समाज में मीडिया की भूमिका को लेकर इन तीन चीजों का जिक्र जरूरी: उपेंद्र राय

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 27 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 27 February, 2020
Upendra Rai

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज को बदलने में मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए ‘सहारा न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया और ट्रांसफेशन की बात की जाती है तो तीन बातें जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि मीडिया की सकारात्मक भूमिका क्या है, मीडिया की नकारात्मक भूमिका क्या है और मीडिया में संतुलन साधे रखना, यानी बैलेंस क्या है।

एक घटना का जिक्र करते हुए उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया किस हद तक नकारात्मक और सकारात्मक भूमिका निभा सकती है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि आप सबने पुलित्जर अवॉर्ड का नाम सुना होगा। पुलित्जर बहुत ही गरीब परिवार से थे और 19वीं सदी में वे हंगरी से न्यूयॉर्क आ गए थे। बहुत ही संघर्ष-परिश्रम करके उन्होंने एक अखबार खरीदा था, जो बाद में ‘न्यूयॉर्क वर्ल्ड’ के नाम से मशहूर हुआ था। ये अखबार में बाद में प्रभावी-शक्तिशाली दैनिक अखबार साबित हुआ था। उस समय अमेरिका में एक और अखबार था, जिसे विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट चलाते थे। वे अमेरिका के एक दूसरे शहर से न्यूयॉर्क में आकर बसे थे। विलियम हर्स्ट ने पुलित्जर अखबार के सभी अच्छे कर्मियों को तोड़ा और अपने अखबार की ओर ले गए। एक बार उन्होंने एक कहानी गढ़ी कि किस तरह से क्यूबा की एक लड़की को स्पेन ने अपने यहां बंदी बना लिया और वह कहानी इस तरह से चल पड़ी कि क्यूबा और स्पेन में युद्ध जैसी स्थित पैदा हो गई। बाद में ‘पुलित्जर’ अखबार ने पूरे झूठ का पर्दाफाश किया और बताया कि पूरी कहानी ही गलत थी। उस समय दोनों अखबारों में होड़ थी। यदि निगेटिविटी का उदाहरण दिया जाए तो ये अपने आप में बड़ा उदाहरण है, क्योंकि जिन दो देशों के बीच संबंध इतने मधुर थे, वे इतने ज्यादा खराब हो गए कि युद्ध जैसी नौबत आ गई। ये मीडिया का नकारात्मक प्रभाव ही तो है।

वहीं, मीडिया के संतुलित व्यवहार की बात करते हुए राय ने कहा,‘यहां महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के एक संवाद का जिक्र करना चाहूंगा कि जब ‘नवजीवन’ और ‘यंग इंडिया’ में महात्मा गांधी कॉलम लिखते थे  तो उन्होंने नेहरूजी से कहा कि आप भी कॉलम लिखा करिए। देश के लोगों को पता चलना चाहिए कि गांधी और नेहरू में कितने मतभेद हैं, क्योंकि जब मैं लिखता हूं तो कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ आदमी लिखने को तैयार नहीं होता है। इससे लोगों को ये पता नहीं चलता कि हमारे बीच जी-हुजूरी नहीं है, बल्कि हम एक-दूसरे के विचारों को पसंद और नापसंद भी करते हैं। लेकिन नेहरू जी गांधी जी के साथ कॉलम लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। जब गांधी जी ने ‘नवजीवन’ में कई ऐसे आर्टिकल लिखे, जैसे ‘सत्य के प्रयोग में मैंने आज अपने ब्रह्मचर्य को परखने की कोशिश की।’ इस पर उन्होंने कई बातें लिखीं, तब सरदार पटेल ने उनको पत्र लिखा जो ‘नवजीवन’ में प्रकाशित भी हुआ कि बापू जो आप सत्य का प्रयोग कर रहे हैं, वह हम सभी जानते हैं, लेकिन समाज से उसका बहुत ज्यादा मतलब नहीं है। इसलिए इतना स्पष्ट और साफ बने रहने की जरूरत नहीं है। ये आपके निजी प्रयोग हैं और आप इसे निजी तरीके से करिए। इसे लेकर समाज में लंबे समय तक बहस चलाने की जरूररत नहीं है, ये आपके व्यक्तिगत मामले में हैं इनको व्यक्तिगत तरीके से करिए।

