वहां नेटवर्क18 (ब्रॉडकास्ट) के सीईओ और A+E नेटवर्क्स | TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘नेटवर्क18’ (Network18) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्वसनी सूत्रों के हवाले से मिली इस खबर के मुताबिक सीनियर मीडिया प्रोफेशनल अविनाश कौल ने ‘नेटवर्क18’ में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वहां नेटवर्क18 (ब्रॉडकास्ट) के सीईओ और A+E नेटवर्क्स | TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
अपनी इस भूमिका में वह ‘नेटवर्क18’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को रिपोर्ट कर रहे थे। इस खबर की पुष्टि के लिए समचार4मीडिया ने 'नेटवर्क18' के शीर्ष प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक वहां से कोई जवाब नहीं मिल सका था।
बता दें कि अविनाश कौल ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Limited) में एक दशक से ज्यादा समय से कार्यरत थे। पिछले अगस्त में उनके पोर्टफोलियो में इजाफा किया गया था, ताकि टीवी, डिजिटल और प्रिंट में सीधे राजस्व वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरान उन्हें टीवी और प्रिंट बिजनेस के ऑपरेटिंग वर्टिकल्स और रेटिंग बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अविनाश कौल को इंडस्ट्री में काम करने का 26 साल से ज्यादा का अनुभव है और पिछले करीब 15 वर्षों से वह लीडरशिप भूमिकाएं निभा रहे हैं। ब्रैंड निर्माण से लेकर कंटेंट को विभिन्न शैलियों में गढ़ने और इंडस्ट्री के तेज बदलावों के बीच टीमों को दिशा देने तक अविनाश का प्रभाव व्यापक और गहरा रहा है। सहयोगी, दूरदर्शी और परिणामों पर नज़र रखने वाले लीडर के रूप में वे जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व की खासियत यह रही है कि वे नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए दर्शकों की पसंद और व्यवसायिक लक्ष्यों के संतुलन को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।
अपने करियर के दौरान अविनाश कौल ने जनरल न्यूज, बिजनेस न्यूज, जनरल एंटरटेनमेंट, किड्स प्रोग्रामिंग, रीजनल एंटरटेनमेंट और अंग्रेजी व हिंदी फिल्मों जैसे तमाम कंटेंट जॉनर (genres) का प्रबंधन करते हुए टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया है। उन्हें ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के तहत सीईओ ऑफ द ईयर का पुरस्कार भी मिल चुका है।
‘नेटवर्क18’ से पहले अविनाश कौल ‘टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क’ (Times Television Network) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं, जहां उन्होंने ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now), ‘ईटी नाउ’ (ET Now) और ‘जूम’ (ZOOM) जैसे प्रमुख चैनल्स का प्रबंधन किया।
वह ‘टाइम्स टेलिविजन नेटवर्क’ के अलावा ‘सहारा वन’ में बतौर सीईओ काम कर चुके हैं। उन्होंने सात साल तक ‘एनडीटीवी मीडिया’ में बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के रूप में भी काम किया है। ‘एनडीटीवी’ से पहले कौल ‘डिस्कवरी कम्युनिकेशनंस’ और ‘स्टार इंडिया’ के साथ भी काम कर चुके हैं। कौल ने अपना करियर ‘माइंडशेयर’ के साथ बतौर मीडिया प्लानर शुरू किया था।
नई व्यवस्था के तहत कुलदीप मिश्रा संभालेंगे लल्लनटॉप की संपादकीय जिम्मेदारी, जबकि रजत सेन प्रोडक्शन टीम का नेतृत्व करेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, वर्तमान में इस समूह के डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘द लल्लनटॉप’ (The Lallantop) और ‘इंडिया टुडे’ (हिंदी) के एडिटर सौरभ द्विवेदी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस नए बदलाव के साथ ही कुलदीप मिश्रा को ‘द लल्लनटॉप’ की संपादकीय जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि रजत सेन प्रोडक्शन टीम का नेतृत्व करेंगे।
इस बारे में ‘इंडिया टुडे’ समूह की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने लिखा है, ‘इंडिया टुडे ग्रुप डिजिटल के साथ 12 साल की पारी के बाद ‘द लल्लनटॉप’ और इंडिया टुडे (हिंदी) के एडिटर सौरभ द्विवेदी अब अलग-अलग क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने aajtak.in में फीचर्स एडिटर के रूप में जॉइन किया था और कमलेश के साथ मिलकर लल्लनटॉप को देश के हिंदी भाषी इलाकों के युवाओं का भरोसेमंद और पसंदीदा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया।’
इसके साथ ही कली पुरी ने लिखा, ‘मुझे सौरभ और उनके द्वारा किए गए काम पर बेहद गर्व है। समय के साथ हम इस बात पर चर्चा करते रहे हैं कि वे अपनी रचनात्मक ऊर्जा ऐसे अन्य माध्यमों में लगाना चाहते हैं, जो फिलहाल इंडिया टुडे ग्रुप के पोर्टफोलियो का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप और रजत दोनों ही लल्लनटॉप की फाउंडिंग टीम का हिस्सा रहे हैं। किसी संस्थान में अपने ही लोगों के जरिये पीढ़ीगत बदलाव देखना मुझे सबसे ज़्यादा संतोष देता है। कुलदीप अक्सर एलटी शो और नेतानगरी जैसे कार्यक्रमों की एंकरिंग करते हैं, जबकि रजत ने द लल्लनटॉप को प्रोडक्शन के कई बदलावों और नए दौर से सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। हालांकि सौरभ की कमी ज़रूर महसूस होगी, लेकिन आने वाले इस बदलाव को लेकर मैं काफ़ी उत्साहित हूं।’
बता दें कि सौरभ द्विवेदी ने अपने इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर भी एक ट्वीट किया है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया
— Saurabh Dwivedi (@saurabhtop) January 5, 2026
हम न होंगे कोई हमसा होगा
शुक्रिया @TheLallantop
मान, पहचान और ज्ञान के लिए.
एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी
( शेर नासिर काज़मी की कलम से) pic.twitter.com/yrVSM2YpQw
बता दें कि सौरभ द्विवेदी मूलरूप से उत्तर प्रदेश में उरई के रहने वाले हैं। कानपुर से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिर यहीं बस गए। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका आगाज 2007 में स्टार न्यूज के साथ इंटर्नशिप से हुआ। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वक्त तक एक एस्ट्रो शो में काम किया और फिर ‘टाइम्स‘ समूह से जुड़ गए। ‘नवभारत टाइम्स’ में करीब तीन साल पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने के बाद सौरभ ने न्यूज एडिटर के रूप में ‘भास्कर‘ समूह का दामन थामा और यहां से उनकी सीधे ‘इंडिया टुडे‘ ग्रुप में एंट्री हुई, जहां से अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
सरकार ने एक अहम फैसले में वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा अधिकारी ममता वर्मा को दूरदर्शन न्यूज (डीडी न्यूज) का नया डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सरकार ने एक अहम फैसले में वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा अधिकारी ममता वर्मा को दूरदर्शन न्यूज (डीडी न्यूज) का नया डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया है। ममता वर्मा ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं जब पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग के सामने भरोसा बनाए रखने, संतुलित खबरें देने और तेजी से बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाने की बड़ी चुनौती है।
ममता वर्मा 1994 बैच की IIS अधिकारी हैं और मूल रूप से शिमला, हिमाचल प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने शिमला के लोरेटो कॉन्वेंट और सेंट बीड्स कॉलेज से पढ़ाई की है। उनकी पढ़ाई और शुरुआती जीवन ने उन्हें सार्वजनिक सेवा के लिए तैयार किया और अपने काम में अनुशासन सिखाया।
अपने करियर के दौरान ममता वर्मा ने संचार, सूचना और नीति से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया है और हर जगह अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाया है। डीडी न्यूज की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह केंद्रीय पंचायती राज विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं। वहां उन्होंने जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था, विकेंद्रीकरण और जनता तक सही जानकारी पहुंचाने के काम को मजबूत किया।
डीडी न्यूज की डायरेक्टर जनरल के तौर पर उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह चैनल को सिर्फ सरकारी जानकारी देने वाले माध्यम तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उसे एक भरोसेमंद, तथ्यपरक और संतुलित न्यूज प्लेटफॉर्म के रूप में आगे बढ़ाएंगी। उनकी यह नियुक्ति हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है और साथ ही यह देश के मीडिया क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
Network18 ने अपने प्रमुख अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल CNN-News18 के लिए CNN International के साथ ब्रांड और कंटेंट लाइसेंसिंग साझेदारी को अगले एक दशक के लिए बढ़ा दिया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के अग्रणी मीडिया नेटवर्क Network18 ने वैश्विक न्यूज़ ब्रांड CNN International के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत कर दिया है। इस समझौते के तहत CNN-News18 पर CNN ब्रांड और कंटेंट का लाइसेंस अब 31 दिसंबर 2035 तक जारी रहेगा।
यह साझेदारी पहली बार 2005 में शुरू हुई थी, जिसे 2015 में नवीनीकृत किया गया और अब यह तीसरे दशक में प्रवेश कर रही है। इस नए चरण में दोनों कंपनियों ने केवल टीवी ही नहीं, बल्कि डिजिटल और कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म्स पर भी सहयोग को और गहरा करने का फैसला किया है।
नई रणनीति के तहत CNN-News18 अपनी डिजिटल मौजूदगी को यूट्यूब, कनेक्टेड टीवी और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक विस्तार देगा, जिससे यह ब्रांड वैश्विक दर्शकों तक पहुंचेगा। इस मौके पर Network18 के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी ने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक न्यूज़ इंडस्ट्री में एक “अद्वितीय और ऐतिहासिक सहयोग” है।
उन्होंने कहा कि अब यह रिश्ता डिजिटल और कनेक्टेड टीवी के जरिए नए विकास के रास्ते खोलेगा। CNN International, जो Warner Bros. Discovery का हिस्सा है, अपनी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता और संपादकीय विशेषज्ञता इस सहयोग में जारी रखेगा। CNN International के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट Phil Nelson ने कहा कि Network18 के साथ साझेदारी CNN के सबसे मजबूत वैश्विक सहयोगों में से एक है।
