समाज में मीडिया की भूमिका को लेकर इन तीन चीजों का जिक्र जरूरी: उपेंद्र राय

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 27 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 27 February, 2020
Upendra Rai

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज को बदलने में मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए ‘सहारा न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया और ट्रांसफेशन की बात की जाती है तो तीन बातें जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि मीडिया की सकारात्मक भूमिका क्या है, मीडिया की नकारात्मक भूमिका क्या है और मीडिया में संतुलन साधे रखना, यानी बैलेंस क्या है।

एक घटना का जिक्र करते हुए उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया किस हद तक नकारात्मक और सकारात्मक भूमिका निभा सकती है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि आप सबने पुलित्जर अवॉर्ड का नाम सुना होगा। पुलित्जर बहुत ही गरीब परिवार से थे और 19वीं सदी में वे हंगरी से न्यूयॉर्क आ गए थे। बहुत ही संघर्ष-परिश्रम करके उन्होंने एक अखबार खरीदा था, जो बाद में ‘न्यूयॉर्क वर्ल्ड’ के नाम से मशहूर हुआ था। ये अखबार में बाद में प्रभावी-शक्तिशाली दैनिक अखबार साबित हुआ था। उस समय अमेरिका में एक और अखबार था, जिसे विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट चलाते थे। वे अमेरिका के एक दूसरे शहर से न्यूयॉर्क में आकर बसे थे। विलियम हर्स्ट ने पुलित्जर अखबार के सभी अच्छे कर्मियों को तोड़ा और अपने अखबार की ओर ले गए। एक बार उन्होंने एक कहानी गढ़ी कि किस तरह से क्यूबा की एक लड़की को स्पेन ने अपने यहां बंदी बना लिया और वह कहानी इस तरह से चल पड़ी कि क्यूबा और स्पेन में युद्ध जैसी स्थित पैदा हो गई। बाद में ‘पुलित्जर’ अखबार ने पूरे झूठ का पर्दाफाश किया और बताया कि पूरी कहानी ही गलत थी। उस समय दोनों अखबारों में होड़ थी। यदि निगेटिविटी का उदाहरण दिया जाए तो ये अपने आप में बड़ा उदाहरण है, क्योंकि जिन दो देशों के बीच संबंध इतने मधुर थे, वे इतने ज्यादा खराब हो गए कि युद्ध जैसी नौबत आ गई। ये मीडिया का नकारात्मक प्रभाव ही तो है।

वहीं, मीडिया के संतुलित व्यवहार की बात करते हुए राय ने कहा,‘यहां महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के एक संवाद का जिक्र करना चाहूंगा कि जब ‘नवजीवन’ और ‘यंग इंडिया’ में महात्मा गांधी कॉलम लिखते थे  तो उन्होंने नेहरूजी से कहा कि आप भी कॉलम लिखा करिए। देश के लोगों को पता चलना चाहिए कि गांधी और नेहरू में कितने मतभेद हैं, क्योंकि जब मैं लिखता हूं तो कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ आदमी लिखने को तैयार नहीं होता है। इससे लोगों को ये पता नहीं चलता कि हमारे बीच जी-हुजूरी नहीं है, बल्कि हम एक-दूसरे के विचारों को पसंद और नापसंद भी करते हैं। लेकिन नेहरू जी गांधी जी के साथ कॉलम लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। जब गांधी जी ने ‘नवजीवन’ में कई ऐसे आर्टिकल लिखे, जैसे ‘सत्य के प्रयोग में मैंने आज अपने ब्रह्मचर्य को परखने की कोशिश की।’ इस पर उन्होंने कई बातें लिखीं, तब सरदार पटेल ने उनको पत्र लिखा जो ‘नवजीवन’ में प्रकाशित भी हुआ कि बापू जो आप सत्य का प्रयोग कर रहे हैं, वह हम सभी जानते हैं, लेकिन समाज से उसका बहुत ज्यादा मतलब नहीं है। इसलिए इतना स्पष्ट और साफ बने रहने की जरूरत नहीं है। ये आपके निजी प्रयोग हैं और आप इसे निजी तरीके से करिए। इसे लेकर समाज में लंबे समय तक बहस चलाने की जरूररत नहीं है, ये आपके व्यक्तिगत मामले में हैं इनको व्यक्तिगत तरीके से करिए।