राय ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जब आजादी का आंदोलन चल रहा था, उस समय जो अखबार निकल रहे थे, वे सभी चंदे से चलते थे और इसकी वजह से इन अखबारों की जवाबदेही समाज के प्रति थी, क्योंकि जनता का अखबार था, जनता के द्वारा, जनता के पैसे चलता था। वो तब किसी बिजनेस मोटिवेशन या उसके दवाब में नहीं चलता था, लेकिन आज की स्थिति ठीक इसके उलट है।

समाज में मीडिया की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि याद करिए पहले ऋषि-महर्षि वैद्य के रूप में इलाज करते थे, तो उनका एक उद्देश्य होता था कि बीमार को ठीक करना, लेकिन जब इस प्रोफेशन में बिजनेस घुसा तो आज देखिए कि किस तरह से हम लोग अखबारों में रोज खबरें छापते हैं और चैनलों पर बहस करते हैं कि कैसे किसी के मृत शरीर को वेटिंलेटर पर रखकर पांच दिन तक एयर पम्प करके उसको ‘जिंदा’ रखा गया और कैसे आज की तारीख में कई हॉस्पिटल्स चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा बीमार आदमी हमारे यहां ही भर्ती हों। इसके लिए उन्होंने मार्केटिंग के एग्जिक्यूटिव लगा रखे हैं। अब यहीं से होड़ शुरू होती है, क्योंकि सेवा का भाव तो चला गया और बिजनेस ने अपनी जगह बना ली है। ठीक ऐसे ही हम मीडिया के लोगों को भी आलोचना करने का ‘लाइसेंस’ मिला हुआ है और हम यह करते भी हैं। लेकिन कई बार सवाल उठता है कि हमारी आलोचना कौन करेगा, हम पर कौन नजर रखेगा। बवाल उस दिन खड़ा हो जाता है जब हम भी बिजनेस के दवाब में टीआरपी बढ़ाने के लिए, कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए, अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए कहानियां गढ़ने और बनाने लग जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सवाल तो तब खड़ा होता है जब कुछ चैनल ऐसे लोगों को अपने साथ कर लेते हैं जो दो मिनट में दस टायर और चार आदमियों को इकट्ठा करके दंगा करने से भी नहीं चूकते हैं। इस तरह की तमाम बाते हैं जो हम लोगों को पता है, जो हम बता सकते हैं कि हम हीं लोगों में से किस-किस चैनल पर इस तरह की खबरें चलीं। लेकिन साथ ही साथ देखा जाए तो तमाम निगेटिविटी के बीच मीडिया एक सशक्त आवाज भी है, एक सशक्त माध्यम भी है और खासतौर से मध्यम वर्ग की उम्मीदों को मीडिया ने जितना परवान चढ़ाया है, मीडिया ने जितना हौसला दिया है, शायद ही 500 सालों में कोई ऐसा माध्यम या तरीका हो, जिसने आम आदमी के भरोसे, साहस या उसके भरोसे को इतनी मजबूती दी हो।

राय ने कहा कि इस मामले में आप रानू मंडल का केस भी देख सकते हैं कि मीडिया ने कैसे एक भीख मांगकर अपनी जीविका चलाने वाली को रातों-रात स्टार बनाया और तमाम ऐसे लोगों के मन में ये भरोसा पैदा किया, जिसके पास कोई साधन-रिसोर्स नहीं है कि वह कैसे रातों-रात कोई चमत्कार कर सकता है। यही मीडिया और सोशल मीडिया की ताकत है।

आज 40 करोड़ लोग भारत में वॉट्सऐप इस्तेमाल करते हैं और वे ऐप्स जो बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं, वे न तो कोई पत्रकार हायर करते हैं और न ही किसी मीडियाकर्मी को नौकरी देते हैं फिर भी गूगल की दखल न्यूज में सबसे ज्यादा है और बिना मीडिया का काम करते हुए वॉट्सऐप सशक्त माध्यम बन चुका है।  

जो बदलाव मीडिया के जरिए सोसायटी में हो रहा है वह बहुत हद तक अच्छा है। प्रकृति का सारा सिस्टम द्वंद्वात्म है। अगर कहीं अच्छा है तो उसके साथ बुरा जुड़ा हुआ है और कहीं बुरा है तो उसके साथ अच्छा भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इन तमाम बहस के बीच मैं बतौर जर्नलिस्ट इतना ही कहना चाहूंगा कि अभी तक समाज के प्रति मीडिया ने जो अपनी भूमिका निभाई है वह बहुत अच्छी है और आम आदमी के लिए मीडिया ने भरोसा जगाने का काम किया है। शायद मौजूदा हालात में कोई ऐसा माध्यम, कोई ऐसा साधन नहीं है जो आम आदमी की ताकत बन सके। कहीं न कहीं न्यूज चैनल्स ने, सोशल मीडिया ने आम आदमी के दैनिक व्यवहार, उसके दैनिक जीवन को बदलने का काम किया है।

