने कंपनी में Manager के तौर पर शुरुआत की थी और आगे बढ़ते हुए VP-APAC-Sales की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह 2005 से 2007 तक करीब दो साल TATA AIG में काम कर चुकी हैं। कंपनी के मुताबिक, वह APAC क्षेत्र में क्लाइंट हासिल करने की जिम्मेदारी संभालती हैं।
प्रकाश जौहरी की भी तीन साल के लिए दोबारा नियुक्ति
बोर्ड ने प्रकाश जौहरी को भी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल भी 15 नवंबर 2026 से 14 नवंबर 2029 तक तीन साल का होगा। इस नियुक्ति के लिए भी कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी और इसे आगामी 20वीं AGM में रखा जाएगा।
प्रकाश जौहरी ने Boston College के Carroll School of Management से Science में Bachelor’s degree की है, जिसमें Finance और Operation Technology Management प्रमुख विषय रहे हैं।
कंपनी के मुताबिक, प्रकाश जौहरी कंपनी की शुरुआत से ही इससे जुड़े हुए हैं। वह बिजनेस विस्तार, कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी, लीडरशिप, मैनेजमेंट, वित्तीय प्रदर्शन, स्टेकहोल्डर रिलेशन, इनोवेशन और ग्रोथ जैसे अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालते हैं।
कंपनी का कहना है कि उन्होंने Maxposure को पारंपरिक मीडिया कारोबार से आगे बढ़ाकर एक भविष्य को ध्यान में रखते हुए मीडिया व एंटरटेनमेंट बिजनेस बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कंपनी की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया और टेक्नोलॉजी में निवेश के साथ-साथ ग्लोबल पेटेंट हासिल करने जैसी पहलों में भी योगदान दिया है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी में दोनों डायरेक्टर्स के बीच संबंध का भी खुलासा किया गया है। श्वेता जौहरी, Maxposure के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश जौहरी की पत्नी हैं।
VAP & Associates बने Secretarial Auditor
बोर्ड ने M/s VAP & Associates, Company Secretaries को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Secretarial Auditor नियुक्त करने को भी मंजूरी दी है। यह नियुक्ति 3 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी।
कंपनी के मुताबिक, VAP & Associates कंपनी सचिवों की एक मान्यता प्राप्त फर्म है, जिसे Corporate Laws, Secretarial Audit, Compliance Audit, FEMA, Securities Laws, Listing Regulations और Corporate Governance जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल है।
यह फर्म कई प्रतिष्ठित सरकारी उपक्रमों, सूचीबद्ध कंपनियों, NBFCs और निजी कंपनियों के साथ काम कर चुकी है। इनमें इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड, IRCON इंटरनेशनल लिमिटेड, NTPC लिमिटेड, ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक लिमिटेड जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए ऑडिटर की नियुक्ति
Maxposure ने साफ किया है कि Secretarial Auditor की नियुक्ति इस बार केवल वित्त वर्ष 2026-27 के लिए की गई है। कंपनी के मुताबिक, SEBI Listing Regulations के Regulation 15(2) के तहत Regulation 24A उस पर लागू नहीं है। इसी वजह से ऑडिटर की नियुक्ति सामान्य पांच लगातार वित्त वर्षों के बजाय केवल एक वित्त वर्ष के लिए की गई है।
कब हुई बोर्ड मीटिंग
Maxposure की बोर्ड मीटिंग 3 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक शाम 5:07 बजे शुरू हुई और 6:30 बजे समाप्त हुई। कंपनी ने बताया कि बैठक के लिए तय समय शाम 5 बजे था।
इस तरह Maxposure ने अगले तीन साल के लिए अपने टॉप मैनेजमेंट में निरंतरता बनाए रखने का फैसला किया है। हालांकि, स्वेता जौहरी और प्रकाश जौहरी की पुनर्नियुक्ति पर अंतिम मंजूरी कंपनी के शेयरधारकों की आगामी AGM में मिलेगी।
अशोक सिंघल इससे पहले करीब 18 साल से ‘आजतक’ (AajTak) से जुड़े हुए थे, जहां से कुछ समय पूर्व उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार अशोक सिंघल ने हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ (News24) के साथ अपनी नई पारी का आगाज किया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यहां पर बतौर कंसल्टेंट एडिटर जॉइन किया है और वह इनपुट की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बता दें कि अशोक सिंघल ने कुछ महीने पहले ही ‘आजतक’ (AajTak) में अपनी करीब 18 साल लंबी पारी को विराम दिया था। वह जुलाई 2008 में इस न्यूज चैनल से जुड़े थे और बतौर मैनेजिंग एडिटर (पॉलिटिक्स) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
हरियाणा के जींद के नरवाना इलाके के रहने वाले अशोक सिंघल को मीडिया में काम करने का करीब 34 साल का अनुभव है। उन्होंने ‘जनसत्ता’ अखबार से मीडिया में कदम रखा। उन दिनों ओम थानवी चंडीगढ़ में और प्रभाष जोशी दिल्ली में संपादक हुआ करते थे। बाद में अशोक सिंघल ‘राष्ट्रीय सहारा’ अख़बार से जुड़ गए। उसके बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में कदम रखा और कुछ महीने ‘एनडीटीवी’ में रहे। फिर करीब 12 साल तक ‘जी न्यूज’ के साथ काम किया। उसके बाद ‘आजतक’ से जुड़े और कुछ समय पहले वहां से अलविदा कहने के बाद अब 'न्यूज24' जॉइन किया है।
सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले अशोक सिंघल के बारे में मीडिया गलियारों में कहा जाता है कि वह हमेशा अपने काम को ही सबसे ऊपर रखते हैं और अपनी मेहनत के दम पर देश के करोड़ों दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है। संसद और पीएमओ से जुड़ी हजारों खबरें ब्रेक करने वाले अशोक सिंघल आज भी टीवी न्यूज मीडिया के मैदान में सक्रिय और प्रभावशाली बने हुए हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से अशोक सिंघल को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।