राय ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जब आजादी का आंदोलन चल रहा था, उस समय जो अखबार निकल रहे थे, वे सभी चंदे से चलते थे और इसकी वजह से इन अखबारों की जवाबदेही समाज के प्रति थी, क्योंकि जनता का अखबार था, जनता के द्वारा, जनता के पैसे चलता था। वो तब किसी बिजनेस मोटिवेशन या उसके दवाब में नहीं चलता था, लेकिन आज की स्थिति ठीक इसके उलट है।

समाज में मीडिया की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि याद करिए पहले ऋषि-महर्षि वैद्य के रूप में इलाज करते थे, तो उनका एक उद्देश्य होता था कि बीमार को ठीक करना, लेकिन जब इस प्रोफेशन में बिजनेस घुसा तो आज देखिए कि किस तरह से हम लोग अखबारों में रोज खबरें छापते हैं और चैनलों पर बहस करते हैं कि कैसे किसी के मृत शरीर को वेटिंलेटर पर रखकर पांच दिन तक एयर पम्प करके उसको ‘जिंदा’ रखा गया और कैसे आज की तारीख में कई हॉस्पिटल्स चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा बीमार आदमी हमारे यहां ही भर्ती हों। इसके लिए उन्होंने मार्केटिंग के एग्जिक्यूटिव लगा रखे हैं। अब यहीं से होड़ शुरू होती है, क्योंकि सेवा का भाव तो चला गया और बिजनेस ने अपनी जगह बना ली है। ठीक ऐसे ही हम मीडिया के लोगों को भी आलोचना करने का ‘लाइसेंस’ मिला हुआ है और हम यह करते भी हैं। लेकिन कई बार सवाल उठता है कि हमारी आलोचना कौन करेगा, हम पर कौन नजर रखेगा। बवाल उस दिन खड़ा हो जाता है जब हम भी बिजनेस के दवाब में टीआरपी बढ़ाने के लिए, कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए, अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए कहानियां गढ़ने और बनाने लग जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सवाल तो तब खड़ा होता है जब कुछ चैनल ऐसे लोगों को अपने साथ कर लेते हैं जो दो मिनट में दस टायर और चार आदमियों को इकट्ठा करके दंगा करने से भी नहीं चूकते हैं। इस तरह की तमाम बाते हैं जो हम लोगों को पता है, जो हम बता सकते हैं कि हम हीं लोगों में से किस-किस चैनल पर इस तरह की खबरें चलीं। लेकिन साथ ही साथ देखा जाए तो तमाम निगेटिविटी के बीच मीडिया एक सशक्त आवाज भी है, एक सशक्त माध्यम भी है और खासतौर से मध्यम वर्ग की उम्मीदों को मीडिया ने जितना परवान चढ़ाया है, मीडिया ने जितना हौसला दिया है, शायद ही 500 सालों में कोई ऐसा माध्यम या तरीका हो, जिसने आम आदमी के भरोसे, साहस या उसके भरोसे को इतनी मजबूती दी हो।

राय ने कहा कि इस मामले में आप रानू मंडल का केस भी देख सकते हैं कि मीडिया ने कैसे एक भीख मांगकर अपनी जीविका चलाने वाली को रातों-रात स्टार बनाया और तमाम ऐसे लोगों के मन में ये भरोसा पैदा किया, जिसके पास कोई साधन-रिसोर्स नहीं है कि वह कैसे रातों-रात कोई चमत्कार कर सकता है। यही मीडिया और सोशल मीडिया की ताकत है।

आज 40 करोड़ लोग भारत में वॉट्सऐप इस्तेमाल करते हैं और वे ऐप्स जो बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं, वे न तो कोई पत्रकार हायर करते हैं और न ही किसी मीडियाकर्मी को नौकरी देते हैं फिर भी गूगल की दखल न्यूज में सबसे ज्यादा है और बिना मीडिया का काम करते हुए वॉट्सऐप सशक्त माध्यम बन चुका है।  