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ट्रेडमार्क-टैगलाइन के इस्तेमाल को लेकर Times Network की याचिका पर HC ने दिया ये आदेश

वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप में एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Times Network

दिल्ली हाई कोर्ट ने अरनब गोस्वामी की कंपनी ‘एआरजी आउटलेयर मीडिया’ (ARG Outlier Media Private Limited) द्वारा ‘NEWS HOUR’ अथवा इसके नाम से मिलते-जुलते किसी भी ट्रेड मार्क का इस्तेमाल किए जाने पर अंतरिम तौर पर रोक लगा दी है।   

बता दें कि वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन/टाइम्स नेटवर्क ने अपने ट्रेडमार्क ‘न्यूज आवर’ (News Hour) और ‘नेशन वॉन्ट्स टू नो’ (Nation Wants to Know) के संरक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अरनब गोस्वामी की कंपनी एआरजी आउटलेयर मीडिया के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का एक मुकदमा दायर किया था।

वहीं, ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के बारे में न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने कहा कि सभी सबूतों का विस्तृत परीक्षण किए जाने की जरूरत है, इसलिए तब तक एआरजी आउटलियर को किसी भी न्यूज चैनल पर अपने भाषण/प्रजेंटेशन आदि के हिस्से के रूप में इसके इस्तेमाल की अनुमति है।

हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड किसी भी संबंध में ट्रेडमार्क के समान इसका इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे इस तरह के इस्तेमाल का हिसाब रखने की जरूरत होगी। इस तरह के हिसाब अथवा खातों को हर छह महीने में एक बार एआरजी के निदेशकों में से एक के हलफनामे पर नियमित रूप से अदालत में दायर किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के मालिकाना हक के मामले में किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दी और इसे सबूतों के आधार पर निर्णय के लिए छोड़ दिया। इसी तरह वर्ष 2017 में ‘टाइम्स नेटवर्क’  ने दिल्ली हाई कोर्ट में एआरजी आउटलियर के खिलाफ गोपनीयता भंग के लिए एक मुकदमा दायर किया था। इसमें एआरजी ने कोर्ट में यह वचन दिया था कि वह अपने चैनल पर टाइम्स नाउ की प्रोग्रामिंग सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेंगे और इसके आधार पर उसे राहत प्रदान की गई थी।

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इस वजह से पहले पत्रकार के बेटे का किया अपहरण, फिर कर दी हत्या

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Crime

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है। फिरौती के लिये अपहर्ताओं ने 45 लाख रुपए देने की मांग की थी। पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, बच्चे के पिता को जानने वाले 23 वर्षीय मैकेनिक ने बच्चे का 18 अक्टूबर को अपहरण किया था और उसी दिन ही गला दबाकर हत्या करने के बाद बच्चे के शव को पहाड़ी पर जला दिया गया था। पुलिस ने बताया कि अपहर्ताओं को भय था कि बच्चे को छोड़ने पर वह उसकी पहचान उजागर कर देगा, लिहाजा आरोपी ने उसकी हत्या कर दी थी।

बता दें कि महबूबाबाद शहर के कृष्णा कॉलोनी निवासी में रंजीत कुमार का परिवार रहता है। रंजीत कुमार पेशे से पत्रकार हैं। उनका 9 वर्षीय बड़ा बेटा दीक्षित रेड्डी का रविवार शाम 6.30 बजे के आसपास बाइक सवार अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया था, जब वह महबूबाबाद शहर में स्थित अपने घर के बाहर खेल रहा था। अपहर्ता मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये थे और बच्चे को उठा ले गए। पुलिस को शक था कि बच्चा संभवत: उनको जानता था। बाद में अपहर्ताओं ने इंटरनेट के माध्यम से फोन पर बच्चे की मां से संपर्क किया और उसकी रिहाई के लिये  45 लाख रुपए देने की मांग की थी।