तेज़ी से बदलते “ग्लोकल” न्यूज़ परिदृश्य में, जहाँ दुनिया की घटनाएँ सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं, CNN की वैश्विक पहुंच और Network18 की भारतीय विश्वसनीयता मिलकर दर्शकों को व्यापक और भरोसेमंद समाचार अनुभव प्रदान करती हैं। Network18 आने वाले समय में CNN-News18 के डिजिटल, तकनीकी और संपादकीय विस्तार में और निवेश करेगा, ताकि भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी नेतृत्वकारी स्थिति और मजबूत हो सके।
वैश्विक म्यूज़िक दिग्गज Universal Music Group ने फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी Excel Entertainment में कुछ हिस्सेदारी खरीदी है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैश्विक संगीत और मनोरंजन कंपनी Universal Music Group ने भारत के कंटेंट इंडस्ट्री में औपचारिक कदम रखते हुए मुंबई स्थित प्रोडक्शन हाउस Excel Entertainment में कुछ निवेश किया है। यह कंपनी Farhan Akhtar और Ritesh Sidhwani के नेतृत्व में संचालित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह सौदा लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद पूरा हुआ है और इसकी औपचारिक घोषणा आज मुंबई में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की जाएगी। इस कार्यक्रम में Devendra Fadnavis की मौजूदगी भी प्रस्तावित है, जिससे इस साझेदारी को मिल रहे महत्व का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
यह साझेदारी भारत के तेज़ी से बढ़ते फिल्म–ओटीटी–म्यूज़िक इकोसिस्टम और वैश्विक म्यूज़िक इंडस्ट्री के बीच गहरे तालमेल की ओर इशारा करती है। Universal Music Group के लिए यह निवेश भारतीय सिनेमा, म्यूज़िक एल्बम्स और ओरिजिनल कंटेंट में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मज़बूत करता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट के रूप में उभर रहा है।
वहीं, Excel Entertainment के लिए यह साझेदारी ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन, इंटरनेशनल म्यूज़िक इंटीग्रेशन और वैश्विक सहयोग के नए रास्ते खोलती है। जानकारों के मुताबिक, इस निवेश से संस्थापकों की हिस्सेदारी या रचनात्मक नियंत्रण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी बहुमत हिस्सेदारी के साथ पूर्ण क्रिएटिव कंट्रोल बनाए रखेंगे।
कस्तूरी एंड सन्स ने सुंदर कोंडूर को द हिंदू ग्रुप का नया Chief Revenue Officer (CRO) नियुक्त किया है। दो दशकों से अधिक अनुभव रखने वाले कोंडूर ने यह जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के ज़रिये साझा की।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Kasturi & Sons, जो The Hindu Group का पब्लिशिंग हाउस है, ने सुंदर कोंडूर को अपना नया Chief Revenue Officer नियुक्त किया है। कोंडूर ने लिंक्डइन पर पोस्ट कर कहा कि वे The Hindu Group Publishing Pvt. Ltd. में अपनी नई भूमिका शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।
सुंदर कोंडूर मीडिया पब्लिशिंग, विज्ञापन बिक्री और रेवेन्यू लीडरशिप में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे Bennett Coleman & Co. (टाइम्स ग्रुप) के साथ नौ साल से अधिक समय तक जुड़े रहे और विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाईं। दिलचस्प बात यह है कि कोंडूर पहले भी Kasturi & Sons के साथ Vice President – Advertising Sales के रूप में काम कर चुके हैं।
मई 2015 से नवंबर 2016 के बीच उन्होंने The Hindu के लिए नेशनल सेल्स का नेतृत्व किया था। अपने करियर के शुरुआती चरण में वे Mid Day में भी सीनियर भूमिकाओं में रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोंडूर का अनुभव द हिंदू ग्रुप की रेवेन्यू रणनीति को और मज़बूत करेगा तथा डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म्स पर विकास को गति देगा।
चुनाव आयोग ने 2025 के लिए वोटर एजुकेशन और जागरूकता पर सबसे अच्छे मीडिया कैंपेन के लिए मीडिया हाउस से आवेदन मांगे हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
चुनाव आयोग ने 2025 के लिए वोटर एजुकेशन और जागरूकता पर सबसे अच्छे मीडिया कैंपेन के लिए मीडिया हाउस से आवेदन मांगे हैं। इसका मकसद उन मीडिया संस्थाओं को पहचानना है जिन्होंने चुनाव में भागीदारी बढ़ाने और सभी के लिए आसान चुनावों के बारे में जागरूकता फैलाने में विशेष काम किया।
ये अवॉर्ड चार कैटेगरी में दिए जाएंगे– प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो और ऑनलाइन मीडिया। इसमें वो मीडिया कैंपेन शामिल होंगे, जिन्होंने:
आसान और सुलभ चुनाव को प्रमोट किया,
चुनाव प्रक्रिया को समझाया,
चुनाव से जुड़े IT ऐप्स को दिखाया,
दूरदराज के मतदान केंद्रों की कवरेज की, और
लोगों में वोटिंग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई।
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि वे उन मीडिया संस्थाओं के नाम सुझाएं जिन्होंने 2025 में इन क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया। सभी नामों की समीक्षा चुनाव आयोग स्तर पर गठित जूरी करेगी।
इसके अलावा, मीडिया टीमों के शानदार प्रयासों को पहचानने के लिए आयोग ने नया मीडिया एक्सीलेंस अवॉर्ड भी शुरू किया है। इसके तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ CEO सोशल मीडिया टीम को एक अवॉर्ड मिलेगा। ये अवॉर्ड इस साल राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर प्रस्तुत किए जाएंगे।
आयोग ने कहा है कि इस श्रेणी के तहत सभी सुझाव और नामांकन इस महीने की 7 जनवरी तक भेजे जाएं।
? | ????? ????? ??? ??? ???? ???????? ?? ??????’ ????????? & ????????? - ????
— Election Commission of India (@ECISVEEP) January 4, 2026
ECI invites entries from Media Houses for the Media Awards 2025.
The Award(s) will be presented on National Voters’ Day 2026.
(1/6) pic.twitter.com/ppefmzK6R6
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में ‘श्री राम और तमिलगम’ पुस्तक का विमोचन हुआ। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने श्री राम को प्रथम पर्यावरण संरक्षक बताते हुए जीव-दया और प्रकृति संतुलन पर जोर दिया।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के दूसरे दिन आयोजित एक विशेष सत्र में पुस्तक ‘श्री राम और तमिलगम: एक अटूट बंधन’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. नरसी राम बिश्नोई, कुलपति, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (हिसार) उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भगवान श्री राम के व्यक्तित्व के एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत प्रासंगिक पक्ष—पर्यावरण संरक्षण—को केंद्र में रखा।
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि श्री राम केवल मर्यादा पुरुषोत्तम या आदर्श राजा ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के सच्चे रक्षक भी थे। उन्होंने रामायण के समुद्र-प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब समुद्र ने मार्ग नहीं दिया और ब्रह्मास्त्र का संधान किया गया, तब श्री राम ने यह विचार कर निर्णय बदला कि इससे असंख्य जलचर निर्दोष रूप से नष्ट हो जाएंगे।
यही संवेदनशीलता उन्हें प्रथम पर्यावरण रक्षक के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने बिश्नोई परंपरा का संदर्भ देते हुए गुरु जम्भेश्वर महाराज द्वारा दिए गए 29 नियमों की चर्चा की, जिनका मूल उद्देश्य जीव-रक्षा और वृक्ष-संरक्षण है। खेजड़ली के बलिदान को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में पर्यावरण के लिए त्याग कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि जीवित परंपरा है।
अपने वक्तव्य में प्रो. बिश्नोई ने आधुनिक संदर्भों की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि जीव-दया केवल विचार नहीं, आचरण का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि वन्यजीवों को क्षति पहुंचाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करता है।
सच्चा पश्चाताप और संरक्षण का संकल्प ही न्याय और क्षमा का आधार हो सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ने के साथ-साथ ‘राम राज्य’ की उस भावना को सामने लाती है, जहां विकास प्रकृति के विनाश के बिना संभव है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार और ‘एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया’ (Editors Club Of India) के प्रेजिडेंट अमिताभ अग्निहोत्री ने नए साल पर एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘टीवी9 नेटवर्क’ (Network9) में अपनी पारी को विराम देने की घोषणा की है। अमिताभ अग्निहोत्री ‘टीवी9’ में करीब चार से बतौर कंसल्टिंग एडिटर कार्यरत थे। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं और नोएडा स्थित सेक्टर-62 में ऑफिस बनाया जा रहा है। अमिताभ अग्निहोत्री के अनुसार, जल्द ही वह नई शुरुआत करेंगे और तब उस बारे में विस्तार से बताएंगे।
गौरतलब है कि अमिताभ अग्निहोत्री को मीडिया में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जीवन और पत्रकारिता में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अमिताभ ने 1989 में ‘आईआईएमसी’, दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की। अमिताभ ‘दैनिक जागरण’ के दिल्ली से लॉन्च होने पर संस्थान का हिस्सा बने थे। 1994 में ‘आज‘ के नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में भी काम किया। ‘आज‘ के बाद ‘दैनिक भास्कर‘ में भी तकरीबन 10 साल रहे। ‘दैनिक भास्कर‘ के बाद 2008 में ‘देशबन्धु‘ के स्थानीय संपादक बने।