जो बदलाव मीडिया के जरिए सोसायटी में हो रहा है वह बहुत हद तक अच्छा है। प्रकृति का सारा सिस्टम द्वंद्वात्म है। अगर कहीं अच्छा है तो उसके साथ बुरा जुड़ा हुआ है और कहीं बुरा है तो उसके साथ अच्छा भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इन तमाम बहस के बीच मैं बतौर जर्नलिस्ट इतना ही कहना चाहूंगा कि अभी तक समाज के प्रति मीडिया ने जो अपनी भूमिका निभाई है वह बहुत अच्छी है और आम आदमी के लिए मीडिया ने भरोसा जगाने का काम किया है। शायद मौजूदा हालात में कोई ऐसा माध्यम, कोई ऐसा साधन नहीं है जो आम आदमी की ताकत बन सके। कहीं न कहीं न्यूज चैनल्स ने, सोशल मीडिया ने आम आदमी के दैनिक व्यवहार, उसके दैनिक जीवन को बदलने का काम किया है।

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प्रसार भारती ने जारी की डीडी फ्रीडिश पर मौजूद चैनल्स की लिस्ट, लिया ये फैसला

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्ले‘टफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्‍लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के अनुसार, इस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुल 88 चैनल्स हैं। इनमें पब्लिक और प्राइवेट चैनल्स शामिल हैं।  

प्रसार भारती ने 28 फरवरी को हुई 44वीं ई-नीलामी के दौरान डीडी फ्रीडिश के MPEG-2 स्लॉट की बिक्री से 53 चैनलों के लिए 594.25 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

बता दें कि इस पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में एहतियाती कदम उठाए हुए हाल ही में MPEG-2 की ई-नीलामी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रसार भारती ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के लिए डीडी फ्रीडिश डीटीएच प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स को भरने के लिए निजी टीवी चैनल्स से आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 मार्च अपराह्न तीन बजे तक रखी गई थी।

इस बारे में प्रसार भारती के डायरेक्टर (डीटीएच) इंद्रजीत ग्रेवाल का कहना है, ‘कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए गए कई एहतियाती कदमों को ध्यान में रखते हुए टीवी चैनल्स से आवेदन पाने और आवंटन की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।’

 

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एडिटर्स गिल्ड ने सरकार की इस बात पर जताई हैरानी, यूं की मीडिया की वकालत

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयान पर काफी हैरानी जताई है

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था  ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) सरकार के उस बयान पर काफी क्षुब्ध है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले प्रवासी कामगारों के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया को भी दोषी ठहराया था।

इस बारे में अब गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कही गईं इस तरह की बातों से उसे व्याकुलता और हैरानी हुई है। इसके साथ ही गिल्ड का यह भी कहना है कि वर्तमान हालातों में अपने काम में मुस्तैदी से जुटी मीडिया को दोषी ठहराना केवल उसे कमजोर करना है। अभूतपूर्व संकट के दौरान मीडिया पर लगे इस तरह के आरोप देश के सामने खबरों के प्रसार की प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकते हैं। दुनिया में किसी भी देश में कोई भी लोकतंत्र अपने मीडिया का मुंह बंद करके इस महामारी के खिलाफ नहीं लड़ रहा है।

गिल्ड ने वेबसाइट ‘द वायर’ (The Wire) के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी संज्ञान में लिया है। गिल्ड का मानना ​​है कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस तरह के हस्तक्षेप मीडिया को उसके उद्देश्य को हासिल करने में बाधा पैदा करेंगे। गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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कोरोना संकट के बीच कई मैगजींस हुईं बंद, वहीं अरुण पुरी ने दिलाया ये भरोसा

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Aroon Purie

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना को लेकर फैली अफवाहों के चलते लोगों के दिलोदिमाग में यह बात घर कर गई है कि अखबार भी वायरस फैला सकता है। इस वजह से अखबारों के सर्कुलेशन में तो कमी आई ही है, साथ ही उन्हें मिलने वाले विज्ञापन भी घटे हैं।