पुलिस ने बताया कि बच्चे के पिता द्वारा हाल में संपत्ति खरीदे जाने की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने जल्द से जल्द पैसे कमाने के लिए अपहरण की योजना बनाई, जिसके बाद इस अपराध को अंजाम दिया, ताकि वह अमीरों की तरह जिंदगी जी सके। महबूबाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक कोटी रेड्डी ने बताया कि योजना के तहत आरोपी 18 अक्टूबर को पीड़ित के घर गया और बच्चे को बुलाया। चूंकि अरोपी बच्चे के पिता का जानता था इसलिए बच्चा उसके साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर चला गया। आगे ले जाने के बाद उसे एहसास हुआ कि अकेले बच्चे को संभालना बहुत मुश्किल है। आरोपी सीसीटीवी कैमरे से बचने के लिए बच्चे को अलग रास्ते से शहर से बाहर किसी सूनसान जगह पर ले गया। वहां उसने बच्चे को बंधक बनाकर रखा। वह डर गया था कि बच्चा अपने माता-पिता को सब बता देगा, इसलिए उसने बच्चे की हत्या कर दी।

बच्चे की हत्या करने के बाद भी, उसने घटना के दिन रात नौ बजे उसकी मां वसंता को फोन किया और 45 लाख रुपए की राशि मांगी। अपहर्ता रोज इंटरनेट से बच्चे के परिवार को फोन कर पैसा मांगता था। बुधवार को उसने परिवार से पैसे को मोडू कोटला इलाके में लाने के लिए कहा। एक न्यूज चैनल में काम करने वाले बच्चे के पिता रंजीत रेड्डी पैसों का बैग लेकर पहुंच भी गए, लेकिन अपहरर्ता वहां से बाहर नहीं आया। उन्होंने वहां बुधवार रात तक इंतजार किया।

बाद में परिवार की शिकायत पर अपहरर्ता को पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाया। एसपी ने कहा कि उन्होंने कई संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन जांच से पता चला कि मंदा सागर ने इस घटना को अकेले अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए इलाके के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और आरोपी को बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाने की तस्वीर दिखी, जिसके आधार पर मैकेनिक को गिरफ्तार किया गया। 

पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस अपराध में और लोग तो शामिल नहीं है।

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मीटिंग के समय वीडियो कॉल पर रिपोर्टर ने किया कुछ ऐसा, मांगनी पड़ी माफी

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को देखते हुए देश-दुनिया में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने का चलन बढ़ा है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Meeting

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को देखते हुए देश-दुनिया में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने का चलन बढ़ा है।  तमाम कंपनियां घरों से काम कराने को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में तमाम लोगों के लिए उनका लिविंग रूम दफ्तर और वीडियो कॉल उनके नए कॉन्फ्रेंस रूम में तब्दील हो गया है। ऐसा भी देखने में आया है कि वीडियो कॉल के दौरान कुछ लोग भूल जाते हैं कि वह सार्वजनिक मंच पर हैं और कोई न कोई ऐसी ‘हरकत’ कर देते हैं, जिससे उन्हें बाद में शर्मिंदा होना पड़ता है।

ऐसा ही एक मामला अमेरिका से सामने आया है, जहां पर पिछले हफ्ते वर्चुअल मीटिंग के दौरान अमेरिकी मैगजीन ‘न्यू यॉर्कर’ (New Yorker) का एक रिपोर्टर हस्तमैथुन (masturbating) करने लगा। इस दौरान जेफरी टोबिन (jeffrey toobin) नामक इस रिपोर्टर को अहसास ही नहीं हुआ कि तमाम लोग उसे देख रहे हैं। रिपोर्टर की इस हरकत पर उसे निलंबित कर दिया गया है।

म़ीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते ‘न्यू यॉर्कर’ और ‘डब्ल्यूएनवाईसी रेडियो’ (WNYC radio) के सदस्यों के बीच जूम वीडियो कॉल हो रही थी। इस कॉल के दौरान थोड़ी देर के लिए ब्रेक हुआ तो टोबिन दूसरी कॉल पर व्यस्त हो गए। ब्रेक के बाद जब अन्य लोग वीडियो कॉल पर वापस आए तो उन्हें जेफरी टोबिन हस्तमैथुन करते हुए दिखाई दिए।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस बारे में टोबिन का कहना है, ‘मैंने एक शर्मनाक मूर्खतापूर्ण गलती की। मुझे लगा कि कैमरा बंद है। इस शर्मनाक गलती के लिए मैं अपनी पत्नी, परिवार, दोस्तों और सहयोगियों से माफी मांगता हूं।’ ‘न्यू यॉर्कर’ की प्रवक्ता नताली रेबे (Natalie Raabe) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि टोबिन को निलंबित कर दिया गया है और मामले में जांच का आदेश दिया गया है।