इसके बाद उन्होंने ‘टोटल टीवी‘ में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। हालांकि बाद में यहां से इस्तीफा देकर ‘समाचार प्लस‘ के प्रबंध संपादक बन गए। इसके बाद उन्होंने ‘इंडिया नाउ‘ समूह में बतौर एडिटर-इन-चीफ जॉइन कर लिया, पर कुछ कारणों के चलते चैनल लॉन्च ही नहीं हो सका। फिर यहां से बॉय बोलकर वह ‘के-न्यूज’ (K-NEWS) चैनल से बतौर सीईओ व एडिटर-इन-चीफ जुड़ गए।
‘के-न्यूज‘ के साथ करीब एक साल की पारी खेलने के बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया। यहां से बाय बोलकर ‘नेटवर्क18‘ (हिंदी नेटवर्क) में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने हिंदी न्यूज चैनल ‘आर9’ (R9) के साथ बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी शुरू की थी, जहां से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अमिताभ अग्निहोत्री बतौर कंसल्टिंग एडिटर ‘टीवी9’ आ गए थे, जहां से अब उन्होंने अपनी पारी को विराम दे दिया है।
अमिताभ अग्निहोत्री को पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने अमूल्य योगदान के लिए कई बार पुरस्कृत भी किया जा चुका है। उन्हें मटुश्री, गणेशशंकर विद्यार्थी और यूनिवार्ता अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2013 में उन्हें समाचार4मीडिया द्वारा ‘मीडिया महारथी’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
समाचार4मीडिया की ओर से अमिताभ अग्निहोत्री को उनके नए सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।
आखिर क्यों बंद हो रहे हैं MTV के चैनल, भारत में इसका क्या असर पड़ा, और MTV का भविष्य अब किस दिशा में जा रहा है, इसी पूरी कहानी को आसान भाषा और तथ्यों के साथ समझते हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक समय था जब टीवी ऑन करते ही युवाओं की पहली पसंद MTV हुआ करता था। म्यूजिक वीडियो, पॉप कल्चर और यूथ ट्रेंड्स का पर्याय रहे इस चैनल ने पूरी एक पीढ़ी की सोच और मनोरंजन को आकार दिया। लेकिन बदलते दौर, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती ताक़त और दर्शकों की आदतों में आए बड़े बदलावों के बीच अब MTV के कई प्रतिष्ठित म्यूजिक चैनल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बंद किए जा रहे हैं। आखिर क्यों बंद हो रहे हैं ये चैनल, भारत में इसका क्या असर पड़ा, और MTV का भविष्य अब किस दिशा में जा रहा है, इसी पूरी कहानी को आसान भाषा और तथ्यों के साथ समझते हैं।
MTV का इतिहास: कैसे शुरू हुआ एक म्यूजिक का युग
MTV (Music Television) एक ऐसा चैनल था जिसने पूरी दुनिया में म्यूजिक वीडियो की पहचान बदली। इसे 1 अगस्त 1981 को अमेरिका में लॉन्च किया गया था और यह 24-घंटे म्यूजिक और म्यूजिक वीडियो दिखाने वाला पहला चैनल माना जाता है।
रिलीज के शुरुआती दिनों में MTV सिर्फ म्यूजिक वीडियोज ही प्रसारित करता था और युवा दर्शकों के बीच यह बेहद लोकप्रिय हुआ। MTV ने म्यूजिक, फैशन, पॉप कल्चर और युवा सोच को एक नया रूप दिया और “I Want My MTV” जैसे स्लोगन ने उस दौर के म्यूजिक प्रेमियों को झकझोर दिया।
टीवी से डिजिटल का सफर: दर्शकों की बदलती आदतें
मगर जैसे-जैसे समय बदला, लोगों के मनोरंजन के तरीके भी बदलने लगे। इंटरनेट और स्मार्टफोन के आने के बाद YouTube, Spotify, TikTok जैसे प्लेटफार्म म्यूजिक और वीडियो देखने का मुख्य तरीका बन गए। लोग अब टीवी पर म्यूजिक चैनल देखने की बजाय ऑनलाइन और ऑन-डिमांड कंटेंट पसंद करने लगे।
इस बदलती प्रवृत्ति के कारण MTV जैसे 24-घंटे म्यूजिक चैनल की व्यूअरशिप लगातार घटती चली गई। MTV के म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों ने जो दर्शक कभी टीवी के लिए चुने थे, वे अब डिजिटल पर चले गए। यही MTV के म्यूजिक चैनलों के बंद होने का सबसे बड़ा कारण है।
2025 में MTV की घोषणा: म्यूजिक चैनलों का अंत
12 अक्टूबर 2025 को Paramount Global (जो MTV की पैरेंट कंपनी है) ने घोषणा की कि दुनिया भर के कुछ प्रमुख MTV म्यूजिक चैनलों को 31 दिसंबर 2025 तक बंद कर दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं: MTV Music, MTV 80s, MTV 90s, Club MTV और MTV Live. ये सभी चैनल मुख्य रूप से म्यूजिक, म्यूजिक वीडियो और लाइव कॉन्सर्ट प्रोग्रामिंग पर केंद्रित थे।
MTV के इन म्यूजिक चैनलों का अंत, म्यूजिक टीवी की उस “गोल्डन एरा” का अंत माना जा रहा है, जिसमें टीनेजर्स और युवा अपने पसंदीदा म्यूजिक वीडियो देखने के लिए टीवी पर MTV देखते थे।
कहां-कहां बंद हो रहा है MTV?