अकेले मध्य प्रदेश में 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार मालिकों ने अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद कर दिया है। वहीं, मैगज़ीन भी इससे अछूती नहीं हैं। न्यूज़ीलैंड के विख्यात मैगज़ीन प्रकाशन ‘बाऊर मीडिया’ ने इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बाऊर मीडिया ‘द लिसनर, वुमन डे, न्यूजीलैंड वुमन वीकली, नॉर्थ एंड साउथ और नेक्स्ट’ नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। इस संबंध में कंपनी के मुख्य कार्यकारी ब्रेंडन हिल का कहना है कि COVID-19 से मुकाबले के लिए चल रहे लॉकडाउन से मैगजींस के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है और इससे व्यवसाय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गया है। लिहाजा, हमें मज़बूरी में प्रकाशन बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रिकाएं विज्ञापन पर निर्भर करती हैं और मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कब तक सब कुछ ठीक हो पाएगा।

बाऊर मीडिया ने अपनी मैगजींस के खरीदारों की तलाश करने के लिए व्यावसायिक सलाहकार फर्म EY को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस फैसले के बारे में कर्मचारियों को आज सुबह ही जानकारी दी है। हालांकि, ब्रेंडन हिल का कहना है कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिया जाएगा। बाऊर मीडिया के इस फैसले ने जहां मीडिया जगत को हिला दिया है, वहीं ‘इंडिया टुडे’ समूह के चेयरमैन अरुण पुरी की तरफ से मीडियाकर्मियों के लिए एक राहत देने वाला समाचार आया है। अरुण पुरी ने साफ किया है कि 'इंडिया टुडे' मैगजीन पहले की तरह ही प्रकाशित होती रहेगी और हम कोरोना वायरस को जीतने नहीं देंगे।

उन्होंने ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, ‘पिछले 44 सालों से 'इंडिया टुडे' का हर अंक समय पर आया है और हम COVID-19 को अपना रिकॉर्ड खराब करने नहीं देंगे। हम हर हफ्ते बेहतरीन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे।’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘इस हफ्ते की शुरुआत से हमने मैगजीन के ऑनलाइन और प्रिंट दोनों संस्करण प्रकाशित करने का फैसला लिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन पर हमारी विशेष कवरेज पढ़ने के लिए तैयार रहें। साथ ही हम कोरोना वायरस संकट पर रोजाना एक न्यूजलेटर भी प्रकाशित कर रहे हैं।’ 

 

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ABP न्यूज नेटवर्क ने जुल्फिया वारिस को अपनी इस नई इकाई का बनाया बिजनेस हेड

एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
zulfia

'एबीपी न्यूज नेटवर्क' (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क कंटेंट स्टूडियो’ (ABP News Network Content Studio) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। जुल्फिया की जिम्मेदारी कंपनी की नई सहायक इकाई  ‘एएनएन कंटेंट स्टूडियो’ (ANN Content Studio) के साथ-साथ सभी प्लेटफार्म्स के लिए कंटेंट प्रड्यूस करने की होगी।

जुल्फिया को मीडिया इंडस्ट्री में 20 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है। इससे पहले वे डिस्कवरी इंडिया (Discovery India) में प्रीमियम हेड और डिजिटल नेटवर्क की वीपी-प्रॉडक्ट हेड थीं। अपनी इस भूमिका में जुल्फिया डिस्कवरी इंडिया चैनल्स के लिए फैक्चुअल और लाइफ स्टाइल कैटेगरी में अपना योगदान देती थीं। उन्होंने इसके अलावा ‘टीवी18 इंडिया’ (TV18 India Ltd), ‘एमटीवी इंडिया’ (M.T.V India), ‘चैनल वी इंडिया’ (Channel V India), ‘स्टार टीवी नेटवर्क’ (Star TV Network) और जी एंटरटेनमेंट (Star TV Network) जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

जुल्फिया ने 1998 में सोफिया कॉलेज मुंबई से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद 1999 में सोफिया पॉलिटेक्निक मुंबई से सोशल कम्युनिकेशंस एंड मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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लॉकडाउन की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ पुलिस ने ये किया सलूक