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बिहार में इस पॉलिटिकल पार्टी के प्रवक्ता बने पत्रकार असित नाथ

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Asit Nath

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें बिहार कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इस बात की जानकारी असित नाथ ने खुद अपने फेसबुक पेज पर दी है।

बिहार के बेतिया के रहने वाले असित नाथ तिवारी ने पश्चिम चंपारण में पढ़ाई की है और पत्रकारिता की शुरुआत भी वहीं से की। उन्होंने दैनिक जागरण की मुजफ्फरपुर यूनिट से सम्बद्ध होकर रिपोर्टिंग की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टीवी पत्रकारिता में असिता नाथ ने महुआ टीवी से बतौर एंकर शुरुआत की और यह सफर मौर्या टीवी, जी न्यूज हिंदी, के न्यूज इंडिया और समाचार प्लस आदि  तक जारी रहा। असित इन चैनल्स में आउटपुट हेड समेत कई वरिष्ठ पदों पर रहे। पत्रकारिता के साथ साथ कविता और सार्थक लेखन में भी असित की विशेष रुचि है। उन्होंने ‘नदी लौटती भी है’ नाम से कहानी संग्रह भी लिखा है।

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अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने PM मोदी को लिखा लेटर, उठाया ये बड़ा मुद्दा

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं।

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Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
PM MODI

दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के उत्पीड़न का मामला उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को लिखे गए इस पत्र में इन दोनों प्रेस संस्थाओं ने पीएम से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने का आग्रह किया है, जिससे पत्रकारों का उत्पीड़न न हो और वे प्रतिशोध के डर के बिना काम कर सकें।

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ऑस्ट्रिया-मुख्यालय स्थित ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और बेल्जियम स्थित ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं। इन दोनों संस्थाओं ने मोदी से राज्य सरकारों को पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह समेत सभी आरोपों को वापस लेने का निर्देश देने के लिए कहा है, जो कर्तव्य पालन के दौरान उन पर लगाए गए हैं।

इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पत्र के अनुसार, ‘स्वास्थ्य संकट का उपयोग उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार की कमी को उजागर किया है। एक सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के लिए एक स्वतंत्र मीडिया आवश्यक है।’

उन्होंने लिखा है, ‘स्वतंत्र, महत्वपूर्ण पत्रकारों को परेशान करने के लिए राजद्रोह के कानूनों का उपयोग न केवल देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन है। यह सरकार द्वारा किसी आलोचना को चुप कराने का भी प्रयास है।’

रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों एसोसिशंस का कहना है, ’भारत में 25 मार्च को जब पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था, तब से 31 मई के बीच महामारी को कवर करने के लिए 55 पत्रकारों को निशाना बनाया गया। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई।’

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पत्रकार की पिटाई के खिलाफ आगे आया एडिटर्स गिल्ड, उठाई ये मांग

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने दिल्ली में ‘कारवां’ मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है। इस बारे में गिल्ड की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है। गिल्ड ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की मांग की है।  

गिल्ड का कहना है कि पेनकर पर पुलिस ने उस समय हमला किया, जब वह बतौर पत्रकार अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। दिल्ली में पिछले दो महीनों के दौरान कारवां मैगजीन का यह चौथा पत्रकार है, जिस पर हमला किया गया है।

यह भी पढ़ें: पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, कमिश्नर को दी शिकायत

गिल्ड की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, ‘पिछले दिनों उत्तरी दिल्ली में नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना के मामले में कुछ छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मॉडल टाउन इलाक़े के पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पेनकर इसी मामले की कवरेज कर रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान पेनकर ने अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन पुलिस नहीं मानी। पुलिस ने उनका फोन जब्त कर लिया और खींचे गए फोटोग्राफ डिलीट कर दिए।’

इस स्टेटमेंट भी यह भी कहा गया है, ‘कारवां के रिपोर्टर पर हुआ यह हमला संवैधानिक सिद्धांतों और मीडिया के स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के अधिकार का उल्लंघन है। गिल्ड हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही पत्रकार के खिलाफ किसी भी मामले को रोकने का निर्देश देना चाहिए।’

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ZEE में हुए बड़े बदलाव, राहुल जौहरी को मिली ये जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Zee