सबसे पहले MTV के म्यूजिक चैनल यूके (UK) और आयरलैंड (Ireland) में 31 दिसंबर 2025 को ऑफ एयर हो गए, और बाद में इन्हें यूरोप, ब्राजील, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भी बन्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
इन देशों में MTV Music, MTV 80s, MTV 90s, Club MTV और MTV Live जैसे म्यूजिक चैनल्स प्रसारण से हटाए जा रहे हैं क्योंकि मीडिया कंपनियाँ traditional TV से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रही हैं।
हालाँकि MTV के कुछ चैनल जैसे MTV HD, जो मुख्यतः रियलिटी और मनोरंजन शो दिखाते हैं, अभी भी चल रहे हैं, इन म्यूजिक-सेंट्रिक चैनलों के अंत का मतलब यह है कि टीवी पर म्यूजिक वर्ल्ड का एक बड़ा हिस्सा गायब हो रहा है।
भारत में MTV का क्या हाल है?
भारत में MTV India को बंद किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ी थी कि MTV India भी दिसंबर 2025 में बंद हो जाएगा, लेकिन यह जानकारी गलत साबित हुई थी। अक्टूबर, 2025 में ही MTV India ने खुद स्पष्ट किया कि वह बंद नहीं हो रहा है और दर्शकों को पहले जैसे रियलिटी शोज, म्यूजिक और युवा-आधारित कार्यक्रम मिलेंगे।
इसका कारण यह है कि MTV India ने समय रहते अपनी पहचान बदल ली है- अब यह चैनल केवल म्यूजिक वीडियो नहीं बल्कि Reality Shows, Youth Entertainment और गेम फॉर्मेट्स भी प्रदर्शित करता है, जिससे उसकी व्यूअरशिप काफी मजबूत बनी हुई है।
क्यों MTV के मूल म्यूजिक चैनल बंद हो रहे हैं?
MTV के म्यूजिक चैनलों के बंद होने के पीछे कुछ बड़े कारण हैं। सबसे पहले, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई है। अब लोग गाने YouTube, TikTok, Spotify जैसे प्लेटफॉर्म्स पर देखना और सुनना पसंद करते हैं, जिससे टीवी चैनलों की मांग कम हो गई है।
दूसरा कारण यह है कि टीवी पर म्यूजिक चैनलों की व्युअरशिप लगातार घट रही है। पुराने जमाने की तरह लोग अब टीवी पर गाने देखने के बजाय ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर ही कंटेंट देखना पसंद करते हैं।
तीसरा कारण Paramount Global की रणनीति है। कंपनी अब खर्चों को कम करने और आधुनिक मीडिया की जरूरतों के हिसाब से बदलाव करने की दिशा में है। इसी वजह से उसने म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों को बंद करने का फैसला लिया है।
मीडिया की बदलती दुनिया: MTV का भविष्य
म्यूजिक टीवी का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, क्योंकि युवा दर्शक अब रियल-टाइम ऑनलाइन कंटेंट को प्राथमिकता देने लगे हैं। अब लोग गाने और एंटरटेनमेंट सिर्फ टीवी पर नहीं देखते, बल्कि YouTube, TikTok, Spotify और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर देखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि MTV के पुराने फ्लैगशिप चैनल, जैसे MTV HD, अब केवल म्यूजिक वीडियो नहीं दिखाते। ये चैनल अब रियलिटी शो, प्रतियोगिताएं, पॉप-कल्चर गेम-शो और अन्य इंटरएक्टिव कंटेंट पर फोकस कर रहे हैं।
इस बदलाव को मीडिया इंडस्ट्री की नई लहर के रूप में देखा जा रहा है। आज के समय में कंटेंट डिजिटल, शॉर्ट-फॉर्म और ऑन-डिमांड हो रहा है। ऐसे में टीवी चैनल भी खुद को नए दर्शकों और उनकी बदलती पसंद के हिसाब से ढाल रहे हैं। MTV इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है, जहां वह पुराने म्यूजिक फॉर्मेट से आगे बढ़कर नए और विविध फॉर्मेट के कंटेंट की ओर कदम बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया का यह रूप भविष्य में और भी तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर झुकेगा। ऐसे में चैनलों का अस्तित्व उसी समय टिकेगा जब वे युवा दर्शकों की पसंद, नए ट्रेंड्स और डिजिटल अनुभव को समझकर अपने कंटेंट को अपडेट करेंगे। MTV का यह परिवर्तन इसी दिशा का एक हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि मीडिया इंडस्ट्री अब केवल टेलीविजन पर आधारित नहीं रह गई, बल्कि ऑनलाइन और डिजिटल अनुभवों की दुनिया में अपने दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