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
journalist

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है। लिहाजा मीडिया को काम करने में परेशानी न हो इसके लिए पीएम मोदी ने मीडिया को इमरजेंसी जरूरत में शामिल किया है। लेकिन फिर अलग-अलग जगहों से पुलिस के द्वारा पत्रकारों के साथ बर्बरता के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर से सामने आया है।

बता दें कि घटना ग्वालियर के चेतकपुरी गेट की है। यहां शहर में लगे लॉकडाउन की रिपोर्टिंग कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युवा पत्रकार चेतन सेठ के साथ पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार करते हुए न सिर्फ उन्हें गालियां दीं, बल्कि विरोध करने पर पत्रकार के साथ मारपीट भी की, जिसमें चोटिल हो गया है। पत्रकार का जेएएच अस्पताल में इलाज कराया गया।

दरअसल, पुलिसकर्मियों ने पत्रकार को रिर्पोटिंग करने से मना किया, जिसका विरोध करने पर रिर्पोटर को पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए गालियां दी कि तुम मीडिया वाले ज्यादा परेशान कर रह हो। इसके बाद, पुलिसकर्मियों ने बर्बरता दिखाते हुए पत्रकार पर लाठियों से हमला कर दिया, जिससे पत्रकार के बायां हाथ फ्रेक्चर हो गया।

इसके बाद शहर के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम पत्रकारों ने फूलबाग चौराहे पर अपने कैमरा बैग सड़क पर रख लग पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार का विरोध किया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी नवनीत भसीन ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें एएसआई के.के शाक्य, आकक्षक गौरव शर्मा और आरक्षक बालेंद्र शर्मा के नाम शामिल है।

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CNBC Awaaz की एंकर मुग्धा मिश्रा ने लिया ये फैसला

जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा इस चैनल के साथ एक दशक से ज्यादा समय से जुड़ी हुई थीं और एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Mugdha Mishra

हिंदी के बिजनेस न्यूज चैनल ‘सीएनबीसी आवाज’ (CNBC Awaaz) से खबर है कि मुग्धा मिश्रा ने ग्रुप को अलविदा कह दिया है। जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा यहां एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं। वे पिछले एक दशक से ज्यादा समय से चैनल के साथ थीं।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से इस खबर की पुष्टि करते हुए मुग्धा ने कहा, ‘हां मैंने ‘सीएनबीसी आवाज’ को बाय बोल दिया है और अब मैं एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ऑटो सेक्शन को कवर करूंगी।

मुग्धा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में ‘सीएनबीसी आवाज’ में एडिटेरियल डेस्क पर बतौर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में शुरू की थी। यहां वह 10 एनालिस्ट की टीम का नेतृत्व करती थीं, जो 24x7 आधार पर रिसर्च इनपुट्स उपलब्ध कराती थी।

2008 में उन्होंने ब्लूमबर्ग-यूटीवी (यूटीवी समूह और ब्लूमबर्ग के बीच एक जॉइंट वेंचर, जिसे बाद में BTVi  के नाम से जाना गया) को जॉइन कर लिया था। यहां उन्होंने सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम किया और एडिटोरियल डेस्क पर भी अपना योगदान दिया।

वर्ष 2009 में मुग्धा ने ‘सीएनबीसी आवाज’ को जॉइन कर लिया और यहां अपने करियर की सबसे लंबी पारी खेली। यहां उन्होंने ‘आवाजओवर ड्राइव’ (Awaaz Overdrive) शो की एंकरिंग की। इस साप्ताहिक शो में वह कार और मोटरसाइकिलों के बारे में बात करती थीं।

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NBA ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का किया स्वागत

