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रूबिका लियाकत ने बताया, लड़कियों के लिए मीडिया इंडस्ट्री में वर्तमान दौर क्यों है शानदार
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समाचार4मीडिया ने मीडिया इंडस्ट्री में कार्यरत महिला पत्रकारों से पत्रकारिता के क्षेत्र में इस मुकाम को हासिल करने के दौरान आए तमाम उतार-चढ़ावों के बारे में चर्चा की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
आज सारी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। दरअसल, हर साल आठ मार्च को दुनिया के हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सम्मान और प्रशंसा प्रकट करते हुए उनकी हर क्षेत्र में स्थापित उपलब्धियों को याद किया जाता है। इस मौके पर हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया ने मीडिया इंडस्ट्री में कार्यरत महिला पत्रकारों से बात कर जानना चाहा कि मी़डिया इंडस्ट्री में उनका अब तक का सफर कैसा रहा है और इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
इस बारे में हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज एंकर रूबिका लियाकत का कहना था, ‘मैंने कभी ये सोचकर मीडिया इंडस्ट्री में कदम नहीं रखा कि मैं एक महिला हूं। मेरा मानना है कि पत्रकारिता के लिए जिन बुनियादी बातों की जरूरत होती है, वह महिला और पुरुष दोनों में समान होती हैं। इन बुनियादी बातों में लिखने की ताकत के साथ आपने क्या देखा है, क्या सुना है और आप क्या कहने वाले हैं आदि शामिल होती हैं। यह मुझमें भी उतनी ही हैं, जितनी किसी अन्य पुरुष पत्रकार में। मैंने 2007 से इस इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया है। यदि मैं खुद को लड़की समझकर इस इंडस्ट्री में कदम रखती तो मेरे लिए चुनौतियां अथवा संघर्ष दोगुना हो जाता। मुझे सिर्फ इस बात का यकीन था कि जो चीज पत्रकारिता के लिए चाहिए, वह महिला-पुरुष को समान रूप से मिली है, अब कौन इसका ज्यादा बेहतर इस्तेमाल कर लेता है, वह मेरी लड़ाई थी। इस बात का मुझे हमेशा फायदा ही हुआ है। जैसे-कभी रिपोर्टिंग के दौरान कहा जाता था कि यहां नहीं जाना है, क्योंकि वहां आप नहीं जा पाओगी, लेकिन मेरा कहना होता था कि आखिर मैं क्यों नहीं जा पाऊंगी। जब आप लोग माइक लेकर लोगों से बातचीत कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं। मैं अपने प्रोफेशन के लिए हर समय तैयार रहती हैं, जैसे-यदि रात की शिफ्ट करनी हो या सुबह छह बजे की शिफ्ट करनी हो, मैं हर समय इसके लिए तैयार रहती हूं। यही नहीं, प्रिग्नेंसी के दौरान भी मैंने नौ महीने तक एंकरिंग की और ऑफिस में साफ कह दिया कि मुझे इस काम के लिए इस वजह से मना न किया जाए कि मैं प्रिग्नेंट हूं।’
इस बातचीत के दौरान रूबिका लियाकत का यह भी कहना था,’यही नहीं, मां बनने के बाद भी मैंने काम को लेकर कभी किसी को यह कहने का मौका नहीं दिया कि अब रूबिका को बच्चे पर ध्यान देना चाहिए। रही बात बच्चे पर ध्यान देने की तो हम पति-पत्नी दोनों मिलकर उस पर ध्यान देते हैं। मेरे पति भी बच्चे पर उतना ही ध्यान देते हैं, जितना मैं, ऐसे में काम को लेकर कभी दिक्कत नहीं आती। मेरा मानना है कि जिस दिन महिला और पुरुष को हमने एक चश्मे से देखना शुरू कर दिया, यानी एक समान मानना शुरू कर दिया, आधी समस्या तो उसी दिन दूर हो जाएगी।’
रूबिका लियाकत का यह भी कहना था, ‘यदि आपने अपने आप को अबला नारी समझा तो आपको बहुत लड़ाइयां लड़नी पड़ेंगी, लेकिन यदि आपने ये सोच लिया कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं और उन्होंने ही इन पुरुषों को जन्म दिया है तो आपके लिए सफर बहुत आसान हो जाएगा। मैं अपनी बात करूं तो मेरे लिए इस इंडस्ट्री का सफर बहुत आसान रहा है। मैं ये कहूंगी कि 2007 से लेकर अब तक महिला होने के नाते मुझे किसी भी तरह से कमतर नहीं समझा गया है। कई बार तो मुझे काम के सिलसिले में मेरे पुरुष सहकर्मी से ज्यादा प्राथमिकता दी जाती रही है, क्योंकि मैं अपने काम को लेकर हमेशा तैयार रहती हूं।’
मीडिया इंडस्ट्री में आने वाली युवा पीढ़ी खासकर लड़कियों को सफलता का मूल मंत्र देते हुए रूबिका लियाकत का कहना था, ‘पत्रकारिता के फील्ड में आने वाली पीढ़ी से मैं यही कहना चाहती हूं कि हमेशा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। काम को लेकर कोई इफ और बट (किंतु-परंतु) नहीं होना चाहिए। सबसे ज्यादा चैलेंजिंग काम के लिए जिस दिन आप अपने सीनियर्स के जेहन में आ गए, तो ये आपके लिए बड़ी बात है। मैं अपनी कहूं तो सबसे ज्यादा चैलेंजिंग और टफ काम के लिए एडिटर के जेहन में सबसे पहले मेरा नाम आता था। उनका मानना होता था कि काम कितना भी मुश्किल क्यों न हो, यह तो कर ही लेगी। इस आग के कुएं में यदि छलांग लगाई है तो तैरना आना चाहिए। उस तैरने के लिए आप तैयार रहिए। इस इंडस्ट्री में आने वाली लड़कियों से मेरा यही कहना है कि अपने आप को पुरुषों के बराबर समझें। अब हम लोग (महिलाएं) बहुत आगे बढ़ चुके हैं। यही नहीं, पहले के मुकाबले महिलाओं की स्थिति भी इंडस्ट्री में बेहतर हुई है। महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए तमाम तरह की गाइडलाइंस भी आ चुकी हैं। अब कोई आसानी से यहां काम करने वाली महिला पत्रकारों को परेशान नहीं कर सकता है। मुझे लगता है कि लड़कियों के लिए मीडिया इंडस्ट्री में वर्तमान दौर काफी शानदार है। यही वो टाइम है, जब लड़कियों को बड़ी संख्या में इस इंडस्ट्री में आना चाहिए।’
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