परिणाम: एक युग का अंत, मगर चैनल का पूरा सफर खत्म नहीं
MTV के म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों का बंद होना एक दीर्घ युग का अंत है जिसने बहुत से लोगों के बचपन और जवानी को म्यूजिक और वीडियो से जोड़ा, लेकिन MTV पूरी तरह से बंद नहीं हो रहा है। इसका प्रमुख चैनल अभी भी चल रहा है और नए मनोरंजन रूपों के साथ अपनी पहचान बनाए हुए है।
MTV का सफर म्यूजिक टीवी से लेकर युवा मनोरंजन तक एक लम्बा इतिहास है, और अब वह समय के साथ स्वयं को बदलते हुए भविष्य की ओर अग्रसर है।
मीडिया इंडस्ट्री के इतिहास में 2026 एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है, जहां AI सिर्फ तकनीकी सहायक नहीं बल्कि कंटेंट निर्माण, रणनीति, डिस्ट्रीब्यूशन व दर्शक जुड़ाव का केंद्र बिंदु बन जाएगा।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री के इतिहास में 2026 एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ तकनीकी सहायक नहीं बल्कि कंटेंट निर्माण, रणनीति, डिस्ट्रीब्यूशन और दर्शक जुड़ाव का केंद्र बिंदु बन जाएगा। पिछली कुछ वर्ष में मीडिया में AI की शुरुआत दिखी थी, 2025 में जनरेटिव AI और LLMs (Large Language Models) ने पत्रकारिता, वीडियो निर्माण और सोशल मीडिया कंटेंट को बदलने की दिशा में पहला कदम रखा, लेकिन 2026 में यह बदलाव और गहरा, असरदार और रोजमर्रा का बन जाएगा।
पहले मीडिया में AI का उपयोग सपोर्ट टूल के रूप में होता था- जैसे टेक्स्ट सुझाव देना, ट्रांसक्रिप्शन या छवि सुधारना। 2026 में AI अब सामग्री का रचनात्मक साथी और कहीं-कहीं मुख्य लेखक बनता दिखेगा। मीडिया कंपनियाँ AI का इस्तेमाल कर डेटा पर आधारित स्टोरीलाइन, ट्रेंड-इंटेलिजेंस और मल्टीमॉडल कंटेंट (जैसे टेक्स्ट़, वीडियो, ऑडियो एक साथ) तैयार करेंगी जो हर प्लेटफॉर्म के लिए ऑटोमैटिकली अनुकूलित होगा।
यह बदलाव किया जाता है क्योंकि यूजर डेटा और उनके व्यवहार के अनुसार पर्सनलाइज्ड कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स में AI-आधारित पर्सनलाइजेशन से यूजर इंगेजमेंट में 25% तक की वृद्धि देखी गई है।
2026 की सबसे बड़ी तकनीकी प्रगति में से एक है एजेंटिक AI का उदय- ऐसे AI सिस्टम जो सिर्फ उत्तर नहीं देंगे बल्कि लक्ष्य निर्धारित कर काम पूरा करेंगे। उदाहरण के लिए, AI अब खबर के लिए डेटा इकट्ठा कर सकता है, उसके आधार पर शीर्षक तय कर सकता है, असली रिपोर्टर के लिए प्राथमिक मसौदा तैयार कर सकता है और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म चुन सकता है।
इसका अर्थ यह होगा कि केवल रिपोर्टर ही नहीं बल्कि AI को कार्यों का सह-निर्माता माना जाएगा। यह बदलाव रणनीति रचना, संसाधन आवंटन और मीडिया आउटलेट की कार्यप्रणाली में भी दिखाई देगा। 2026 में वही मीडिया संस्थान आगे रहेंगे जो AI को प्रतिस्थापन (replacement) नहीं बल्कि सहयोगी (collaborator) के रूप में अपनाएंगे।
टेलीविजन और प्रिंट की एक-सार शैली अब पुरानी समझी जाएगी। AI के कारण अब कंटेंट डायनेमिक रूप से हर यूजर के हिसाब से बदल जाएगा- जैसे एक ही न्यूज स्टोरी को अलग-अलग भाषाओं, स्वरूपों और प्लेटफॉर्म आवश्यकता के अनुसार तुरंत अनुकूलित कर देना। इससे डिलीवरी दक्षता और पहुंच में बड़ा उछाल आएगा।