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
NBA

फेक न्यूज को फैलने से रोकने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने स्वागत किया है। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इसके साथ ही कोरोनावायरस (कोविड-19) के संकट के दौरान किसी भी न्यूज को टेलिकास्ट करते समय सोशल मीडिया पर चल रहीं तमाम ‘फेक न्यूज’ से बचना चाहिए और तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में इस बात पर भी प्रसन्नता जताई गई है कि सोशल मीडिया समेत विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की ओर से एक डेली बुलेटिन भी चलाया जाएगा, ताकि लोगों में फैल रहीं तमाम आशंकाओं को दूर किया जा सके। इससे मीडिया को भी तमाम संदेहों को स्पष्ट करने और उन्हें सटीक रिपोर्टिंग करने में सक्षम बनाने में मदद मिलेगी।

पत्र में ‘एनबीए’ ने इस बात के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की सराहना की है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। 

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें।

 

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कोरोना की चपेट में आया यह न्यूज एंकर, ट्वीट कर खुद दी जानकारी

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Corona

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं। अमेरिका में प्रतिदिन मरने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। वहीं इससे संक्रमित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ के एंकर क्रिस्टोफर कूमो (Christopher Cuomo) भी अब कोरोना का शिकार हो गए है। उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है।  

खास बात ये है कि पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी क्रिस्टोफर अपने शो को घर से होस्ट करेंगे। मंगलवार को उन्होंने खुद ही एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि उनके कोरोना का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हालात बहुत मुश्किल हैं और हर दिन ये बिगड़ते ही जा रहे हैं। मैं भी संक्रमित हो गया हूं, पिछले दिनों मैं कई लोगों से मिला, उनमें से कुछ संक्रमित थे। मुझे बुखार और सांस लेने में दिक्कत है। आशा है कि बच्चों और पत्नी तक संक्रमण नहीं पहुंचेगा।’ बता दें कि कि सीएनएन के एंकर न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्‍यूमो के भाई हैं।

 

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पत्रकारोंं की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में उठी ये मांग

सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Journalist

कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर ग्राउंड रिपोर्टर के जरिए देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, ऐसे में उनकी सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा और प्रत्येक पत्रकार के लिए 50 लाख रुपए बीमा कराने की मांग की गई है।

बता दें कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई की अभी कोई जल्दी नहीं है। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद सुनवाई की जाएगी।  यह याचिका वकील अर्पित भार्गव की ओर से हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष दायर की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद फील्ड में रिपोर्टिंग कर रहे प्रत्येक रिपोर्टर को स्वास्थ्य और जीवन बीमा देने के लिए केन्द्र सरकार को निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिपोर्टर चाहे कांट्रैक्चुअल हों, एडहोक पर हों या स्थायी हों, सभी को यह सुविधा प्रदान की जाए। याचिका में ये मांग की गई है कि प्रत्येक रिपोर्टर को कम से कम 50 लाख रुपए का स्वास्थ्य और जीवन बीमा मुहैया करवाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें, इसलिए रिपोर्टरों के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है। हालांकि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति सामान्य हो जाने के बाद ही इस याचिका पर विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था  प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए।

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BCCL से आई बड़ी खबर, एस. शिवकुमार को मिली ये जिम्मेदारी

‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
S. Sivakumar

जानी-मानी मीडिया कंपनी ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर यह है कि एस. शिवकुमार को ‘बीसीसीएल’ में एग्जिक्यूटिव कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति एक अप्रैल से प्रभावी होगी। नई भूमिका में ‘बीसीसीएल’ से संबंधित सभी कार्य शिवकुमार के जिम्मे होंगे।

बता दें कि एस. शिवकुमार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के फेलो मेंबर हैं। वह ‘बीसीसीएल’ के साथ करीब तीस वर्षों से जुड़े हुए हैं। जुलाई 2016 में उन्हें प्रेजिडेंट (रेवेन्यू) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

इसके साथ ही शिवकुमार और मोहित जैन ‘बीसीसीएल’ के बोर्ड में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स की भूमिका में भी रहेंगे। वहीं, ‘बीसीसीएल’ के सीईओ के रूप में राज जैन का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, वह इस संस्थान से करीब पांच वर्षों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नवंबर 2014 में इस समूह को जॉइन किया था। इससे पहले वह 'भारती रिटेल' में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।  

 

 

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