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की।

इस पुनर्गठन के तहत पुनीत मिश्रा कंटेंट व इंटरनेशनल मार्केट्स के प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं अमित गोयनका डिजिटल बिजनेस एंड प्लेटफॉर्म्स के प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। तरुण कात्याल जो ZEE5 इंडिया के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अमित गोयनका को रिपोर्ट करते रहेंगे।

शरीक पटेल इंटीग्रेटेड मूवीज बिजनेस का काम देखेंगे और अनुराग बेदी म्यूजिक बिजनेस संभालते रहेंगे।

इसके अलावा राहुल जौहरी को प्रेजिडेंट (बिजनेस- साउथ एशिया) के तौर पर नियुक्त किया गया है और वे इंटीग्रेटेड रेवेन्यू और मोनेटाइजिंग टीम का नेतृत्व करेंगे। जौहरी इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पहले सीईओ थे और करीब चार साल तक उन्होंने इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। बीसीसीआई से पहले वे करीब 15 साल तक डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

पुनीत मिश्रा, अमित गोयनका, शरीक पटेल, अनुराग बेदी और राहुल जौहरी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे। कंपनी में किए गए ये बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

 

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अब इस तरह का कंटेंट प्रोडक्शन हाउसेज से सीधे तैयार करा सकेगा प्रसार भारती

15 अक्टूबर को हुई प्रसार भारती बोर्ड की 163वीं बैठक में इस संबंध में लिया गया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’  (Prasar Bharati) प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप अब रणनीतिक, राष्ट्रीय व अन्य प्रतिष्ठित महत्व की परियोजनाओं के लिए जाने-माने प्रॉडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को सीधे कंटेंट का प्रोडक्शन प्रदान कर सकता है।

प्रसार भारती बोर्ड ने इसके लिए दिशा-निर्देशों को अपनी मंजूरी दे दी है। प्रसार भारती बोर्ड की 15 अक्टूबर को हुई 163वीं बोर्ड बैठक में ‘Policy Guidelines for Commissioning of Programmes under DAP (Direct Assignment Process)’ को मंजूरी दे दी गई है। ये गाइडलाइंस सभी पूर्व और वर्तमान नीतियों में ‘DAP’  के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं में लागू होंगी।

इन गाइडलाइंस के अनुसार प्रसार भारती प्रबंधन सीधे असाइमेंट के लिए समय-समय पर रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के टॉपिक्स/सब्जेक्ट/थीम्स को शॉर्टलिस्ट करेगा। जिन प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को डाइरेक्ट असाइमेंट दिया जाना है, उनकी पहचान प्रसार भारती प्रबंधन करेगा। ‘DAP’ प्रक्रिया शुरू करने से पहले शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के बारे में संबंधित बोर्ड समिति को सूचित किया जाएगा।

प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स की ओर से रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के कंटेंट को तैयार करने के लिए मिलने वाले स्वत:प्रस्तावों को भी पहले संबंधित बोर्ड कमेटी के सामने शॉर्टलिस्टिंग के लिए रखना होगा। इसके बाद मूल्यांकन के लिए उन्हें ‘DAP’ की कमेटी के सामने रखा जाएगा।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनीं TRAI-ब्रॉडकास्टर्स की दलीलें, दिया ये आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायलय में चल रही है सुनवाई। कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
TRAI

बॉम्बे हाई कोर्ट का कहना है कि वर्ष 2020 के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (नियामक ढांचे) को लागू न किए जाने को लेकर ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ जबरन कोई कठोर कदम नहीं उठा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बताया जाता है कि कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही कहा गया है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता, ट्राई इस मामले में ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता है।

इससे पहले एक सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.ए. सैयद और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की डिवीजन बेंच ने ट्राई से कई सवाल पूछे थे। बता दें कि तमाम ब्रॉडकास्टर्स और आईबीएफ ने ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर (NTO-2) को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए इस राज्य में जल्द लागू होगा कानून

लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Journalist Protection Act

झारखंड में जल्द ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) लागू होगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उसके बाद इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। ।

मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान एसोसिएशन ने दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मुआवजा देने, गंभीर रूप से बीमार पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने और पत्रकार पेंशन योजना में सुधार करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद सभी पत्रकारों को पत्रकार पेंशन योजना का लाभ देने, इसकी खामियों में सुधार करने की बात कही। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार 10 पत्रकारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने का निर्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज हसन, झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, रांची जिला अध्यक्ष आलोक सिन्हा और पत्रकार नईमुल्ला खान आदि शामिल थे।

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