उदाहरण के तौर पर, डिजिटल न्यूज ऐप्स AI-आधारित न्यूज फीड्स को आपके पढ़ने की आदतों के हिसाब से तैयार करेंगे, जिससे यूजर्स की प्रतिधारण दर (retention) बेहतर होगी।
AI की प्रगति सिर्फ टेक्स्ट जेनरेशन तक सीमित नहीं रहेगी। 2026 में एजेंटिक AI सिस्टम्स ख़बर के स्रोत से डेटा इकट्ठा कर सकते हैं, तथ्यों की जांच कर सकते हैं, संपादकीय प्राथमिकताओं के अनुसार मसौदा तैयार कर सकते हैं और पूरे वर्कफ्लो को ट्रैक कर सकते हैं।
यह मीडिया संस्थानों को यह तय करने में मदद करेगा कि कौन-सी खबर तुरंत चलानी है, किस पर और जांच की जरूरत है और कौन-सी स्टोरी दर्शकों के लिए सबसे ज्यादा अहम है। ये फैसले अब अनुमान से नहीं, बल्कि डेटा के आधार पर लिए जाएंगे। इससे पत्रकारों को रोजमर्रा के तकनीकी कामों से राहत मिलेगी और वे गंभीर, गहरी और असरदार रिपोर्टिंग पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।
AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक बड़ा चुनौती-क्षेत्र भी उभर रहा है, 'AI स्लॉप' कंटेंट की भरमार। एक शोध में पाया गया है कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर नए यूजर्स को दिखाए जाने वाले वीडियो का 20% तक भाग केवल AI-जनरेटेड और कम-गुणवत्ता वाला कंटेंट है, जिसे केवल व्यूज और विज्ञापन राजस्व के लिए बनाया जाता है।
इससे मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और गलत सूचना फैलने का जोखिम बढ़ता है। 2026 में मीडिया कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स के लिए यह चुनौती होगी कि वे AI के लाभ का उपयोग करते हुए गुणवत्ता और नैतिकता बनाए रखें।
AI के बढ़ते उपयोग के बीच रेगुलेटरी और नैतिक मानकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। 2026 में यह उम्मीद की जा रही है कि सरकारें, मीडिया संगठनों और प्लेटफॉर्म्स मिलकर ऐसे गाइडलाइंस तैयार करेंगे, जो नैतिकता, पारदर्शिता और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दें।
यह आवश्यक है क्योंकि AI-जनरेटेड गलत जानकारी और 'डीपफेक' जैसी तकनीकों से समाज और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी से करना सीखना होगा, ताकि AI सहायता प्रदान करे, लेकिन निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी इंसानी विवेक के पास रहे।
AI के उपयोग से रूटीन, मशीनी कामों (जैसे बेसिक एडिटिंग, ट्रांसक्रिप्शन और प्रारंभिक रिपोर्टिंग) में कटौती संभव है, लेकिन साथ ही नई भूमिकाएँ और कौशल उभरेंगे- जैसे AI-एडिटिंग विशेषज्ञ, डेटा आयोजक, AI-ट्रेनर, एथिक्स ऑफिसर और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट।
यह बदलाव पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को तकनीकी दक्षता और रणनीतिक सोच की तरफ ले जाएगा- जहां रचनात्मकता और नैतिक निर्णय मशीनों की तुलना में अधिक मूल्यवान होंगे।
2026 मीडिया में AI का वर्ष होगा- जहां कंटेंट निर्माण तेजी से, स्मार्टली और डेटा-संचालित तरीके से होगा। AI के सहयोग से मीडिया अधिक तीव्र, ज्यादा व्यक्तिगत और ज्यादा इंटरैक्टिव बनेगा। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि तकनीक की ताकत का सही इस्तेमाल तभी संभव है जब नैतिकता, गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए।
इसलिए 2026 का मीडिया परिदृश्य तकनीक और मानव बुद्धि का सही संतुलन तय करेगा, एक ऐसा संतुलन जहां AI इंसान के साथी के रूप में उभरता है, न कि उसका विकल्प।